उरई दिनांक 12 अगस्त 2026(सू०वि०)। विगत दिवस मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार उरई दिनांक 12 अगस्त 2026(सू०वि०)। विगत दिवस मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह, अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान-उरई के कुशल मार्ग दर्शन में जनपद न्यायालय उरई में स्थाई लोक अदालत के संचालन एवं न्यायिक क्षेत्र के बारे में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन श्रीमती मनाली चन्द्रा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान उरई की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के श्रीमती मनाली चन्द्रा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन द्वारा उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये बताया गया कि स्थाई लोक अदालत का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत किया गया है। यह एक स्थायी निकाय है, जो सामान्य अदालतों की तरह नियमित रूप से (प्रतिदिन) कार्य करती है और स्थाई लोक अदालत के विषय में विस्तृत जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री रामबाबू केवट सदस्य स्थायी लोकअदालत जालौन द्वारा उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं को बताया कि स्थाई लोक अदालत भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान का एक अत्यंत प्रभावी और सुलभ माध्यम है। सामान्य न्यायालयों में मुकदमों के बढ़ते बोझ और न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से इसका गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का निपटारा करना है। इसके कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं परिवहन सेवाएं (यात्री या माल परिवहन) ,डाक, टेलीफोन या दूरसंचार सेवाएं बिजली, पानी और स्वच्छता, अस्पताल, औषधालय और स्वास्थ्य सेवाएं, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और आवास सेवाएं आदि है। स्थाई लोक अदालत की आर्थिक और कानूनी सीमा एक करोड़ रुपये तक के वित्तीय विवादों की सुनवाई कर सकती है। इसके अलावा, यह केवल उन्हीं मामलों को स्वीकार करती है जो अभी तक किसी अन्य न्यायालय के समक्ष नहीं गए हैं। यह गंभीर या अशमनीय आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर सकती। विद्वान अधिवक्ता श्री संजय कुमार अग्रवाल द्वारा बताया गया कि स्थाई लोक अदालत भारत में आम नागरिकों को बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों (जैसे बिजली बोर्ड, बीमा कंपनी, बैंक) के खिलाफ एक मजबूत और त्वरित सुरक्षा कवच प्रदान करती है। यह कम खर्चीली, त्वरित और सुलभ न्याय प्रणाली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो भारतीय न्यायपालिका के समय और धन दोनों की बचत करती है। इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर जिला न्यायालय उरई के बार संघ जालौन की महासचिव श्रीमती साधना त्रिपाठी, सर्वश्री द्रगपाल सिंह परमार, विश्राम सिंह, शिव सिंह, अभिषेक पाठक, अशोक बाबू पाठक, सत्येन्द्र सिंह, रामजी, शिव कुमार श्रीवास्तव, यादवेन्द्र प्रताप सिंह, श्रीमती सुनीता सिंह, श्री प्रदीप कुमार, श्री सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, श्रीमती मन्जूलता आदि विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
उरई दिनांक 12 अगस्त 2026(सू०वि०)। विगत दिवस मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार उरई दिनांक 12 अगस्त 2026(सू०वि०)। विगत दिवस मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह, अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान-उरई के कुशल मार्ग दर्शन में जनपद न्यायालय उरई में स्थाई लोक अदालत के संचालन एवं न्यायिक क्षेत्र के बारे में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन श्रीमती मनाली चन्द्रा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान उरई की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के श्रीमती मनाली चन्द्रा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन