सत्ताधारी सरकार द्वारा बहन-बेटियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, प्रदेश में रेप, हत्या और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल बयानबाजी की जगह त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा ही बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। इसी बीच, सीधी जिले के चुरहट विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मवई की एक चर्चित घटना से जुड़ा एक और वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में पीड़ित परिवार पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाता दिख रहा है। परिजनों का आरोप है कि युवती के लापता होने के बाद समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआत से ही मामले की गंभीरता से जांच की जाती, तो शायद आज स्थिति कुछ अलग होती। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर विभिन्न दावे और आरोप लगातार लगाए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल हो रहे इस वीडियो और परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है। ऐसे संवेदनशील प्रकरणों में अंतिम निष्कर्ष केवल विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ पाएगा। इस पूरे मामले में लोगों की प्रमुख मांग है कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए, यदि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले।
सत्ताधारी सरकार द्वारा बहन-बेटियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, प्रदेश में रेप, हत्या और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल बयानबाजी की जगह त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा ही बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। इसी बीच, सीधी जिले के चुरहट विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मवई की एक चर्चित घटना से जुड़ा एक और वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में पीड़ित परिवार पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाता दिख रहा है। परिजनों का आरोप है कि युवती के लापता होने के बाद समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआत से ही मामले की गंभीरता से जांच की जाती, तो शायद आज स्थिति कुछ अलग होती। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर विभिन्न दावे और आरोप लगातार लगाए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल हो रहे इस वीडियो और परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है। ऐसे संवेदनशील प्रकरणों में अंतिम निष्कर्ष केवल विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ पाएगा। इस पूरे मामले में लोगों की प्रमुख मांग है कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए, यदि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले।
- सत्ताधारी सरकार द्वारा बहन-बेटियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, प्रदेश में रेप, हत्या और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल बयानबाजी की जगह त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा ही बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। इसी बीच, सीधी जिले के चुरहट विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मवई की एक चर्चित घटना से जुड़ा एक और वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में पीड़ित परिवार पुलिस और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाता दिख रहा है। परिजनों का आरोप है कि युवती के लापता होने के बाद समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआत से ही मामले की गंभीरता से जांच की जाती, तो शायद आज स्थिति कुछ अलग होती। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर विभिन्न दावे और आरोप लगातार लगाए जा रहे हैं। हालांकि, वायरल हो रहे इस वीडियो और परिवार द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है। ऐसे संवेदनशील प्रकरणों में अंतिम निष्कर्ष केवल विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आ पाएगा। इस पूरे मामले में लोगों की प्रमुख मांग है कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए, यदि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले।1
- मध्यप्रदेश के रीवा जिले की मनगवां विधानसभा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नदना उर्फ डिहिया में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक आदिवासी महिला घायल हो गई। गाँव में सड़क की सुविधा न होने के कारण, महिला के परिजनों को उसे दो किलोमीटर तक खाट पर लादकर ले जाना पड़ा, जिसका एक वीडियो भी सामने आया है। यह स्थिति तब है जब मनगवां के विधायक द्वारा इस ग्राम पंचायत को विधायक निधि से ₹5,00,000 दिए गए थे। आरोप है कि ये धनराशि 'कमीशन बाजी' की भेंट चढ़ गई और सड़क सिर्फ कागजों पर ही बनी हुई है। हकीकत यह है कि आज भी मरीजों को इलाज के लिए चारपाई पर रखकर दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। आजादी के इतने वर्षों बाद भी मनगवां विधानसभा में ऐसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखने को मिल रहा है, जो क्षेत्र में विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।2
- एक घटना के बाद, आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर चक्काजाम कर दिया।1
