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"तस्करों को 'माननीय' बनाने का खेल: हरीश, विवेकानंद और वरुण की चौकड़ी पर उठे गंभीर सवाल!" ​अजीत मिश्रा (खोजी) 'सिस्टम' के संरक्षण में 'स्मैक' का खेल? भाजपा की साख पर भारी पड़ते 'दागी' पार्षद! "तस्करों को 'माननीय' बनाने का खेल: हरीश, विवेकानंद और वरुण की चौकड़ी पर उठे गंभीर सवाल!" बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। ​बस्ती। राजनीति में जब निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर संदिग्ध छवि वाले लोगों को 'माननीय' बनाया जाने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि पार्टी का पतन निकट है। जनपद में हाल ही में हुए मनोनीत सभासदों की सूची ने न केवल भाजपा के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर किया है, बल्कि शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ​आभार का 'अजीब' गणित ​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक 'धन्यवाद' संदेश आज चर्चा का विषय बना हुआ है। एक मनोनीत सभासद द्वारा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह का आभार जताना, लेकिन स्थानीय विधायक अजय सिंह को पूरी तरह नजरअंदाज कर देना, किसी गहरी साजिश या गुटबाजी की ओर इशारा करता है। आखिर विधायक का आभार क्यों नहीं? क्या इसलिए क्योंकि विधायक जी ने एक 'दागी' और कथित 'तस्कर' के मनोनयन का विरोध किया था? ​कार्यकर्ता की हत्या, अपराधियों का सत्कार! ​ जो व्यक्ति कभी सामाजिक सम्मान के लायक नहीं था, उसे भाजपा के दिग्गज नेताओं ने रातों-रात 'इज्जतदार' बना दिया। ​सवाल यह है: क्या पार्टी के पास जमीन पर पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं का अकाल पड़ गया था? ​क्या अब 'गांजा और स्मैक तस्करों' के दम पर संगठन की वैतरणी पार की जाएगी? ​"जिस पुलिस ने कल तक इन अपराधियों को गलियों में खदेड़ा, आज सत्ता के दबाव में वही पुलिस इन्हें सैल्यूट ठोकने को मजबूर है। यह समाज और लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।" ​विकास या विनाश? ​नगर पंचायत बोर्ड की बैठकों में जब कथित तस्करों की मौजूदगी होगी, तो वहाँ विकास की नहीं, बल्कि अवैध धंधों के संरक्षण की रणनीति बनेगी। जनता चिल्लाती रहेगी, लेकिन सुनवाई सिर्फ उनकी होगी जो नशे के कारोबार में लिप्त हैं। नेताओं की यह 'अपराधी प्रेम' वाली नीति आगामी चुनावों में पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। ​सत्ता के गलियारों में सन्नाटा ​जनता पूछ रही है कि आखिर वरुण सिंह और संगठन के अन्य कर्णधारों की इन संदिग्धों के मनोनयन में क्या भूमिका है? क्या भाजपा के दामन पर पड़ रहे ये छींटे नेताओं को नजर नहीं आ रहे? अगर यही संरक्षण असली कार्यकर्ताओं को मिलता, तो शायद आज पार्टी की स्थिति कुछ और होती। अपराधियों का 'राज्याभिषेक' और नैतिकता का जनाजा बस्ती जनपद की राजनीति में यह काला अध्याय है कि जो कल तक पुलिस की फाइलों में 'दागी' थे, आज वे भगवा अंगवस्त्र पहनकर 'सिस्टम' चला रहे हैं। वरुण सिंह और विवेकानंद मिश्र जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आखिर किस मजबूरी में एक कथित तस्कर के लिए पैरवी कर रहे थे? क्या पार्टी का कैडर इतना खोखला हो चुका है कि उसे 'गांजा और स्मैक' बेचने वालों में भविष्य नजर आ रहा है? विधायक अजय सिंह की उपेक्षा या अपराधियों की चिढ़? सूत्रों की मानें तो स्थानीय विधायक अजय सिंह ने इस मनोनयन का कड़ा विरोध किया था। शायद यही कारण है कि 'उपकृत' हुए सभासद ने अपने आभार पत्र से विधायक का नाम गायब कर दिया। यह सीधे तौर पर संदेश है कि अब संगठन में 'सफेदपोश अपराधियों' का वर्चस्व है और वे उन नेताओं को अपना दुश्मन मानते हैं जो शुचिता की बात करते हैं। जनता की अदालत में 'गुटबाजी' का हिसाब पार्टी के भीतर मचे इस घमासान ने जनता के बीच भाजपा की छवि को धूलधूसरित कर दिया है। जब नगर पंचायत बोर्ड की बैठकों में विकास की जगह 'नशे की खेप' पर चर्चा होने की आशंका हो, तो आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगता है। नेताओं को यह गलतफहमी पालना भारी पड़ेगा कि जनता अंधी है; लोकसभा चुनाव के परिणामों ने जो संकेत दिए थे, लगता है बस्ती के इन 'बड़े भाई' और 'आकाओं' ने उससे कोई सबक नहीं सीखा। ​निष्कर्ष: यदि समय रहते 'गंदगी' साफ नहीं की गई, तो जनता का आक्रोश और कार्यकर्ताओं की बेबसी आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएगी। अब देखना यह है कि शीर्ष नेतृत्व इस 'नशे के कारोबार' और 'राजनीति के गठजोड़' पर क्या रुख अपनाता है।

