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चंदौली में एक लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए डॉक्टर परशुराम सिंह
Ajay Singh
चंदौली में एक लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए डॉक्टर परशुराम सिंह
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- मुख्यमंत्री के आदेश का पालन करते हुए एमवी एक्ट का पालन कराने वाले टीआई एसपी यादव हुए वायरल चंदौली के यातायात प्रभारी सत्य प्रकाश यादव द्वारा बाइक सवारो को यातायात नियमों का पालन करते हुए हेलमेट पहनने की सलाह देने का अंदाज तेजी से वायरल हो रहा है1
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- फातमा बेगम (प्रधान, गोपालपुर) का बयान – "लगाए गए सभी आरोप निराधार और फर्जी, असलम खान और विकास कार्यों के साथ हैं पूरी मजबूती से" गोपालपुर की प्रधान फातमा बेगम ने अपने ऊपर और अपने परिवार पर लग रहे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह असलम खान की जमीन के मामले में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी हैं और आगे भी खड़ी रहेंगी. भू-माफियाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि चंदौली जिले के ताहिरपुर और रामनगर में अवैध ढंग से बैनामा कराकर जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तमाम झूठे मुकदमों और साजिशों के बावजूद वह अपने गाँव के विकास कार्यों को रुकने नहीं देंगी. उन्होंने बताया ईशान मिल्की को उनके बहनोई यूपी पुलिस इंस्पेक्टर शमीम का संरक्षण प्राप्त है1
- सड़क पर जमीन सिल्ट दे रही दुर्घटना को दावत चहनियाँ विकास खंड अंतर्गत मोहरगंज से ककरहटी बैराठ होते हुए रामगढ़ सढान तक नहर जाती है उक्त नहर पर कम से कम 12 विद्यालयों की सुबह गाड़ियां और कम से कम सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों के 15 से अधिक स्कूलों के बच्चों का आवागमन है और यही बाबा कीनाराम का मुख्य मार्ग भी है प्रतिवर्ष जन्मोत्सव या गुरु पूर्णिमा के समय ही यही हाल होता है जब सूखा रहता है तब नहर की सिल्ट और सफाई नहीं होती है अभी पूरी नहर की मिट्टी और झाड़ियां उठाकर के सड़कों पर रख दी गई है और जब तक यह बरसात नहीं समाप्त हो जाएगी या जब-जब बारिश होगी तब तक वह मिट्टी पूरे नवनिर्मित सड़क पर फैल जाती है और आए दिन दुर्घटना होती है प्रतिदिन कम से कम 10 से 15 बच्चे गिरते हैं कीचड़ में राहगीर गिरते हैं इस समस्या का निदान कैसे होगा2
- *वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा ऐलान, भदोही का नाम फिर होगा संत रविदास नगर* सपा ने एक और पाप किया था कि संत रविदास जी के नाम पर बने जिले का नाम भी हटा दिया था, आज से भदोही को फिर से संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा। *वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा ऐलान, भदोही का नाम फिर होगा संत रविदास नगर* सपा ने एक और पाप किया था कि संत रविदास जी के नाम पर बने जिले का नाम भी हटा दिया था, आज से भदोही को फिर से संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा।1
- गुरु पूर्णिमा पर गूंजा पं. लछिमन बिरहा अखाड़ा लोक कलाकारों ने भक्ति और संस्कृति का बांधा समा आप देख रहे हैं न्यूज टू इंडिया से संवाददाता विनीत कुमार गुप्ता जिला चीफ ब्यूरो की खास रिपोर्ट चंदौली। व्यास जयंती एवं गुरु पूर्णिमा 2026 के पावन अवसर पर जनपद चंदौली के रमगढ़ स्थित गुरु लछिमन जी की जन्मस्थली पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी "पं. लछिमन बिरहा अखाड़ा" द्वारा भव्य गुरु पूर्णिमा समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोक संस्कृति, गुरु परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं और कलाकारों ने गुरु प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम का आयोजन गुरु जी के उत्तराधिकारी पं. किशन तिवारी के संरक्षण एवं प्रख्यात पीठाधीश्वर कवि सुरेश पूर्वांचली के संचालन में हुआ। समारोह में दूर-दराज से पहुंचे लोक गायकों, कवियों और बिरहा कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि चन्द्रिका, सूर्यनाथ पंकज, राजनारायण प्रजापति, पं. भगवान दास यादव, यशकुल लाल यादव व्यास, सुभाष यादव 'बिरहा युवा शिवानी', चन्द्रा चांदनी (सोनभद्र), नन्दलाल नागर, पं. गजानन्द, गोलू सिंह, गिरेन्द्र यादव, कमलेश प्रजापति, दयाराम, कवि माया मूर्ति 'चेतन' सहित अनेक प्रतिष्ठित लोक कलाकारों एवं साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह में उपस्थित सभी कलाकारों एवं अतिथियों को मंच से डॉ. मकसूद आलम, पं. हरिनारायण ज्योतिषाचार्य, ज्ञान प्रकाश मौर्य एवं मट्टू मौर्य द्वारा अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया कार्यक्रम के समापन पर पीठाधीश्वर कवि सुरेश पूर्वांचली ने गुरु लछिमन महाराज एवं बाबा किनाराम के आदर्शों का स्मरण करते हुए समाज में गुरु परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मां सरस्वती से सभी कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंत में जय गुरु लछिमन, जय किनाराम के जयघोष के साथ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन न केवल गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत करने वाला बना, बल्कि पूर्वांचल की समृद्ध लोक संस्कृति और बिरहा परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।1
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