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दरभंगा में किसानों की जमीन पर फिर संकट! अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का अल्टीमेटम। बिहार में एक बार फिर किसानों की जमीन का मुद्दा गरमा गया है... दरभंगा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, क्या विकास परियोजना के नाम पर अब वही जमीन उनसे छीनी जाएगी? दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कॉलोनी इलाके में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। किसानों और उनके प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता रिटायर्ड कर्नल पी.के. चौधरी और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अगर बाजार में जमीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, तो मुआवजे का आकलन पुराने सर्किल रेट के आधार पर क्यों? किसानों का दावा है कि दरभंगा में सर्किल रेट लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है और इसी वजह से उन्हें मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम पड़ रहा है। मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के इनलाइनमेंट यानी प्रस्तावित मार्ग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित नक्शे में ऐसा मार्ग था, जिससे किसानों की जमीन का नुकसान कम हो सकता था। लेकिन बाद में इनलाइनमेंट में बदलाव किया गया और अब कई किसानों की जमीन इसकी चपेट में आने की आशंका है। आखिर रूट में बदलाव क्यों किया गया? किसानों को इसकी जानकारी कब और कैसे दी गई? और क्या प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर पर्याप्त सुनवाई हुई? किसानों का कहना है कि पिछली भारत माला परियोजना के दौरान भी मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं। किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई मामले पिछले करीब ढाई साल से प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित हैं। आरोप है कि सुनवाई के नाम पर किसानों को लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब दोनार से बेनीपुर की ओर 4-लेन सड़क और एम्स के आसपास भी सड़क निर्माण की योजनाएं चल रही हैं, तो महज करीब 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए नए निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? क्या मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता? या फिर किसानों की जमीन अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प है? ये सवाल अब प्रशासन और सरकार के सामने हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि किसान प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं— पहली— प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार और रोक की मांग। दूसरी— जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र समिति का गठन। तीसरी— दरभंगा में लंबे समय से लंबित सर्किल रेट का तत्काल संशोधन। चौथी— प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित मुआवजा मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारा। पांचवीं— भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ देने की मांग। अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है... सवाल है किसान के भविष्य का। अगर जिन परिवारों ने पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उनकी जमीन दोबारा किसी दूसरी परियोजना की जद में आती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास का संकट खड़ा हो सकता है। अब देखना होगा— क्या सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का रास्ता निकालेगी? क्या मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन होगा? क्या प्रस्तावित इनलाइनमेंट पर फिर से विचार किया जाएगा? या फिर... क्या दरभंगा की धरती पर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत होगी? फिलहाल किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है और प्रशासन के सामने चुनौती भी बड़ी है। इस पूरे मामले पर हमारी नजर बनी हुई है।

3 hrs ago
user_Raman kumar Darbhanga Tak
Raman kumar Darbhanga Tak
हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
3 hrs ago

दरभंगा में किसानों की जमीन पर फिर संकट! अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का अल्टीमेटम। बिहार में एक बार फिर किसानों की जमीन का मुद्दा गरमा गया है... दरभंगा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, क्या विकास परियोजना के नाम पर अब वही जमीन उनसे छीनी जाएगी? दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कॉलोनी इलाके में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। किसानों और उनके प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता रिटायर्ड कर्नल पी.के. चौधरी और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अगर बाजार में जमीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, तो मुआवजे का आकलन पुराने सर्किल रेट के आधार पर क्यों? किसानों का दावा है कि दरभंगा में सर्किल रेट लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है और इसी वजह से उन्हें मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम पड़ रहा है। मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के इनलाइनमेंट यानी प्रस्तावित मार्ग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित नक्शे में ऐसा मार्ग था, जिससे किसानों की जमीन का नुकसान कम हो सकता था। लेकिन बाद में इनलाइनमेंट में बदलाव किया गया और अब कई किसानों की जमीन इसकी चपेट में आने की आशंका है। आखिर रूट में बदलाव क्यों किया गया? किसानों को इसकी जानकारी कब और कैसे दी गई? और क्या प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर पर्याप्त सुनवाई हुई? किसानों का कहना है कि पिछली भारत माला परियोजना के दौरान भी मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं। किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई मामले पिछले करीब ढाई साल से प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित हैं। आरोप है कि सुनवाई के नाम पर किसानों को लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब दोनार से बेनीपुर की ओर 4-लेन सड़क