जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील के सुरेरी थाना क्षेत्र स्थित कठवतिया गांव में पैतृक संपत्ति को लेकर एक विवाद अब और गंभीर होता दिख रहा है। पीड़ित पक्ष ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयास की शिकायत जिलाधिकारी से की थी, लेकिन आरोप है कि शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने से विपक्षियों का मनोबल बढ़ा और उन्होंने एक दुकान में तोड़फोड़ कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया। कठवतिया निवासी राजकुमार सिंह पुत्र काली प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि वे आराजी संख्या 548/0.0218 हेक्टेयर भूमि के सहखातेदार हैं। यह भूमि पैतृक संपत्ति है, जिसका बंटवारा उनके पिता द्वारा जीवनकाल में ही कर दिया गया था। राजकुमार सिंह का कहना है कि वे तब से अपने हिस्से की भूमि पर दुकान, गोदाम और कृषि कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया था कि 21 मई 2026 को विपक्षी पक्ष ने उनके हिस्से की भूमि पर लोहे के खंभे गाड़कर कब्जा करने और निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया। विरोध करने पर उन्हें गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई थी। पीड़ित पक्ष ने यह भी दावा किया कि भूमि विवाद से संबंधित वाद न्यायालय में विचाराधीन है और संबंधित भूमि पर स्थगन आदेश भी प्रभावी है। राजकुमार सिंह के अनुसार, शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी का लाभ उठाते हुए कथित तौर पर 15 जून 2026 को स्वतंत्र सिंह समेत अन्य लोगों ने उनकी दुकान में घुसकर तोड़फोड़ की, सामान बाहर फेंक दिया और विरोध करने पर मारपीट भी की, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जब राजकुमार सिंह शिकायत लेकर सुरेरी थाने पहुँचे, तो पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत राजकुमार सिंह और दूसरे पक्ष से शशिकांत सिंह दोनों का चालान कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस कार्रवाई से उन्हें न्याय मिलने के बजाय और अधिक परेशानी उठानी पड़ी, जबकि विपक्षी पक्ष का मनोबल बढ़ गया। इस मामले में अभी तक विपक्षी पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग अब प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं, क्योंकि न्यायालय के स्थगन आदेश प्रभावी होने के बावजूद कथित निर्माण और तोड़फोड़ के आरोप कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील के सुरेरी थाना क्षेत्र स्थित कठवतिया गांव में पैतृक संपत्ति को लेकर एक विवाद अब और गंभीर होता दिख रहा है। पीड़ित पक्ष ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयास की शिकायत जिलाधिकारी से की थी, लेकिन आरोप है कि शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने से विपक्षियों का मनोबल बढ़ा और उन्होंने एक दुकान में तोड़फोड़ कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया। कठवतिया निवासी राजकुमार सिंह पुत्र काली प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि वे आराजी संख्या 548/0.0218 हेक्टेयर भूमि के सहखातेदार हैं। यह भूमि पैतृक संपत्ति है, जिसका बंटवारा उनके पिता द्वारा जीवनकाल में ही कर दिया गया था। राजकुमार सिंह का कहना है कि वे तब से अपने हिस्से की भूमि पर दुकान, गोदाम और कृषि कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र
में बताया था कि 21 मई 2026 को विपक्षी पक्ष ने उनके हिस्से की भूमि पर लोहे के खंभे गाड़कर कब्जा करने और निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया। विरोध करने पर उन्हें गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई थी। पीड़ित पक्ष ने यह भी दावा किया कि भूमि विवाद से संबंधित वाद न्यायालय में विचाराधीन है और संबंधित भूमि पर स्थगन आदेश भी प्रभावी है। राजकुमार सिंह के अनुसार, शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी का लाभ उठाते हुए कथित तौर पर 15 जून 2026 को स्वतंत्र सिंह समेत अन्य लोगों ने उनकी दुकान में घुसकर तोड़फोड़ की, सामान बाहर फेंक दिया और विरोध करने पर मारपीट भी की, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जब राजकुमार सिंह शिकायत लेकर सुरेरी थाने पहुँचे,
तो पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत राजकुमार सिंह और दूसरे पक्ष से शशिकांत सिंह दोनों का चालान कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस कार्रवाई से उन्हें न्याय मिलने के बजाय और अधिक परेशानी उठानी पड़ी, जबकि विपक्षी पक्ष का मनोबल बढ़ गया। इस मामले में अभी तक विपक्षी पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग अब प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं, क्योंकि न्यायालय के स्थगन आदेश प्रभावी होने के बावजूद कथित निर्माण और तोड़फोड़ के आरोप कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