- सिंगरौली जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे लगातार अभियान के तहत प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई की है। कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देश पर खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल के मार्गदर्शन में खनिज निरीक्षक अशोक मिश्रा ने अवैध खनिज परिवहन में संलिप्त तीन वाहनों को जब्त किया है। जांच के दौरान, एक बिना नंबर वाला ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना अभिवहन पास के गिट्टी का परिवहन करते हुए पाया गया, जिसे बरगवां पुलिस थाना में सुरक्षित खड़ा कराया गया। इसी तरह, वाहन क्रमांक यूपी 64 बीटी 5171 को रेत का अवैध परिवहन करते हुए पकड़े जाने पर चितरंगी थाना में जब्त किया गया। एक अन्य ट्रैक्टर-ट्रॉली (एमपी 66 जेडीबी 4475) को बिना वैध दस्तावेजों के गिट्टी ढोते हुए पाए जाने पर कोतवाली बैढ़न थाना में सुरक्षित रखा गया है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब्त किए गए इन सभी वाहनों के खिलाफ खनिज नियमों के तहत नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन की इस सतत कार्रवाई से अवैध खनिज परिवहन में शामिल लोगों के बीच हड़कंप मच गया है, और यह खनिज संसाधनों के संरक्षण एवं राजस्व सुरक्षा की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी साफ तौर पर दर्शाता है।1
- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जमकर गरजते हुए राष्ट्रहित का महत्व समझाया। इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों पर विशेष जोर दिया।1
- प्रयागराज के जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मरीजों को मुफ्त दवा देने के सरकारी दावे केवल कागजों तक ही सीमित हैं। यहां तैनात डॉक्टरों पर गंभीर आरोप है कि वे कमीशन के लालच में सरकारी पर्चे पर भी बाहर की महंगी दवाएं लिखते हैं, जिसके कारण गरीब मरीज सरकारी अस्पताल आने के बावजूद उन्हें बाहर से खरीदने को मजबूर हैं। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि 4 जुलाई को बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर वे CHC गए थे, जहां डॉक्टर ने सरकारी पर्चे पर पांच दवाएं लिखीं। मेडिकल स्टोर पर पता चला कि अस्पताल में इनमें से एक भी दवा उपलब्ध नहीं है और सभी प्राइवेट कंपनी की थीं, जिसके लिए उन्हें ₹680 खर्च कर बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि कई अन्य मरीजों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। पर्चे पर 'सरकारी अस्पताल जसरा' लिखा होने के बावजूद, नीचे लिखी दवाएं अस्पताल की सूची में शामिल ही नहीं होतीं। एक ANM ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जसरा CHC में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज आते हैं और इनमें से लगभग 70% पर्चों पर बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं, जिन्हें गरीब लोग मजबूरी में चुपचाप खरीद लेते हैं। सूत्रों के अनुसार, CHC के पास स्थित 10 से 15 निजी मेडिकल स्टोर के साथ डॉक्टरों की मिलीभभगत है। आरोप है कि जितनी महंगी और ब्रांडेड दवा लिखी जाती है, डॉक्टरों को उतना ही अधिक कमीशन मिलता है। मरीजों से अक्सर कह दिया जाता है कि 'सरकारी दवा खत्म है, बाहर से ले लीजिए'। इस कमीशनखोरी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है; मजदूरी करने वाले गरीब मरीज ₹500-₹800 की दवाएं खरीदने में असमर्थ होते हैं। उन्हें पहले लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाना पड़ता है और फिर बाहर जाकर दवा खरीदनी पड़ती है। इसके अलावा, अधिकांश ग्रामीण मरीजों को यह भी जानकारी नहीं होती कि कौन सी दवा सरकारी है और कौन सी प्राइवेट। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से जसरा CHC के पर्चों की गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि सरकार भले ही 'आयुष्मान' और 'मुफ्त इलाज' का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन जसरा CHC में व्याप्त इस कमीशनखोरी के कारण मरीजों को आर्थिक और मानसिक, दोनों तरह से 'दोहरी मार' झेलनी पड़ रही है। कुल मिलाकर, कमीशन के इस खेल में जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का पूरा सिस्टम दम तोड़ता नजर आ रहा है, जिससे मरीज लगातार परेशान हैं।1
- बहरी तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सिहौलिया स्थित सरकारी पाठशाला क्रमांक 1 की स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। आज सुबह 10 बजे तक भी स्कूल का ताला बंद था, जिसके कारण बच्चे स्कूल के बाहर घूमते हुए दिखाई दिए और मौके पर कोई भी अध्यापक उपस्थित नहीं था। कुछ देर इंतजार करने के बाद वहाँ उपस्थित हुए अध्यापक अजय कुमार कोल ने बताया कि स्कूल के सभी अध्यापकों का तबादला कर दिया गया है। इसी वजह से बच्चों को संभालना मुश्किल हो गया है। इस स्थिति को शासन-प्रशासन द्वारा देश के भविष्य के साथ एक बहुत बड़ी खिलवाड़ बताया गया है।4
- सोनभद्र जनपद के घोरावल तहसील स्थित ग्राम पंचायत भैसवार में भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति का धरना प्रदर्शन 413वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के जिला अध्यक्ष बिरजू कुशवाहा कर रहे हैं, जबकि जिला सचिव संजय कुमार यादव इसके संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।2