Shuru
Apke Nagar Ki App…
नगर चुनाव के साथ-साथ अब आरोपों की एक परतदार कहानी भी सामने आ रही है, जो हर नए बयान के साथ और तीखी होती जा रही है। शिवपुर मोहल्ले से उठी कथित नोट बाँटने की गोड्डा में नगर चुनाव के साथ-साथ अब आरोपों की एक परतदार कहानी भी सामने आ रही है, जो हर नए बयान के साथ और तीखी होती जा रही है। शिवपुर मोहल्ले से उठी कथित नोट बाँटने की
User10408
नगर चुनाव के साथ-साथ अब आरोपों की एक परतदार कहानी भी सामने आ रही है, जो हर नए बयान के साथ और तीखी होती जा रही है। शिवपुर मोहल्ले से उठी कथित नोट बाँटने की गोड्डा में नगर चुनाव के साथ-साथ अब आरोपों की एक परतदार कहानी भी सामने आ रही है, जो हर नए बयान के साथ और तीखी होती जा रही है। शिवपुर मोहल्ले से उठी कथित नोट बाँटने की
More news from Jharkhand and nearby areas
- गोड्डा में नगर चुनाव के साथ-साथ अब आरोपों की एक परतदार कहानी भी सामने आ रही है, जो हर नए बयान के साथ और तीखी होती जा रही है। शिवपुर मोहल्ले से उठी कथित नोट बाँटने की1
- Post by Akshay1
- Post by CAppu NEWS1
- इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब एक संदिग्ध व्यक्ति ने एक लड़की को लेकर भागने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि जैसे ही वह उसे लेकर जाने लगा, बच्ची ने जोर-जोर से आवाज लगानी शुरू कर दी। शोर सुनकर आसपास के लोग सतर्क हो गए। भीड़ जुटती देख कथित बच्चा चोर बच्ची को छोड़कर मौके से फरार हो गया।1
- Post by MAHAGAMA1
- देश के जानेमाने उद्योगपति और अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी पीरपैंती पहुंचे। इस दौरे को प्रदेश में विकास कार्यों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें कि बिहार के पीरपैंती में अदाणी समूह थर्मल पावर प्लांट का निर्माण कर रहा है। यह पिछले कई दशक में किसी भी औद्योगिक समूह द्वारा बिहार में किया गया सबसे बड़ा निवेश है। अदाणी समूह के चेयरमैन ने मौके पर पहुंच कर इस प्रोजेक्ट के कामकाज का जायजा लिया और वृक्षारोपण के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अदाणी समूह का पावर प्लांट पीरपैंती प्रखंड के सिरमतपुर व आसपास की करीब 479 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है। यह अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल प्लांट 2400 मेगावाट उत्पादन क्षमता का होगा। उत्तर में गंगा, दक्षिण में नेशनल हाईवे और पास ही पीरपैंती रेलवे स्टेशन लॉजिस्टिक दृष्टि से लोकेशन को काफी महत्वपूर्ण बनाता है। इस प्लांट के निर्माण के दौरान 10 से 12 हजार लोगों को और ऑपरेशनल होने प लगभग 3000 लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस परियोजना पर अदाणी की तरफ से 30 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। परियोजना को पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। फिलहाल चहारदीवारी और भूमि समतलीकरण जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा प्रोजेक्ट बिहार की बिजली जरूरतों को मजबूती देगा, क्षेत्रीय रोजगार, औद्योगिक तरक्की और बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देगा। उद्योग जगत की बड़ी हस्ती का यह दौरा केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि राज्य में भरोसे और निवेश का सकारात्मक पैगाम भी है।1
- सबरबाड़ी में बेखौफ बदमाशों का तांडव: व्यवसाई से नगदी और मोबाइल लूटा अमरपुर प्रखंड क्षेत्र के साबरबाड़ी गांव के समीप शनिवार की संध्या अपराधियों ने एक व्यवसाई को निशाना बनाते हुए नगदी और मोबाइल छीन लिया। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।1
- गोड्डा में नगर चुनाव के साथ-साथ अब आरोपों की एक परतदार कहानी भी सामने आ रही है, जो हर नए बयान के साथ और तीखी होती जा रही है। शिवपुर मोहल्ले से उठी कथित नोट बाँटने की सूचना ने पहले ही माहौल को गर्म कर दिया था। सुशील रमानी के समर्थक सुमन दास का दावा है कि सूचना मिलने पर जब वे वहाँ पहुँचे, तो हालात सामान्य नहीं थे। उनके अनुसार नकाबपोश युवकों की मौजूदगी, डर का माहौल और कथित मारपीट ने यह संकेत दिया कि मामला सिर्फ बहस का नहीं, दबाव का भी है। इस घटनाक्रम में सुमन दास ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष प्रेमनंदन मंडल, उनके पुत्र प्रीतेश नंदन और नगर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी गुड्डू मंडल के भाई संतोष मंडल की मौजूदगी का आरोप लगाया है, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे विवाद को और संदेह के घेरे में ला दिया। नगर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी गुड्डू मंडल ने न तो पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट जवाब दिया और न ही निष्पक्ष जाँच की बात की, बल्कि उल्टा आरोप लगाने वालों पर ही नोट बाँटने का दावा ठोक दिया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब आरोप असहज करने लगें, तो अक्सर नैरेटिव पलटने की कोशिश की जाती है—ताकि सवाल पूछने वाले ही कटघरे में खड़े नज़र आएँ। यही वजह है कि गुड्डू मंडल का यह पलटवार कई नए सवाल खड़े कर रहा है। अगर सब कुछ साफ़ है, तो जाँच से बचने का भाव क्यों दिखता है? और अगर सच्चाई साथ है, तो बयानबाज़ी के बजाय तथ्य सामने क्यों नहीं रखे जा रहे? फिलहाल यह मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है और सच्चाई किसी निष्पक्ष जाँच के बाद ही सामने आ सकेगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि गोड्डा की जनता अब सिर्फ़ आरोप सुनने के मूड में नहीं है। वह यह जानना चाहती है कि सत्ता की दौड़ में डर और दबाव का इस्तेमाल कहीं लोकतंत्र पर भारी तो नहीं पड़ रहा।1