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पितृ दिवस के अवसर पर, मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने सभी पिताओं को नमन करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह, उनका अनुशासन और उनका मार्गदर्शन समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए एक अमूल्य धरोहर के समान हैं। इस विशेष दिन पर, पाण्डेय ने सभी से अपने पिता और पितृतुल्य व्यक्तियों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने संदेश दिया कि "पिता का सम्मान, परिवार का अभिमान।" इसके अतिरिक्त, एक पितृ दिवस विशेष संदेश में उन्होंने कहा कि "पिता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की वह मजबूत नींव हैं जिनके त्याग, संघर्ष और संस्कारों पर हमारा भविष्य खड़ा होता है।"
सूर्य प्रकाश पाण्डेय
पितृ दिवस के अवसर पर, मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने सभी पिताओं को नमन करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह, उनका अनुशासन और उनका मार्गदर्शन समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए एक अमूल्य धरोहर के समान हैं। इस विशेष दिन पर, पाण्डेय ने सभी से अपने पिता और पितृतुल्य व्यक्तियों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने संदेश दिया कि "पिता का सम्मान, परिवार का अभिमान।" इसके अतिरिक्त, एक पितृ दिवस विशेष संदेश में उन्होंने कहा कि "पिता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की वह मजबूत नींव हैं जिनके त्याग, संघर्ष और संस्कारों पर हमारा भविष्य खड़ा होता है।"
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- पितृ दिवस के अवसर पर, मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने सभी पिताओं को नमन करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह, उनका अनुशासन और उनका मार्गदर्शन समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए एक अमूल्य धरोहर के समान हैं। इस विशेष दिन पर, पाण्डेय ने सभी से अपने पिता और पितृतुल्य व्यक्तियों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने संदेश दिया कि "पिता का सम्मान, परिवार का अभिमान।" इसके अतिरिक्त, एक पितृ दिवस विशेष संदेश में उन्होंने कहा कि "पिता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की वह मजबूत नींव हैं जिनके त्याग, संघर्ष और संस्कारों पर हमारा भविष्य खड़ा होता है।"1
- जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील के सुरेरी थाना क्षेत्र स्थित कठवतिया गांव में पैतृक संपत्ति को लेकर एक विवाद अब और गंभीर होता दिख रहा है। पीड़ित पक्ष ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयास की शिकायत जिलाधिकारी से की थी, लेकिन आरोप है कि शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने से विपक्षियों का मनोबल बढ़ा और उन्होंने एक दुकान में तोड़फोड़ कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया। कठवतिया निवासी राजकुमार सिंह पुत्र काली प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि वे आराजी संख्या 548/0.0218 हेक्टेयर भूमि के सहखातेदार हैं। यह भूमि पैतृक संपत्ति है, जिसका बंटवारा उनके पिता द्वारा जीवनकाल में ही कर दिया गया था। राजकुमार सिंह का कहना है कि वे तब से अपने हिस्से की भूमि पर दुकान, गोदाम और कृषि कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया था कि 21 मई 2026 को विपक्षी पक्ष ने उनके हिस्से की भूमि पर लोहे के खंभे गाड़कर कब्जा करने और निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया। विरोध करने पर उन्हें गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई थी। पीड़ित पक्ष ने यह भी दावा किया कि भूमि विवाद से संबंधित वाद न्यायालय में विचाराधीन है और संबंधित भूमि पर स्थगन आदेश भी प्रभावी है। राजकुमार सिंह के अनुसार, शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी का लाभ उठाते हुए कथित तौर पर 15 जून 2026 को स्वतंत्र सिंह समेत अन्य लोगों ने उनकी दुकान में घुसकर तोड़फोड़ की, सामान बाहर फेंक दिया और विरोध करने पर मारपीट भी की, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जब राजकुमार सिंह शिकायत लेकर सुरेरी थाने पहुँचे, तो पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत राजकुमार सिंह और दूसरे पक्ष से शशिकांत सिंह दोनों का चालान कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस कार्रवाई से उन्हें न्याय मिलने के बजाय और अधिक परेशानी उठानी पड़ी, जबकि विपक्षी पक्ष का मनोबल बढ़ गया। इस मामले में अभी तक विपक्षी पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग अब प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं, क्योंकि न्यायालय के स्थगन आदेश प्रभावी होने के बावजूद कथित निर्माण और तोड़फोड़ के आरोप कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।3
