सुपौल जिले के प्रतापगंज प्रखंड अंतर्गत सुरजापूर गाँव में एक नाला निर्माण कार्य ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गया है, जिसके कारण गाँव के चारों ओर बाढ़ जैसे हालात हैं और पानी भरा हुआ है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी के प्रयासों से मुखिया महानंद पासवान ने इस नाले का काम शुरू तो करवाया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी यह नाला पूरा नहीं हो पाया है। बताया गया है कि इस काम को मनमाने तरीके से किया जा रहा है, जिसमें एक दिन काम करने के बाद तीन दिन बंद रहता है, और जब मन होता है तभी काम होता है, अन्यथा उसे छोड़ दिया जाता है। इसी क्रम में, चार दिन पहले नाला निर्माण स्थल से ट्रैक्टर पर सामान वापस ले जाया जा रहा था। सामाजिक कार्यकर्ता ज़फ़रूल हसन को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने तत्काल स्थल पर पहुँचकर सामान को वापस ले जाने से रोका। इस अधूरे नाले के कारण बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे गाँव के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आम लोगों को स्वच्छ वातावरण में जीने का अधिकार नहीं है। मो० ज़फ़रूल हसन के अनुसार, यह अधूरा नाला निर्माण ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। गाँव के लोग सवाल करते हैं कि आखिर जनता अपनी समस्या लेकर जाए तो जाए कहाँ।
सुपौल जिले के प्रतापगंज प्रखंड अंतर्गत सुरजापूर गाँव में एक नाला निर्माण कार्य ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गया है, जिसके कारण गाँव के चारों ओर बाढ़ जैसे हालात हैं और पानी भरा हुआ है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी के प्रयासों से मुखिया महानंद पासवान ने इस नाले का काम शुरू तो करवाया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी यह नाला पूरा नहीं हो पाया है। बताया गया है कि इस काम को मनमाने तरीके से किया जा रहा है, जिसमें एक दिन काम करने के बाद तीन दिन बंद रहता है, और जब मन होता है तभी काम होता है, अन्यथा उसे छोड़ दिया जाता है। इसी क्रम में, चार दिन पहले नाला निर्माण स्थल से ट्रैक्टर पर सामान वापस ले जाया जा रहा था। सामाजिक कार्यकर्ता ज़फ़रूल हसन को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने तत्काल स्थल पर पहुँचकर सामान को वापस ले जाने से रोका। इस अधूरे नाले के कारण बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे गाँव के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आम लोगों को स्वच्छ वातावरण में जीने का अधिकार नहीं है। मो० ज़फ़रूल हसन के अनुसार, यह अधूरा नाला निर्माण ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। गाँव के लोग सवाल करते हैं कि आखिर जनता अपनी समस्या लेकर जाए तो जाए कहाँ।
- सुपौल जिले के प्रतापगंज प्रखंड अंतर्गत सुरजापूर गाँव में एक नाला निर्माण कार्य ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गया है, जिसके कारण गाँव के चारों ओर बाढ़ जैसे हालात हैं और पानी भरा हुआ है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी के प्रयासों से मुखिया महानंद पासवान ने इस नाले का काम शुरू तो करवाया था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी यह नाला पूरा नहीं हो पाया है। बताया गया है कि इस काम को मनमाने तरीके से किया जा रहा है, जिसमें एक दिन काम करने के बाद तीन दिन बंद रहता है, और जब मन होता है तभी काम होता है, अन्यथा उसे छोड़ दिया जाता है। इसी क्रम में, चार दिन पहले नाला निर्माण स्थल से ट्रैक्टर पर सामान वापस ले जाया जा रहा था। सामाजिक कार्यकर्ता ज़फ़रूल हसन को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने तत्काल स्थल पर पहुँचकर सामान को वापस ले जाने से रोका। इस अधूरे नाले के कारण बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिससे गाँव के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या आम लोगों को स्वच्छ वातावरण में जीने का अधिकार नहीं है। मो० ज़फ़रूल हसन के अनुसार, यह अधूरा नाला निर्माण ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है, लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। गाँव के लोग सवाल करते हैं कि आखिर जनता अपनी समस्या लेकर जाए तो जाए कहाँ।1
- सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत पथरा उत्तर पंचायत के वार्ड संख्या-09 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-182 आज भी अपने स्वयं के भवन से वंचित है। भवन न होने के कारण इस केंद्र का संचालन किराए के मकान में हो रहा है, जिससे सेविका और सहायिका को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र की सेविका मीरा देवी ने बताया कि केशव नगर में बिहार सरकार की पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद अब तक आंगनबाड़ी केंद्र के लिए भवन का निर्माण नहीं कराया गया है। इस वजह से उन्हें दूसरे के मकान में केंद्र चलाना पड़ता है और हर माह किराया भी देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अपना भवन बनने से बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी