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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष  टूटने लगी है पश्चिमी विक्षोभ की कमर , अब तैयार रहें जल संकट के लिए  नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है।  अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा।  पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार,  शायद ही कोई सुने।  बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।

3 hrs ago
user_NTL
NTL
Nainital, Uttarakhand•
3 hrs ago

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष  टूटने लगी है पश्चिमी विक्षोभ की कमर , अब तैयार रहें जल संकट के लिए  नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है।  अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा।  पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार,  शायद ही कोई सुने।  बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।

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  • भीमताल: सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी द्वारा उठाई गई भीमताल झील की गाद मिट्टी निकासी और सुरक्षा की मांग पर सिंचाई विभाग ने कार्यवाही की है। बृजवासी द्वारा सिंचाई विभाग से पत्राचार करने के बाद, विभाग ने अपनी कार्यवाही से बृजवासी को अवगत कराया है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि भीमताल झील से मिट्टी, गाद और सिल्ट निकासी के लिए अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न फर्मों से दर आमंत्रण की गई है। दर आमंत्रण के पश्चात प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृति और धन आवंटन के लिए प्रेषित किया जाएगा। इसके अलावा, झील के चारों ओर पर्यटन सुरक्षा दृष्टि से अच्छी रेलिंग लगाए जाने के लिए जिला योजना के अंतर्गत 12.55 लाख का प्राक्कलन तैयार कर जिला पर्यटन अधिकारी को प्रेषित किया जाएगा।
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    भीमताल: सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी द्वारा उठाई गई भीमताल झील की गाद मिट्टी निकासी और सुरक्षा की मांग पर सिंचाई विभाग ने कार्यवाही की है। बृजवासी द्वारा सिंचाई विभाग से पत्राचार करने के बाद, विभाग ने अपनी कार्यवाही से बृजवासी को अवगत कराया है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि भीमताल झील से मिट्टी, गाद और सिल्ट निकासी के लिए अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न फर्मों से दर आमंत्रण की गई है। दर आमंत्रण के पश्चात प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृति और धन आवंटन के लिए प्रेषित किया जाएगा।
इसके अलावा, झील के चारों ओर पर्यटन सुरक्षा दृष्टि से अच्छी रेलिंग लगाए जाने के लिए जिला योजना के अंतर्गत 12.55 लाख का प्राक्कलन तैयार कर जिला पर्यटन अधिकारी को प्रेषित किया जाएगा।
    user_Nainital news
    Nainital news
    Local News Reporter Nainital, Uttarakhand•
    34 min ago
  • उत्तराखंड देहरादून में एक मुस्लिम युवक ने फेसबुक में फेक आईडी बनाकर एक युवती को नौकरी का झांसा देकर होटल‌ में बुलाया। युवती की सूझबूझ से स्थानीय लोगों ने युवक को पकड़ लिया।
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    उत्तराखंड देहरादून में एक मुस्लिम युवक ने फेसबुक में फेक आईडी बनाकर एक युवती को नौकरी का झांसा देकर होटल‌ में बुलाया।
युवती की सूझबूझ से स्थानीय लोगों ने युवक को पकड़ लिया।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    1 hr ago
  • नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है।  अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा।  पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार,  शायद ही कोई सुने।  बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।
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    नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है। 
अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा। 
पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार,  शायद ही कोई सुने। 
बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    3 hrs ago
  • Post by Surendra Kumar
    1
    Post by Surendra Kumar
    user_Surendra Kumar
    Surendra Kumar
    Paint Shop कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    8 hrs ago
  • जिला अलीगढ़ दानिश सच का साथ 🙏🙏👍
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    जिला अलीगढ़ दानिश सच का साथ 🙏🙏👍
    user_Danish Khan
    Danish Khan
    Dancer अल्मोड़ा, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    10 hrs ago
  • बाजपुर में मंडल अध्यक्ष महिला मोर्चा कुसुम सैनी जी के आवास पर होली महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में #जिलाअध्यक्ष #महिला #मोर्चा #आकांक्षा #ठाकुर जी रही इसमें नगर की ही बहुत सारी महिलाओं ने प्रतिभाग़ किया तथा मिलजुल कर होली खेली गई इसमें फूलों की होली व रंगों की होली का आयोजन किया गया व सबसे होली को धूमधाम से मनाने की अपील की गई। आज के होली महोत्सव में कुसुम सैनी जी दिव्या गोयल जी रितेश जी मधु जी ज्योति जी पुष्पा राजेश जी गीता जी अर्चना जी नीतू जी रीना सक्सेना जी पूजा जिंदल जी स्वेता जी नमिता जी सुनीता जी नीलम जी निशा जी पूजा जी पूनम जी सरिता जी नमनम जी रेखा जी सीमा जी उपस्थित
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    बाजपुर में मंडल अध्यक्ष महिला मोर्चा कुसुम सैनी जी के आवास पर होली महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में #जिलाअध्यक्ष #महिला #मोर्चा #आकांक्षा #ठाकुर जी रही इसमें नगर की ही बहुत सारी महिलाओं ने प्रतिभाग़ किया तथा मिलजुल कर होली खेली गई इसमें फूलों की होली व रंगों की होली का आयोजन किया गया व सबसे होली को धूमधाम से मनाने की अपील की गई।
आज के होली महोत्सव में कुसुम सैनी जी दिव्या गोयल जी रितेश जी मधु जी  ज्योति जी  पुष्पा राजेश जी गीता जी अर्चना जी नीतू जी रीना सक्सेना जी पूजा जिंदल जी स्वेता जी नमिता जी सुनीता जी नीलम जी निशा जी पूजा जी पूनम जी सरिता जी नमनम जी  रेखा जी सीमा जी उपस्थित
    user_Kush BAZPUR
    Kush BAZPUR
    Bajpur, Udam Singh Nagar•
    1 hr ago
  • 💩😺
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    💩😺
    user_Mahaveer Saini
    Mahaveer Saini
    Psychologist बगवालीपोखर, अल्मोड़ा, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • ईरान में जान बचाने को भागते लोग, आसमान में धुएं का गुबार।
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    ईरान में जान बचाने को भागते लोग, आसमान में धुएं का गुबार।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    2 hrs ago
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