द्वारा उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये बताया गया कि स्थाई लोक अदालत का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत किया गया है। यह एक स्थायी निकाय है, जो सामान्य अदालतों की तरह नियमित रूप से (प्रतिदिन) कार्य करती है और स्थाई लोक अदालत के विषय में विस्तृत जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री रामबाबू केवट सदस्य स्थायी लोकअदालत जालौन द्वारा उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं को बताया कि स्थाई लोक अदालत भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान का एक अत्यंत प्रभावी और सुलभ माध्यम है। सामान्य न्यायालयों में मुकदमों के बढ़ते बोझ और न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से इसका गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का निपटारा करना है। इसके कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं परिवहन सेवाएं (यात्री या माल परिवहन) ,डाक, टेलीफोन या दूरसंचार सेवाएं बिजली, पानी और स्वच्छता, अस्पताल, औषधालय और स्वास्थ्य सेवाएं, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और आवास सेवाएं आदि है। स्थाई लोक अदालत की आर्थिक और कानूनी सीमा एक करोड़ रुपये तक के वित्तीय विवादों की सुनवाई कर सकती है। इसके अलावा, यह केवल उन्हीं मामलों को स्वीकार करती है जो अभी तक किसी अन्य न्यायालय के समक्ष नहीं गए हैं। यह गंभीर या अशमनीय आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर सकती। विद्वान अधिवक्ता श्री संजय कुमार अग्रवाल द्वारा बताया गया कि स्थाई लोक अदालत भारत में आम नागरिकों को बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों (जैसे बिजली बोर्ड, बीमा कंपनी, बैंक) के खिलाफ एक मजबूत और त्वरित सुरक्षा कवच प्रदान करती है। यह कम खर्चीली, त्वरित और सुलभ न्याय प्रणाली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो भारतीय न्यायपालिका के समय और धन दोनों की बचत करती है। इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर जिला न्यायालय उरई के बार संघ जालौन की महासचिव श्रीमती साधना त्रिपाठी, सर्वश्री द्रगपाल सिंह परमार, विश्राम सिंह, शिव सिंह, अभिषेक पाठक, अशोक बाबू पाठक, सत्येन्द्र सिंह, रामजी, शिव कुमार श्रीवास्तव, यादवेन्द्र प्रताप सिंह, श्रीमती सुनीता सिंह, श्री प्रदीप कुमार, श्री सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, श्रीमती मन्जूलता आदि विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
- उरई दिनांक 12 अगस्त 2026(सू०वि०)। विगत दिवस मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार उरई दिनांक 12 अगस्त 2026(सू०वि०)। विगत दिवस मा० उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह, अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान-उरई के कुशल मार्ग दर्शन में जनपद न्यायालय उरई में स्थाई लोक अदालत के संचालन एवं न्यायिक क्षेत्र के बारे में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन श्रीमती मनाली चन्द्रा, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन स्थान उरई की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के श्रीमती मनाली चन्द्रा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन द्वारा उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये बताया गया कि स्थाई लोक अदालत का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22-बी के तहत किया गया है। यह एक स्थायी निकाय है, जो सामान्य अदालतों की तरह नियमित रूप से (प्रतिदिन) कार्य करती है और स्थाई लोक अदालत के विषय में विस्तृत जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री रामबाबू केवट सदस्य स्थायी लोकअदालत जालौन द्वारा उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं को बताया कि स्थाई लोक अदालत भारत में वैकल्पिक विवाद समाधान का एक अत्यंत प्रभावी और सुलभ माध्यम है। सामान्य न्यायालयों