मध्यप्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत में पदस्थ उपयंत्री सतीश समेले का मीडिया के सामने दिया गया बयान राज्य की व्यवस्था और कमीशनखोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उपयंत्री ने सरेआम डंके की चोट पर यह स्वीकार किया है कि वह कमीशन लेता है, जिसके बाद अब इस मामले में कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले में सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यदि अन्य अधिकारियों को इस कमीशनखोरी की जानकारी थी, तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उपयंत्री ने स्वयं को कमीशनखोर तो बताया है, लेकिन ऊपर से नीचे तक लिप्त अन्य अधिकारियों का नाम बताने से परहेज किया है। इस पूरे घटनाक्रम को मध्यप्रदेश सरकार की विफलता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मांग उठ रही है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को इसका संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से लोकतंत्र शर्मिंदा हो रहा है।
मध्यप्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत में पदस्थ उपयंत्री सतीश समेले का मीडिया के सामने दिया गया बयान राज्य की व्यवस्था और कमीशनखोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उपयंत्री ने सरेआम डंके की चोट पर यह स्वीकार किया है कि वह कमीशन लेता है, जिसके बाद अब इस मामले में कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले में सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यदि अन्य अधिकारियों को इस कमीशनखोरी की जानकारी थी, तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उपयंत्री ने स्वयं को कमीशनखोर तो बताया है, लेकिन ऊपर से नीचे तक लिप्त अन्य अधिकारियों का नाम बताने से परहेज किया है। इस पूरे घटनाक्रम को मध्यप्रदेश सरकार की विफलता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मांग उठ रही है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को इसका संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से लोकतंत्र शर्मिंदा हो रहा है।
- मध्य प्रदेश के सतना और रीवा जिले में एक युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। यह शव घटना के 74 दिन बाद बरामद हुआ है, जिसने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच और हत्या से जुड़े पहलुओं पर चर्चा तेज है। सोशल मीडिया पर #हत्याकांड, #प्रेम_प्रसंग और #पुलिस_जांच जैसे हैशटैग्स के जरिए इस मामले में न्याय की मांग और त्वरित कार्रवाई को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रामपुर बघेलान और गोविंदगढ़ क्षेत्रों से जुड़े इस मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार है।1
- मध्यप्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत में पदस्थ उपयंत्री सतीश समेले का मीडिया के सामने दिया गया बयान राज्य की व्यवस्था और कमीशनखोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उपयंत्री ने सरेआम डंके की चोट पर यह स्वीकार किया है कि वह कमीशन लेता है, जिसके बाद अब इस मामले में कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले में सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यदि अन्य अधिकारियों को इस कमीशनखोरी की जानकारी थी, तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उपयंत्री ने स्वयं को कमीशनखोर तो बताया है, लेकिन ऊपर से नीचे तक लिप्त अन्य अधिकारियों का नाम बताने से परहेज किया है। इस पूरे घटनाक्रम को मध्यप्रदेश सरकार की विफलता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मांग उठ रही है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को इसका संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से लोकतंत्र शर्मिंदा हो रहा है।1
- सतना जिले के रामपुर बघेलान स्थित रोगी कल्याण समिति की कार्यप्रणाली पर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीआई के माध्यम से समिति की 29 जुलाई 2025 की बैठक का कार्यवाही रजिस्टर, एंबुलेंस चालक श्री सुरेंद्र आदिवासी की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव और अन्य अभिलेख मांगे गए थे। जवाब में बताया गया कि बैठक का कार्यवाही रजिस्टर उपलब्ध नहीं है, जबकि अन्य दस्तावेज़ उपलब्ध करा दिए गए। प्राप्त दस्तावेज़ों से यह भी सामने आया है कि रोगी कल्याण समिति की निधि से नाश्ते पर पैसे खर्च किए गए। इसके अलावा, एंबुलेंस चालक की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है, जिसमें आशंका जताई गई है कि यदि केवल एक व्यक्ति से आवेदन लेकर सीधी नियुक्ति कर दी गई है, तो यह चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। यह स्पष्ट किया गया है कि रोगी कल्याण समिति का धन जनता का पैसा है, जो मरीजों से प्राप्त शुल्क और अन्य स्रोतों से आता है, इसलिए इसके हर खर्च में पारदर्शिता और नियमों का पालन अनिवार्य है, ताकि जनता को धन के उपयोग की पूरी जानकारी मिल सके। संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। पोस्ट में कहा गया है कि यदि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता महसूस होती है, तो इसे अधिकतम साझा किया जाए ताकि यह मुद्दा सही अधिकारियों तक पहुँच सके।1
- शिव सिंह राजपूत दहिया अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र के एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं।1
- Post by Abhishek Pandey1
- सतना में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क प्राधिकरण के कार्यकाल को लेकर संविदाकारों ने एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया है। इस दौरान संविदाकारों ने प्राधिकरण के महाप्रबंधक के कथित "काले कारनामों" का पर्दाफाश करने का दावा किया है। संविदाकारों के अनुसार, महाप्रबंधक द्वारा बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की जा रही है और उन्हें कमीशन देने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कमीशन के लेन-देन का पूरा हिसाब-किताब प्रस्तुत किया, साथ ही एमबी (माप पुस्तिका) में की गई काट-छांट के भी पुख्ता सबूत पेश किए हैं। महाप्रबंधक उमेश साहू के इन कथित भ्रष्ट आचरणों और "काले कारनामों" को संविदाकारों ने जिला प्रशासन के सामने भी उजागर किया है।1
- जयपुर के चर्चित नीरज शर्मा केस में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने मामले की दिशा बदल दी है। पुलिस की अब तक की छानबीन के मुताबिक, यह घटना कोई सामान्य सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या की साजिश प्रतीत हो रही है। इस मामले में एक गंभीर आरोप सामने आया है, जिसमें बेटी पर ही अपनी मां की हत्या की साजिश रचने का संदेह जताया गया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। मामले का अंतिम फैसला अदालत द्वारा ही किया जाएगा।1
- सतना जिले के रामपुर बघेलान क्षेत्र के ग्राम गुडुहुरु में पीएम श्री स्कूल के समीप बन रहे तीन कमरों के नए भवन के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता सामने आई है। निर्माण के लिए स्वीकृत एस्टीमेट में बालू का उपयोग कर जुड़ाई का प्रावधान था, लेकिन इसके विपरीत कार्यस्थल पर सस्ती डस्ट का उपयोग किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य का ठेका जनमेजय सिंह को दिया गया है, जिनके द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किए जाने से भवन की मजबूती और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इस निर्माण को लेकर भारी रोष है और लोग अब बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। घटिया निर्माण के कारण भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने और निर्माण कार्य की जांच कराने की पुरजोर मांग की है।1