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गया पुलिस पर गंभीर पक्षपात के आरोप लगे हैं, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कानून सबके लिए समान है या सिर्फ आम जनता के लिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़े अधिकारियों को आवेदन दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इन आरोपों के चलते, गया पुलिस सरकारी कर्मचारी को संरक्षण देने के आरोपों से घिर गई है और उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
AMIT KUMAR
गया पुलिस पर गंभीर पक्षपात के आरोप लगे हैं, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कानून सबके लिए समान है या सिर्फ आम जनता के लिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़े अधिकारियों को आवेदन दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इन आरोपों के चलते, गया पुलिस सरकारी कर्मचारी को संरक्षण देने के आरोपों से घिर गई है और उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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- बिहार के गया जिले में गुरुआ थाना गंभीर रिश्वतखोरी के आरोपों से घिर गया है। एक पीड़ित ने थाने पर ₹25 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पीड़ित का कहना है कि आवेदन देने के पूरे पाँच दिन बीत जाने के बाद भी उसकी प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जो मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है। हालांकि, थाना प्रभारी ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ऐसी कोई बात नहीं है। इस स्थिति में, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।1
- हिंदी प्रेस दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार साथियों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्हें अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए। इस मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आयोजन की शोभा बढ़ाई। इस सम्मान समारोह में सुजीत कुमार (हिंदुस्तान), नीरज कुमार (प्रभात खबर), दीपक कुमार (दैनिक भास्कर) और सुभाष कुमार (दैनिक जागरण) जैसे पत्रकार शामिल थे, जिन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। डॉ. मनीष पंकज मिश्रा ने पत्रकारों को लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ बताते हुए कहा कि समाज को जागरूक बनाने, जनहित के मुद्दों को उठाने और सरकार तथा जनता के बीच संवाद स्थापित करने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ऐसे लोकतंत्र के पहरेदारों को सम्मानित करने का अवसर मिलने पर गर्व व्यक्त किया और जोर दिया कि पत्रकारों की निष्पक्ष व निर्भीक लेखनी समाज को सही दिशा देती है तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करती है। डॉ. मिश्रा ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास और उसके योगदान का भी उल्लेख किया, सभी पत्रकारों को हिंदी प्रेस दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने मीडिया को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि पत्रकारों के अथक प्रयासों से ही आम लोगों की समस्याएं शासन-प्रशासन तक पहुँच पाती हैं। सम्मान प्राप्त करने वाले पत्रकारों ने डॉ. मनीष पंकज मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि उन्हें समय-समय पर सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के सम्मान से पत्रकारों का मनोबल बढ़ता है और उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन और अधिक निष्ठा एवं समर्पण के साथ करने की प्रेरणा मिलती है।1
- औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड स्थित भीखनपुरा प्राथमिक विद्यालय में एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) के कारण विद्यालय के शिक्षक सुनील कुमार सिंह, जिनकी उम्र 43 वर्ष थी, की घटनास्थल पर ही दुःखद मृत्यु हो गई।1
- बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा आज गया शहर के माता मंगला गौरी मंदिर पहुँचे और विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर में पूजा संपन्न करने के बाद, वे माता मंगला गौरी प्रबंधकारिणी समिति के कार्यालय गए, जहाँ उनका स्वागत किया गया।1
- पूरे देश में प्रतिष्ठित NEET परीक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल उठाया गया है, जिसमें पूछा गया है कि क्या यह सिर्फ एक 'व्यावसायिक धंधा' बनकर रह गई है।1
- बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधियों ने सम्राट चौधरी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को 'सैटेलाइट टाउनशिप' और 'ग्रीन फील्ड' के नाम पर बंद करके तथा अब अंचल की भूमिका शामिल करके इसे और अधिक जटिल बना रही है, जिससे यह 'घूस का घोंसला' बन जाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले राज्य के दर्जनों जिलों के सैकड़ों गांवों और नगर निकाय के वार्डों में जमीन रजिस्ट्री को एक साल के लिए रोक दिया था, और अब संपूर्ण बिहार में रजिस्ट्री विभाग के साथ-साथ अंचल को भी जमीन रजिस्ट्रीकरण पद्धति में शामिल करके बिहारवासियों को बड़े संकट में डाल दिया है। नेताओं के अनुसार, 'ग्रीन लैंड सैटेलाइट टाउनशिप' के अंतर्गत आने वाले गांवों और वार्डों के गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पहले से ही अपनी बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई या गंभीर बीमारियों जैसे आवश्यक कार्यों के लिए जमीन बेचने में असमर्थ होने के कारण परेशान थे। अब रजिस्ट्री ऑफिस के साथ-साथ अंचल अधिकारी और उनके कार्यालय को जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया में शामिल करने और उनसे रिपोर्ट लेने की पद्धति से लोगों को और अधिक संकट, देरी और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम किसान-मजदूरों और आमजनों को परेशान करने वाला है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जमीन रजिस्ट्री, जिसे 'विक्रय मनोबंध पत्र' कहा जाता है, वह जमीन का 'हकियत' (वास्तविक मालिकाना हक) नहीं है, न ही अंचल या म्युनिसिपल रसीदें हकियत दर्शाती हैं। ये सभी केवल रजिस्ट्रेशन और टैक्स संबंधी कागज़ात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कागज़ातों का 'हौआ' बनाकर किसान-मजदूरों और आमजनों को तंग और तबाह करना चाहती है। नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को और जटिल बनाने के बजाय उसे आसान किया जाए, ताकि आम जनता को जमीन रजिस्ट्री के लिए अंचल कार्यालय के चक्कर न काटने पड़ें और पहले की तरह आसानी से कार्य संपन्न हो सकें। कांग्रेस पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार जल्द से जल्द जमीन खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर लगी रोक को हटाती नहीं है और अंचल की भूमिका समाप्त नहीं करती है, तो पार्टी बाध्य होकर जिला रजिस्ट्रार (जिलाधिकारी कार्यालय) और उप-रजिस्ट्रार (रजिस्ट्री ऑफिस कार्यालय) का घेराव करेगी। यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष बाबूलाल प्रसाद सिंह, दामोदर गोस्वामी, विपिन बिहारी सिन्हा, इंटक जिला महासचिव टिंकू गिरी, विशाल कुमार, मोहम्मद शामिम आलम, और मुन्ना मांझी सहित अन्य नेताओं ने कही।1
- एक भावुक अपील में, सरकार से हाथ जोड़कर निवेदन किया गया है कि संविधान से एक विशेष 'चीज' को तत्काल हटा दिया जाए। अपीलकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि यह 'चीज' नहीं हटाई गई, तो आने वाले समय में भीषण बर्बादी होगी और लोग बीमारियों से मरेंगे, जिसमें सब कुछ नष्ट हो जाएगा। इस भयावह स्थिति का जिम्मेदार हमारे माननीय श्री सम्राट चौधरी जी को बताते हुए, उनसे विनम्रतापूर्वक आग्रह किया गया है कि वे इस गंभीर विषय पर गंभीरता से विचार करें।1
- लूटूआ के जंगल में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है, जहाँ झाड़ियों में छिपाकर रखे गए दो देसी कट्टे और दो जिंदा .315 बोर के कारतूस बरामद किए गए हैं। इस समय रहते की गई कार्रवाई से सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया है।1