तथा केंद्र संचालन में भी कोई कठिनाई नहीं होगी। वहीं, स्थानीय ग्रामीणों ने भी आंगनबाड़ी केंद्र के लिए स्थायी भवन निर्माण की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन उपलब्ध होने पर भी भवन निर्माण न होना विभागीय उदासीनता को दर्शाता है और उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जल्द भवन निर्माण कराने की मांग की है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को सूचना दी जा चुकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस दिशा में जल्द पहल कर केंद्र को अपना भवन उपलब्ध कराया जाएगा। मुखिया मरुद्दीन जी से बात करने पर उन्होंने बताया कि भवन निर्माण कार्य के लिए लिखकर दिया जा चुका है। पिपरा की सीडीपीओ ने जानकारी दी कि क्षेत्र के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों का भवन निर्माण पूरा कर संचालन किया जा रहा है और केंद्र संख्या-182 का भवन निर्माण भी जल्द कराया जाएगा।1
- अररिया जिले के भारत-नेपाल सीमावर्ती शहर जोगबनी में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जोगबनी हाट को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। यह कदम ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ के तहत उठाया गया, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्र से अवैध कब्जों को हटाया गया।1
- जोगबनी बाजार और हाट क्षेत्र में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत, नगर परिषद द्वारा मुख्य बाजार और सड़क के दोनों ओर अवैध रूप से किए गए कब्जों को बुलडोजर की मदद से हटाया गया। इन कब्जों में ठेले, तंबू और अस्थायी दुकानें शामिल थीं। प्रशासन ने साफ किया है कि यह अभियान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार जारी रहेगा। साथ ही, यह निर्देश भी दिया गया है कि यदि कोई दुकानदार दोबारा सड़क या फुटपाथ पर कब्जा करता है, तो उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।1
- कुमारखंड प्रखंड में रविवार सुबह विभिन्न पंचायत के स्वास्थ्य उपकेंद्रों सहित कई स्थानों पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने योग शिक्षकों, एएनएम और सीएचओ के मार्गदर्शन में योगाभ्यास किया। योगाभ्यास के दौरान विभिन्न प्रकार के योग प्राणायाम, सूर्य नमस्कार आसन, मयूरासन, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम क्रिया, कपालभाति क्रिया, ब्रजासन, शीर्षासन, धनुरासन और पद्मासन का अभ्यास कराया गया। यह कार्यक्रम भतनी, रहटा, रानीपट्टी पश्चिम, बेलारी, श्रीनगर सहित कई हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (एचडब्ल्यूसी) पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक-शिक्षिकाएं और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए। इस मौके पर डॉ. नवीन भारती, डॉ. वकार आलम, एएनएम प्रियंका कुमारी, जूली कुमारी, निर्जला कुमारी, रुबी कुमारी, सीएचओ प्रीति कुमारी, अनिता कुमारी, अनिता टोप्पो, सीएचओ लाखन सिंह जाट, जीएनएम मनीष कुमार मंडोतिया, शोभा कुमारी, गुंजन कुमारी, नंदनी कुमारी, सीएचओ प्रधान चौधरी, रिया कुमारी, खुशबू कुमारी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी, आशा कार्यकर्ता और आम लोग मौजूद रहे। इस दौरान उपस्थित लोगों को शरीर को निरोगी बनाने के लिए आसनों का महत्व समझाया गया। बताया गया कि बीमारियों से बचाव और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योगासन आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास से कई बीमारियों से बचा जा सकता है और योग हमारे लिए बहुत लाभदायक है।1
- पुलिसकर्मियों ने भरत तिवारी के आत्मसमर्पण करने के बाद उन पर पाँच-पाँच गोलियाँ दाग दीं। इस कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए पूछा जा रहा है कि आखिर यह कहाँ का न्याय है।1
- अररिया के बथनाहा वीरपुर के समीप मुख्य मार्ग पर रविवार को एक तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आने से लगभग 50 वर्षीय मीना देवी की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान मीना देवी के रूप में हुई है, जो सीताराम ठाकुर की पत्नी थीं और वार्ड संख्या 10, अचरा पंचायत, थाना नरपतगंज की निवासी थीं, वर्तमान में लक्ष्मीपुर गांव में रह रही थीं। समाजसेवी राहुल चौधरी ने बताया कि तेज गति से आ रहा हाइवा अनियंत्रित हो गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए, जिन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर बथनाहा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अररिया भेज दिया। पुलिस ने हाइवा को भी जब्त कर लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना के बाद मृतक के परिजनों का बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने सड़क पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से यातायात नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। बथनाहा पुलिस ने बताया कि इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और फरार चालक की पहचान कर उसे गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है।1
- Post by Hira kumar1