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शनिवार की लोक अदालत में काफी मामला का हुआ निपटारा बिहार के दरभंगा जिला न्यायालय में बिहार के दरभंगा जिला के दरभंगा न्यायालय जिसमें सभी बैंक बिजली बिल एवं अपराध के लिए घटना एवं अन्य लड़कों का निष्पादन किया

2 hrs ago
user_Sonu jha (Susant Suriya )
Sonu jha (Susant Suriya )
Media company गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
2 hrs ago

शनिवार की लोक अदालत में काफी मामला का हुआ निपटारा बिहार के दरभंगा जिला न्यायालय में बिहार के दरभंगा जिला के दरभंगा न्यायालय जिसमें सभी बैंक बिजली बिल एवं अपराध के लिए घटना एवं अन्य लड़कों का निष्पादन किया

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  • 🌙🙏 चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🌙 14 सितंबर 2026 | सोमवार मिथिला की परंपरा, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति का पावन पर्व — चौरचन पाबैन। चंद्र देव की पूजा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व सभी के जीवन में खुशियाँ और शांति लाए। 🌙✨ आप सभी को चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏❤️ #ChauthChandra #Chaurachan #Mithila #MithilaCulture #Bihar
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    🌙🙏 चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🌙

14 सितंबर 2026 | सोमवार

मिथिला की परंपरा, हमारी आस्था और हमारी संस्कृति का पावन पर्व — चौरचन पाबैन।
चंद्र देव की पूजा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व सभी के जीवन में खुशियाँ और शांति लाए। 🌙✨

