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आज सवाई माधोपुर कलेक्ट्रेट पर रेलवे कॉलोनी के वार्ड नंबर 53 की महिलाएं अपनी मांगों को लेकर पहुंचीं और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। सुनीता, रजिया, अनिता और गुड्डी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि पिछले दो महीने से उनके इलाके में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है, क्योंकि पानी की टंकी का लाइट कनेक्शन काट दिया गया है। भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए इधर-उधर भटककर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इन महिलाओं ने जिला कलेक्टर से पानी की व्यवस्था को सुचारु रूप से बहाल करने और पानी की टंकी को तत्काल चालू करवाने की मांग की है।
Rakesh Agarwal
आज सवाई माधोपुर कलेक्ट्रेट पर रेलवे कॉलोनी के वार्ड नंबर 53 की महिलाएं अपनी मांगों को लेकर पहुंचीं और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। सुनीता, रजिया, अनिता और गुड्डी सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि पिछले दो महीने से उनके इलाके में पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है, क्योंकि पानी की टंकी का लाइट कनेक्शन काट दिया गया है। भीषण गर्मी में लोग पानी के लिए इधर-उधर भटककर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इन महिलाओं ने जिला कलेक्टर से पानी की व्यवस्था को सुचारु रूप से बहाल करने और पानी की टंकी को तत्काल चालू करवाने की मांग की है।
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- चौथ माता सरोवर पर 'वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान' के अंतर्गत श्रमदान का आयोजन किया गया। इस पहल में विधायक जितेंद्र गोठवाल के साथ-साथ अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लेकर श्रमदान किया।1
- सवाई माधोपुर में सारसोप गांव के खातेदारों और अन्य नागरिकों ने ईसरदा डैम से प्रस्तावित नहर योजना के वर्तमान सर्वे पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। यह आपत्ति ग्राम सारसोप में आयोजित सर्व समाज व खाता धारकों के आपसी विचार-विमर्श के बाद दर्ज की गई है। अपनी इन्हीं आपत्तियों और मांगों को लेकर आज सैकड़ों की संख्या में ईसरदा गांव के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित सर्वे में नहर को ईसरदा डैम से बंगला ढाणी होते हुए सारसोप गांव की पूर्वी दिशा में यू आकार में घुमाकर ढील बंद से ऊपर होकर शिवाड़ महापुरा रोड से जोड़ा जाना दिखाया गया है। यह मार्ग करीब 15-20 किलोमीटर लंबा है, जिसे ग्रामीण अनुचित मानते हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग से अधिकांश काश्तकार प्रभावित होंगे और नहर निर्माण से पूरे गांव में बारिश और गांव के पानी की निकासी अवरुद्ध हो जाएगी। इससे लगभग 10-12 हजार की आबादी वाला क्षेत्र प्रभावित होगा और बाढ़ जैसे हालात बने रहेंगे। ग्रामीणों ने ईसरदा डैम से सीधी नहर निर्माण का सुझाव दिया है, जो शिवाड़ महापुरा मार्ग से निकाली जाए। उनके अनुसार, यह सीधा मार्ग केवल 8 से 10 किलोमीटर लंबा होगा, जिससे कम से कम काश्तकार प्रभावित होंगे और सारसोप गांव के आबादी क्षेत्र में पानी भरने की समस्या का भी समाधान होगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह वैकल्पिक सर्वे पूर्व में भी किया गया था और यह आर्थिक दृष्टि से कम लागत वाला है। ग्रामीण वर्तमान सर्वे को निरस्त करवाकर कम नुकसान वाले विकल्प के तहत नहर निर्माण कार्य करवाने की मांग कर रहे हैं ताकि नागरिकों का कम से कम नुकसान हो और आबादी क्षेत्र में पानी भराव की समस्या से निजात मिल सके। ज्ञापन सौंपने वालों में कैलाश सोनी, शंकर लाल सैनी, रामस्वरूप और जगदीश सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।1
- जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम1
- टोंक जिले में कुणाल गुर्जर से जुड़े मामले को लेकर यह जानने की जिज्ञासा है कि राजनीतिक गलियारों में इस विषय पर सचिन पायलट की क्या प्रतिक्रिया रही है। प्रमुख सवाल यही है कि सचिन पायलट ने इस मामले पर क्या बयान दिया है या उनकी क्या राय है।1
- कृषि मंत्री डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने आज चौमूं में एक नकली बीज बनाने वाली फैक्ट्री पर छापा मारकर एक बड़े धोखाधड़ी का खुलासा किया। यह फैक्ट्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्री का गोदाम थी, जहाँ आरजी-510 नाम से नकली मूंगफली बीज तैयार कर बेचा जा रहा था। जांच के दौरान यह सामने आया कि यह आरजी-510 मूंगफली बीज, जो दरअसल दुर्गापुरा स्थित (RARI) द्वारा विकसित एक उन्नत किस्म है, बाजार से खरीदी गई साधारण मूंगफली से तैयार किया जा रहा था। इन नकली बीजों में अफ्लाटॉक्सिन नामक एक हानिकारक फंगस भी पाया गया। यह फंगस मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह है और फसलों की उत्पादकता पर भी गंभीर असर डालता है। गौरतलब है कि इसी अफ्लाटॉक्सिन की समस्या के कारण पहले इंडोनेशिया और यूरोपीय देशों को होने वाले राजस्थान की मूंगफली के निर्यात पर कई देशों ने प्रतिबंध लगा दिए थे। ऐसी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद, इस तरह के नकली और दूषित बीज का कारोबार लगातार जारी रहना अत्यंत चिंताजनक है।1
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- राजस्थान के करौली जिले के सपोटरा उपखंड कार्यालय के ठीक सामने लंबे समय से जाम पड़ी नाली की सफाई न होने से नाराज स्थानीय निवासियों ने आखिरकार खुद ही इसकी जिम्मेदारी संभाली और सफाई अभियान शुरू कर दिया। नगरपालिका प्रशासन की लगातार अनदेखी और इस वजह से सड़क पर फैल रहे गंदे पानी के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालकों के फिसलकर घायल होने की घटनाओं से परेशान होकर लोगों ने यह कदम उठाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगरपालिका प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद लोगों ने स्वयं फावड़े लेकर नाली की सफाई की और पानी की निकासी को सुचारु बनाया। क्षेत्रवासियों ने बताया कि उपखंड कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान के सामने गंदगी और जलभराव से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस सफाई के बाद राहगीरों और वाहन चालकों को राहत मिली है, जिसके साथ ही लोगों ने नगरपालिका से भविष्य में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की है।1
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