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पापडी गांव विकास से वंचित बरसात से रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूत ग्रामीण राजस्थान धडकन लोकेश मीणा लाखेरी/पापड़ी। क्षेत्र में हाई लेवल ब्रिज की मांग पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। पापड़ी सहित आसपास के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों को हर वर्ष बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेलवे नालों में पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पापड़ी रेलवे नाले का बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका है, इसके बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ। बरसात के समय यह रेलवे नाला हादसों का कारण बन जाता है। पानी के तेज बहाव में लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। कई बार छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया बरसात के दिनों में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को जान हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी हाई लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आगामी पंचायत चुनावों में सरपंच पद के लिए होने वाले मतदान का बहिष्कार किया जाएगा ग्रामीण लेखराज मीणा ने कहा कि सरकारें वर्षों से अधूरे वादे करती आ रही हैं। हर बार आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन विकास कार्य केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गांव का विकास कब होगा और सरकारें अपने वादे कब पूरे करेंगी। वहीं हरिओम मीणा ने बताया कि चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल गांव के विकास और समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन वादों को भूल जाते हैं। चाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की, दोनों ही दलों ने क्षेत्र की जनता को केवल आश्वासन ही दिए हैं ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रचार किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में क्षेत्र का विकास शून्य नजर आता है। यदि जल्द ही हाई लेवल ब्रिज का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं, या फिर ग्रामीणों की यह मांग भी अन्य वादों की तरह अधूरी ही रह जाएगी।

5 hrs ago
user_Lokesh meena
Lokesh meena
Reporter Indragarh, Bundi•
5 hrs ago

पापडी गांव विकास से वंचित बरसात से रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूत ग्रामीण राजस्थान धडकन लोकेश मीणा लाखेरी/पापड़ी। क्षेत्र में हाई लेवल ब्रिज की मांग पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। पापड़ी सहित आसपास के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों को हर वर्ष बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेलवे नालों में पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पापड़ी रेलवे नाले का बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका है, इसके बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ। बरसात के समय यह रेलवे नाला हादसों का कारण बन जाता है। पानी के तेज बहाव में लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। कई बार छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया बरसात के दिनों में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को जान हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी

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दी है कि यदि इस बार भी हाई लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आगामी पंचायत चुनावों में सरपंच पद के लिए होने वाले मतदान का बहिष्कार किया जाएगा ग्रामीण लेखराज मीणा ने कहा कि सरकारें वर्षों से अधूरे वादे करती आ रही हैं। हर बार आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन विकास कार्य केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गांव का विकास कब होगा और सरकारें अपने वादे कब पूरे करेंगी। वहीं हरिओम मीणा ने बताया कि चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल गांव के विकास और समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन वादों को भूल जाते हैं। चाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की, दोनों ही दलों ने क्षेत्र की जनता को केवल आश्वासन ही दिए हैं ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रचार किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में क्षेत्र का विकास शून्य नजर आता है। यदि जल्द ही हाई लेवल ब्रिज का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं, या फिर ग्रामीणों की यह मांग भी अन्य वादों की तरह अधूरी ही रह जाएगी।