आप सभी को चौरचन पाबैन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏❤️

#ChauthChandra #Chaurachan #Mithila #MithilaCulture #Bihar
    user_Mukesh Kumar
    Mukesh Kumar
    गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    2 hrs ago
  • शनिवार की लोक अदालत में काफी मामला का हुआ निपटारा बिहार के दरभंगा जिला न्यायालय में बिहार के दरभंगा जिला के दरभंगा न्यायालय जिसमें सभी बैंक बिजली बिल एवं अपराध के लिए घटना एवं अन्य लड़कों का निष्पादन किया
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    शनिवार की लोक अदालत में काफी मामला का हुआ निपटारा बिहार के दरभंगा जिला न्यायालय में
बिहार के दरभंगा जिला के दरभंगा न्यायालय जिसमें सभी बैंक बिजली बिल एवं अपराध के लिए घटना एवं अन्य लड़कों का निष्पादन किया
    user_Sonu jha (Susant Suriya )
    Sonu jha (Susant Suriya )
    Media company गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    2 hrs ago
  • दरभंगा :- सिंहवारा प्रखंड का कठलिया गाँव विश्वकर्मा पूजा बिबाद सुनिए क्या बोले छेत्रिये- नेता ओम प्रकाश ठाकुर.
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    दरभंगा :- सिंहवारा प्रखंड का कठलिया गाँव विश्वकर्मा पूजा बिबाद सुनिए क्या बोले छेत्रिये- नेता ओम प्रकाश ठाकुर.
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    3 hrs ago
  • दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी
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    दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी
दरभंगा में किसानों की जमीन पर चला अधिग्रहण का बुलडोजर? किसान में हड़कंप? जनसुराज नेता ने दी चेतावनी
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    12 hrs ago
  • दरभंगा में किसानों की जमीन पर फिर संकट! अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का अल्टीमेटम। बिहार में एक बार फिर किसानों की जमीन का मुद्दा गरमा गया है... दरभंगा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, क्या विकास परियोजना के नाम पर अब वही जमीन उनसे छीनी जाएगी? दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कॉलोनी इलाके में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। किसानों और उनके प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता रिटायर्ड कर्नल पी.के. चौधरी और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। अगर बाजार में जमीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, तो मुआवजे का आकलन पुराने सर्किल रेट के आधार पर क्यों? किसानों का दावा है कि दरभंगा में सर्किल रेट लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है और इसी वजह से उन्हें मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम पड़ रहा है। मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के इनलाइनमेंट यानी प्रस्तावित मार्ग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित नक्शे में ऐसा मार्ग था, जिससे किसानों की जमीन का नुकसान कम हो सकता था। लेकिन बाद में इनलाइनमेंट में बदलाव किया गया और अब कई किसानों की जमीन इसकी चपेट में आने की आशंका है। आखिर रूट में बदलाव क्यों किया गया? किसानों को इसकी जानकारी कब और कैसे दी गई? और क्या प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर पर्याप्त सुनवाई हुई? किसानों का कहना है कि पिछली भारत माला परियोजना के दौरान भी मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं। किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई मामले पिछले करीब ढाई साल से प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित हैं। आरोप है कि सुनवाई के नाम पर किसानों को लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ। किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब दोनार से बेनीपुर की ओर 4-लेन सड़क और एम्स के आसपास भी सड़क निर्माण की योजनाएं चल रही हैं, तो महज करीब 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए नए निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है? क्या मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता? या फिर किसानों की जमीन अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प है? ये सवाल अब प्रशासन और सरकार के सामने हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि किसान प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है। किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं— पहली— प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार और रोक की मांग। दूसरी— जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र समिति का गठन। तीसरी— दरभंगा में लंबे समय से लंबित सर्किल रेट का तत्काल संशोधन। चौथी— प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित मुआवजा मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारा। पांचवीं— भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ देने की मांग। अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है... सवाल है किसान के भविष्य का। अगर जिन परिवारों ने पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उनकी जमीन दोबारा किसी दूसरी परियोजना की जद में आती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास का संकट खड़ा हो सकता है। अब देखना होगा— क्या सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का रास्ता निकालेगी? क्या मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन होगा? क्या प्रस्तावित इनलाइनमेंट पर फिर से विचार किया जाएगा? या फिर... क्या दरभंगा की धरती पर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत होगी? फिलहाल किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है और प्रशासन के सामने चुनौती भी बड़ी है। इस पूरे मामले पर हमारी नजर बनी हुई है।
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    दरभंगा में किसानों की जमीन पर फिर संकट! अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का अल्टीमेटम।
बिहार में एक बार फिर किसानों की जमीन का मुद्दा गरमा गया है...
दरभंगा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
जिस जमीन पर किसान पीढ़ियों से खेती कर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं, क्या विकास परियोजना के नाम पर अब वही जमीन उनसे छीनी जाएगी?
दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के मनोरा, पोखरशाम, बलभद्रपुर और इंदिरा कॉलोनी इलाके में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के बीच बेचैनी बढ़ गई है।
