logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

आशीष कुमार वैद्य लातेहार/झारखंड एंकर - प्रकृति और विकास की जंग में एक बार फिर बेजुबान की जान चली गई है। झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल रेल पहियों की रफ्तार रोकी, बल्कि हर इंसान की रूह को झकझोर कर रख दिया है। महुवामिलान और निंद्रा रेलवे स्टेशन के बीच पोल संख्या 172... यह वह जगह है जहाँ बीती रात मौत ने अपना तांडव मचाया। एक मासूम हाथी का बच्चा, जो अपने झुंड के साथ पटरी पार कर रहा था, लोहे की भारी-भरकम मालगाड़ी की चपेट में आ गया। आज इस बुलेटिन में हम केवल खबर नहीं दिखाएंगे, बल्कि उस दर्द को महसूस कराएंगे जो ग्रामीणों की आँखों में है और उन सवालों को उठाएंगे जो वन विभाग की चुप्पी पर खड़े होते हैं। अंधेरी रात थी, हाथियों का एक झुंड अपनी मस्ती में महुवामिलान के जंगलों से गुजर रहा था। उन्हें क्या पता था कि टोरी की तरफ से काल बनकर एक मालगाड़ी आ रही है। पोल संख्या 172 के पास जैसे ही झुंड पटरी पर आया, मालगाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि हाथी का बच्चा इंजन में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि ट्रेन उसे करीब 150 मीटर तक घसीटते हुए ले गई। लोहे के पहियों और मासूम शरीर के बीच संघर्ष की वो आवाजें चीख बनकर गूंज उठीं। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचे SI ओम प्रकाश यादव ने स्थिति की गंभीरता को बयां किया। हमें सूचना मिली कि डाउन लाइन पर हाथी टकरा गया है। जब मैं पहुँचा तो मंजर डरावना था। एक बच्चा मृत पड़ा था और उसकी माँ वहीं खड़ी होकर मानों उसे जगाने की कोशिश कर रही थी। वन विभाग को बुलाया गया, लेकिन हाथियों का झुंड रात भर वहीं डटा रहा। जहाँ प्रशासन कागजों में उलझा था, वहीं ग्रामीणों के लिए यह केवल एक जानवर की मौत नहीं थी। उनके लिए उनका 'भगवान' चला गया था। स्थानीय लोग मृत हाथी के बच्चे के पास अगरबत्ती जला रहे हैं, उसे पानी पिला रहे हैं और अंतिम विदाई दे रहे हैं। लेकिन इस श्रद्धा के पीछे एक गहरा गुस्सा भी है। यह वन विभाग की सरासर लापरवाही है। उन्हें पता है कि यह एलीफेंट कॉरिडोर है, फिर भी कोई निगरानी नहीं थी, यह पहली घटना नही है इससे पहले भी घटना हुई है और हाथियों का जान गई है। हम इन्हें पूजते हैं और आज इन्हें टुकड़ों में देख रहे हैं। इस हादसे ने झारखंड के रेल रूट को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। जब तक गजराज का झुंड पटरी से नहीं हटा, तब तक रेल प्रशासन बेबस रहा। पलामू एक्सप्रेस, देश की शान वंदे भारत, गरीब रथ और टाटा-जम्मू तवी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों खड़ी रहीं। यात्रियों की परेशानी बढ़ी, तो कई ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा। गनीमत यह रही कि टक्कर मालगाड़ी से हुई, अगर कोई एक्सप्रेस ट्रेन होती तो आज हम किसी बड़े मानवीय हादसे की खबर पढ़ रहे होते। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं: 01. जब विभाग को हाथियों की आवाजाही का पता था, तो 'स्पीड रेस्ट्रिक्शन' क्यों नहीं था? झारखंड वन विभाग की वेबसाइट पर वन्यजीव सुरक्षा के दावे क्या केवल कागजी हैं? 02. क्या रेलवे और वन विभाग के बीच तालमेल की कमी बेजुबानों की जान लेती रहेगी? 03. क्या 'विकास' की पटरियां 'प्रकृति' के शवों पर बिछाई जाएंगी? आज लातेहार के ग्रामीणों की आँखें नम हैं और रेल की पटरियां खून से सनी। यह हादसा एक चेतावनी है। अगर हमने समय रहते एलीफेंट अंडरपास और रडार सिस्टम जैसे तकनीकी समाधानों पर काम नहीं किया, तो वो दिन दूर नहीं जब ये जंगल खामोश हो जाएंगे। फिलहाल वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन क्या वो मां, जो रात भर पटरी पर खड़ी रही, कभी सिस्टम को माफ कर पाएगी?

