राजपुर क्षेत्र के खजूरी रोड स्थित मोटी माता इलाके में एक युवक की सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान लोढगिया उर्फ दीपक मानकर के रूप में हुई है। मृतक के भाई ओंकार ने बताया कि दीपक का अपने रिश्तेदार गणेश एवं राम के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसी विवाद के दौरान दीपक के साथ मारपीट की गई और उसे लट्ठ से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। घटना के बाद घायल दीपक को पहले राजपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय बड़वानी रेफर कर दिया गया। बड़वानी में उपचार के दौरान दीपक ने दम तोड़ दिया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल के साथ-साथ संबंधित पक्षों से पूछताछ कर मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
राजपुर क्षेत्र के खजूरी रोड स्थित मोटी माता इलाके में एक युवक की सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान लोढगिया उर्फ दीपक मानकर के रूप में हुई है। मृतक के भाई ओंकार ने बताया कि दीपक का अपने रिश्तेदार गणेश एवं राम के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसी विवाद के दौरान दीपक के साथ मारपीट की गई और उसे लट्ठ से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। घटना के बाद घायल दीपक को पहले राजपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय बड़वानी रेफर कर दिया गया। बड़वानी में उपचार के दौरान दीपक ने दम तोड़ दिया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल के साथ-साथ संबंधित पक्षों से पूछताछ कर मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
- राजपुर क्षेत्र के खजूरी रोड स्थित मोटी माता इलाके में एक युवक की सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान लोढगिया उर्फ दीपक मानकर के रूप में हुई है। मृतक के भाई ओंकार ने बताया कि दीपक का अपने रिश्तेदार गणेश एवं राम के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इसी विवाद के दौरान दीपक के साथ मारपीट की गई और उसे लट्ठ से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। घटना के बाद घायल दीपक को पहले राजपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय बड़वानी रेफर कर दिया गया। बड़वानी में उपचार के दौरान दीपक ने दम तोड़ दिया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल के साथ-साथ संबंधित पक्षों से पूछताछ कर मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।1
- बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम छोटा बड्दा स्थित नर्मदा नदी तट पर कथित तौर पर जारी अवैध रेत खनन को लेकर युवा कांग्रेस ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। 9 जून को युवा कांग्रेस राजपुर विधानसभा अध्यक्ष दीपेश सिंह (ईलू ठाकुर) ने बड़वानी कलेक्टर को एक आवेदन सौंपकर अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम छोटा बड्दा क्षेत्र में रेत माफियाओं द्वारा नर्मदा नदी के तट से लगातार अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि गांव के विभिन्न स्थानों पर बड़ी मात्रा में बालू रेत का अवैध भंडारण किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, भारी वाहनों और ओवरलोड डंपरों के माध्यम से रेत का परिवहन किया जा रहा है, जिससे अंजड़-छोटा बड्दा मार्ग सहित आसपास के ग्रामीण मार्ग क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इसके कारण स्थानीय नागरिकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। युवा कांग्रेस नेता दीपेश सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध रेत खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, अवैध रूप से संग्रहित रेत को जब्त किया जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। इस आवेदन के साथ कथित अवैध खनन और रेत भंडारण से संबंधित फोटो एवं वीडियो भी संलग्न किए गए हैं। इस संबंध में आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री, प्रमुख सचिव नर्मदा घाटी विकास विभाग, प्रमुख सचिव खनिज साधन विभाग और जिला खनिज अधिकारी बड़वानी को भी भेजी गई है।1
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- खरगोन जिले के बिस्टान पुलिस ने गलतार गांव में अपनी पत्नी की हत्या करने वाले फरार आरोपी पति को घटना के 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पति बिसन ने चरित्र शंका के चलते एक दिन पहले अपनी पत्नी सईदी बाई पर कुल्हाड़ी से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया था। बताया गया कि सईदी बाई बिस्तर पर सो रही थीं जब बिसन ने उन पर धारदार कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी पति बिसन मौके से फरार हो गया था, जिसके बाद बिस्टान पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए आरोपी को भगवानपुरा की ओर पैदल जाते हुए पकड़ा। गिरफ्तार करने के बाद उसे थाने लाया गया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है, जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।2
- बड़वानी जिले के लखनगांव निवासी एक व्यक्ति ने अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय में आवेदन सौंपा है। यह आवेदन अतिक्रमण को हटाने की अपील के साथ प्रस्तुत किया गया।1