- जौनपुर के मड़ियाहूं तहसील के सुरेरी थाना क्षेत्र स्थित कठवतिया गांव में पैतृक संपत्ति को लेकर एक विवाद अब और गंभीर होता दिख रहा है। पीड़ित पक्ष ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयास की शिकायत जिलाधिकारी से की थी, लेकिन आरोप है कि शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने से विपक्षियों का मनोबल बढ़ा और उन्होंने एक दुकान में तोड़फोड़ कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया। कठवतिया निवासी राजकुमार सिंह पुत्र काली प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि वे आराजी संख्या 548/0.0218 हेक्टेयर भूमि के सहखातेदार हैं। यह भूमि पैतृक संपत्ति है, जिसका बंटवारा उनके पिता द्वारा जीवनकाल में ही कर दिया गया था। राजकुमार सिंह का कहना है कि वे तब से अपने हिस्से की भूमि पर दुकान, गोदाम और कृषि कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया था कि 21 मई 2026 को विपक्षी पक्ष ने उनके हिस्से की भूमि पर लोहे के खंभे गाड़कर कब्जा करने और निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया। विरोध करने पर उन्हें गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई थी। पीड़ित पक्ष ने यह भी दावा किया कि भूमि विवाद से संबंधित वाद न्यायालय में विचाराधीन है और संबंधित भूमि पर स्थगन आदेश भी प्रभावी है। राजकुमार सिंह के अनुसार, शिकायत के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी का लाभ उठाते हुए कथित तौर पर 15 जून 2026 को स्वतंत्र सिंह समेत अन्य लोगों ने उनकी दुकान में घुसकर तोड़फोड़ की, सामान बाहर फेंक दिया और विरोध करने पर मारपीट भी की, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जब राजकुमार सिंह शिकायत लेकर सुरेरी थाने पहुँचे, तो पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत राजकुमार सिंह और दूसरे पक्ष से शशिकांत सिंह दोनों का चालान कर दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस कार्रवाई से उन्हें न्याय मिलने के बजाय और अधिक परेशानी उठानी पड़ी, जबकि विपक्षी पक्ष का मनोबल बढ़ गया। इस मामले में अभी तक विपक्षी पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोग अब प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं, क्योंकि न्यायालय के स्थगन आदेश प्रभावी होने के बावजूद कथित निर्माण और तोड़फोड़ के आरोप कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।3
- सारनाथ थाना क्षेत्र में एक 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा की मौत के मामले में पुलिस गहन जांच कर रही है। हालांकि, पीड़ित पक्ष की ओर से अभी तक पुलिस को कोई औपचारिक तहरीर नहीं दी गई है, लेकिन हिरासत में लिए गए आरोपी बॉयफ्रेंड ने पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे किए हैं। जौनपुर निवासी आरोपी बॉयफ्रेंड ने पुलिस को बताया कि छात्रा सुबह नौ बजे उसके लिए खाना लेकर पहुंची थी, जिसके बाद दोनों ने बातचीत की। जब उसे पता चला कि छात्रा तीन महीने की गर्भवती है, तो उसने उस पर गर्भपात की दवा खाने का दबाव बनाया। छात्रा के इनकार के बावजूद, उसने जबरन उसे दवा लेने के लिए मजबूर किया। दवा के सेवन के ठीक डेढ़ घंटे बाद छात्रा की हालत गंभीर रूप से बिगड़ गई, उसे असहनीय दर्द हुआ और खून निकलने लगा। अस्पताल जाने की तैयारी के दौरान वह सीढ़ियों पर अचेत होकर गिर गई। आरोपी के मुताबिक, उसने गार्ड की मदद से छात्रा को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी वहां से भागकर जौनपुर चला गया। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि दोनों पिछले 18 महीने से एक-दूसरे के संपर्क में थे और आरोपी ने सात महीने पहले भी छात्रा को गर्भपात की दवा दी थी। उसे लगा था कि इस बार भी पहले की तरह सब ठीक हो जाएगा। आईएमएस बीएचयू की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता ने इस संदर्भ में बताया है कि नौ सप्ताह की प्रेग्नेंसी के बाद किसी भी तरह की गर्भपात की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह महिला के लिए जानलेवा हो सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाएं लेना बेहद खतरनाक है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार की ओर से तहरीर मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले से जुड़ी अन्य जानकारी भी जुटा रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि छात्रा किन परिस्थितियों में हॉस्टल पहुंची थी।1
