जनपद पंचायत पटेरा की तिदनी ग्राम पंचायत में पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाई जा रही पुलियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया निर्माण में मजबूत बेस की जगह सीधे मिट्टी भर दी गई है, और ऊपरी हिस्से में गिट्टी तथा सीमेंट की मात्रा भी बेहद कम है। आरोप है कि रेत और गुणवत्तायुक्त सामग्री के बजाय नाले से निकला बजरीनुमा मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये पुलियाएँ शुरुआत से ही कमजोर दिख रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलियों की हालत इतनी खराब है कि अभी से ही वाहन गुजरने पर निर्माण धंसने लगा है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि बरसात शुरू होते ही ये पुलियाएँ जवाब दे सकती हैं, जिससे गाँव का संपर्क प्रभावित होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। पुलियों के किनारों पर बनाई गई पट्टियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं; आरोप है कि कहीं पट्टी छोटी बनाई गई तो कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, और लंबाई-चौड़ाई में भी कोई एकरूपता नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के बाद नियमानुसार तराई तक नहीं की गई, जिससे सीमेंट अपनी पकड़ नहीं बना पा रहा है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर खुलेआम गुणवत्ता विहीन काम कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और सरपंच-सचिव अपनी मनमानी से निर्माण करा रहे हैं। इस मामले को लेकर जब उप यंत्री रोहित नायक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि यदि कुछ ऐसा है तो उन्हें समझ नहीं आया है, लेकिन वे स्वयं जाकर देखेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की गड़बड़ी मिली तो इन कार्यों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। पंचायत के निर्माण कार्यों पर उठे इन सवालों ने गाँव में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जनपद पंचायत पटेरा की तिदनी ग्राम पंचायत में पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाई जा रही पुलियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया निर्माण में मजबूत बेस की जगह सीधे मिट्टी भर दी गई है, और ऊपरी हिस्से में गिट्टी तथा सीमेंट की मात्रा भी बेहद कम है। आरोप है कि रेत और गुणवत्तायुक्त सामग्री के बजाय नाले से निकला बजरीनुमा मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये पुलियाएँ शुरुआत से ही कमजोर दिख रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलियों की हालत इतनी खराब है कि अभी से ही वाहन गुजरने पर निर्माण धंसने लगा है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि बरसात शुरू होते ही ये पुलियाएँ जवाब दे सकती हैं, जिससे गाँव का संपर्क प्रभावित होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। पुलियों के किनारों पर बनाई गई पट्टियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं; आरोप है कि कहीं पट्टी छोटी बनाई गई तो कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, और लंबाई-चौड़ाई में भी कोई एकरूपता नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के बाद नियमानुसार तराई तक नहीं की गई, जिससे सीमेंट अपनी पकड़ नहीं बना पा रहा है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर खुलेआम गुणवत्ता विहीन काम कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और सरपंच-सचिव अपनी मनमानी से निर्माण करा रहे हैं। इस मामले को लेकर जब उप यंत्री रोहित नायक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि यदि कुछ ऐसा है तो उन्हें समझ नहीं आया है, लेकिन वे स्वयं जाकर देखेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की गड़बड़ी मिली तो इन कार्यों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। पंचायत के निर्माण कार्यों पर उठे इन सवालों ने गाँव में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
- दमोह जिले के हटा में एमएलबी रोड की मुख्य सड़क पर एक पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण लगातार पानी बह रहा है। इस समस्या से सड़क से आने-जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ दुकानदारों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने इस लीकेज का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। उन्होंने संबंधित जिम्मेदारों से जल्द से जल्द इस समस्या को ठीक करने की गुहार लगाई है। पाइपलाइन लीकेज के कारण सड़कों पर बह रहे इस पानी के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारी बेखबर बने हुए हैं।1
- पन्ना जिले की पवई पुलिस ने बाइक चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है, जहाँ लगभग डेढ़ लाख रुपये मूल्य की तीन चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। पवई पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर इस मामले को सुलझाया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पवई और अमानगंज क्षेत्र से इन बाइकों की चोरी करने का जुर्म कबूल कर लिया है।1
