एटा में नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने ऐतिहासिक कैलाश मंदिर से लगे तालाब एवं जलाशय की बदहाल स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। नगरवासियों ने इसकी तत्काल सफाई और संरक्षण की मांग उठाई है, क्योंकि बरसात का मौसम शुरू होने के बावजूद तालाब, जलाशय और उनसे जुड़े नालों की अब तक सफाई नहीं कराई गई है। इससे क्षेत्र में जलभराव और पर्यावरणीय समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। नगरवासियों ने आरोप लगाया है कि कैलाश मंदिर से लगे इस ऐतिहासिक तालाब की दयनीय स्थिति को कुछ दिन पहले समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, फिर भी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनकी शिकायत है कि इस मामले में लगातार उपेक्षा बरती जा रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जलाशयों के संरक्षण संबंधी दिए गए निर्देशों की स्पष्ट अवहेलना प्रतीत होती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि तालाब, पोखर, झील और अन्य जलाशय सार्वजनिक संपत्ति हैं। न्यायालय ने यह भी कहा है कि इनके क्षेत्रफल को कम करने, अतिक्रमण करने अथवा स्वरूप बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और राज्यों तथा स्थानीय निकायों को इनके संरक्षण, पुनर्जीवन एवं अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका को तत्काल प्रभाव से जलाशय क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को रोकना चाहिए। उन्होंने तालाब की सफाई, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और जल संरक्षण के उपायों को प्राथमिकता देने की मांग की है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से यह भी मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करते हुए कैलाश मंदिर से लगे तालाब एवं जलाशय क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, चल रहे निर्माण कार्यों की जांच हो और एक व्यापक सफाई अभियान चलाकर जलभराव की संभावित समस्या को रोका जाए। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जलाशय के संरक्षण और सफाई की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के दौरान क्षेत्र में गंभीर जलभराव एवं पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसके लिए प्रशासन को जनहित में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।
एटा में नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने ऐतिहासिक कैलाश मंदिर से लगे तालाब एवं जलाशय की बदहाल स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। नगरवासियों ने इसकी तत्काल सफाई और संरक्षण की मांग उठाई है, क्योंकि बरसात का मौसम शुरू होने के बावजूद तालाब, जलाशय और उनसे जुड़े नालों की अब तक सफाई नहीं कराई गई है। इससे क्षेत्र में जलभराव और पर्यावरणीय समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। नगरवासियों ने आरोप लगाया है कि कैलाश मंदिर से लगे इस ऐतिहासिक तालाब की दयनीय स्थिति को कुछ दिन पहले समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, फिर भी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनकी शिकायत है कि इस मामले में लगातार उपेक्षा बरती जा रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जलाशयों के संरक्षण संबंधी दिए गए निर्देशों की स्पष्ट अवहेलना प्रतीत होती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि तालाब, पोखर, झील और अन्य जलाशय सार्वजनिक संपत्ति हैं। न्यायालय ने यह भी कहा है कि इनके क्षेत्रफल को कम करने, अतिक्रमण करने अथवा स्वरूप बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और राज्यों तथा स्थानीय निकायों को इनके संरक्षण, पुनर्जीवन एवं अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका को तत्काल प्रभाव से जलाशय क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को रोकना चाहिए। उन्होंने तालाब की सफाई, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और जल संरक्षण के उपायों को प्राथमिकता देने की मांग की है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से यह भी मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करते हुए कैलाश मंदिर से लगे तालाब एवं जलाशय क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, चल रहे निर्माण कार्यों की जांच हो और एक व्यापक सफाई अभियान चलाकर जलभराव की संभावित समस्या को रोका जाए। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जलाशय के संरक्षण और सफाई की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के दौरान क्षेत्र में गंभीर जलभराव एवं पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसके लिए प्रशासन को जनहित में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।
- बिहार में हुई चर्चित भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले को लेकर जनपद एटा में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और सर्वसमाज के लोगों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। रविवार शाम को जीटी रोड स्थित शहीद पार्क में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और कैंडल मार्च निकाला, जहां उन्होंने दिवंगत भरत तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की जोरदार मांग उठाई। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के जिलाध्यक्ष राजेश गुप्ता ने भरत भूषण तिवारी को समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को उठाने वाले और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर आवाज बताया, जिनकी मृत्यु को उन्होंने समाज के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। अन्य वक्ताओं ने भी मुठभेड़ की सत्यता और परिस्थितियों पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया, जिसकी निगरानी किसी उच्चस्तरीय समिति या न्यायिक इकाई द्वारा की जानी चाहिए ताकि जनता का विश्वास बना रहे। समाजसेवी हरेंद्र सारस्वत और कीर्ति वसु पाराशर ने भी पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए, और सरकार से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की अपील की। इस दौरान, उपस्थित जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भरत तिवारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा, जिसके बाद हाथों में मोमबत्तियां लेकर कैंडल मार्च निकाला गया। सांसद प्रतिनिधि चंदन शर्मा ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए न्याय और निष्पक्ष सुनवाई की मांग की। लोगों ने दृढ़ता से कहा कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक न्याय की मांग जारी रहेगी। कार्यक्रम में शंभूशरण मिश्रा, भूदेव मिश्रा, मोहित पाठक, सुनील मिश्रा, हिमांशु तिवारी, रिंकू गुप्ता, अभिनव गुप्ता, अर्पित गुप्ता, अवधेश कुमार सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, व्यापारी, जनप्रतिनिधि और सर्वसमाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।2
