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मध्यप्रदेश में लाडली बहना योजना पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसी राज्य के बुरहानपुर जिले में लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो इस योजना पर हो रहे भारी भरकम खर्च के विपरीत एक गंभीर जमीनी हकीकत को दर्शाता है।
Chhtu Rajgund
मध्यप्रदेश में लाडली बहना योजना पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसी राज्य के बुरहानपुर जिले में लोग पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो इस योजना पर हो रहे भारी भरकम खर्च के विपरीत एक गंभीर जमीनी हकीकत को दर्शाता है।
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- यह गंभीर चिंता जताई गई है कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, आज उन्हें 'मौत के कुएं' से पानी निकालने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस विपरीत परिस्थिति के बावजूद यह कहा जा रहा है कि देश तरक्की कर रहा है, जिस पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा है।1
- शुक्रवार दोपहर जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र स्थित कछपुरा ओवर ब्रिज पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार मेट्रो बस ने स्कूटी पर सवार महिलाओं को टक्कर मार दी, जिसमें संजय नगर, यादव कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय कविता पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य महिला गंभीर रूप से घायल हुई है, जिसका मेडिकल अस्पताल में इलाज जारी है।1
- कटनी जिले में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है, जिसके चलते शुक्रवार को मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला सचिव हरप्रीत लक्की सिंह के नेतृत्व में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, कटनी ने अधीक्षक भू अभिलेख अधिकारी को कलेक्टर आशीष तिवारी के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 20 दिनों के भीतर उनकी लंबित और जायज मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के 32 हजार संविदा कर्मचारी चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। ज्ञापन सौंपते हुए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारी मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने में रात-दिन निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन्हीं कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है, बावजूद इसके सरकार द्वारा लगातार उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री की उपस्थिति में उनकी मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रदेश भर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री द्वारा 30 जनवरी 2026 को दशहरा मैदान (टी.टी. नगर) में आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में की गई घोषणा के अनुसार तत्काल नियमितीकरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे सामान्य प्रशासन विभाग की 2023 की नीति के तहत एन.पी.एस. (NPS) और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वार्षिक वेतनवृद्धि, नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता (DA), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के वेतन में पी.बी.आई. (PBI) का समायोजन और पूर्व की तरह इंडिकेटर लागू करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों ने शासन द्वारा किए गए समकक्षता (वेतन विसंगति) के गलत निर्धारण पर तुरंत पुनर्विचार कर संशोधन करने और नियमित कर्मचारियों की तरह सभी अवकाश स्वीकृत करने की भी मांग की है। साथ ही, जब तक 'समान कार्य-समान वेतन' और समान सुविधाएँ नहीं मिल जातीं, तब तक 'सार्थक ऐप' के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था बंद करने की अपील की गई है। कर्मचारियों ने बताया कि 02 जून से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और इस दिन से जिले के सभी कर्मचारी विभाग द्वारा दिए गए सभी प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का पूर्णतः बहिष्कार करेंगे। संघ ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण वे आंदोलन के लिए विवश हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 2 जून से स्वास्थ्य सुविधाएँ ठप होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।1
- कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम अमाड़ी में आंगनवाड़ी भवन वर्षों से बेहद जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। भवन की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। भवन के असुरक्षित होने की वजह से, छोटे बच्चों को तेज धूप और मौसम की मार के बीच खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है और वहीं पोषण आहार लेना भी पड़ रहा है। यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों को पेड़ों की छांव में या खुले मैदान में संभालने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की यह मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही एक नया आंगनवाड़ी भवन बनाया जाए या फिर इस जर्जर भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।1