और एम्स के आसपास भी सड़क निर्माण की योजनाएं चल रही हैं, तो महज करीब 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए नए निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? क्या मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता? या फिर किसानों की जमीन अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प है? ये सवाल अब प्रशासन और सरकार के सामने हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि किसान प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं— पहली— प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार और रोक की मांग। दूसरी— जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र समिति का गठन। तीसरी— दरभंगा में लंबे समय से लंबित सर्किल रेट का तत्काल संशोधन। चौथी— प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित मुआवजा मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारा। पांचवीं— भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ देने की मांग। अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है... सवाल है किसान के भविष्य का। अगर जिन परिवारों ने पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उनकी जमीन दोबारा किसी दूसरी परियोजना की जद में आती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास का संकट खड़ा हो सकता है। अब देखना होगा— क्या सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का रास्ता निकालेगी? क्या मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन होगा? क्या प्रस्तावित इनलाइनमेंट पर फिर से विचार किया जाएगा? या फिर... क्या दरभंगा की धरती पर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत होगी? फिलहाल किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है और प्रशासन के सामने चुनौती भी बड़ी है। इस पूरे मामले पर हमारी नजर बनी हुई है।

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  • दरभंगा में किसानों की जमीन पर फिर संकट! अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का अल्टीमेटम। बिहार में एक बार फिर किसानों की जमीन का मुद्दा गरमा गया है... दरभंगा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, क्या विकास परियोजना के नाम पर अब वही जमीन उनसे छीनी जाएगी? दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कॉलोनी इलाके में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। किसानों और उनके प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता रिटायर्ड कर्नल पी.के. चौधरी और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अगर बाजार में जमीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, तो मुआवजे का आकलन पुराने सर्किल रेट के आधार पर क्यों? किसानों का दावा है कि दरभंगा में सर्किल रेट लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है और इसी वजह से उन्हें मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम पड़ रहा है। मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के इनलाइनमेंट यानी प्रस्तावित मार्ग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित नक्शे में ऐसा मार्ग था, जिससे किसानों की जमीन का नुकसान कम हो सकता था। लेकिन बाद में इनलाइनमेंट में बदलाव किया गया और अब कई किसानों की जमीन इसकी चपेट में आने की आशंका है। आखिर रूट में बदलाव क्यों किया गया? किसानों को इसकी जानकारी कब और कैसे दी गई? और क्या प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर पर्याप्त सुनवाई हुई? किसानों का कहना है कि पिछली भारत माला परियोजना के दौरान भी मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं। किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई मामले पिछले करीब ढाई साल से प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित हैं। आरोप है कि सुनवाई के नाम पर किसानों को लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब दोनार से बेनीपुर की ओर 4-लेन सड़क और एम्स के आसपास भी सड़क निर्माण की योजनाएं चल रही हैं, तो महज करीब 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए नए निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? क्या मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता? या फिर किसानों की जमीन अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प है? ये सवाल अब प्रशासन और सरकार के सामने हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि किसान प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं— पहली— प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार और रोक की मांग। दूसरी— जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र समिति का गठन। तीसरी— दरभंगा में लंबे समय से लंबित सर्किल रेट का तत्काल संशोधन। चौथी— प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित मुआवजा मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारा। पांचवीं— भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ देने की मांग। अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है... सवाल है किसान के भविष्य का। अगर जिन परिवारों ने पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उनकी जमीन दोबारा किसी दूसरी परियोजना की जद में आती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास का संकट खड़ा हो सकता है। अब देखना होगा— क्या सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का रास्ता निकालेगी? क्या मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन होगा? क्या प्रस्तावित इनलाइनमेंट पर फिर से विचार किया जाएगा? या फिर... क्या दरभंगा की धरती पर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत होगी? फिलहाल किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है और प्रशासन के सामने चुनौती भी बड़ी है। इस पूरे मामले पर हमारी नजर बनी हुई है।
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    दरभंगा में किसानों की जमीन पर फिर संकट! अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का अल्टीमेटम।
बिहार में एक बार फिर किसानों की जमीन का मुद्दा गरमा गया है...