12 hrs ago
user_Ashish Kumar Baidya
Ashish Kumar Baidya
Chandwa, Latehar•
12 hrs ago

आशीष कुमार वैद्य लातेहार/झारखंड एंकर - प्रकृति और विकास की जंग में एक बार फिर बेजुबान की जान चली गई है। झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल रेल पहियों की रफ्तार रोकी, बल्कि हर इंसान की रूह को झकझोर कर रख दिया है। महुवामिलान और निंद्रा रेलवे स्टेशन के बीच पोल संख्या 172... यह वह जगह है जहाँ बीती रात मौत ने अपना तांडव मचाया। एक मासूम हाथी का बच्चा, जो अपने झुंड के साथ पटरी पार कर रहा था, लोहे की भारी-भरकम मालगाड़ी की चपेट में आ गया। आज इस बुलेटिन में हम केवल खबर नहीं दिखाएंगे, बल्कि उस दर्द को महसूस कराएंगे जो ग्रामीणों की आँखों में है और उन सवालों को उठाएंगे जो वन विभाग की चुप्पी पर खड़े होते हैं। अंधेरी रात थी, हाथियों का एक झुंड अपनी मस्ती में महुवामिलान के जंगलों से गुजर रहा था। उन्हें क्या पता था कि टोरी की तरफ से काल बनकर एक मालगाड़ी आ रही है। पोल संख्या 172 के पास जैसे ही झुंड पटरी पर आया, मालगाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि हाथी का बच्चा इंजन में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि ट्रेन उसे करीब 150 मीटर तक घसीटते हुए ले गई। लोहे के पहियों और मासूम शरीर के बीच संघर्ष की वो आवाजें चीख बनकर गूंज उठीं। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचे SI ओम प्रकाश यादव ने स्थिति की गंभीरता को बयां किया। हमें सूचना मिली कि डाउन लाइन पर हाथी टकरा गया है। जब मैं पहुँचा तो मंजर डरावना था। एक बच्चा मृत पड़ा था और उसकी माँ वहीं खड़ी होकर मानों उसे जगाने की कोशिश कर रही थी। वन विभाग को बुलाया गया, लेकिन हाथियों का झुंड रात भर वहीं डटा रहा। जहाँ प्रशासन कागजों में उलझा था, वहीं ग्रामीणों के लिए यह केवल एक जानवर की मौत नहीं थी। उनके लिए उनका 'भगवान' चला गया था। स्थानीय लोग मृत हाथी के बच्चे के पास अगरबत्ती जला रहे हैं, उसे पानी पिला रहे हैं और अंतिम विदाई दे रहे हैं। लेकिन इस श्रद्धा के पीछे एक गहरा गुस्सा भी है। यह वन विभाग की सरासर लापरवाही है। उन्हें पता है कि यह एलीफेंट कॉरिडोर है, फिर भी कोई निगरानी नहीं थी, यह पहली घटना नही है इससे पहले भी घटना हुई है और हाथियों का जान गई है। हम इन्हें पूजते हैं और आज इन्हें टुकड़ों में देख रहे हैं। इस हादसे ने झारखंड के रेल रूट को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। जब तक गजराज का झुंड पटरी से नहीं हटा, तब तक रेल प्रशासन बेबस रहा। पलामू एक्सप्रेस, देश की शान वंदे भारत, गरीब रथ और टाटा-जम्मू तवी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों खड़ी रहीं। यात्रियों की परेशानी बढ़ी, तो कई ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा। गनीमत यह रही कि टक्कर मालगाड़ी से हुई, अगर कोई एक्सप्रेस ट्रेन होती तो आज हम किसी बड़े मानवीय हादसे की खबर पढ़ रहे होते। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं: 01. जब विभाग को हाथियों की आवाजाही का पता था, तो 'स्पीड रेस्ट्रिक्शन' क्यों नहीं था? झारखंड वन विभाग की वेबसाइट पर वन्यजीव सुरक्षा के दावे क्या केवल कागजी हैं? 02. क्या रेलवे और वन विभाग के बीच तालमेल की कमी बेजुबानों की जान लेती रहेगी? 03. क्या 'विकास' की पटरियां 'प्रकृति' के शवों पर बिछाई जाएंगी? आज लातेहार के ग्रामीणों की आँखें नम हैं और रेल की पटरियां खून से सनी। यह हादसा एक चेतावनी है। अगर हमने समय रहते एलीफेंट अंडरपास और रडार सिस्टम जैसे तकनीकी समाधानों पर काम नहीं किया, तो वो दिन दूर नहीं जब ये जंगल खामोश हो जाएंगे। फिलहाल वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन क्या वो मां, जो रात भर पटरी पर खड़ी रही, कभी सिस्टम को माफ कर पाएगी?