on 21 March
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
on 21 March
5101da7a-c21e-4509-b753-1894a2b0653b

"तस्करों को 'माननीय' बनाने का खेल: हरीश, विवेकानंद और वरुण की चौकड़ी पर उठे गंभीर सवाल!" ​अजीत मिश्रा (खोजी) 'सिस्टम' के संरक्षण में 'स्मैक' का खेल? भाजपा की साख पर भारी पड़ते 'दागी' पार्षद! "तस्करों को 'माननीय' बनाने का खेल: हरीश, विवेकानंद और वरुण की चौकड़ी पर उठे गंभीर सवाल!" बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। ​बस्ती। राजनीति में जब निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर संदिग्ध छवि वाले लोगों को 'माननीय' बनाया जाने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि पार्टी का पतन निकट है। जनपद में हाल ही में हुए मनोनीत सभासदों की सूची ने न केवल भाजपा के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर किया है, बल्कि शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ​आभार का 'अजीब' गणित ​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक 'धन्यवाद' संदेश आज चर्चा का विषय बना हुआ है। एक मनोनीत सभासद द्वारा पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्र और वरुण सिंह का आभार जताना, लेकिन स्थानीय विधायक अजय सिंह को पूरी तरह नजरअंदाज कर देना, किसी गहरी साजिश या गुटबाजी की ओर इशारा करता है। आखिर विधायक का आभार क्यों नहीं? क्या इसलिए क्योंकि विधायक जी ने एक 'दागी' और कथित 'तस्कर' के मनोनयन का विरोध किया था? ​कार्यकर्ता की हत्या, अपराधियों का सत्कार! ​ जो व्यक्ति कभी सामाजिक सम्मान के लायक नहीं था, उसे भाजपा के दिग्गज नेताओं ने रातों-रात 'इज्जतदार' बना दिया। ​सवाल यह है: क्या पार्टी के पास जमीन पर पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं का अकाल पड़ गया था? ​क्या अब 'गांजा और स्मैक तस्करों' के दम पर संगठन की वैतरणी पार की जाएगी? ​"जिस पुलिस ने कल तक इन अपराधियों को गलियों में खदेड़ा, आज सत्ता के दबाव में वही पुलिस इन्हें सैल्यूट ठोकने को मजबूर है। यह समाज और लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।" ​विकास या विनाश? ​नगर पंचायत बोर्ड की बैठकों में जब कथित तस्करों की मौजूदगी होगी, तो वहाँ विकास की नहीं, बल्कि अवैध धंधों के संरक्षण की रणनीति बनेगी। जनता चिल्लाती रहेगी, लेकिन सुनवाई सिर्फ उनकी होगी जो नशे के कारोबार में लिप्त हैं। नेताओं की यह 'अपराधी प्रेम' वाली नीति आगामी चुनावों में पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। ​सत्ता के गलियारों में सन्नाटा ​जनता पूछ रही है कि आखिर वरुण सिंह और संगठन के अन्य कर्णधारों की इन संदिग्धों के मनोनयन में क्या भूमिका है? क्या भाजपा के दामन पर पड़ रहे ये छींटे नेताओं को नजर नहीं आ रहे? अगर यही संरक्षण असली कार्यकर्ताओं को मिलता, तो शायद आज पार्टी की स्थिति कुछ और होती। अपराधियों का 'राज्याभिषेक' और नैतिकता का जनाजा बस्ती जनपद की राजनीति में यह काला अध्याय है कि जो कल तक पुलिस की फाइलों में 'दागी' थे, आज वे भगवा अंगवस्त्र पहनकर 'सिस्टम' चला रहे हैं। वरुण सिंह और विवेकानंद मिश्र जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आखिर किस मजबूरी में एक कथित तस्कर के लिए पैरवी कर रहे थे? क्या पार्टी का कैडर इतना खोखला हो चुका है कि उसे 'गांजा और स्मैक' बेचने वालों में