दरभंगा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, क्या विकास परियोजना के नाम पर अब वही जमीन उनसे छीनी जाएगी?
दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कॉलोनी इलाके में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच बेचैनी बढ़ गई है।
किसानों और उनके प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता रिटायर्ड कर्नल पी.के. चौधरी और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अगर बाजार में जमीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, तो मुआवजे का आकलन पुराने सर्किल रेट के आधार पर क्यों?
किसानों का दावा है कि दरभंगा में सर्किल रेट लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है और इसी वजह से उन्हें मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम पड़ रहा है।
मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है।
किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के इनलाइनमेंट यानी प्रस्तावित मार्ग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित नक्शे में ऐसा मार्ग था, जिससे किसानों की जमीन का नुकसान कम हो सकता था।
लेकिन बाद में इनलाइनमेंट में बदलाव किया गया और अब कई किसानों की जमीन इसकी चपेट में आने की आशंका है।
आखिर रूट में बदलाव क्यों किया गया?
किसानों को इसकी जानकारी कब और कैसे दी गई?
और क्या प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर पर्याप्त सुनवाई हुई?
किसानों का कहना है कि पिछली भारत माला परियोजना के दौरान भी मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं।
किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई मामले पिछले करीब ढाई साल से प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित हैं।
आरोप है कि सुनवाई के नाम पर किसानों को लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।
किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है।
उनका कहना है कि जब दोनार से बेनीपुर की ओर 4-लेन सड़क और एम्स के आसपास भी सड़क निर्माण की योजनाएं चल रही हैं, तो महज करीब 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए नए निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है?
क्या मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता?
या फिर किसानों की जमीन अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प है?
ये सवाल अब प्रशासन और सरकार के सामने हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि किसान प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—
पहली— प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार और रोक की मांग।
दूसरी— जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र समिति का गठन।
तीसरी— दरभंगा में लंबे समय से लंबित सर्किल रेट का तत्काल संशोधन।
चौथी— प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित मुआवजा मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारा।
पांचवीं— भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ देने की मांग।
अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है...
सवाल है किसान के भविष्य का।
अगर जिन परिवारों ने पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उनकी जमीन दोबारा किसी दूसरी परियोजना की जद में आती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास का संकट खड़ा हो सकता है।
अब देखना होगा—
क्या सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का रास्ता निकालेगी?
क्या मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन होगा?
क्या प्रस्तावित इनलाइनमेंट पर फिर से विचार किया जाएगा?
या फिर...
क्या दरभंगा की धरती पर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत होगी?