- जौनपुर जिले के थाना केराकत अंतर्गत ग्राम धरौरा में खेत में मिट्टी डालने को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गाँव के दो पड़ोसी परिवारों, जो आपस में पट्टिदार भी हैं, के बीच हुए इस झगड़े में 65 वर्षीय रामदुलार सरोज को गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के संबंध में, परिजनों की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना को लेकर जौनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की बाइट भी जारी की गई है।1
- चंदौली के चहनियां क्षेत्र स्थित मथेला ग्राम सभा के लोलपुर गांव में तालाब की दुर्व्यवस्था और प्यास से एक नीलगाय की मौत होने के बाद ग्रामीणों की शिकायत पर खंड विकास अधिकारी जावेद अख्तर ने मंगलवार को गांव का निरीक्षण किया। गांव में खामियां मिलने पर BDO ने जिम्मेदार कर्मियों को फोन पर कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया। यह घटना तीन दिन पूर्व हुई थी, जब लोलपुर गांव में तालाब के पास पानी के लिए तरस रही नीलगाय की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब में पानी न होने और झाड़-झंखाड़ से पटा होने के कारण पशु-पक्षियों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गांव में विकास कार्य न कराने और तालाब के रखरखाव में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए सोमवार को BDO को एक प्रार्थना पत्र सौंपा था। शिकायत मिलते ही BDO जावेद अख्तर मंगलवार को अपनी टीम के साथ लोलपुर पहुंचे और तालाब सहित पूरे गांव का गहन निरीक्षण किया। गांव में गंदगी, जलजमाव और तालाब की बदहाली देखकर नाराज BDO ने मौके से ही सचिव और संबंधित कर्मियों को फोन पर फटकार लगाई। BDO जावेद अख्तर ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों की लिखित शिकायत पर वह स्वयं मौके पर पहुंचे हैं, और उन्होंने सचिव को तत्काल तालाब की सफाई कराकर पानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सुधार न होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। BDO के त्वरित निरीक्षण पर ग्रामीणों ने संतोष व्यक्त किया और उन्होंने जल्द से जल्द तालाब में पानी भरवाने तथा गांव की सफाई की मांग की।1
- अब पाकिस्तानियों ने खुद ही इस बात के सबूत पेश किए हैं कि भारत ने बहुत जोरदार कार्रवाई की है, जिसके परिणामस्वरूप आंतक के तीन ठिकाने अब समतल मैदान में बदल गए हैं। यह खबर बीबीसी उर्दू सर्विस के पाकिस्तानी रिपोर्टरों के हवाले से सामने आई है। इस घटना को प्रधानमंत्री के उस बयान से जोड़ा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि "ये नया भारत है, घुसकर मारता है", खासकर उन लोगों के संदर्भ में जिन्होंने तब इस दावे के सबूत मांगे थे।1
- लछछू ब्रह्म बाबा मंदिर में हाल ही में खुदाई के दौरान प्राचीन शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं मिली हैं। इस महत्वपूर्ण खोज से स्थानीय श्रद्धालुओं में भारी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।1
- पितृ दिवस के अवसर पर, मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण ऑर्गेनाइजेशन के रिपोर्टर सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने सभी पिताओं को नमन करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पिता का स्नेह, उनका अनुशासन और उनका मार्गदर्शन समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए एक अमूल्य धरोहर के समान हैं। इस विशेष दिन पर, पाण्डेय ने सभी से अपने पिता और पितृतुल्य व्यक्तियों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने का आह्वान किया। उन्होंने संदेश दिया कि "पिता का सम्मान, परिवार का अभिमान।" इसके अतिरिक्त, एक पितृ दिवस विशेष संदेश में उन्होंने कहा कि "पिता केवल एक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की वह मजबूत नींव हैं जिनके त्याग, संघर्ष और संस्कारों पर हमारा भविष्य खड़ा होता है।"1
- फीफा विश्व कप ट्रॉफी का कुल वजन 6.175 किलोग्राम है, जिसमें लगभग 5 किलोग्राम 18 कैरेट सोना शामिल है। इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी की अनुमानित कीमत 20 मिलियन डॉलर आंकी जाती है, जो भारतीय रुपये में लगभग ₹170 से ₹190 करोड़ के बराबर है। इसी भारी भरकम कीमत के कारण इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान खेल ट्रॉफियों में से एक माना जाता है।1