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  • पापडी गांव विकास से वंचित बरसात से रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूत ग्रामीण राजस्थान धडकन लोकेश मीणा लाखेरी/पापड़ी। क्षेत्र में हाई लेवल ब्रिज की मांग पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। पापड़ी सहित आसपास के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों को हर वर्ष बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेलवे नालों में पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पापड़ी रेलवे नाले का बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका है, इसके बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ। बरसात के समय यह रेलवे नाला हादसों का कारण बन जाता है। पानी के तेज बहाव में लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। कई बार छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया बरसात के दिनों में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को जान हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी हाई लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आगामी पंचायत चुनावों में सरपंच पद के लिए होने वाले मतदान का बहिष्कार किया जाएगा ग्रामीण लेखराज मीणा ने कहा कि सरकारें वर्षों से अधूरे वादे करती आ रही हैं। हर बार आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन विकास कार्य केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गांव का विकास कब होगा और सरकारें अपने वादे कब पूरे करेंगी। वहीं हरिओम मीणा ने बताया कि चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल गांव के विकास और समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन वादों को भूल जाते हैं। चाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की, दोनों ही दलों ने क्षेत्र की जनता को केवल आश्वासन ही दिए हैं ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रचार किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में क्षेत्र का विकास शून्य नजर आता है। यदि जल्द ही हाई लेवल ब्रिज का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं, या फिर ग्रामीणों की यह मांग भी अन्य वादों की तरह अधूरी ही रह जाएगी।
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    पापडी गांव विकास से वंचित बरसात से रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूत ग्रामीण
राजस्थान धडकन 
लोकेश मीणा लाखेरी/पापड़ी।
क्षेत्र में हाई लेवल ब्रिज की मांग पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। पापड़ी सहित आसपास के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों को हर वर्ष बरसात के मौसम में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेलवे नालों में पानी भर जाने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पापड़ी रेलवे नाले का बजट पहले ही स्वीकृत हो चुका है, इसके बावजूद आज तक धरातल पर कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ। बरसात के समय यह रेलवे नाला हादसों का कारण बन जाता है। पानी के तेज बहाव में लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है। कई बार छोटे-बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया बरसात के दिनों में सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों को जान हथेली पर रखकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है ग्रामीणों में इस समस्या को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी हाई लेवल ब्रिज का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो आगामी पंचायत चुनावों में सरपंच पद के लिए होने वाले मतदान का बहिष्कार किया जाएगा ग्रामीण लेखराज मीणा ने कहा कि सरकारें वर्षों से अधूरे वादे करती आ रही हैं। हर बार आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन विकास कार्य केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गांव का विकास कब होगा और सरकारें अपने वादे कब पूरे करेंगी।
वहीं हरिओम मीणा ने बताया कि चुनाव के समय सभी राजनीतिक दल गांव के विकास और समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन वादों को भूल जाते हैं। चाहे बीजेपी की सरकार हो या कांग्रेस की, दोनों ही दलों ने क्षेत्र की जनता को केवल आश्वासन ही दिए हैं ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय विकास के नाम पर बड़े-बड़े प्रचार किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में क्षेत्र का विकास शून्य नजर आता है। यदि जल्द ही हाई लेवल ब्रिज का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं, या फिर ग्रामीणों की यह मांग भी अन्य वादों की तरह अधूरी ही रह जाएगी।
    user_Lokesh meena
    Lokesh meena
    Reporter Indragarh, Bundi•
    5 hrs ago
  • Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    1
    Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    user_राजू काँकोरिया खण्डार
    राजू काँकोरिया खण्डार
    Journalist खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • Post by Mastram Kevat
    1
    Post by Mastram Kevat
    user_Mastram Kevat
    Mastram Kevat
    टोंक, टोंक, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • Post by हनुमान गौतम
    1
    Post by हनुमान गौतम
    user_ हनुमान गौतम
    हनुमान गौतम
    दूनी, टोंक, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • “राष्ट्रीय युवा दिवस पर कोटा में युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान” विधायक संदीप शर्मा ने क्या कहा जानिए
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    “राष्ट्रीय युवा दिवस पर कोटा में युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान” विधायक संदीप शर्मा ने क्या कहा जानिए
    user_Mayur times news
    Mayur times news
    Journalist Ladpura, Kota•
    22 min ago
  • #kotacrime कोटा के नयापुरा स्थित एक होटल में पुलिस की रेड: देह व्यापार का आरोप: एक दलाल सहित 8 युवक और 8 युवतियां डिटेन: ना नशे का कारोबार रुक रहा, ना चाकूबाजी, खुलेआम फायरिंग, चोरी चकारी और ना चैन स्नैचिंग और लूटमार...