- सारनाथ थाना क्षेत्र में एक 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा की मौत के मामले में पुलिस गहन जांच कर रही है। हालांकि, पीड़ित पक्ष की ओर से अभी तक पुलिस को कोई औपचारिक तहरीर नहीं दी गई है, लेकिन हिरासत में लिए गए आरोपी बॉयफ्रेंड ने पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे किए हैं। जौनपुर निवासी आरोपी बॉयफ्रेंड ने पुलिस को बताया कि छात्रा सुबह नौ बजे उसके लिए खाना लेकर पहुंची थी, जिसके बाद दोनों ने बातचीत की। जब उसे पता चला कि छात्रा तीन महीने की गर्भवती है, तो उसने उस पर गर्भपात की दवा खाने का दबाव बनाया। छात्रा के इनकार के बावजूद, उसने जबरन उसे दवा लेने के लिए मजबूर किया। दवा के सेवन के ठीक डेढ़ घंटे बाद छात्रा की हालत गंभीर रूप से बिगड़ गई, उसे असहनीय दर्द हुआ और खून निकलने लगा। अस्पताल जाने की तैयारी के दौरान वह सीढ़ियों पर अचेत होकर गिर गई। आरोपी के मुताबिक, उसने गार्ड की मदद से छात्रा को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी वहां से भागकर जौनपुर चला गया। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि दोनों पिछले 18 महीने से एक-दूसरे के संपर्क में थे और आरोपी ने सात महीने पहले भी छात्रा को गर्भपात की दवा दी थी। उसे लगा था कि इस बार भी पहले की तरह सब ठीक हो जाएगा। आईएमएस बीएचयू की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता ने इस संदर्भ में बताया है कि नौ सप्ताह की प्रेग्नेंसी के बाद किसी भी तरह की गर्भपात की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह महिला के लिए जानलेवा हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाएं लेना बेहद खतरनाक है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार की ओर से तहरीर मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटा रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि छात्रा किन परिस्थितियों में हॉस्टल पहुंची थी।1
- सतीश पाल का एक 'सैड' लव सॉन्ग वीडियो अब उपलब्ध है। 'संगीत' और 'गुड लुक' पर केंद्रित यह 'शॉर्ट' वीडियो एक स्टेटस अपडेट के लिए बनाया गया है, जिसे 'वायरल' और 'ट्रेंडिंग' बताया जा रहा है। इस वीडियो को 'टॉप टेन' में शामिल करने का लक्ष्य है।1
- भदोही साइबर क्राइम थाना और साइबर सेल भदोही ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए एक देशव्यापी फर्जी ट्रेडिंग एवं इन्वेस्टमेंट धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसका अनुमानित मूल्य ₹50 करोड़ है। पुलिस ने इस मामले में ज्ञानपुर क्षेत्र से गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों, मन्नू सिंह और ओमप्रकाश गौतम को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि यह गिरोह "FISD PRO" नामक एक नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों को अत्यधिक मुनाफे का लालच देता था और इस तरह करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के खिलाफ पूरे देश में 100 से अधिक NCRP शिकायतें दर्ज की गई हैं। यह गिरोह 50 से अधिक म्यूल खातों का इस्तेमाल कर अवैध लेन-देन करता था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक, फर्जी आधार कार्ड और एक बायोमेट्रिक मशीन शामिल हैं। साइबर पुलिस ने गिरोह से जुड़े खातों में मौजूद ₹30 लाख से अधिक की धनराशि को भी फ्रीज कर दिया है। जाँच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह का संबंध प्रवर्तन निदेशालय (ED) पटना द्वारा जांचाधीन ₹31 करोड़ के एक चर्चित NHAI बैंक फ्रॉड मामले से भी है। पुलिस इस मामले में फरार अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।1
- जौनपुर जिले के थाना केराकत अंतर्गत ग्राम धरौरा में खेत में मिट्टी डालने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गाँव के दो पड़ोसी परिवारों, जो आपस में पट्टिदार भी हैं, के बीच हुए इस झगड़े में 65 वर्षीय रामदुलार सरोज को गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के संबंध में, परिजनों की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना को लेकर जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की बाइट भी जारी की गई है।1
- फीफा विश्व कप ट्रॉफी का कुल वजन 6.175 किलोग्राम है, जिसमें लगभग 5 किलोग्राम 18 कैरेट सोना शामिल है। इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी की अनुमानित कीमत 20 मिलियन डॉलर आंकी जाती है, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹170 से ₹190 करोड़ के बराबर है। इसी भारी भरकम कीमत के कारण इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान खेल ट्रॉफियों में से एक माना जाता है।1
- जौनपुर के बदलापुर कोतवाली परिसर में धोखाधड़ी के एक मामले को लेकर पहुंचे दो पक्ष आपस में भिड़ गए, जिसके बाद पूरा कोतवाली परिसर जंग का मैदान बन गया। इस हिंसक झड़प में बीच-बचाव करने आए कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कई लोगों को हिरासत में लेना पड़ा है।1