More news from Latehar and nearby areas
  • आशीष कुमार वैद्य लातेहार/झारखंड एंकर - प्रकृति और विकास की जंग में एक बार फिर बेजुबान की जान चली गई है। झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल रेल पहियों की रफ्तार रोकी, बल्कि हर इंसान की रूह को झकझोर कर रख दिया है। महुवामिलान और निंद्रा रेलवे स्टेशन के बीच पोल संख्या 172... यह वह जगह है जहाँ बीती रात मौत ने अपना तांडव मचाया। एक मासूम हाथी का बच्चा, जो अपने झुंड के साथ पटरी पार कर रहा था, लोहे की भारी-भरकम मालगाड़ी की चपेट में आ गया। आज इस बुलेटिन में हम केवल खबर नहीं दिखाएंगे, बल्कि उस दर्द को महसूस कराएंगे जो ग्रामीणों की आँखों में है और उन सवालों को उठाएंगे जो वन विभाग की चुप्पी पर खड़े होते हैं। अंधेरी रात थी, हाथियों का एक झुंड अपनी मस्ती में महुवामिलान के जंगलों से गुजर रहा था। उन्हें क्या पता था कि टोरी की तरफ से काल बनकर एक मालगाड़ी आ रही है। पोल संख्या 172 के पास जैसे ही झुंड पटरी पर आया, मालगाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि हाथी का बच्चा इंजन में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि ट्रेन उसे करीब 150 मीटर तक घसीटते हुए ले गई। लोहे के पहियों और मासूम शरीर के बीच संघर्ष की वो आवाजें चीख बनकर गूंज उठीं। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचे SI ओम प्रकाश यादव ने स्थिति की गंभीरता को बयां किया। हमें सूचना मिली कि डाउन लाइन पर हाथी टकरा गया है। जब मैं पहुँचा तो मंजर डरावना था। एक बच्चा मृत पड़ा था और उसकी माँ वहीं खड़ी होकर मानों उसे जगाने की कोशिश कर रही थी। वन विभाग को बुलाया गया, लेकिन हाथियों का झुंड रात भर वहीं डटा रहा। जहाँ प्रशासन कागजों में उलझा था, वहीं ग्रामीणों के लिए यह केवल एक जानवर की मौत नहीं थी। उनके लिए उनका 'भगवान' चला गया था। स्थानीय लोग मृत हाथी के बच्चे के पास अगरबत्ती जला रहे हैं, उसे पानी पिला रहे हैं और अंतिम विदाई दे रहे हैं। लेकिन इस श्रद्धा के पीछे एक गहरा गुस्सा भी है। यह वन विभाग की सरासर लापरवाही है। उन्हें पता है कि यह एलीफेंट कॉरिडोर है, फिर भी कोई निगरानी नहीं थी, यह पहली घटना नही है इससे पहले भी घटना हुई है और हाथियों का जान गई है। हम इन्हें पूजते हैं और आज इन्हें टुकड़ों में देख रहे हैं। इस हादसे ने झारखंड के रेल रूट को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। जब तक गजराज का झुंड पटरी से नहीं हटा, तब तक रेल प्रशासन बेबस रहा। पलामू एक्सप्रेस, देश की शान वंदे भारत, गरीब रथ और टाटा-जम्मू तवी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों खड़ी रहीं। यात्रियों की परेशानी बढ़ी, तो कई ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा। गनीमत यह रही कि टक्कर मालगाड़ी से हुई, अगर कोई एक्सप्रेस ट्रेन होती तो आज हम किसी बड़े मानवीय हादसे की खबर पढ़ रहे होते। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं: 01. जब विभाग को हाथियों की आवाजाही का पता था, तो 'स्पीड रेस्ट्रिक्शन' क्यों नहीं था? झारखंड वन विभाग की वेबसाइट पर वन्यजीव सुरक्षा के दावे क्या केवल कागजी हैं? 02. क्या रेलवे और वन विभाग के बीच तालमेल की कमी बेजुबानों की जान लेती रहेगी? 03. क्या 'विकास' की पटरियां 'प्रकृति' के शवों पर बिछाई जाएंगी? आज लातेहार के ग्रामीणों की आँखें नम हैं और रेल की पटरियां खून से सनी। यह हादसा एक चेतावनी है। अगर हमने समय रहते एलीफेंट अंडरपास और रडार सिस्टम जैसे तकनीकी समाधानों पर काम नहीं किया, तो वो दिन दूर नहीं जब ये जंगल खामोश हो जाएंगे। फिलहाल वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन क्या वो मां, जो रात भर पटरी पर खड़ी रही, कभी सिस्टम को माफ कर पाएगी?