में मुकदमों के बढ़ते बोझ और न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करने के उद्देश्य से इसका गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का निपटारा करना है। इसके कार्यक्षेत्र में निम्नलिखित सेवाएं शामिल हैं परिवहन सेवाएं (यात्री या माल परिवहन) ,डाक, टेलीफोन या दूरसंचार सेवाएं बिजली, पानी और स्वच्छता, अस्पताल, औषधालय और स्वास्थ्य सेवाएं, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और आवास सेवाएं आदि है। स्थाई लोक अदालत की आर्थिक और कानूनी सीमा एक करोड़ रुपये तक के वित्तीय विवादों की सुनवाई कर सकती है। इसके अलावा, यह केवल उन्हीं मामलों को स्वीकार करती है जो अभी तक किसी अन्य न्यायालय के समक्ष नहीं गए हैं। यह गंभीर या अशमनीय आपराधिक मामलों की सुनवाई नहीं कर सकती। विद्वान अधिवक्ता श्री संजय कुमार अग्रवाल द्वारा बताया गया कि स्थाई लोक अदालत भारत में आम नागरिकों को बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों (जैसे बिजली बोर्ड, बीमा कंपनी, बैंक) के खिलाफ एक मजबूत और त्वरित सुरक्षा कवच प्रदान करती है। यह कम खर्चीली, त्वरित और सुलभ न्याय प्रणाली का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो भारतीय न्यायपालिका के समय और धन दोनों की बचत करती है। इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर जिला न्यायालय उरई के बार संघ जालौन की महासचिव श्रीमती साधना त्रिपाठी, सर्वश्री द्रगपाल सिंह परमार, विश्राम सिंह, शिव सिंह, अभिषेक पाठक, अशोक बाबू पाठक, सत्येन्द्र सिंह, रामजी, शिव कुमार श्रीवास्तव, यादवेन्द्र प्रताप सिंह, श्रीमती सुनीता सिंह, श्री प्रदीप कुमार, श्री सच्चिदानन्द श्रीवास्तव, श्रीमती मन्जूलता आदि विद्वान अधिवक्तागण उपस्थित रहे।1
- अगर आप मध्य प्रदेश से और चार पहिया वाहन चला रहे हो तो आपके लिए ये खबर है ध्यान से सुन लिए क्योंकि इस समय पुलिस एक्सनमोड में है वरना महंगा पड़ सकता है चालान #hindustanprgatimadhyaprdeshlive #viralreels #video #mppolice #terific अगर आप मध्य प्रदेश से और चार पहिया वाहन चला रहे हो तो आपके लिए ये खबर है ध्यान से सुन लिए क्योंकि इस समय पुलिस एक्सनमोड में है वरना महंगा पड़ सकता है चालान1
- जालौन जिले की कुठोंद पुलिस ने बचाई जान यमुना नदी में कूद रहा था युवक नमस्कार दोस्तों आज़ हम आपको जालौन जिले के कुठोंद थाना क्षेत्र से जुड़ी खबर दिखाने जा रहे हैं जहां आज पुलिस की सजगता, सूझ-बूझ और होशियारी से एक युवक की जान बच गई और एक परिवार बिखरने से बच गया1
- गैस एजेंसी पर लगी लंबी कतार, सिलेंडर के लिए भटक रहे उपभोक्ता; ओटीपी के इंतजार में खाली लौट रहे लोग चुरखी रोड स्थित चैनू गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं की भीड़, कर्मचारियों पर अभद्रता का आरोप; घरेलू उपभोक्ताओं ने उठाए सिलेंडरों की उपलब्धता पर सवाल जालौन। नगर के चुरखी रोड स्थित चैनू गैस एजेंसी पर बुधवार को घरेलू गैस सिलेंडर लेने के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतार लगी रही। घंटों इंतजार के बावजूद कई उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर नहीं मिल सका। उपभोक्ताओं का आरोप है कि पिछले चार-पांच दिनों से उनके मोबाइल पर गैस बुकिंग की ओटीपी नहीं आ रही है, जिसके चलते उन्हें एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं के मुताबिक, समस्या की जानकारी लेने के लिए जब वे गैस एजेंसी के कार्यालय पहुंचे तो कंप्यूटर ऑपरेटर से ओटीपी नहीं आने की शिकायत की। आरोप है कि ऑपरेटर ने कथित तौर पर जवाब दिया कि ‘‘ओटीपी नहीं आ रही है तो हम क्या करें, जाओ रोड पर बैठो।’’ उपभोक्ताओं ने इस व्यवहार को अभद्र बताते हुए नाराजगी जताई। गैस सिलेंडर के लिए परेशान उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय पर घरेलू गैस उपलब्ध नहीं कराई जानी है तो कनेक्शन देने का क्या फायदा है। उपभोक्ताओं ने गैस की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि होटल और रेस्टोरेंट में लगातार सिलेंडर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। उपभोक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने, ओटीपी की समस्या दूर कराने और घरेलू गैस सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं को परेशानी न उठानी पड़े।1
