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राजधानी राँची के नामकुम इलाके में तीन गाड़ियां लगातार एक दूसरे से टकरा गई। इसमें कई लोग घायल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह मामला नामकुम थाना इलाके के पतराटोली का है। मामले की जानकारी मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर लिया है। यह हादसा कैसे हुआ। यह अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। इस हादसे में कई लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। नामकुम थाने की पुलिस ने बताया कि कुल तीन लोग जख्मी हुए हैं। तीनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है।

3 hrs ago
user_Bikram reporting News
Bikram reporting News
Satbarwa, Palamu•
3 hrs ago

राजधानी राँची के नामकुम इलाके में तीन गाड़ियां लगातार एक दूसरे से टकरा गई। इसमें कई लोग घायल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह मामला नामकुम थाना इलाके के पतराटोली का है। मामले की जानकारी मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर लिया है। यह हादसा कैसे हुआ। यह अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है। इस हादसे में कई लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। नामकुम थाने की पुलिस ने बताया कि कुल तीन लोग जख्मी हुए हैं। तीनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कर दिया गया है।

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    1
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    user_Bikram reporting News
    Bikram reporting News
    Satbarwa, Palamu•
    3 hrs ago
  • राजू हक्क फुजक धज्जिया वजक्क जन्फुज कलगक
    1
    राजू हक्क फुजक धज्जिया
वजक्क जन्फुज कलगक
    user_Kulu Garu
    Kulu Garu
    गारू, लातेहार, झारखंड•
    22 hrs ago
  • गारु :पलामू टाइगर रिजर्व के बारेसांढ़ वन क्षेत्र में अतिरिक्त प्रभार को लेकर सुलग रही चिंगारी अब लपटों में बदल चुकी है। आंदोलन के सातवें दिन परेवाटांड़ गांव गुस्से का केंद्र बन गया। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश और जुबां पर तीखे नारे—पूरा इलाका आंदोलित रहा।“तरुण कुमार सिंह वापस जाओ”, “घूसखोर रेंजर वापस जाओ” और “जल, जंगल, जमीन हमारा है” के नारों से आसमान गूंज उठा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज अगर अब भी अनसुनी रही, तो हालात और विस्फोटक होंगे। *गांव-गांव में उबल रहा आक्रोश* डेढ़गांव, बगईकोना, झुमरी, टेनटांड, कुजरूम, लाटू और मायापुर—हर गांव में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। सात दिनों से जारी आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनविद्रोह का रूप लेता जा रहा है।परेवाटांड़ की सभा में महिलाएं सबसे आगे दिखीं। बुजुर्गों ने कहा, “जंगल हमारी जिंदगी है, इसे दूर बैठकर नहीं बचाया जा सकता।” युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रखंड से जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा। *300 किलोमीटर दूर से ‘निगरानी’—कैसे बचेगा जंगल?* ग्रामीणों का आरोप है कि जिस अधिकारी की मूल तैनाती लगभग 300 किलोमीटर दूर आनंदपुर क्षेत्र में है, उन्हें बारेसांढ़ जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है।लोग सवाल उठा रहे हैं क्या इतनी दूरी से जंगल की रक्षा संभव है? क्या अवैध कटाई, शिकार और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण हो पाएगा?बारेसांढ़ क्षेत्र जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां के जंगल सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “दूर बैठे अफसर” से जंगल और जनता दोनों असुरक्षित हैं। *पूर्व रेंजर का तबादला बना चिंगारी* पूर्व रेंजर नन्द कुमार मेहता के तबादले को लेकर भी लोगों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके कार्यकाल में विभाग और जनता के बीच तालमेल बेहतर था।कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में तबादला किया गया। हालांकि विभाग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। *ज्ञापन के बाद भी चुप्पी, बढ़ा असंतोष* ग्रामीणों ने डीएफओ कुमार आशीष को लिखित आवेदन देकर मौजूदा अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने और नियमित रेंजर की नियुक्ति की मांग की है।लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने से गुस्सा और भड़क उठा है। लोगों का कहना है कि “अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।” *अल्टीमेटम: होगा घेराव* प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है—यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति भी तैयार है।बारेसांढ़ में परेवाटांड़ से उठी यह आग अब शांत होती नहीं दिख रही। प्रशासन की अगली चाल तय करेगी कि यह आंदोलन सुलझेगा या फिर बड़ा टकराव जन्म लेगा।फिलहाल एक बात साफ है—बारेसांढ़ में जंगल ही नहीं, जनभावनाएं भी धधक रही हैं।