    1
    आशीष कुमार वैद्य 
लातेहार/झारखंड 
एंकर - प्रकृति और विकास की जंग में एक बार फिर बेजुबान की जान चली गई है। झारखंड के लातेहार जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल रेल पहियों की रफ्तार रोकी, बल्कि हर इंसान की रूह को झकझोर कर रख दिया है। महुवामिलान और निंद्रा रेलवे स्टेशन के बीच पोल संख्या 172... यह वह जगह है जहाँ बीती रात मौत ने अपना तांडव मचाया। एक मासूम हाथी का बच्चा, जो अपने झुंड के साथ पटरी पार कर रहा था, लोहे की भारी-भरकम मालगाड़ी की चपेट में आ गया। आज इस बुलेटिन में हम केवल खबर नहीं दिखाएंगे, बल्कि उस दर्द को महसूस कराएंगे जो ग्रामीणों की आँखों में है और उन सवालों को उठाएंगे जो वन विभाग की चुप्पी पर खड़े होते हैं।   अंधेरी रात थी, हाथियों का एक झुंड अपनी मस्ती में महुवामिलान के जंगलों से गुजर रहा था। उन्हें क्या पता था कि टोरी की तरफ से काल बनकर एक मालगाड़ी आ रही है। पोल संख्या 172 के पास जैसे ही झुंड पटरी पर आया, मालगाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि हाथी का बच्चा इंजन में फंस गया। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि ट्रेन उसे करीब 150 मीटर तक घसीटते हुए ले गई। लोहे के पहियों और मासूम शरीर के बीच संघर्ष की वो आवाजें चीख बनकर गूंज उठीं। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचे SI ओम प्रकाश यादव ने स्थिति की गंभीरता को बयां किया। हमें सूचना मिली कि डाउन लाइन पर हाथी टकरा गया है। जब मैं पहुँचा तो मंजर डरावना था। एक बच्चा मृत पड़ा था और उसकी माँ वहीं खड़ी होकर मानों उसे जगाने की कोशिश कर रही थी। वन विभाग को बुलाया गया, लेकिन हाथियों का झुंड रात भर वहीं डटा रहा।
जहाँ प्रशासन कागजों में उलझा था, वहीं ग्रामीणों के लिए यह केवल एक जानवर की मौत नहीं थी। उनके लिए उनका 'भगवान' चला गया था। स्थानीय लोग मृत हाथी के बच्चे के पास अगरबत्ती जला रहे हैं, उसे पानी पिला रहे हैं और अंतिम विदाई दे रहे हैं। लेकिन इस श्रद्धा के पीछे एक गहरा गुस्सा भी है।  यह वन विभाग की सरासर लापरवाही है। उन्हें पता है कि यह एलीफेंट कॉरिडोर है, फिर भी कोई निगरानी नहीं थी, यह पहली घटना नही है इससे पहले भी घटना हुई है और हाथियों का जान गई है। हम इन्हें पूजते हैं और आज इन्हें टुकड़ों में देख रहे हैं। इस हादसे ने झारखंड के रेल रूट को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। जब तक गजराज का झुंड पटरी से नहीं हटा, तब तक रेल प्रशासन बेबस रहा। पलामू एक्सप्रेस, देश की शान वंदे भारत, गरीब रथ और टाटा-जम्मू तवी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों खड़ी रहीं। यात्रियों की परेशानी बढ़ी, तो कई ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा। गनीमत यह रही कि टक्कर मालगाड़ी से हुई, अगर कोई एक्सप्रेस ट्रेन होती तो आज हम किसी बड़े मानवीय हादसे की खबर पढ़ रहे होते।
इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