- कुछ लोग विवाद और लड़ाई को प्राथमिकता देते हैं, जबकि सभी समस्याओं का समाधान बैठकर बातचीत के माध्यम से भी संभव है। आपसी संवाद के द्वारा हर प्रकार की समस्या का निराकरण किया जा सकता है।1
- कटनी में जायन्ट्स ग्रुप ऑफ कटनी सहेली एवं जायन्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन ने मंगलवार को माधव नगर गेट के सामने स्थित बजरंगबली जी मंदिर में विशाल मां भंडारा और शरबत वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। भीषण गर्मी और लगभग 42 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद, संगठन के सदस्यों और महिला शक्ति ने पूरे उत्साह, अनुशासन तथा सेवा भावना के साथ इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप दिया, जिससे यह सेवा, समर्पण और संगठन शक्ति का अद्भुत संगम बन गया। इस दौरान, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान बजरंगबली के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में कटनी जिले के समाजसेवी बसंती यादव, शिवराज गोस्वामी, राजेंद्र शर्मा, देशराज, बालकिशन नामदेव, बसंत भैया के बेटे सहित सैकड़ों की संख्या में महिला मित्र मंडली, ग्रुप के सदस्य एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महिला शक्ति का योगदान विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ ग्रुप की अध्यक्ष और महिला सदस्यों ने तपती धूप में श्रद्धालुओं को शरबत वितरित कर मानव सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उन्होंने पूरी व्यवस्था को कुशलतापूर्वक संभालते हुए यह प्रमाणित किया कि समाज सेवा, धार्मिक आस्था और संगठन को मजबूत बनाने में महिला शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं के लिए मां भंडारे तथा शरबत वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, जिसकी स्थानीय नागरिकों ने जमकर सराहना की। आयोजकों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मानव सेवा, सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और संगठन को और अधिक मजबूत बनाना था। कार्यक्रम के अंत में, सभी सदस्यों ने भगवान बजरंगबली से क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की, और यह सेवा, सहयोग तथा सामाजिक समर्पण की भावना से आयोजित कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बना।4
- दमोह जिले में सड़क सुरक्षा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हाल ही में संपन्न हुई, जिसमें जिला कलेक्टर श्री यादव ने कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए। बैठक के दौरान, कलेक्टर ने संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे सड़क पर रोड मार्किंग, चेतावनी संकेतों की स्थापना और सुरक्षा से संबंधित अन्य सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अवश्य पूरा करें।1
- पन्ना जिले में रास्तों से जुड़े विवादों के निराकरण के लिए शासन को कड़े नियम लागू करने की मांग की गई है। यह कहा गया है कि जब शासन द्वारा सख्त नियम लागू किए जाएंगे, तभी प्रशासन इन रास्तों के विवादों को सफलतापूर्वक सुलझा पाएगा। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति के बीच लड़ाई-झगड़े और गाली-गलौज जैसी अप्रिय स्थितियाँ सामने न आएँ।1
- कटनी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रीठी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में वर्षों से तैनात कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल दिया है, जिसमें जिला पंचायत सदस्य माला मौसी प्रमुख हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे, माला मौसी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यहाँ मरीजों को न तो उचित इलाज मिल रहा है और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उन तक पहुँच पा रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल के कई कर्मचारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है। इन कर्मचारियों की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान करने की बजाय गपशप में व्यस्त रहना है, जिसका सीधा असर सरकारी कामकाज पर पड़ रहा है। माला मौसी ने यह भी बताया कि कई कर्मचारी समय पर अस्पताल नहीं आते और जब आते भी हैं, तो केवल औपचारिकता निभाते हैं। अस्पताल परिसर में काम की बजाय आपसी बातचीत में उनकी व्यस्तता आम मरीजों को भुगतनी पड़ रही है। जनता के हित को ध्यान में रखते हुए, जिला पंचायत सदस्य माला मौसी ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने ज्ञापन में मांग की है कि एक सप्ताह के भीतर वर्षों से अस्पताल में जमे हुए कर्मचारियों को हटाया जाए। माला मौसी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस मामले में समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की, तो वे अस्पताल के सामने धरने पर बैठने को विवश होंगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मांग पर कब तक संज्ञान लेता है और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।1