फिलहाल किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है और प्रशासन के सामने चुनौती भी बड़ी है।
इस पूरे मामले पर हमारी नजर बनी हुई है।
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    3 hrs ago
  • 🌙🙏 चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🌙 14 सितंबर 2026 | सोमवार मिथिला की परंपरा, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति का पावन पर्व — चौरचन पाबैन। चंद्र देव की पूजा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व सभी के जीवन में खुशियाँ और शांति लाए। 🌙✨ आप सभी को चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏❤️ #ChauthChandra #Chaurachan #Mithila #MithilaCulture #Bihar
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    🌙🙏 चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🌙

14 सितंबर 2026 | सोमवार

मिथिला की परंपरा, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति का पावन पर्व — चौरचन पाबैन।
चंद्र देव की पूजा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व सभी के जीवन में खुशियाँ और शांति लाए। 🌙✨

आप सभी को चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏❤️

#ChauthChandra #Chaurachan #Mithila #MithilaCulture #Bihar
    user_Mukesh Kumar
    Mukesh Kumar
    गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    1 hr ago
  • शनिवार की लोक अदालत में काफी मामला का हुआ निपटारा बिहार के दरभंगा जिला न्यायालय में बिहार के दरभंगा जिला के दरभंगा न्यायालय जिसमें सभी बैंक बिजली बिल एवं अपराध के लिए घटना एवं अन्य लड़कों का निष्पादन किया
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    शनिवार की लोक अदालत में काफी मामला का हुआ निपटारा बिहार के दरभंगा जिला न्यायालय में
बिहार के दरभंगा जिला के दरभंगा न्यायालय जिसमें सभी बैंक बिजली बिल एवं अपराध के लिए घटना एवं अन्य लड़कों का निष्पादन किया
    user_Sonu jha (Susant Suriya )
    Sonu jha (Susant Suriya )
    Media company गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    2 hrs ago
  • दरभंगा :- सिंहवारा प्रखंड का कठलिया गाँव विश्वकर्मा पूजा बिबाद सुनिए क्या बोले छेत्रिये- नेता ओम प्रकाश ठाकुर.
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    दरभंगा :- सिंहवारा प्रखंड का कठलिया गाँव विश्वकर्मा पूजा बिबाद सुनिए क्या बोले छेत्रिये- नेता ओम प्रकाश ठाकुर.
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    2 hrs ago
  • समस्तीपुर में विकास की मांग को लेकर आंदोलन तेज! रेल विकास समस्तीपुर में विकास की मांग को लेकर आंदोलन तेज! नमस्कार आप देख सुन रहें है जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन (web)समस्तीपुर, बिहार से राजेश कुमार वर्मा के साथ अटेरन चौक रेल गुमटी पर ओवरब्रिज निर्माण समेत जिले की विभिन्न विकास मांगों को लेकर जिला विकास संघर्ष मोर्चा और रेल विकास-विस्तार मंच ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। डीआरएम चौक पर हुई बैठक में बंद चीनी मिल और पेपर मिल को चालू कराने, दुधपूरा हवाई अड्डे का जीर्णोद्धार, नई रेल लाइनों के निर्माण और समस्तीपुर जंक्शन पर वाशिंग पिट बनाने की मांग उठी। साथ ही 20 सितंबर को निर्माणाधीन मुक्तापुर रेल ओवरब्रिज का निरीक्षण करने का फैसला लिया गया। अब देखना होगा कि इन मांगों पर सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं। इसी तरह के संवाद के लिए हमारे चैनल को लाइक /सब्सक्राइब अवश्य करें.. समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।
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    समस्तीपुर में विकास की मांग को लेकर आंदोलन तेज! रेल विकास 
समस्तीपुर में विकास की मांग को लेकर आंदोलन तेज!
नमस्कार आप देख सुन रहें है जनक्रांति हिन्दी न्यूज़ बुलेटिन (web)समस्तीपुर, बिहार से राजेश कुमार वर्मा के साथ 
अटेरन चौक रेल गुमटी पर ओवरब्रिज निर्माण समेत जिले की विभिन्न विकास मांगों को लेकर जिला विकास संघर्ष मोर्चा और रेल विकास-विस्तार मंच ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है।
डीआरएम चौक पर हुई बैठक में बंद चीनी मिल और पेपर मिल को चालू कराने, दुधपूरा हवाई अड्डे का जीर्णोद्धार, नई रेल लाइनों के निर्माण और समस्तीपुर जंक्शन पर वाशिंग पिट बनाने की मांग उठी।
साथ ही 20 सितंबर को निर्माणाधीन मुक्तापुर रेल ओवरब्रिज का निरीक्षण करने का फैसला लिया गया।
अब देखना होगा कि इन मांगों पर सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।
इसी तरह के संवाद के लिए हमारे चैनल को लाइक /सब्सक्राइब अवश्य करें..
