बलरामपुर जिले के पचपेड़वा में एक फर्जी 'बच्चों के स्पेशलिस्ट क्लीनिक' को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। यह कार्रवाई 'बलरामपुर पोस्ट' द्वारा इस अवैध क्लीनिक के धड़ल्ले से संचालन पर प्रमुखता से खबर उठाने के बाद हुई। पचपेड़वा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार चौधरी और उनकी टीम ने मौके पर पहुँचकर इस गैर-कानूनी क्लीनिक पर ताला जड़ा और सरकारी कागज़ की सील लगाई। क्लीनिक के नीले शटर पर छोटे बच्चों और आंखों की जांच से संबंधित पोस्टर और बैनर लगे थे, जो बिना वैध अनुमति के चिकित्सा सेवाएं चलाने का संकेत दे रहे थे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को 'आधी-अधूरी' और केवल 'खानापूर्ति' बताया जा रहा है, क्योंकि मासूमों की जान से खुलेआम खिलवाड़ करने वाले इस 'झोलाछाप डॉक्टर' के संचालक के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। रिपोर्ट में विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर किस कारण से डॉ. अनिल कुमार चौधरी की टीम पुलिस केस दर्ज कराने से बच रही है। यह चिंता व्यक्त की गई है कि एफआईआर के बिना ऐसे संचालक का हौसला नहीं टूटता और वे कुछ दिनों बाद किसी और जगह से अपना धंधा फिर शुरू कर सकते हैं, जिससे मरीजों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इस फर्जी अस्पताल का कथित संचालक सिद्धार्थ यादव, बलरामपुर सदर ब्लॉक के सिसई गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात फार्मेसिस्ट परम स्वरूप यादव का बेटा है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और चर्चा है कि 'प्रभाव के चलते' अब तक कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई है। 'बलरामपुर पोस्ट' पर प्रकाशित इस खबर को 1.8 लाख से अधिक लोगों ने देखा है, और बड़ी संख्या में पाठक इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य विभाग से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, उम्मीद है कि यह जनहित अभियान जारी रहेगा।
बलरामपुर जिले के पचपेड़वा में एक फर्जी 'बच्चों के स्पेशलिस्ट क्लीनिक' को स्वास्थ्य विभाग ने सील कर दिया है। यह कार्रवाई 'बलरामपुर पोस्ट' द्वारा इस अवैध क्लीनिक के धड़ल्ले से संचालन पर प्रमुखता से खबर उठाने के बाद हुई। पचपेड़वा सीएचसी के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार चौधरी और उनकी टीम ने मौके पर पहुँचकर इस गैर-कानूनी क्लीनिक पर ताला जड़ा और सरकारी कागज़ की सील लगाई। क्लीनिक के नीले शटर पर छोटे बच्चों और आंखों की जांच से संबंधित पोस्टर और बैनर लगे थे, जो बिना वैध अनुमति के चिकित्सा सेवाएं चलाने का संकेत दे रहे थे। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को 'आधी-अधूरी' और केवल 'खानापूर्ति' बताया जा रहा है, क्योंकि मासूमों की जान से खुलेआम खिलवाड़ करने वाले इस 'झोलाछाप डॉक्टर' के संचालक के खिलाफ अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। रिपोर्ट में विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि आखिर किस कारण से डॉ. अनिल कुमार चौधरी की टीम
पुलिस केस दर्ज कराने से बच रही है। यह चिंता व्यक्त की गई है कि एफआईआर के बिना ऐसे संचालक का हौसला नहीं टूटता और वे कुछ दिनों बाद किसी और जगह से अपना धंधा फिर शुरू कर सकते हैं, जिससे मरीजों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इस फर्जी अस्पताल का कथित संचालक सिद्धार्थ यादव, बलरामपुर सदर ब्लॉक के सिसई गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात फार्मेसिस्ट परम स्वरूप यादव का बेटा है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और चर्चा है कि 'प्रभाव के चलते' अब तक कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाई है। 'बलरामपुर पोस्ट' पर प्रकाशित इस खबर को 1.8 लाख से अधिक लोगों ने देखा है, और बड़ी संख्या में पाठक इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य विभाग से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, उम्मीद है कि यह जनहित अभियान जारी रहेगा।
- बलरामपुर जिले के तुलसीपुर तहसील के अंतर्गत विकासखंड गैसडी के ग्राम सभा बेला में संचालित एक गौशाला में बड़े खेल और अव्यवस्था का आरोप लगाया गया है। ग्राम वासियों और गौशाला की देखरेख करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि वे गौशाला के सेक्रेटरी द्वारा प्रताड़ित हैं, जहाँ व्यवस्था सही ढंग से नहीं है और गौमाता की सेवा के नाम पर केवल कागजी कार्यवाही हो रही है। गौशाला की देखरेख करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है, और जब वे वेतन मांगते हैं तो सेक्रेटरी मना कर देते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला के सेक्रेटरी बृजेश अंबानी जी काफी दबंग किस्म के व्यक्ति हैं, जो न तो गौशाला