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    #kotacrime कोटा के नयापुरा स्थित एक होटल में पुलिस की रेड: देह व्यापार का आरोप: एक दलाल सहित 8 युवक और 8 युवतियां डिटेन: ना नशे का कारोबार रुक रहा, ना चाकूबाजी, खुलेआम फायरिंग, चोरी चकारी और ना चैन स्नैचिंग और लूटमार...
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर Ladpura, Kota•
    3 hrs ago
  • राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़ का सुप्रभात अंक। सूवे के मुखिया भजनलाल और प्रशासनिक मुखिया राजीव शर्मा जी अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कमर कसे हुए हैं। किंतु कोटा शहर में अपराधों की दुनिया में बाहर है। पुलिस अपराधियों को पढ़ते पढ़ते थक जाती है। और अपराधी अपराध करते-करते बाज नहीं आते हैं। बरसों से कोटा की हृदय स्थली नयापुरा थाने के कुछ दूरी पर थाने की चौकी से कुछ फलग की दूरी पर पुलिस की छत्रछाया में चल रहा था देह व्यापार का पुरजोर धंधा। हम निरंतर समाज के हित में अपनी बुलेटिन में इस होटल के मालिक के सामने से समाचार प्रकाशित कर रहे थे। लेकिन वह हमसे यही कहता था। दम हो तो पड़वा के बताओ₹50000 महीने की बंदी नयापुरा पुलिस और 25000 की पुलिस चौकी को देता हूं। हमने उसके चैलेंज को स्वीकार किया और जो अफसर को बताया नयापुरा पुलिस की सीओ को वताया। उन्होंने अपने सूत्रों के माध्यम से बिना मुखबिर भेजें उस रैकेट का पर्दा फास्ट किया। अगर बात लीक हो जाती तो कई पुलिसकर्मी भी कई सिपाही दीवान भी उस होटल में सुरा और सुंदरी का मजा लेते थे । इसलिए इस ऑपरेशन को बहुत गोपनी रखा गया।और इसका ऑपरेशन किया गया। धन्यवाद देना चाहता हूं डीएसपी चौहान को उनकी टीम को प्रशिक्षु आईपीएस की सूझबूझ को जिन्होंने सैकड़ो लोगों को ऐडस से गंदी महिलाओं के माध्यम से बचाया। लेकिन शहर पुलिस कप्तान तेजस्विनी महिला है। और महिलाएं सरेआम दिन दहाड़े अपना जिस्म बेच रही हो। उन्होंने अभी तक थाना नयापुरा पुलिस के सीआई चौकी प्रभारी और तों और एक दीवानों सिपाही को जिम्मेदार नहीं माना है। और न उन्होंने लाईनहजीर जैसी साधारण सजा दी। न्यायालय से यह महिलाएं छूट जाएगी होटल मालिक जमानत पर बाहर आ जाएगा फिर वह इन महिलाओं के द्वारा जिस्मफरोशी का होटल में बाजार लगाएगा क्योंकि पूर्व में भी क्यों बार पकड़ा जा चुका है। प्रशासन ने उसकी होटल अभी तक सीज नहीं की है। ब्यावर का रहने वाला यह बदमाश कोटा पिछले वर्षों पूर्व कोटा आया था। होटल कम चलती थी। तभी से 15 साल से देह व्यापार का धंधा कर रहा है। दो विधायकों का कार्यकाल भी यह खुला धंधा करवाता था। कोटा उत्तर के विधायक शांति धारीवाल और प्रहलद गुंजल भी रह चुके हैं। उनके जमाने में भी यह धंधा करता था। उनके पास भी कई शिकायत थी। गई लेकिन उन्होंने भी इसे पुलिस से कहकर नहीं पकड वाया। शहर के मध्य स्वामी विवेकानंद की आदमकट प्रतिमाकी मूर्ति हो। करोड़ों रुपए खर्च कर चोराहा बनाया गया हो। और उसके बीचो-बीच यह होटल मालिक होटल की आड़ में महिलाओं का जिस्म का खुला व्यापार का धंधा करता हो कितना बड़ा दुर्भाग्य। सांसद का विधायकों का पत्रकारों का कि इस हिस्ट्रीशीटर व्यापारी पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई ना करवा पाए।