समस्तीपुर जनक्रांति प्रधान कार्यालय से प्रकाशित व प्रसारित।
    user_Jan-Kranti hindi news bulletin
    Jan-Kranti hindi news bulletin
    Voice of people समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    2 hrs ago
  • खानपुर थाना भवन का निर्माण कराना आवश्यक --- जिला पार्षद। खानपुर थाना भवन जर्जर, मरम्मत के साथ नए भवन की मांग। खानपुर,19 पंचायतों की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहा खानपुर थाना इन दिनों जर्जर भवन में संचालित होने को मजबूर है। थाना भवन की स्थिति ऐसी है कि कई जगहों पर छज्जे टूटकर झड़ रहे हैं। इससे थाना परिसर में रहने वाले पुलिसकर्मियों के साथ-साथ विभिन्न कार्यों से थाना पहुंचने वाले लोगों में भी हादसे की आशंका बनी रहती है। खासकर बारिश के मौसम में जर्जर छज्जों के गिरने का डर और बढ़ जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि खानपुर थाना क्षेत्र में कुल 19 पंचायतें आती हैं। इतने बड़े क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले थाने के लिए वर्तमान भवन अपेक्षा के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। थाना भवन में जगह की कमी के साथ-साथ भवन के कई हिस्से काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं जहां आरक्षी को रहना मुनासिब नहीं है। कई स्थानों पर छत और छज्जे क्षतिग्रस्त हैं, जिसके कारण कभी भी अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है।थाना परिसर में पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए आवश्यक सुविधाओं की भी कमी बताई जा रही है। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से थाना का कार्यक्षेत्र लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है, लेकिन भवन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से पुलिसकर्मियों को सीमित संसाधनों में ही काम करना पड़ रहा है। इस बाबत स्थानीय जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह ने जर्जर थाना भवन की तत्काल मरम्मत कराने की मांग जिला प्रशासन से की है। उन्होंने कहा कि जब तक नए भवन का निर्माण नहीं होता, तब तक क्षतिग्रस्त छज्जों, छत और अन्य जर्जर हिस्सों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि किसी तरह की दुर्घटना को टाला जा सके।जिला पार्षद ने प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से खानपुर थाना के लिए नए भवन के निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है। जिला पार्षद ने कहा कि 19 पंचायतों वाले इस महत्वपूर्ण थाना क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त पर्याप्त जगह वाला नया थाना भवन समय की जरूरत है। नए भवन के निर्माण से पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य करने का वातावरण मिलेगा और आम लोगों को भी थाना पहुंचने पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह ने बताया कि जब सुरक्षाकर्मी ही असुरक्षित रहेंगे तो थानाक्षेत्र के लोगों का सुरक्षा कैसे होगा? वहीं स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जर्जर भवन की मरम्मत के साथ-साथ नए थाना भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगा।
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    खानपुर थाना भवन का निर्माण कराना आवश्यक --- जिला पार्षद।


खानपुर थाना भवन जर्जर, मरम्मत के साथ नए भवन की मांग।

खानपुर,19 पंचायतों की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहा खानपुर थाना इन दिनों जर्जर भवन में संचालित होने को मजबूर है। थाना भवन की स्थिति ऐसी है कि कई जगहों पर छज्जे टूटकर झड़ रहे हैं। इससे थाना परिसर में रहने वाले पुलिसकर्मियों के साथ-साथ विभिन्न कार्यों से थाना पहुंचने वाले लोगों में भी हादसे की आशंका बनी रहती है। खासकर बारिश के मौसम में जर्जर छज्जों के गिरने का डर और बढ़ जाता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि खानपुर थाना क्षेत्र में कुल 19 पंचायतें आती हैं। इतने बड़े क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले थाने के लिए वर्तमान भवन अपेक्षा के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। थाना भवन में जगह की कमी के साथ-साथ भवन के कई हिस्से काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं जहां आरक्षी को रहना मुनासिब नहीं है। कई स्थानों पर छत और छज्जे क्षतिग्रस्त हैं, जिसके कारण कभी भी अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है।थाना परिसर में पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए आवश्यक सुविधाओं की भी कमी बताई जा रही है। क्षेत्रफल और आबादी के लिहाज से थाना का कार्यक्षेत्र लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है, लेकिन भवन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से पुलिसकर्मियों को सीमित संसाधनों में ही काम करना पड़ रहा है।
इस बाबत स्थानीय जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह ने जर्जर थाना भवन की तत्काल मरम्मत कराने की मांग जिला प्रशासन से की है। उन्होंने कहा कि जब तक नए भवन का निर्माण नहीं होता, तब तक क्षतिग्रस्त छज्जों, छत और अन्य जर्जर हिस्सों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि किसी तरह की दुर्घटना को टाला जा सके।जिला पार्षद ने प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से खानपुर थाना के लिए नए भवन के निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है।  जिला पार्षद ने कहा कि 19 पंचायतों वाले इस महत्वपूर्ण थाना क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त पर्याप्त जगह वाला नया थाना भवन समय की जरूरत है। नए भवन के निर्माण से पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य करने का वातावरण मिलेगा और आम लोगों को भी थाना पहुंचने पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।जिला पार्षद स्वर्णिमा सिंह ने बताया कि जब सुरक्षाकर्मी ही असुरक्षित रहेंगे तो थानाक्षेत्र के लोगों का सुरक्षा कैसे होगा?