- उरई की विशाल मेगा मार्ट से मोबाइल चोरी की घटना सामने आई है चोरी करने वाले शख्स का चेहरा सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गया है लेकिन तलाश उसे चेहरे की अभी भी बनी हुई है आपसे अनुरोध है वीडियो को शेयर कर उक्त की पहचान करने में मदद करें #orai1
- जालौन-औरैया मार्ग के लिंक रोड पर चालक समेत नाले में गिरी कार इस वक्त की बड़ी खबर जालौन से है… रात करीब 11 बजे जालौन-औरैया मुख्य मार्ग से जुड़े एक लिंक रोड पर ऐसा हादसा हुआ, जिसने सड़क और पुलिया की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। जालौन-औरैया मुख्य मार्ग से मोहल्ला चिमांदूबे की तरफ जाने वाले लिंक रोड पर एक कार अचानक अनियंत्रित होकर पुलिया के पास बने नाले में जा गिरी। कार में चालक अकेला था और हादसे के बाद वह गाड़ी के अंदर ही फंस गया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल मदद के लिए पहुंचकर कार को बाहर निकालने की काफी कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही जालौन कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल पर मौजूद रहकर स्थिति का जायजा लिया। हालांकि राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कार UP92 AR 5181 नंबर की बताई जा रही है। कार चला रहे व्यक्ति का नाम गंधर्व बताया जा रहा है, जो सिकरी राजा निवासी हैं और वर्तमान में कोंच चौराहे के पास रहते हैं। बताया जा रहा है कि वह ग्रामीण बैंक, नादीगांव में नौकरी करते हैं। जानकारी के मुताबिक गंधर्व चिमांदूबे निवासी कमलेश के मामा से मिलने आए थे। मुलाकात के बाद रात में वापस लौटते समय यह हादसा हो गया। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल— आखिर हादसा हुआ क्यों? स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस जगह हादसा हुआ, वहां बनी पुलिया काफी संकरी है। इसके अलावा पुलिया के दोनों तरफ पर्याप्त सुरक्षा दीवार या सुरक्षा अवरोध नहीं होने के कारण वाहन चालकों के लिए खतरा बना रहता है। बताया जा रहा है कि पुलिया की स्थिति पहले से ही क्षतिग्रस्त है और यहां पहले भी हादसे हो चुके हैं। तो सवाल अब सिर्फ आज के हादसे का नहीं है… सवाल है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? क्या तब कार्रवाई होगी, जब किसी की जान चली जाएगी? जब यह लिंक रोड सीधे जालौन-औरैया मुख्य मार्ग से जुड़ता है और लोगों का लगातार आवागमन रहता है, तो यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं? पुलिया के दोनों तरफ सुरक्षा दीवार क्यों नहीं है? अगर पुलिया संकरी और क्षतिग्रस्त है तो इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? और अगर यहां पहले भी हादसे हो चुके हैं, तो फिर जिम्मेदार विभाग ने अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं किया? आखिर विभाग किस चीज का इंतजार कर रहा है? एक और हादसे का? किसी बड़ी दुर्घटना का? या फिर किसी परिवार के उजड़ने का? राहत की बात है कि आज रात हुए इस हादसे में चालक गंधर्व सुरक्षित बच गए। लेकिन यह हादसा एक गंभीर चेतावनी जरूर है। आज एक कार नाले में गिरी है और चालक बच गया… लेकिन अगली बार नतीजा ऐसा ही होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। इसलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करे, पुलिया की स्थिति की जांच कराए और दोनों तरफ मजबूत सुरक्षा दीवार समेत जरूरी सुरक्षा इंतजाम कराए। क्योंकि सड़क पर हादसे के बाद राहत पहुंचाना जरूरी है… लेकिन उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि हादसा होने से पहले उसकी वजह को खत्म किया जाए। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करता है… या फिर एक और हादसे का इंतजार जारी रहेगा। दैनिक सुबह — खबर वही, जो जनता के सवालों को आवाज दे।1