की ठीक से देखभाल करते हैं और न ही कर्मचारियों को उनका वेतन देते हैं, बल्कि केवल कागजों में काम पूरा करते हैं। इस वजह से गौशाला के कर्मचारियों में बृजेश अंबानी जी के प्रति भारी नाराजगी है। ग्राम वासियों ने उत्तर प्रदेश शासन से ग्राम सभा बेला की गौशाला पर तत्काल जांच बैठक करने की मांग की है। उन्होंने यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज जी से सीधे सवाल किया है कि क्या वे इस मामले में सबसे सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे, खासकर जब वे स्वयं गौमाता की सुरक्षा की बात करते हैं। ग्रामीणों को विश्वास है कि मुख्यमंत्री जी बेला ग्राम सभा में गौशाला के नाम पर हो रहे इस खेल की जांच अवश्य करेंगे।1
- बलरामपुर जिले के महुवाधनी में स्थित सामुदायिक शौचालय प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। यह शौचालय वर्तमान में बंद पड़ा है और इसकी सभी सुविधाएँ ध्वस्त हो चुकी हैं। इस गंभीर स्थिति को लेकर जिम्मेदारों पर तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं।1
- बलरामपुर जिले के मनकापुर रोड और उतरौला रोड के चौराहे पर स्थित राम अवध यादव इंटर कॉलेज के ठीक सामने एक भीषण आग लगने की घटना सामने आई है। इस गंभीर स्थिति के दौरान, घटनास्थल पर न तो कोई पुलिसकर्मी मौजूद था और न ही फायर ब्रिगेड की कोई टीम पहुंची। इसके बावजूद, उपस्थित लोगों ने किसी तरह एकजुट होकर आग पर काबू पाया और उसे बुझाने में सफलता हासिल की।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में योगी आदित्यनाथ के घर की वैधता को लेकर सीधे सवाल उठाए गए हैं। पोस्ट के अनुसार, यह पूछा जा रहा है कि क्या खुद योगी आदित्यनाथ का घर अवैध घोषित किया गया है। इसी के साथ, यह भी प्रश्न किया जा रहा है कि क्या अब उनके अपने ही घर पर बुलडोजर चलाया जाएगा। पोस्ट में विशेष रूप से योगी आदित्यनाथ और बीजेपी का उल्लेख है, जो इस मुद्दे पर तीखे सवाल उठा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की तुलसीपुर तहसील के अंतर्गत विकासखंड गैसडी के ग्राम सभा बेला स्थित गौशाला में बड़े स्तर पर अनियमितताओं और कुप्रबंधन का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला की देखरेख करने वाले सचिव बृजेश अंबानी जी द्वारा कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और गौशाला की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। गौशाला की देखभाल करने वाले कर्मचारियों ने खुद बताया है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला है और जब वे अपनी सैलरी मांगते हैं, तो सचिव मना कर देते हैं। इस कारण वे गौशाला की उचित सेवा नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बृजेश अंबानी जी काफी दबंग किस्म के व्यक्ति हैं, वे न तो गौशाला की ढंग से देखभाल करते हैं और न ही कर्मचारियों को वेतन देते हैं; वे केवल कागजों पर खानापूर्ति करते हैं। क्षेत्रवासियों ने उत्तर प्रदेश शासन से ग्राम सभा बेला की इस गौशाला पर तत्काल जांच बैठक की मांग की है। उनका कहना है कि यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज जी गौ माता की बात करते हैं, ऐसे में उन्हें विश्वास है कि माननीय मुख्यमंत्री जी इस मामले में सबसे सख्त कार्रवाई करेंगे और बेला ग्राम सभा की गौशाला में कथित अनियमितताओं की जांच जरूर कराएंगे।1
- उत्तर प्रदेश के तरबगंज तहसील क्षेत्र के टकटोना गांव में राजस्व टीम पर हमला करने और उन्हें डंडा लेकर खदेड़ने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शुक्रवार को नायब तहसीलदार के नेतृत्व में एक राजस्व टीम, तालाब की ग्रामसभा भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत पर जाँच और सीमांकन करने पहुँची थी, तभी यह घटना हुई। इस दौरान अतिक्रमणकारियों ने टीम के साथ तीखी बहस और अभद्रता भी की। दरअसल, तहसील समाधान दिवस में ग्रामीणों द्वारा तालाब की सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण की शिकायत दर्ज कराई गई थी। जब राजस्व टीम ने अवैध निर्माण को रोकने और जमीन का सीमांकन करने का प्रयास किया, तो अतिक्रमणकारियों ने इसका कड़ा विरोध किया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दबंगों ने हाथ में लाठी-डंडे ले लिए और सरकारी टीम को मौके से खदेड़ दिया। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को कानून को ताक पर रखकर काम करने से रोके जाने की तस्वीरें साफ देखी जा सकती हैं। घटना के बाद, पीड़ित लेखपाल की तहरीर पर स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए चार नामजद आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, अभद्रता करने और धमकी देने सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकारी कार्य में बाधा पहुँचाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1