छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक 18 वर्षीय मूकबधिर दुष्कर्म पीड़िता युवती की मौत ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवती के पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर से कुछ संदिग्ध वस्तुएं मिलने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने तत्काल मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म की घटना के बाद पीड़िता को 3 अप्रैल को जशपुर स्थित सखी सेंटर में रखा गया था, जहां उसकी सुरक्षा, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं की जा रही थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने नियमित निगरानी और उपचार का दावा किया। हालांकि, 12 मई को युवती ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल ले जाकर उपचार के बाद वापस सखी सेंटर भेज दिया गया। फिर 19 मई को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। युवती की असामयिक मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में संदिग्ध वस्तुएं मिलने की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारियों ने बताया कि इन वस्तुओं को विस्तृत जांच और विशेषज्ञ राय के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस के अनुसार, दुष्कर्म मामले के आरोपी को 4 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था, लेकिन मृतक युवती की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है। जिला प्रशासन द्वारा आदेशित मजिस्ट्रियल जांच में सखी सेंटर में पीड़िता की देखभाल, स्वास्थ्य निगरानी, उपचार प्रक्रिया, अस्पताल में किए गए इलाज तथा मौत से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने महिला सुरक्षा, संरक्षण गृहों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें मेडिकल, फॉरेंसिक और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक 18 वर्षीय मूकबधिर दुष्कर्म पीड़िता युवती की मौत ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवती के पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर से कुछ संदिग्ध वस्तुएं मिलने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने तत्काल मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म की घटना के बाद पीड़िता को 3 अप्रैल को जशपुर स्थित सखी सेंटर में रखा गया था, जहां उसकी सुरक्षा, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं की जा रही थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने नियमित निगरानी और उपचार का दावा किया। हालांकि, 12 मई को युवती ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल ले जाकर उपचार के बाद वापस सखी सेंटर भेज दिया गया। फिर 19 मई को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। युवती की असामयिक मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में संदिग्ध वस्तुएं मिलने की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारियों ने बताया कि इन वस्तुओं को विस्तृत जांच और विशेषज्ञ राय के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस के अनुसार, दुष्कर्म मामले के आरोपी को 4 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था, लेकिन मृतक युवती की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है। जिला प्रशासन द्वारा आदेशित मजिस्ट्रियल जांच में सखी सेंटर में पीड़िता की देखभाल, स्वास्थ्य निगरानी, उपचार प्रक्रिया, अस्पताल में किए गए इलाज तथा मौत से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने महिला सुरक्षा, संरक्षण गृहों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें मेडिकल, फॉरेंसिक और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
- छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक 18 वर्षीय मूकबधिर दुष्कर्म पीड़िता युवती की मौत ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और महिला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। युवती के पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर से कुछ संदिग्ध वस्तुएं मिलने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने तत्काल मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म की घटना के बाद पीड़िता को 3 अप्रैल को जशपुर स्थित सखी सेंटर में रखा गया था, जहां उसकी सुरक्षा, देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं की जा रही थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने नियमित निगरानी और उपचार का दावा किया। हालांकि, 12 मई को युवती ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे जिला अस्पताल ले जाकर उपचार के बाद वापस सखी सेंटर भेज दिया गया। फिर 19 मई को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। युवती की असामयिक मौत के बाद हुए पोस्टमार्टम में संदिग्ध वस्तुएं मिलने की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. जी.एस. जात्रा सहित अन्य अधिकारियों ने बताया कि इन वस्तुओं को विस्तृत जांच और विशेषज्ञ राय के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस के अनुसार, दुष्कर्म मामले के आरोपी को 4 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था, लेकिन मृतक युवती की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है। जिला प्रशासन द्वारा आदेशित मजिस्ट्रियल जांच में सखी सेंटर में पीड़िता की देखभाल, स्वास्थ्य निगरानी, उपचार प्रक्रिया, अस्पताल में किए गए इलाज तथा मौत से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने महिला सुरक्षा, संरक्षण गृहों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें मेडिकल, फॉरेंसिक और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।1