- कटनी जिले के रीठी थाना क्षेत्र के ग्राम अमगवां से कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक अपाहिज किसान रामकिशोर पिछले दो महीनों से न्याय की गुहार लगाने के लिए रीठी थाने और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण यह पीड़ित किसान दूसरों के कंधों पर सवार होकर पुलिस के आला अफसरों तक पहुँच रहा है, लेकिन रीठी पुलिस पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप है। शुक्रवार को पीड़ित किसान रामकिशोर एक बार फिर एसपी कार्यालय पहुँचा और अपनी आपबीती सुनाते हुए स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उसका कहना है कि बीते 8 अप्रैल 2026 की रात करीब 10:30 बजे, पुरानी रंजिश और एक सोची-समझी साजिश के तहत गांव के ही 14 रसूखदार दबंग लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी जैसे जानलेवा हथियारों से लैस होकर उसके घर में घुस आए और जान से मारने की नीयत से उस पर और उसके पूरे परिवार पर हमला किया। हमलावरों में मिल्लूलाल उर्फ बंधा, शंकर कुशवाहा, राघवेंद्र, सुखलाल बर्मन, राहुल बंशकार, धर्मेंद्र, एकलव्य, शनि, लक्ष्मीकांत, सुकल, वर्षा, कमलेश बाई, बल्लू और तेजीलाल शामिल थे। किसान रामकिशोर का आरोप है कि इस हमले में उसकी बेटियों के हाथ टूट गए और परिवार के कई सदस्य घायल हुए। घटना के तुरंत बाद रीठी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने न तो आरोपियों के खिलाफ उचित और कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और न ही उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम उठाया, जिसके चलते सभी 14 आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित परिवार अब खौफ के साये में अपने ही घर में जीने को मजबूर है। स्थानीय रीठी पुलिस की इस हीलाहवाली से निराश होकर, रामकिशोर ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ साधारण धाराओं के बजाय 'हत्या के प्रयास' (अटेम्प्ट टू मर्डर) का मामला दर्ज किया जाए। इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि यह भूमि विवाद का मामला था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि अभी मेडिकल रिपोर्ट आनी बाकी है और डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम अमाड़ी में आंगनवाड़ी भवन वर्षों से बेहद जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। भवन की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। भवन के असुरक्षित होने की वजह से, छोटे बच्चों को तेज धूप और मौसम की मार के बीच खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है और वहीं पोषण आहार लेना भी पड़ रहा है। यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों को पेड़ों की छांव में या खुले मैदान में संभालने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की यह मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही एक नया आंगनवाड़ी भवन बनाया जाए या फिर इस जर्जर भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।1
- जनपद पंचायत पटेरा की तिदनी ग्राम पंचायत में पंचायत द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाई जा रही पुलियों में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया निर्माण में मजबूत बेस की जगह सीधे मिट्टी भर दी गई है, और ऊपरी हिस्से में गिट्टी तथा सीमेंट की मात्रा भी बेहद कम है। आरोप है कि रेत और गुणवत्तायुक्त सामग्री के बजाय नाले से निकला बजरीनुमा मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये पुलियाएँ शुरुआत से ही कमजोर दिख रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलियों की हालत इतनी खराब है कि अभी से ही वाहन गुजरने पर निर्माण धंसने लगा है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि बरसात शुरू होते ही ये पुलियाएँ जवाब दे सकती हैं, जिससे गाँव का संपर्क प्रभावित होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। पुलियों के किनारों पर बनाई गई पट्टियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं; आरोप है कि कहीं पट्टी छोटी बनाई गई तो कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया, और लंबाई-चौड़ाई में भी कोई एकरूपता नहीं है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के बाद नियमानुसार तराई तक नहीं की गई, जिससे सीमेंट अपनी पकड़ नहीं बना पा रहा है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर खुलेआम गुणवत्ता विहीन काम कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और सरपंच-सचिव अपनी मनमानी से निर्माण करा रहे हैं। इस मामले को लेकर जब उप यंत्री रोहित नायक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि यदि कुछ ऐसा है तो उन्हें समझ नहीं आया है, लेकिन वे स्वयं जाकर देखेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर इस तरह की गड़बड़ी मिली तो इन कार्यों का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। पंचायत के निर्माण कार्यों पर उठे इन सवालों ने गाँव में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।1
- मध्यप्रदेश में लाडली बहना योजना पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसी राज्य के बुरहानपुर जिले में लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो इस योजना पर हो रहे भारी भरकम खर्च के विपरीत एक गंभीर जमीनी हकीकत को दर्शाता है।1