किसानों और उनके प्रतिनिधियों ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दरभंगा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता रिटायर्ड कर्नल पी.के. चौधरी और किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे को लेकर किसानों की आपत्तियों पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अगर बाजार में जमीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, तो मुआवजे का आकलन पुराने सर्किल रेट के आधार पर क्यों?
किसानों का दावा है कि दरभंगा में सर्किल रेट लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ है और इसी वजह से उन्हें मिलने वाला मुआवजा बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम पड़ रहा है।
मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है।
किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना के इनलाइनमेंट यानी प्रस्तावित मार्ग में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि पहले प्रस्तावित नक्शे में ऐसा मार्ग था, जिससे किसानों की जमीन का नुकसान कम हो सकता था।
लेकिन बाद में इनलाइनमेंट में बदलाव किया गया और अब कई किसानों की जमीन इसकी चपेट में आने की आशंका है।
आखिर रूट में बदलाव क्यों किया गया?
किसानों को इसकी जानकारी कब और कैसे दी गई?
और क्या प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर पर्याप्त सुनवाई हुई?
किसानों का कहना है कि पिछली भारत माला परियोजना के दौरान भी मुआवजे और अधिग्रहण को लेकर कई आपत्तियां उठाई गई थीं।
किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक, कई मामले पिछले करीब ढाई साल से प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित हैं।
आरोप है कि सुनवाई के नाम पर किसानों को लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।
किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया है।
उनका कहना है कि जब दोनार से बेनीपुर की ओर 4-लेन सड़क और एम्स के आसपास भी सड़क निर्माण की योजनाएं चल रही हैं, तो महज करीब 2.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए नए निर्माण की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है?
क्या मौजूदा सड़क व्यवस्था को बेहतर बनाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता?
या फिर किसानों की जमीन अधिग्रहण ही एकमात्र विकल्प है?
ये सवाल अब प्रशासन और सरकार के सामने हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि किसान प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—
पहली— प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार और रोक की मांग।
दूसरी— जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन करने के लिए स्वतंत्र समिति का गठन।
तीसरी— दरभंगा में लंबे समय से लंबित सर्किल रेट का तत्काल संशोधन।
चौथी— प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर लंबित मुआवजा मामलों की जल्द सुनवाई और निपटारा।
पांचवीं— भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के प्रावधानों के तहत पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का लाभ देने की मांग।
अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है...
सवाल है किसान के भविष्य का।
अगर जिन परिवारों ने पहले ही भारतमाला परियोजना के लिए अपनी जमीन दी है, उनकी जमीन दोबारा किसी दूसरी परियोजना की जद में आती है, तो उनके सामने रोजी-रोटी और पुनर्वास का संकट खड़ा हो सकता है।
अब देखना होगा—
क्या सरकार किसानों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए समाधान का रास्ता निकालेगी?
क्या मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन होगा?
क्या प्रस्तावित इनलाइनमेंट पर फिर से विचार किया जाएगा?
या फिर...
क्या दरभंगा की धरती पर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत होगी?
फिलहाल किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है और प्रशासन के सामने चुनौती भी बड़ी है।
इस पूरे मामले पर हमारी नजर बनी हुई है।
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    4 hrs ago
  • पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्च की चिंता छोड़िए और अपनाइए स्टाइलिश, किफायती और इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटर Aditi EV Showroom पर उपलब्ध है Zelio Electric Scooters का शानदार कलेक्शन , जिसमें मिलते हैं आकर्षक डिजाइन, आधुनिक फीचर्स और आरामदायक राइडिंग का बेहतरीन अनुभव।
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    पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्च की चिंता छोड़िए और अपनाइए स्टाइलिश, किफायती और इको-फ्रेंडली इलेक्ट्रिक स्कूटर Aditi EV Showroom पर उपलब्ध है Zelio Electric Scooters का शानदार कलेक्शन
, जिसमें मिलते हैं आकर्षक डिजाइन, आधुनिक फीचर्स और आरामदायक राइडिंग का बेहतरीन अनुभव।
    user_Madhubani Halchal
    Madhubani Halchal
    Local News Reporter मधुबनी, मधुबनी, बिहार•
    1 hr ago
  • पूर्व उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सरकार से मांग करते हुए कहा कि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को संज्ञान में लेकर ससमय चुनाव हो।
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    पूर्व उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सरकार से मांग करते हुए कहा कि पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को संज्ञान में लेकर ससमय चुनाव हो।
    user_Khabar halchal
    Khabar halchal
    Classified ads newspaper publisher मधुबनी, मधुबनी, बिहार•
    2 hrs ago
  • हाय दोस्तों! 👋 आज मैं स्कूल पढ़ाने के लिए गया था। वहाँ मुझे कक्षा 6, 7 और 8 के बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला। आज कुल 6 पीरियड हुए और हर पीरियड 40 मिनट का था। दोपहर 1:30 बजे स्कूल की छुट्टी हुई, इसके बाद मैं वापस अपने घर के लिए निकल गया। 😊 आज का दिन बहुत अच्छा रहा। धन्यवाद दोस्तों! ❤️🙏
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    हाय दोस्तों! 👋
आज मैं स्कूल पढ़ाने के लिए गया था। वहाँ मुझे कक्षा 6, 7 और 8 के बच्चों को पढ़ाने का मौका मिला। आज कुल 6 पीरियड हुए और हर पीरियड 40 मिनट का था।
दोपहर 1:30 बजे स्कूल की छुट्टी हुई, इसके बाद मैं वापस अपने घर के लिए निकल गया। 😊
आज का दिन बहुत अच्छा रहा।
धन्यवाद दोस्तों! ❤️🙏
    user_Mukesh Kumar
    Mukesh Kumar
    गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    23 hrs ago
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