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    गारु :पलामू टाइगर रिजर्व के बारेसांढ़ वन क्षेत्र में अतिरिक्त प्रभार को लेकर सुलग रही चिंगारी अब लपटों में बदल चुकी है। आंदोलन के सातवें दिन परेवाटांड़ गांव गुस्से का केंद्र बन गया। सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश और जुबां पर तीखे नारे—पूरा इलाका आंदोलित रहा।“तरुण कुमार सिंह वापस जाओ”, “घूसखोर रेंजर वापस जाओ” और “जल, जंगल, जमीन हमारा है” के नारों से आसमान गूंज उठा। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज अगर अब भी अनसुनी रही, तो हालात और विस्फोटक होंगे।
*गांव-गांव में उबल रहा आक्रोश* 
डेढ़गांव, बगईकोना, झुमरी, टेनटांड, कुजरूम, लाटू और मायापुर—हर गांव में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। सात दिनों से जारी आंदोलन अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनविद्रोह का रूप लेता जा रहा है।परेवाटांड़ की सभा में महिलाएं सबसे आगे दिखीं। बुजुर्गों ने कहा, “जंगल हमारी जिंदगी है, इसे दूर बैठकर नहीं बचाया जा सकता।” युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रखंड से जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा।
*300 किलोमीटर दूर से ‘निगरानी’—कैसे बचेगा जंगल?* 
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस अधिकारी की मूल तैनाती लगभग 300 किलोमीटर दूर आनंदपुर क्षेत्र में है, उन्हें बारेसांढ़ जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है।लोग सवाल उठा रहे हैं क्या इतनी दूरी से जंगल की रक्षा संभव है? क्या अवैध कटाई, शिकार और वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण हो पाएगा?बारेसांढ़ क्षेत्र जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां के जंगल सिर्फ वन्यजीवों का घर नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “दूर बैठे अफसर” से जंगल और जनता दोनों असुरक्षित हैं।
*पूर्व रेंजर का तबादला बना चिंगारी* 
पूर्व रेंजर नन्द कुमार मेहता के तबादले को लेकर भी लोगों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके कार्यकाल में विभाग और जनता के बीच तालमेल बेहतर था।कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में तबादला किया गया। हालांकि विभाग ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
*ज्ञापन के बाद भी चुप्पी, बढ़ा असंतोष* 
ग्रामीणों ने डीएफओ कुमार आशीष को लिखित आवेदन देकर मौजूदा अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने और नियमित रेंजर की नियुक्ति की मांग की है।लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी ठोस निर्णय नहीं होने से गुस्सा और भड़क उठा है। लोगों का कहना है कि “अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।”
*अल्टीमेटम: होगा घेराव* 
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है—यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वन विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन को जिला स्तर तक ले जाने की रणनीति भी तैयार है।बारेसांढ़ में परेवाटांड़ से उठी यह आग अब शांत होती नहीं दिख रही। प्रशासन की अगली चाल तय करेगी कि यह आंदोलन सुलझेगा या फिर बड़ा टकराव जन्म लेगा।फिलहाल एक बात साफ है—बारेसांढ़ में जंगल ही नहीं, जनभावनाएं भी धधक रही हैं।
    user_निरंजन प्रसाद
    निरंजन प्रसाद
    गारू, लातेहार, झारखंड•
    23 hrs ago
  • Post by Bharat sharma
    1
    Post by Bharat sharma
    user_Bharat sharma
    Bharat sharma
    पडवा, पलामू, झारखंड•
    3 hrs ago
  • Post by Vikram Dewang
    8
    Post by Vikram Dewang
    user_Vikram Dewang
    Vikram Dewang
    Political party office लवालांग, चतरा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • आज तारीख 1 मार्च को दुर्ग जैक्सन से जो ट्रेन चलती अंबिकापुर
    1
    आज तारीख 1 मार्च को दुर्ग जैक्सन से जो ट्रेन चलती अंबिकापुर
    user_Shivmangal kumar Jahrila
    Shivmangal kumar Jahrila
    Singer रंका, गढ़वा, झारखंड•
    19 hrs ago
  • Post by Sunil singh
    1
    Post by Sunil singh
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    Ranka, Garhwa•
    21 hrs ago
  • पोलपोल में भीषण सड़क हादसा: स्कॉर्पियो-कार की टक्कर, बाल-बाल बचे चालक
    1
    पोलपोल में भीषण सड़क हादसा: स्कॉर्पियो-कार की टक्कर, बाल-बाल बचे चालक
    user_Bikram reporting News
    Bikram reporting News
    Satbarwa, Palamu•
    13 hrs ago
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