भविष्य नजर आ रहा है? विधायक अजय सिंह की उपेक्षा या अपराधियों की चिढ़? सूत्रों की मानें तो स्थानीय विधायक अजय सिंह ने इस मनोनयन का कड़ा विरोध किया था। शायद यही कारण है कि 'उपकृत' हुए सभासद ने अपने आभार पत्र से विधायक का नाम गायब कर दिया। यह सीधे तौर पर संदेश है कि अब संगठन में 'सफेदपोश अपराधियों' का वर्चस्व है और वे उन नेताओं को अपना दुश्मन मानते हैं जो शुचिता की बात करते हैं। जनता की अदालत में 'गुटबाजी' का हिसाब पार्टी के भीतर मचे इस घमासान ने जनता के बीच भाजपा की छवि को धूलधूसरित कर दिया है। जब नगर पंचायत बोर्ड की बैठकों में विकास की जगह 'नशे की खेप' पर चर्चा होने की आशंका हो, तो आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगता है। नेताओं को यह गलतफहमी पालना भारी पड़ेगा कि जनता अंधी है; लोकसभा चुनाव के परिणामों ने जो संकेत दिए थे, लगता है बस्ती के इन 'बड़े भाई' और 'आकाओं' ने उससे कोई सबक नहीं सीखा। ​निष्कर्ष: यदि समय रहते 'गंदगी' साफ नहीं की गई, तो जनता का आक्रोश और कार्यकर्ताओं की बेबसी आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाएगी। अब देखना यह है कि शीर्ष नेतृत्व इस 'नशे के कारोबार' और 'राजनीति के गठजोड़' पर क्या रुख अपनाता है।

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  • संतकबीरनगर । जनपद में चलाए जा रहे “क्रैक साइबर क्राइम अभियान” के तहत साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर ठगी के शिकार एक पीड़ित के खाते से निकाली गई 5,31,000 रुपये की पूरी धनराशि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से वापस करा दी गई। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत साइबर क्राइम थाना टीम ने प्रभावी कार्यवाही करते हुए यह सफलता हासिल की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वादी राकेश मौर्या की पत्नी शशिकला मौर्या, निवासी प्लॉट नंबर ई-78, इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद, के नाम से पंजीकृत फर्म “सम्राट इंडस्ट्रीज” के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 5,31,000 रुपये अज्ञात खाते में ट्रांसफर हो गए थे। मामले की सूचना मिलते ही साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आवश्यक तकनीकी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। पुलिस की अपील: जनपद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या संदेश पर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन साझा न करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश चौबे, उपनिरीक्षक रमेश यादव, हेड कांस्टेबल मोहम्मद हिन्दे आजाद, कांस्टेबल रामप्रवेश मद्देशिया एवं कांस्टेबल धीरेन्द्र कुमार प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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    संतकबीरनगर ।
जनपद में चलाए जा रहे “क्रैक साइबर क्राइम अभियान” के तहत साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर ठगी के शिकार एक पीड़ित के खाते से निकाली गई 5,31,000 रुपये की पूरी धनराशि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से वापस करा दी गई।
पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत साइबर क्राइम थाना टीम ने प्रभावी कार्यवाही करते हुए यह सफलता हासिल की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वादी राकेश मौर्या की पत्नी शशिकला मौर्या, निवासी प्लॉट नंबर ई-78, इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद, के नाम से पंजीकृत फर्म “सम्राट इंडस्ट्रीज” के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 5,31,000 रुपये अज्ञात खाते में ट्रांसफर हो गए थे। मामले की सूचना मिलते ही साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आवश्यक तकनीकी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई।
पुलिस की अपील:
जनपद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या संदेश पर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन साझा न करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश चौबे, उपनिरीक्षक रमेश यादव, हेड कांस्टेबल मोहम्मद हिन्दे आजाद, कांस्टेबल रामप्रवेश मद्देशिया एवं कांस्टेबल धीरेन्द्र कुमार प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
    user_LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • बसखारी थाना क्षेत्र में बाइक पर सवार दो लुटेरों ने एक ज्वेलर्स को अपना निशाना बनाया और कनपटी पर पिस्टल लगाते हुए 10 लाख से अधिक का जेवर लूट लिया। सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच करते हुए नजर आ रही है।
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    बसखारी थाना क्षेत्र में बाइक पर सवार दो लुटेरों ने एक ज्वेलर्स को अपना निशाना बनाया और कनपटी पर पिस्टल लगाते हुए 10 लाख से अधिक का जेवर लूट लिया। सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच करते हुए नजर आ रही है।
    user_ABN News Plus
    ABN News Plus
    पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
    7 hrs ago
  • अम्बेडकरनगर में आग लगने से करीब 6 बीघा फसल जलकर राख, आधा दर्जन किसान प्रभावित, भारी नुकसान, तेज हवा के चलते तेजी से फैली आग, ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू, राजस्व टीम मौके पर पहुंचकर कर रही नुकसान का आकलन, अकबरपुर तहसील क्षेत्र के महाये गांव में गेहूं के खेत में भीषण आग
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    अम्बेडकरनगर में आग लगने से करीब 6 बीघा फसल जलकर राख, आधा दर्जन किसान प्रभावित, भारी नुकसान, तेज हवा के चलते तेजी से फैली आग, ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू, राजस्व टीम मौके पर पहुंचकर कर रही नुकसान का आकलन, अकबरपुर तहसील क्षेत्र के महाये गांव में गेहूं के खेत में भीषण आग
    user_APDP NEWS
    APDP NEWS
    पत्रकार Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    7 hrs ago
  • Post by Dushyant Kumar Journalist
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    Post by Dushyant Kumar Journalist
    user_Dushyant Kumar Journalist
    Dushyant Kumar Journalist
    City Star अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर
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    Post by रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर
    user_रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर
    रिपोर्टरआलापुर अंबेडकरनगर
    Voice of people अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • Post by रवि चन्द्र पत्रकार
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    Post by रवि चन्द्र पत्रकार
    user_रवि चन्द्र पत्रकार
    रवि चन्द्र पत्रकार
    Nurse सहजनवा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश सील टूटी, कानून हारा! भव्या मैरिज लॉन का अवैध संचालन जिला प्रशासन के इकबाल को खुली चुनौती। तेजतर्रार डीएम की साख को बट्टा लगाता भव्या ग्रुप, बीडीए की फाइलों में दफन हुई अवैध निर्माण की शिकायतें। 'भव्य' अवैध निर्माण: नक्शा न रजिस्ट्रेशन, फिर भी अफसरों की नाक के नीचे चल रहा करोड़ों का खेल! बस्ती विकास प्राधिकरण की 'मेहरबानी' या भ्रष्टाचार का खेल? 'भव्या ग्रुप' के अवैध साम्राज्य पर कब गरजेगा बाबा का बुलडोजर! बस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है—"अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।" लेकिन बस्ती जनपद में 'बस्ती विकास प्राधिकरण' (BDA) और जिला प्रशासन की नाक के नीचे इस आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या रसूख और खातिरदारी के आगे सरकारी नियम बौने हो चुके हैं? मामला 'भव्या ग्रुप' से जुड़ा है, जिसके अवैध प्रतिष्ठान जिले की व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं। सीज खुला या कानून का मजाक उड़ा? कुछ समय पूर्व एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नक्शा पास कराए संचालित हो रहे भव्या मैरिज लॉन को सीज किया था। लेकिन, चर्चा आम है कि संचालक ने कानून को ठेंगे पर रखकर अवैध तरीके से सीज हटा दिया और संचालन फिर शुरू कर दिया। 