- गुमला के उपायुक्त के निर्देशानुसार, आज समाहरणालय सभागार में अपर समाहर्ता राजीव नीरज की अध्यक्षता में जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए नागरिकों ने अपनी समस्याओं और मांगों से संबंधित आवेदन अपर समाहर्ता को सौंपे। जन शिकायत निवारण दिवस पर प्राप्त प्रमुख आवेदनों में राशन कार्ड में नाम जोड़ने व हटाने, आवास योजना का लाभ दिलाने, भूमि विवाद व म्यूटेशन, मुआवजा भुगतान, सड़क व पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने, सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध होने, रोजगार प्रदान करने, राशन दुकान निर्माण से जुड़े विवाद और अग्निकांड पीड़ितों को सहायता देने जैसे विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित मामले शामिल थे। इसके अतिरिक्त, टाना भगत समुदाय के प्रतिनिधियों ने विकास प्राधिकार से संबंधित लंबित विषयों और महापुरुष विक्रम टाना भगत के नाम पर चौक एवं प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में भी आवेदन प्रस्तुत किए। कई ग्रामीणों ने अपने क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग भी रखी। अपर समाहर्ता राजीव नीरज ने सभी उपस्थित आवेदकों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना और संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार त्वरित निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रत्येक आवेदन पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।1
- पाकरटांड़ प्रखंड के सोगड़ा पेठियार टोली में ग्रोटो आशीष एवं नव निर्माण चबूतरा के आशीष समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस जिला अध्यक्ष सह विधायक भूषण बाड़ा और महिला जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह के दौरान पल्ली पुरोहित फादर पात्रिक खलखो और सहायक पुरोहित फादर तरसियुस टेटे द्वारा पवित्र मिस्सा पूजा बलिदान संपन्न कराया गया। विधायक भूषण बाड़ा ने समारोह को संबोधित करते हुए समाज में प्रेम, एकता, भाईचारा और सेवा भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईश्वर में अटूट विश्वास और आपसी सहयोग की भावना के माध्यम से ही एक मजबूत एवं समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। बाड़ा ने ग्रामीणों से समाजहित में मिल-जुलकर कार्य करने तथा नई पीढ़ी को नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया। इसी क्रम में, जोसिमा खाखा ने कहा कि धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने का काम करते हैं। उन्होंने प्रेम, शांति और सद्भाव बनाए रखने पर जोर देते हुए बताया कि सामाजिक एकजुटता से ही क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव है। इस अवसर पर समीर किंडो, प्रतिमा कुजूर, बिनीता आईंद, विक्टर खेस, अनीता बाड़ा, अरुण खेस, अर्पण खेस, कांति खेस, तारामणि केरकेट्टा सहित धर्म बहनें और बड़ी संख्या में मसीही विश्वासी उपस्थित थे।1
- गुमला जिले के बृंदा पंचायत के कोयनारा टोंगरीटोली गांव निवासी रमेश सिंह के 22 वर्षीय बेटे गौरव सिंह का शव आज सेमरा कोडर स्थित एक केला बगीचे में पेड़ से लटका मिला, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। परिजनों और ग्रामीणों ने गहरी आशंका जताई है कि युवक की हत्या कर मामले को आत्महत्या का रूप देने के उद्देश्य से शव को पेड़ से लटकाया गया है। घटना की सूचना ग्रामीणों द्वारा बृंदा पंचायत की मुखिया सत्यवती देवी को दी गई, जिन्होंने तत्काल उर्मी पिकेट प्रभारी अम्पा हेंब्रम को जानकारी दी। सूचना मिलते ही अम्पा हेंब्रम पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचीं और पालकोट थाना पुलिस को भी बुलाया गया। दोनों थाना क्षेत्रों की पुलिस ने मिलकर कार्रवाई करते हुए शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया। परिजनों ने बताया कि गौरव सिंह सोमवार को अपने दो साथियों के साथ मेला देखने गया था। वापस लौटते समय रास्ते में गौरव ने अपने साथियों से कहा कि उसे एक लड़की का फोन आया है और वह उससे बात करते हुए घर आएगा। इसके बाद उसने साथियों को अपनी बाइक लेकर घर जाने के लिए कहा। हालांकि, साथी घर लौट आए, लेकिन गौरव रातभर घर नहीं पहुंचा। पुलिस की प्रारंभिक जांच में युवक के शरीर पर कई जगहों पर चोट के निशान मिले हैं। घटनास्थल पर खेत में घसीटने और मारपीट होने के संकेत भी पाए गए हैं। मृतक की शर्ट आधी खुली हुई थी और उसका मोबाइल फोन भी गायब बताया जा रहा है। शरीर पर खून और चोट के इन निशानों से हत्या की आशंका और भी गहरी हो गई है। ग्रामीणों और परिजनों का मानना है कि यह मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हो सकता है और हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को रस्सी से पेड़ पर लटकाया गया। हालांकि, पुलिस सभी संभावित बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही है।1