01. जब विभाग को हाथियों की आवाजाही का पता था, तो 'स्पीड रेस्ट्रिक्शन' क्यों नहीं था? झारखंड वन विभाग की वेबसाइट पर वन्यजीव सुरक्षा के दावे क्या केवल कागजी हैं?
02. क्या रेलवे और वन विभाग के बीच तालमेल की कमी बेजुबानों की जान लेती रहेगी?
03. क्या 'विकास' की पटरियां 'प्रकृति' के शवों पर बिछाई जाएंगी?
आज लातेहार के ग्रामीणों की आँखें नम हैं और रेल की पटरियां खून से सनी। यह हादसा एक चेतावनी है। अगर हमने समय रहते एलीफेंट अंडरपास और रडार सिस्टम जैसे तकनीकी समाधानों पर काम नहीं किया, तो वो दिन दूर नहीं जब ये जंगल खामोश हो जाएंगे। फिलहाल वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन क्या वो मां, जो रात भर पटरी पर खड़ी रही, कभी सिस्टम को माफ कर पाएगी?
    user_Ashish Kumar Baidya
    Ashish Kumar Baidya
    Chandwa, Latehar•
    12 hrs ago
  • भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री अरुण उरांव बोले भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थित प्रत्याशी श्री अनिल उरांव लोहरदगा के लिए...#ViralNewsUpdate
    1
    भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता श्री अरुण उरांव बोले भारतीय जनता पार्टी द्वारा समर्थित प्रत्याशी श्री अनिल उरांव लोहरदगा के लिए...#ViralNewsUpdate
    user_Badri Narayan Sahu
    Badri Narayan Sahu
    रिपोर्टर किसको, लोहरदगा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का विचार सुनिए? #election #viral #chunav #voting #adhyaksh #shortvideo #news
    1
    अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का विचार सुनिए? #election #viral #chunav #voting #adhyaksh #shortvideo #news
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    17 hrs ago
  • झारखंड विधानसभा के बजट सत्र (19 फरवरी 2026) के दौरान सिमरिया विधायक कुमार उज्ज्वल (उज्ज्वल दास) ने मुख्य रूप से चतरा और सिमरिया क्षेत्र के विकास और विस्थापन के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
    1
    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र (19 फरवरी 2026) के दौरान सिमरिया विधायक कुमार उज्ज्वल (उज्ज्वल दास) ने मुख्य रूप से चतरा और सिमरिया क्षेत्र के विकास और विस्थापन के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
    user_Aakash Kumar paswan
    Aakash Kumar paswan
    Local News Reporter तांडवा, चतरा, झारखंड•
    9 hrs ago
  • Ramzan mein Mithun ka gosht #Mithun ka gosht jarur khayenkhara sabab Hai kabab hai
    1
    Ramzan mein Mithun ka gosht #Mithun ka gosht jarur khayenkhara sabab Hai kabab hai
    user_Sajid mastana
    Sajid mastana
    सेन्हा, लोहरदगा, झारखंड•
    1 day ago
  • राँची। धुर्वा टंकी साइड शिव मंदिर के पास एक पोल में आग लग गया है।
    1
    राँची। धुर्वा टंकी साइड शिव मंदिर के पास एक पोल में आग लग गया है।
    user_Amit Kr Chiku Objectionnews
    Amit Kr Chiku Objectionnews
    Local News Reporter बुरमू, रांची, झारखंड•
    11 hrs ago