🎯बड़ा सवाल: क्या प्रशासन इतना लाचार है कि उसकी लगाई गई सील कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति अपनी मर्जी से तोड़ दे? 🎯प्रशासनिक मौन: सीज हटने के बाद भी आखिर एडीएम और एसडीएम सदर ने दोबारा कड़ा रुख क्यों नहीं अपनाया? क्या यह मौन किसी 'बड़ी सेटिंग' की तरफ इशारा कर रहा है? नक्शा न रजिस्ट्रेशन: फिर भी 'ग्रैंड' है भव्या पैलेस भव्या ग्रुप के होटल ग्रैंड भव्या पैलेस और भव्या मेडिकल सेंटर जैसे बड़े प्रतिष्ठान बिना किसी स्वीकृत मानचित्र (नक्शा) और बिना अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहे हैं। 🎯बीडीए की भूमिका: जो प्राधिकरण आम आदमी के एक कमरे के निर्माण पर नोटिस थमा देता है, उसे शहर के बीचों-बीच खड़ी ये बहुमंजिला अवैध इमारतें दिखाई क्यों नहीं दे रहीं? 🎯संरक्षण का आरोप: सूत्रों की मानें तो होटल प्रबंधन सत्ताधारी दल के नेताओं, रसूखदार पत्रकारों और प्रशासनिक अफसरों को मुफ्त 'भोजन और आवास' की शाही व्यवस्था उपलब्ध करा रहा है। क्या इसी खातिरदारी के बदले में बीडीए और जिला प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद ली हैं? डीएम की छवि को धूमिल करता 'भव्या ग्रुप' का अहंकार जिले में तेजतर्रार छवि वाली डीएम कृतिका ज्योत्सना एक ओर जहां विकास और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर तन कर खड़ी भव्या ग्रुप की ये अवैध बिल्डिंग्स सीधे तौर पर जिला प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही हैं। कई सालों से अनाधिकृत रूप से हो रहे इस संचालन पर शिकायतों का अंबार है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलों को इधर-बधर घुमाया जा रहा है। जनता पूछ रही है तीखे सवाल: जब आम जनता के अवैध निर्माण पर 'बाबा का बुलडोजर' गरजता है, तो भव्या ग्रुप के लिए तेल की कमी क्यों हो जाती है? ✍️क्या बीडीए के अधिकारी केवल कागजी शेर बनकर रह गए हैं, जो रसूखदारों के सामने नतमस्तक हैं? ✍️बिना फायर एनओसी और बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे मेडिकल सेंटर में अगर कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? बस्ती की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है। क्या शासन-प्रशासन इस 'भव्या साम्राज्य' पर कानूनी शिकंजा कसेगा या फिर भ्रष्टाचार की इस 'भव्य' दावत में जिम्मेदार अपनी हिस्सेदारी निभाते रहेंगे? देखना शेष है कि क्या 'बस्ती विकास प्राधिकरण' कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर रसूख की चादर ओढ़कर सोता रहता है।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
सील टूटी, कानून हारा! भव्या मैरिज लॉन का अवैध संचालन जिला प्रशासन के इकबाल को खुली चुनौती।
तेजतर्रार डीएम की साख को बट्टा लगाता भव्या ग्रुप, बीडीए की फाइलों में दफन हुई अवैध निर्माण की शिकायतें।
'भव्य' अवैध निर्माण: नक्शा न रजिस्ट्रेशन, फिर भी अफसरों की नाक के नीचे चल रहा करोड़ों का खेल!
बस्ती विकास प्राधिकरण की 'मेहरबानी' या भ्रष्टाचार का खेल? 'भव्या ग्रुप' के अवैध साम्राज्य पर कब गरजेगा बाबा का बुलडोजर!
बस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है—"अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।" लेकिन बस्ती जनपद में 'बस्ती विकास प्राधिकरण' (BDA) और जिला प्रशासन की नाक के नीचे इस आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या रसूख और खातिरदारी के आगे सरकारी नियम बौने हो चुके हैं? मामला 'भव्या ग्रुप' से जुड़ा है, जिसके अवैध प्रतिष्ठान जिले की व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं।
सीज खुला या कानून का मजाक उड़ा?