वहीं स्थानीय लोगों और पुलिस कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जर्जर भवन की मरम्मत के साथ-साथ नए थाना भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगा।
    user_Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Farmer Samastipur, Bihar•
    6 hrs ago
  • दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी
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    दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी
दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    11 hrs ago
  • *बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्व. तुलसीदास मेहता जी की स्मृति सभा सम्पन्न, वक्ताओं ने किया नमन* आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री, समता-सादगी और समाजवाद के प्रखर नायक स्वर्गीय तुलसीदास मेहता की स्मृति दिवस पर समस्तीपुर विकास मंच के द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यवसायी सह समाजसेवी हरेंद्र कुमार राय, संचालन छात्र राजद के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुकेश यादव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता सह समाजसेवी मो. शाहिद हुसैन ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समस्तीपुर विकास मंच के जिला संयोजक सह राजद जिला प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर जी ने कहा कि स्व. तुलसीदास मेहता जी 1962 में सोशलिस्ट पार्टी से पहला चुनाव जीते और 1969, 1985, 1990, 1995 में लगातार जीत दर्ज की। वे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी और बाद में लालू प्रसाद यादव जी के कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने आजीवन गरीब, वंचित, पिछड़े और किसानों की लड़ाई लड़ी। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका सादगी भरा जीवन आज के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। हम सब उनके बताए समाजवाद के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। इस अवसर पर व्यवसायी हरेंद्र कुमार राय , छात्र नेता मुकेश यादव , अधिवक्ता मो. शाहिद हुसैन , वरीय पत्रकार शिवचंद्र झा, समाजसेवी संदीप सरकार एवं स्थानीय गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंत में स्व. मेहता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। *भवदीय* *राकेश कुमार ठाकुर* *जिला संयोजक, समस्तीपुर विकास मंच सह प्रवक्ता, जिला राजद समस्तीपुर *बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्व. तुलसीदास मेहता जी की स्मृति सभा सम्पन्न, वक्ताओं ने किया नमन* आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री, समता-सादगी और समाजवाद के प्रखर नायक स्वर्गीय तुलसीदास मेहता की स्मृति दिवस पर समस्तीपुर विकास मंच के द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यवसायी सह समाजसेवी हरेंद्र कुमार राय, संचालन छात्र राजद के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुकेश यादव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता सह समाजसेवी मो. शाहिद हुसैन ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समस्तीपुर विकास मंच के जिला संयोजक सह राजद जिला प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर जी ने कहा कि स्व. तुलसीदास मेहता जी 1962 में सोशलिस्ट पार्टी से पहला चुनाव जीते और 1969, 1985, 1990, 1995 में लगातार जीत दर्ज की। वे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी और बाद में लालू प्रसाद यादव जी के कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने आजीवन गरीब, वंचित, पिछड़े और किसानों की लड़ाई लड़ी। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका सादगी भरा जीवन आज के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। हम सब उनके बताए समाजवाद के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं। इस अवसर पर व्यवसायी हरेंद्र कुमार राय , छात्र नेता मुकेश यादव , अधिवक्ता मो. शाहिद हुसैन , वरीय पत्रकार शिवचंद्र झा, समाजसेवी संदीप सरकार एवं स्थानीय गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंत में स्व. मेहता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। *भवदीय* *राकेश कुमार ठाकुर* *जिला संयोजक, समस्तीपुर विकास मंच सह प्रवक्ता, जिला राजद समस्तीपुर