  • पीएम श्री राजकीयकृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय प्रखंड मुख्यालय सिसई में प्रथम दिन वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वही दूसरे दिन सांस्कृतिक सह प्रदर्शनी कार्यक्रम प्रतियोगिता आयोजित किया गया। जिसमें विद्यालय के बच्चों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और भारत देश के झारखंड, बिहार, उड़ीसा सहित दर्जनों राज्यों के वेशभूषा में वहां के खान पान का प्रदर्शनी लगाया। प्रतियोगिता में उड़ीसा राज्य का प्रदर्शन कर रही पूर्णिमा कुमारी प्रथम स्थान, बिहार राज्य का प्रदर्शन कर रहे पृथ्वी राज ग्रुप द्वितीय स्थान, झारखंड का प्रदर्शन कर रही वर्षा कुमारी ग्रुप तृतीय स्थान प्राप्त की। सभी विजेता प्रतिभागियों को मेडल पहनाकर व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। प्रधानाध्यापिका मीना साहु ने कहा कि विद्यालय जब से पी एम श्री हुआ हैं, उसके बाद से बच्चों को हर प्रकार के प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि बच्चें शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ खेल कूद, गीत संगीत, निबंध लेखन,पेंटिंग, भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता में भाग लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
    1
    पीएम श्री राजकीयकृत उत्क्रमित उच्च विद्यालय प्रखंड मुख्यालय सिसई में प्रथम दिन वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वही दूसरे दिन सांस्कृतिक सह प्रदर्शनी कार्यक्रम प्रतियोगिता आयोजित किया गया। जिसमें विद्यालय के बच्चों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और भारत देश के झारखंड, बिहार, उड़ीसा सहित दर्जनों राज्यों के वेशभूषा में वहां के खान पान का प्रदर्शनी लगाया। प्रतियोगिता में उड़ीसा राज्य का प्रदर्शन कर रही पूर्णिमा कुमारी प्रथम स्थान, बिहार राज्य का प्रदर्शन कर रहे पृथ्वी राज ग्रुप द्वितीय स्थान, झारखंड का प्रदर्शन कर रही वर्षा कुमारी ग्रुप तृतीय स्थान प्राप्त की। सभी विजेता प्रतिभागियों को मेडल पहनाकर व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। प्रधानाध्यापिका मीना साहु ने कहा कि विद्यालय जब से पी एम श्री हुआ हैं, उसके बाद से बच्चों को हर प्रकार के प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि बच्चें शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ खेल कूद, गीत संगीत, निबंध लेखन,पेंटिंग, भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता में भाग लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    11 hrs ago
  • लोहरदगा नगर परिषद अध्यक्ष पद के प्रत्याशी श्री पावन एक्का बोले हम सोए भी रहेंगे तो चुनाव जीत जाएंगे #ViralNewsUpdate #NagarNigam #nagarpalika #newsupdatetoday #lohardaga_updates #jharkhandpolitics #groundreporting #ViralNewsシ #viralnews2026 #bharatkahriday #bjpvscongress #viralnews #BJPNEWS #jharkhandupdates Bharat Ka Hriday
    1
    लोहरदगा नगर परिषद अध्यक्ष पद के प्रत्याशी श्री पावन एक्का बोले हम सोए भी रहेंगे तो चुनाव जीत जाएंगे  #ViralNewsUpdate #NagarNigam #nagarpalika   #newsupdatetoday #lohardaga_updates #jharkhandpolitics #groundreporting #ViralNewsシ #viralnews2026 #bharatkahriday #bjpvscongress #viralnews #BJPNEWS #jharkhandupdates Bharat Ka Hriday
    user_Badri Narayan Sahu
    Badri Narayan Sahu
    रिपोर्टर किसको, लोहरदगा, झारखंड•
    23 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.