कुछ समय पूर्व एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने बिना रजिस्ट्रेशन और बिना नक्शा पास कराए संचालित हो रहे भव्या मैरिज लॉन को सीज किया था। लेकिन, चर्चा आम है कि संचालक ने कानून को ठेंगे पर रखकर अवैध तरीके से सीज हटा दिया और संचालन फिर शुरू कर दिया।
🎯बड़ा सवाल: क्या प्रशासन इतना लाचार है कि उसकी लगाई गई सील कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति अपनी मर्जी से तोड़ दे?
🎯प्रशासनिक मौन: सीज हटने के बाद भी आखिर एडीएम और एसडीएम सदर ने दोबारा कड़ा रुख क्यों नहीं अपनाया? क्या यह मौन किसी 'बड़ी सेटिंग' की तरफ इशारा कर रहा है?
नक्शा न रजिस्ट्रेशन: फिर भी 'ग्रैंड' है भव्या पैलेस
भव्या ग्रुप के होटल ग्रैंड भव्या पैलेस और भव्या मेडिकल सेंटर जैसे बड़े प्रतिष्ठान बिना किसी स्वीकृत मानचित्र (नक्शा) और बिना अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से चल रहे हैं।
🎯बीडीए की भूमिका: जो प्राधिकरण आम आदमी के एक कमरे के निर्माण पर नोटिस थमा देता है, उसे शहर के बीचों-बीच खड़ी ये बहुमंजिला अवैध इमारतें दिखाई क्यों नहीं दे रहीं?
🎯संरक्षण का आरोप: सूत्रों की मानें तो होटल प्रबंधन सत्ताधारी दल के नेताओं, रसूखदार पत्रकारों और प्रशासनिक अफसरों को मुफ्त 'भोजन और आवास' की शाही व्यवस्था उपलब्ध करा रहा है। क्या इसी खातिरदारी के बदले में बीडीए और जिला प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद ली हैं?
डीएम की छवि को धूमिल करता 'भव्या ग्रुप' का अहंकार
जिले में तेजतर्रार छवि वाली डीएम कृतिका ज्योत्सना एक ओर जहां विकास और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर तन कर खड़ी भव्या ग्रुप की ये अवैध बिल्डिंग्स सीधे तौर पर जिला प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही हैं। कई सालों से अनाधिकृत रूप से हो रहे इस संचालन पर शिकायतों का अंबार है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलों को इधर-बधर घुमाया जा रहा है।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल:
जब आम जनता के अवैध निर्माण पर 'बाबा का बुलडोजर' गरजता है, तो भव्या ग्रुप के लिए तेल की कमी क्यों हो जाती है?
✍️क्या बीडीए के अधिकारी केवल कागजी शेर बनकर रह गए हैं, जो रसूखदारों के सामने नतमस्तक हैं?
✍️बिना फायर एनओसी और बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे मेडिकल सेंटर में अगर कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
बस्ती की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहती है। क्या शासन-प्रशासन इस 'भव्या साम्राज्य' पर कानूनी शिकंजा कसेगा या फिर भ्रष्टाचार की इस 'भव्य' दावत में जिम्मेदार अपनी हिस्सेदारी निभाते रहेंगे?
देखना शेष है कि क्या 'बस्ती विकास प्राधिकरण' कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर रसूख की चादर ओढ़कर सोता रहता है।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • इस्राइल में फंसे अम्बेडकरनगर के युवक की हुई वतन वापसी, डीएम अम्बेडकरनगर की पहल पर हुई वापसी, पत्नी ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला का जताया आभार
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    इस्राइल में फंसे अम्बेडकरनगर के युवक की हुई वतन वापसी, डीएम अम्बेडकरनगर की पहल पर हुई वापसी, पत्नी ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला का जताया आभार
    user_APDP NEWS
    APDP NEWS
    पत्रकार Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    8 hrs ago
  • Post by Dushyant Kumar Journalist
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    Post by Dushyant Kumar Journalist
    user_Dushyant Kumar Journalist
    Dushyant Kumar Journalist
    City Star अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
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