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पृथ्वी पर आपका वेट 60 किलो है तो चंद्रमा पर 10 किलो रह जाएगा चंद्रमा और पृथ्वी के बीच अदभुत असमानताएं हैं। इसका व्यास पृथ्वी का 27 फ़ीसद है। धरती से चांद का एक ही हिस्सा दिखता है। पृथ्वी से देखने पर सूरज और चंद्रमा का साइज बराबर दिखता है, जबकि सूरज चन्द्रमा से 400 गुना बड़ा है। चंद्रमा की ग्रेविटी पृथ्वी की तुलना 16.5 प्रतिशत है। चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चांद पर दिन में तापमान +127 डिग्री सेल्सियस रहता है तो रात को गिरकर -173°C तक चला जाता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी है। अभी तक सिर्फ 12 लोग ही चंद्रमा पर पहुंच पाए हैं। चंद्रमा पृथ्वी के ज्वार-भाटा, मौसम, और जीवन के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
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पृथ्वी पर आपका वेट 60 किलो है तो चंद्रमा पर 10 किलो रह जाएगा चंद्रमा और पृथ्वी के बीच अदभुत असमानताएं हैं। इसका व्यास पृथ्वी का 27 फ़ीसद है। धरती से चांद का एक ही हिस्सा दिखता है। पृथ्वी से देखने पर सूरज और चंद्रमा का साइज बराबर दिखता है, जबकि सूरज चन्द्रमा से 400 गुना बड़ा है। चंद्रमा की ग्रेविटी पृथ्वी की तुलना 16.5 प्रतिशत है। चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चांद पर दिन में तापमान +127 डिग्री सेल्सियस रहता है तो रात को गिरकर -173°C तक चला जाता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी है। अभी तक सिर्फ 12 लोग ही चंद्रमा पर पहुंच पाए हैं। चंद्रमा पृथ्वी के ज्वार-भाटा, मौसम, और जीवन के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
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- पृथ्वी पर आपका वेट 60 किलो है तो चंद्रमा पर 10 किलो रह जाएगा चंद्रमा और पृथ्वी के बीच अदभुत असमानताएं हैं। इसका व्यास पृथ्वी का 27 फ़ीसद है। धरती से चांद का एक ही हिस्सा दिखता है। पृथ्वी से देखने पर सूरज और चंद्रमा का साइज बराबर दिखता है, जबकि सूरज चन्द्रमा से 400 गुना बड़ा है। चंद्रमा की ग्रेविटी पृथ्वी की तुलना 16.5 प्रतिशत है। चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 3.8 सेमी दूर जा रहा है। चांद पर दिन में तापमान +127 डिग्री सेल्सियस रहता है तो रात को गिरकर -173°C तक चला जाता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ के रूप में पानी है। अभी तक सिर्फ 12 लोग ही चंद्रमा पर पहुंच पाए हैं। चंद्रमा पृथ्वी के ज्वार-भाटा, मौसम, और जीवन के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।1
- Post by Surendra Kumar1
- बाजपुर में मंडल अध्यक्ष महिला मोर्चा कुसुम सैनी जी के आवास पर होली महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में #जिलाअध्यक्ष #महिला #मोर्चा #आकांक्षा #ठाकुर जी रही इसमें नगर की ही बहुत सारी महिलाओं ने प्रतिभाग़ किया तथा मिलजुल कर होली खेली गई इसमें फूलों की होली व रंगों की होली का आयोजन किया गया व सबसे होली को धूमधाम से मनाने की अपील की गई। आज के होली महोत्सव में कुसुम सैनी जी दिव्या गोयल जी रितेश जी मधु जी ज्योति जी पुष्पा राजेश जी गीता जी अर्चना जी नीतू जी रीना सक्सेना जी पूजा जिंदल जी स्वेता जी नमिता जी सुनीता जी नीलम जी निशा जी पूजा जी पूनम जी सरिता जी नमनम जी रेखा जी सीमा जी उपस्थित2
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- Post by शैल शक्ति1
- नोएडा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने परिवारिक रिश्तों को शर्मसार कर दिया। जानकारी के अनुसार, जिस पिता ने अपने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी बेटे ने अपने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि घटना के पीछे पारिवारिक विवाद और आपसी तनाव मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी बेटे और पिता के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर बेटे ने पिता पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश करते हुए शव के टुकड़े करने का भी प्रयास किया, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि हत्या के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि पारिवारिक विवाद अब गंभीर अपराधों का रूप लेते जा रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है।1
- उत्तराखंड देहरादून में एक मुस्लिम युवक ने फेसबुक में फेक आईडी बनाकर एक युवती को नौकरी का झांसा देकर होटल में बुलाया। युवती की सूझबूझ से स्थानीय लोगों ने युवक को पकड़ लिया।1
- नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है। अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा। पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार, शायद ही कोई सुने। बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।1
- खटीमा में होली के रंगों में रंगे सीएम धामी, बोले- 'खटीमा मेरा घर और खटीमा वासी मेरा परिवार'। खटीमा (ऊधम सिंह नगर) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को अपने गृह क्षेत्र खटीमा पहुँचे, जहाँ उन्होंने आयोजित भव्य 'होली मिलन समारोह' में प्रतिभाग किया। सनातन धर्मशाला स्थित रामलीला मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पूरी तरह से होली के रंगों और लोक संस्कृति के उल्लास में डूबे नजर आए। इस दौरान पहुंचे जनसमूह को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक कुमाऊँनी होली, शास्त्रीय होली और थारू होली गायन में स्थानीय लोगों के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और होली गीतों पर ठुमके भी लगाए। मुख्यमंत्री के साथ जनसमूह ने फूलों की होली भी खेली। जनता को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में मुख्यमंत्री ने कहा, "खटीमा मेरा घर है और यहाँ के निवासी मेरा परिवार हैं। अपनों के बीच आकर मुझे जो प्रसन्नता मिलती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती"। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएं और पर्व ही हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार हैं। होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने खटीमा को 'मिनी इंडिया' और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक बताया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जा मंत्री मंजीत सिंह, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, उपा0 अमित कुमार पांडे,महासचिव रमेश चंद्र जोशी,नंदन सिंह खड़ायत, गम्भीर सिंह धामी, सतीश भट्ट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति वी सी जिला विकास प्राधिकरण जयकिशन, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, सी एमओ डॉ के के अग्रवाल,जिला विकास अधिकारी सुशील मोहन डोभाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।- पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री उत्तराखंड1