- मंगलवार को महुआडांड़ प्रखंड मुख्यालय के बस स्टैंड पर एक भव्य सफाई महाअभियान चलाया गया, जिसने पूरे इलाके को स्वच्छता का नया संदेश दिया। जिला परिषद सदस्य स्तेला नागेशिया और थाना प्रभारी मनोज कुमार के सशक्त नेतृत्व में यह अभियान चला, जिससे महीनों से कचरे के ढेर और गंदगी से जूझ रहे बस स्टैंड की तस्वीर कुछ ही घंटों में पूरी तरह बदल गई। सुबह की पहली किरण के साथ ही बस स्टैंड परिसर में जेसीबी और ट्रैक्टरों की गर्जना गूंजने लगी। इस अभियान के लिए सभी दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं और श्रमदान करने के लिए आगे आए, जिससे पूरा बस स्टैंड परिसर एक कर्मभूमि में बदल गया। जेसीबी का उपयोग कचरे के बड़े-बड़े ढेर हटाने के लिए किया गया, जबकि झाड़ू से हर कोने की सफाई की गई। इस ऐतिहासिक सफाई अभियान को सफल बनाने के लिए बस, ऑटो संचालकों और दुकानदारों ने दिल खोलकर आर्थिक सहयोग भी दिया। अभियान का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब मजदूरों की कमी के कारण जिला परिषद सदस्य स्तेला नागेशिया और वरिष्ठ पत्रकार रामप्रवेश गुप्ता स्वयं मैदान में उतरे। उन्होंने बिना किसी संकोच के हाथों में फावड़ा थामा और पसीना बहाकर कचरा उठाकर ट्रैक्टरों में डालना शुरू किया, जिससे उपस्थित सभी लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। दूसरी ओर, थाना प्रभारी मनोज कुमार ने भी नेतृत्व की मिसाल पेश की, जिन्होंने तपती दोपहरी और कड़ी धूप की परवाह न करते हुए पूरे दिन सफाई कार्य का संचालन किया। वे स्वयं मजदूरों के साथ खड़े रहे और हर हिस्से को चमकाने तक डटे रहे। थाना प्रभारी ने जोर देते हुए कहा कि "बस स्टैंड हमारा चेहरा है। इसे साफ रखना सिर्फ प्रशासन नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी है।" इस महाअभियान में महुआडांड़ पुलिस प्रशासन, जिला परिषद सदस्य स्तेला नागेशिया, पत्रकार रामप्रवेश गुप्ता, मो0 आलम मछली दुकान, अली मछली दुकान, मो0 सैफ, कैलाश जायसवाल, संदीप कुमार, अतिउल्ला मुर्गा दुकान, इकबाल ब्रेड दुकान, प्रिथ्वी राम और बस स्टैंड के सभी दुकानदारों का विशेष योगदान रहा।4
- डुमरी थाना क्षेत्र के निवासी धीरज बैग, जो स्वर्गीय बिनु बैग के पुत्र हैं, गुजरात से अपने घर लौटते समय लापता हो गए हैं। इस घटना के बाद से धीरज के परिजन बेहद चिंतित हैं और लगातार उनकी तलाश में जुटे हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, धीरज कुछ दिन पहले काम करने के लिए गुजरात के मुंद्रा गए थे, जहाँ पहुँचने के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी थी। धीरज के साथी दिनेश महतो ने बताया कि उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें घर वापस लाने का फैसला किया गया। इसके बाद, सभी साथी 27 मई 2026 को अहमदाबाद से राउरकेला जाने वाली एक ट्रेन में सवार हुए। अगले दिन, 28 मई 2026 की सुबह लगभग 11 बजे, हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12833) महाराष्ट्र के जलगांव जिले स्थित भुसावल स्टेशन पर कुछ देर के लिए रुकी। इसी दौरान धीरज अपनी जनरल बोगी से दूसरी बोगी की ओर गए, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटे। साथियों ने ट्रेन, स्टेशन परिसर और आस-पास के इलाकों में धीरज की बहुत खोजबीन की, परंतु उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। इसके बाद, साथियों ने इस घटना की जानकारी परिजनों को दी। मंगलवार दोपहर 12 बजे, परिजनों ने बताया कि अब तक धीरज का कोई पता नहीं चल पाया है। लापता धीरज बैग ने गुलाबी फूलदार शर्ट और आसमानी रंग की जींस पहन रखी थी, और उनका रंग हल्का सांवला है। परिजनों ने आम लोगों से भावुक अपील की है कि यदि किसी को धीरज बैग के संबंध में कोई जानकारी मिले तो वे मोबाइल नंबर 9346836905 अथवा 7355954415 पर तुरंत सूचना दें।1
- सोमवार शाम गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के कुरूमगढ़ क्षेत्र में मड़ापानी के पास एक भीषण सड़क हादसे में एक ट्रैक्टर पलट गया, जिसमें सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह ट्रैक्टर कुरूमगढ़ में निर्माणाधीन अस्पताल में ईंटें पहुंचाकर गुमला की ओर लौट रहा था। दुर्घटना तब हुई जब मड़ापानी के समीप अचानक सड़क पर एक गाय आ गई, जिसे बचाने के प्रयास में चालक ने वाहन को तेजी से मोड़ा। इससे ट्रैक्टर का एक पहिया सड़क किनारे बने गड्ढे में फंस गया और संतुलन बिगड़ते ही ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना इतनी भयावह थी कि ट्रैक्टर बीच से टूटकर दो हिस्सों में बंट गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार सुनाई देने लगी। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद ट्रैक्टर के नीचे और आसपास फंसे घायलों को बाहर निकाला। घायलों में धर्मेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार और वासुदेव कुमार सहित चार अन्य लोग शामिल हैं। धर्मेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार और वासुदेव कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला रेफर किया गया है, जहाँ वे चिकित्सकों की निगरानी में हैं। अन्य घायलों का भी इलाज जारी है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और ट्रैक्टरों पर क्षमता से अधिक लोगों को ले जाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है।1