- सनावद में आयोजित एक आध्यात्मिक संगोष्ठी में देश के प्रख्यात जैन चिंतक, विद्वान और अध्यात्म मर्मज्ञ डॉ. विवेक सागर शास्त्री ने स्पष्ट किया कि जैन दर्शन मात्र आस्था का विषय नहीं, बल्कि आत्मोत्कर्ष का एक वैज्ञानिक मार्ग है। उन्होंने इस दर्शन को प्रत्येक आत्मा में निहित अनंत संभावनाओं को पहचानने और उन्हें जागृत करने का सीधा रास्ता बताया। डॉ. शास्त्री ने वर्तमान समय की अधिकांश व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं के समाधान के रूप में स्वाध्याय, आत्मचिंतन और संस्कारों को रेखांकित किया। पूर्णाश्रय में हुई इस चर्चा के दौरान, डॉ. शास्त्री ने कई प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि यदि मनुष्य स्वयं को समझने का प्रयास करे, तो उसके जीवन की दिशा और दशा दोनों परिवर्तित हो सकती हैं। उनके अनुसार, वास्तविक बाहरी बदलाव की नींव आंतरिक जागरण पर आधारित है, जिसे केवल स्वाध्याय के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने समाज में पाठशालाओं की महत्ता पर भी विशेष बल दिया, यह बताते हुए कि किसी भी समाज का भविष्य उसकी नई पीढ़ी के संस्कारों पर निर्भर करता है। डॉ. शास्त्री ने पाठशालाओं को केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण की आधारशिलाएँ बताया। उन्होंने कहा कि स्वाध्याय और पाठशालाएँ दो ऐसी शक्तिशाली व्यवस्थाएँ हैं, जो समाज को संगठित, संस्कारित और सशक्त बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मात्र 41 वर्ष की आयु में ही डॉ. विवेक सागर शास्त्री ने देश-विदेश के हजारों श्रोताओं के बीच अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनके सत्यनिष्ठ, स्पष्टवादी और दृढ़ विचारों ने, विशेषकर युवा वर्ग को अत्यधिक प्रभावित किया है। जैन और जैनेतर समाज के अनगिनत युवा उनके व्याख्यानों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक और आमूलचूल परिवर्तन ला रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रतिदिन हजारों लोग उनके प्रवचनों से लाइव जुड़कर उनके तार्किक, सात्विक और जीवनोपयोगी चिंतन से लाभान्वित होते हैं। इस अवसर पर राजेन्द्र महावीर ने शाल और मोतीमाला से डॉ. शास्त्री का आत्मीय स्वागत किया। आशीष चौधरी, संतोष बाकलीवाल, संदीप चौधरी, हेमेंद्र जैन ‘हेमू’, सौरभ जैन मंगलश्री, जितेश जैन, शुभम जैन और सुरभि जैन ने भी उनका सम्मान किया।1
- सोशल मीडिया पर 'आदिवासी किंग ब्रो' ने अपने पूर्ण एडिटिंग कार्य का प्रदर्शन किया है। इस पोस्ट के माध्यम से, उन्होंने उन लोगों को टिप्पणी (कमेंट) करने के लिए आमंत्रित किया है जो इसी तरह की एडिटिंग करवाना चाहते हैं या उसे स्वयं बनाना सीखना चाहते हैं।1
- सेंधवा स्थित शासकीय आदिवासी बालक महाविद्यालय छात्रावास में 9 जून 2026 को धरती आबा महामानव शहीद बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर छात्रावास के विद्यार्थियों ने बिरसा मुंडा सहित अन्य शहीदों के छायाचित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान, उपस्थित विद्यार्थियों ने क्रमवार शहीद बिरसा मुंडा के जीवन, उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी समाज के उत्थान में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पोरलाल खर्ते, जो अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के नेशनल कोऑर्डिनेटर और खरगोन-बड़वानी के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी हैं, ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शहीद बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में ही ऐसे ऐतिहासिक कार्य किए, जिनसे आज भी पूरा देश प्रेरणा प्राप्त करता है। खर्ते ने बिरसा मुंडा के शोषणकारी जमींदारी व्यवस्था, अंग्रेजी शासन तथा आदिवासियों पर हो रहे अन्याय, अत्याचार, दमन और शोषण के विरुद्ध किए गए संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिरसा मुंडा ने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक अंग्रेजी सत्ता से कोई समझौता नहीं किया और अपने समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्षरत रहे। पोरलाल खर्ते ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा पूर्ण कर समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दें, साथ ही संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा एवं सामाजिक न्याय के लिए संघर्षरत रहें। उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि जिस प्रकार बिरसा मुंडा को उनके बलिदान के 150 वर्ष बाद भी पूरा देश श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करता है, उसी प्रकार प्रत्येक विद्यार्थी को भी अपने जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए, जिससे समाज उन्हें भी सदैव स्मरण रखे। इस अवसर पर छात्रावास अध्यक्ष नितेश बर्डे, उपाध्यक्ष मांगीलाल चौहान, कोषाध्यक्ष संतोष नरगावे, सचिव रितेश डावर, सह सचिव जगदीश बंडोड़, संगठन प्रभारी रंजीत तरोले सहित बड़ी संख्या में छात्रावास के विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन गुटीराम सेनानी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मांगीलाल चौहान ने किया।1