- जलेसर का बड़ा बाजार और नाला बाजार क्षेत्र अपनी लोकप्रियता तथा महत्व के कारण शहर का हृदय माना जाता है, लेकिन यह व्यस्ततम इलाका अब गंभीर यातायात जाम की समस्या से जूझ रहा है। व्यापारियों द्वारा अपनी दुकानों के सामने अतिक्रमण करने और ग्राहकों द्वारा वाहनों को बेतरतीब ढंग से खड़ा करने के कारण, बाजार की मुख्य सड़क संकरी हो गई है, जिसका परिणाम यह है कि सड़कें अक्सर जाम में बदल जाती हैं। इस भीषण जाम के कारण, चौराहे के पास स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक रोगियों को पहुंचाने में भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है। एक वायरल वीडियो में भी व्यस्ततम चौराहे की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु उठाए गए योगदान का कितना असर होता है, यह साफ दिखाई दे रहा है, जिससे स्थिति की गंभीरता उजागर होती है। सड़क पर आड़ी-तिरछी खड़ी मोटरसाइकिलें और दुकानदारों की बेंचें इस जाम का प्रमुख कारण बनती हैं। प्रशासन का ध्यान इस समस्या पर केंद्रित करने का प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि नाला बाजार चौराहे पर जाम अतिक्रमण की वजह से बना है और लोग इससे मुक्ति की आस लगाए बैठे हैं।2
- फ़र्रुखाबाद ज़िले के कटिया रेलवे कंपिल रोड स्टेशन पर 60 से 70 साल पुराने पेड़ काटे जा रहे हैं। स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में इन पेड़ों की कटाई का काम चल रहा है।1
- गौ सेवा और गौ रक्षा के लिए रात-रात भर जागकर और दिन-रात एक करके समर्पण भाव से काम करने वालों के प्रति भारी निराशा और हताशा व्यक्त की गई है। टेक्स्ट में बताया गया है कि अपनी निस्वार्थ सेवा के बावजूद, ऐसे समर्पित व्यक्तियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं। विशेष रूप से, गौ सेवा में लगे चौदह "भाइयों" को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस कठोर दंड के बाद सवाल उठाया गया है कि उनकी सेवा के बदले उन्हें क्या मिला, जो न्याय की कमी को दर्शाता है। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन भाइयों को न्याय नहीं मिला, और इस निराशाजनक परिणाम के कारण आज से कोई भी गौ सेवा नहीं करेगा। यह संदेश मौजूदा व्यवस्था के प्रति अविश्वास और गौ सेवा के प्रति समर्पण को छोड़ने का संकेत देता है।2
- हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर अपना ताजा फैसला और निर्देश जारी किए हैं। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण रिपोर्ट और चुनाव की संभावित तारीखों से जुड़ी जानकारी शामिल है। इसके अतिरिक्त, नई मतदाता सूची और 9 अंकों वाली यूनिक आईडी (Unique ID) से संबंधित पूरी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। नागरिकों से यह पूछा गया है कि क्या वे अपने गांव की सरकार चुनने के लिए तैयार हैं, और उन्हें सलाह दी गई है कि वे पूरी जानकारी के लिए वीडियो को अंत तक देखें तथा अपनी राय कमेंट सेक्शन में साझा करें।1
- एटा में नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने ऐतिहासिक कैलाश मंदिर से लगे तालाब एवं जलाशय की बदहाल स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। नगरवासियों ने इसकी तत्काल सफाई और संरक्षण की मांग उठाई है, क्योंकि बरसात का मौसम शुरू होने के बावजूद तालाब, जलाशय और उनसे जुड़े नालों की अब तक सफाई नहीं कराई गई है। इससे क्षेत्र में जलभराव और पर्यावरणीय समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। नगरवासियों ने आरोप लगाया है कि कैलाश मंदिर से लगे इस ऐतिहासिक तालाब की दयनीय स्थिति को कुछ दिन पहले समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, फिर भी जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनकी शिकायत है कि इस मामले में लगातार उपेक्षा बरती जा रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जलाशयों के संरक्षण संबंधी दिए गए निर्देशों की स्पष्ट अवहेलना प्रतीत होती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि तालाब, पोखर, झील और अन्य जलाशय सार्वजनिक संपत्ति हैं। न्यायालय ने यह भी कहा है कि इनके क्षेत्रफल को कम करने, अतिक्रमण करने अथवा स्वरूप बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, और राज्यों तथा स्थानीय निकायों को इनके संरक्षण, पुनर्जीवन एवं अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका को तत्काल प्रभाव से जलाशय क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को रोकना चाहिए। उन्होंने तालाब की सफाई, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और जल संरक्षण के उपायों को प्राथमिकता देने की मांग की है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से यह भी मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करते हुए कैलाश मंदिर से लगे तालाब एवं जलाशय क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, चल रहे निर्माण कार्यों की जांच हो और एक व्यापक सफाई अभियान चलाकर जलभराव की संभावित समस्या को रोका जाए। नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जलाशय के संरक्षण और सफाई की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बरसात के दौरान क्षेत्र में गंभीर जलभराव एवं पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसके लिए प्रशासन को जनहित में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए।1
- उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सोमवार शाम डायल-112 के एक सिपाही ने सरेराह एक युवक के साथ मारपीट की। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में इस पुलिसकर्मी के व्यवहार को लेकर भारी आक्रोश है और जनता यह सवाल पूछ रही है कि 'क्या पुलिस कानून के दायरे से ऊपर है?' इस पूरे मामले में अब उच्च अधिकारियों की ओर से की जाने वाली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।1