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डिंडोरी जिले के समनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि सुबह 10 बजे तक भी अस्पताल में न कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई कर्मचारी, जिसके कारण दूर-दराज़ के गाँवों से इलाज के लिए पहुँचे मरीजों को घंटों तक इंतज़ार करना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि इस स्थिति से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा परेशानी हुई। समय पर इलाज न मिलने के कारण लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि अस्पताल में स्टाफ ही समय पर नहीं पहुँचेगा, तो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ कैसे मिल पाएंगी। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरी लापरवाही के मामले में क्या कार्रवाई करता है।
NILMANI CHOUDHARY
डिंडोरी जिले के समनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि सुबह 10 बजे तक भी अस्पताल में न कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई कर्मचारी, जिसके कारण दूर-दराज़ के गाँवों से इलाज के लिए पहुँचे मरीजों को घंटों तक इंतज़ार करना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि इस स्थिति से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा परेशानी हुई। समय पर इलाज न मिलने के कारण लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि अस्पताल में स्टाफ ही समय पर नहीं पहुँचेगा, तो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ कैसे मिल पाएंगी। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरी लापरवाही के मामले में क्या कार्रवाई करता है।
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- डिंडोरी जिले की खैरदा पंचायत के ग्रामीण बरसात शुरू होने से पहले ही गंभीर बिजली संकट से जूझ रहे हैं। बिजली की कमी के कारण लोगों में कीड़े-मकोड़ों का भय भी बना हुआ है। अपनी इस समस्या को लेकर खैरदा गांव के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में अपनी गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्युत विभाग के अधिकारी 'कुंभकरण की निद्रा' में सोए हुए हैं और खैरदा गांव में व्याप्त बिजली संकट से पूरी तरह बेखबर हैं।3
- डिंडोरी जिले की ग्राम पंचायत नेवसा के पतेरा टोला में भीषण जल संकट छाया हुआ है, जिससे लगभग 40 से 45 परिवार पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की लापरवाही के कारण उन्हें नियमित पानी नहीं मिल रहा है, और हालात ऐसे हो गए हैं कि केंद्र सरकार की नल-जल योजना भी उनकी प्यास बुझाने में विफल साबित हो रही है। इस मजबूरी के चलते लोग दूषित कुएं का पानी उपयोग करने को विवश हैं, जिससे बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें कई बार दूर-दूर तक जाकर पानी लाना पड़ता है। गांव में एक निजी बोरिंग से पानी तो दिया जा रहा है, लेकिन इसके लिए हर परिवार से 200 रुपए महीने लिए जाते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन गया है। पानी की इस गंभीर समस्या से परेशान ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया को अपनी पूरी स्थिति से अवगत कराया। ग्रामीणों ने प्रशासन को हालात की गंभीरता दिखाने के लिए दूषित पानी की बोतल भी अपने साथ लाई थी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस विकट समस्या का समाधान कितनी शीघ्रता से कर पाता है।1
- डिंडोरी जिले में लगातार गिरते जलस्तर के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर जल संकट गहरा गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी गांवों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। ताजा मामला ग्राम पंचायत नेवसा के पतेरा टोला से सामने आया है, जहाँ लगभग 40 से 45 परिवार भीषण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं और दूषित कुएं का पानी इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। पंचायत की इस कथित लापरवाही से परेशान ग्रामीण कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के सामने पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि पतेरा टोला में पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। पंचायत द्वारा न तो नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही खराब पड़ी जल प्रणालियों को सुधारा जा रहा है। इस मजबूरी में ग्रामीणों को दूषित कुएं का पानी पीना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पतेरा टोला में रहने वाला एक शिक्षक अपने निजी बोरिंग से पानी उपलब्ध कराता है, जिसके एवज में प्रत्येक परिवार से हर महीने 200 रुपए लिए जा रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन गया है। ग्रामीणों ने आगे बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन आज तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ यह जल संकट और भी विकराल हो गया है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें घंटों दूर जाकर पानी लाना पड़ता है, जो उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। समस्या की गंभीरता को दर्शाने के लिए ग्रामीण दूषित पानी बोतल में भरकर लाए थे, जिसे उन्होंने डिंडोरी कलेक्टर को दिखाया ताकि समस्या के निराकरण हेतु तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू हो सके। जनसुनवाई में पहुंचे इन ग्रामीणों की समस्या पर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करता है।1
- डिंडोरी जिले के ग्रामर गांव, सोनपुर थाना क्षेत्र से एक ग्रामीण ने शिकायत की है कि किसी व्यक्ति ने अपने खेत की मिट्टी को उनके 'बंधीय' में डलवा दिया है। इस मुद्दे को लेकर लगातार झगड़ा हो रहा है, जिसका अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है। पीड़ित ग्रामीण ने सरकार से इस मामले का तुरंत निराकरण करने की अपील की है। उन्होंने आम जनता से भी अनुरोध किया है कि इस शिकायत को आगे साझा करें ताकि यह सरकार तक पहुँच सके।4
- शहडोल का मेवाड़ हॉस्पिटल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि एक मरीज द्वारा बिल मांगे जाने पर अस्पताल ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। इस घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि, हम इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि किसी भी प्रकार से नहीं करते हैं।1
- शहडोल के बस स्टैंड स्थित शराब भट्टी पर तय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज़्यादा कीमत पर शराब बेची जा रही है। इस अवैध वसूली के बावजूद प्रशासन पूरी तरह से मौन है, जिसके कारण शराब खरीदने वाले लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।1
- मध्य प्रदेश के अनूपपुर में पानी के गंभीर संकट को लेकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, लोग घड़ा-बाल्टी लेकर जनपद में पहुंचे और पानी की समस्या को उजागर किया।1
- डिंडोरी जिले के समनापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि सुबह 10 बजे तक भी अस्पताल में न कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई कर्मचारी, जिसके कारण दूर-दराज़ के गाँवों से इलाज के लिए पहुँचे मरीजों को घंटों तक इंतज़ार करना पड़ा। मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि इस स्थिति से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा परेशानी हुई। समय पर इलाज न मिलने के कारण लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। ग्रामीणों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि अस्पताल में स्टाफ ही समय पर नहीं पहुँचेगा, तो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ कैसे मिल पाएंगी। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरी लापरवाही के मामले में क्या कार्रवाई करता है।1