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    *बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्व. तुलसीदास मेहता जी की स्मृति सभा सम्पन्न, वक्ताओं ने किया नमन*


आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री, समता-सादगी और समाजवाद के प्रखर नायक स्वर्गीय तुलसीदास मेहता की स्मृति दिवस पर समस्तीपुर विकास मंच के द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यवसायी सह समाजसेवी हरेंद्र कुमार राय, संचालन छात्र राजद के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुकेश यादव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता सह समाजसेवी मो. शाहिद हुसैन ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समस्तीपुर विकास मंच के जिला संयोजक सह राजद जिला प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर जी ने कहा कि स्व. तुलसीदास मेहता जी 1962 में सोशलिस्ट पार्टी से पहला चुनाव जीते और 1969, 1985, 1990, 1995 में लगातार जीत दर्ज की। वे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी और बाद में लालू प्रसाद यादव जी के कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने आजीवन गरीब, वंचित, पिछड़े और किसानों की लड़ाई लड़ी। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका सादगी भरा जीवन आज के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। हम सब उनके बताए समाजवाद के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं।

इस अवसर पर व्यवसायी हरेंद्र कुमार राय , छात्र नेता मुकेश यादव , अधिवक्ता मो. शाहिद हुसैन , वरीय पत्रकार शिवचंद्र झा, समाजसेवी संदीप सरकार  एवं स्थानीय गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंत में स्व. मेहता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

*भवदीय*
*राकेश कुमार ठाकुर*
*जिला संयोजक, समस्तीपुर विकास मंच सह प्रवक्ता, जिला राजद समस्तीपुर
*बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्व. तुलसीदास मेहता जी की स्मृति सभा सम्पन्न, वक्ताओं ने किया नमन*
आज दिनांक 12 सितंबर 2026 को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री, समता-सादगी और समाजवाद के प्रखर नायक स्वर्गीय तुलसीदास मेहता की स्मृति दिवस पर समस्तीपुर विकास मंच के द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता व्यवसायी सह समाजसेवी हरेंद्र कुमार राय, संचालन छात्र राजद के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुकेश यादव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता सह समाजसेवी मो. शाहिद हुसैन ने किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समस्तीपुर विकास मंच के जिला संयोजक सह राजद जिला प्रवक्ता राकेश कुमार ठाकुर जी ने कहा कि स्व. तुलसीदास मेहता जी 1962 में सोशलिस्ट पार्टी से पहला चुनाव जीते और 1969, 1985, 1990, 1995 में लगातार जीत दर्ज की। वे जननायक कर्पूरी ठाकुर जी और बाद में लालू प्रसाद यादव जी के कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री रहे। उन्होंने आजीवन गरीब, वंचित, पिछड़े और किसानों की लड़ाई लड़ी। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनका सादगी भरा जीवन आज के जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। हम सब उनके बताए समाजवाद के रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं।
इस अवसर पर व्यवसायी हरेंद्र कुमार राय , छात्र नेता मुकेश यादव , अधिवक्ता मो. शाहिद हुसैन , वरीय पत्रकार शिवचंद्र झा, समाजसेवी संदीप सरकार  एवं स्थानीय गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। अंत में स्व. मेहता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
*भवदीय*
*राकेश कुमार ठाकुर*
*जिला संयोजक, समस्तीपुर विकास मंच सह प्रवक्ता, जिला राजद समस्तीपुर
    user_Mritunjay Kumar Thakur
    Mritunjay Kumar Thakur
    समस्तीपुर पत्रकार समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    12 hrs ago
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