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    राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़ का सुप्रभात अंक। 
सूवे के मुखिया भजनलाल और प्रशासनिक मुखिया राजीव शर्मा जी अपराधों पर लगाम लगाने के लिए कमर कसे हुए हैं। 
किंतु कोटा शहर में अपराधों की दुनिया में बाहर है। पुलिस अपराधियों को पढ़ते पढ़ते थक जाती है। और अपराधी अपराध करते-करते बाज नहीं आते हैं। 
बरसों से कोटा की हृदय स्थली नयापुरा थाने के कुछ दूरी पर थाने की चौकी से कुछ फलग की दूरी पर पुलिस की छत्रछाया में चल रहा था देह व्यापार का पुरजोर धंधा। हम निरंतर समाज के हित में अपनी बुलेटिन में इस होटल के मालिक के सामने से समाचार प्रकाशित कर रहे थे। लेकिन वह हमसे यही कहता था। दम हो तो पड़वा के बताओ₹50000 महीने की बंदी नयापुरा पुलिस और 25000 की पुलिस चौकी को देता हूं। हमने उसके चैलेंज को स्वीकार किया और जो अफसर को बताया नयापुरा पुलिस की  सीओ को वताया।
उन्होंने अपने सूत्रों के माध्यम से बिना मुखबिर भेजें उस रैकेट का पर्दा फास्ट किया। अगर बात लीक हो जाती तो कई पुलिसकर्मी भी कई सिपाही दीवान भी उस होटल में सुरा और सुंदरी का मजा लेते थे । इसलिए इस ऑपरेशन को बहुत गोपनी रखा गया।और इसका ऑपरेशन किया गया। 
धन्यवाद देना चाहता हूं डीएसपी चौहान को उनकी टीम को प्रशिक्षु आईपीएस की सूझबूझ को जिन्होंने सैकड़ो लोगों को ऐडस से गंदी महिलाओं के माध्यम से बचाया।
लेकिन शहर पुलिस कप्तान तेजस्विनी महिला है। और महिलाएं सरेआम दिन दहाड़े अपना जिस्म बेच रही हो। उन्होंने अभी तक थाना नयापुरा पुलिस के सीआई चौकी प्रभारी और तों और एक दीवानों सिपाही को जिम्मेदार नहीं माना है। और न उन्होंने लाईनहजीर जैसी साधारण सजा दी।
न्यायालय से यह महिलाएं छूट जाएगी होटल मालिक जमानत पर बाहर आ जाएगा फिर वह इन महिलाओं के द्वारा जिस्मफरोशी का होटल में बाजार लगाएगा क्योंकि पूर्व में भी क्यों बार पकड़ा जा चुका है। प्रशासन ने उसकी होटल अभी तक सीज नहीं की है। 
ब्यावर का रहने वाला यह बदमाश कोटा पिछले वर्षों पूर्व कोटा आया था। होटल कम चलती थी। तभी से 15 साल से देह व्यापार का धंधा कर रहा है। दो विधायकों का कार्यकाल भी यह खुला धंधा करवाता था।
कोटा उत्तर के विधायक शांति धारीवाल और प्रहलद गुंजल भी रह चुके हैं। उनके जमाने में भी यह धंधा करता था। उनके पास भी कई शिकायत थी। गई लेकिन उन्होंने भी इसे पुलिस से कहकर नहीं पकड वाया। 
शहर के मध्य  स्वामी विवेकानंद की आदमकट प्रतिमाकी मूर्ति हो। करोड़ों रुपए खर्च कर चोराहा बनाया गया हो। और उसके बीचो-बीच यह होटल मालिक होटल की आड़ में महिलाओं का जिस्म का खुला व्यापार का धंधा करता हो कितना बड़ा दुर्भाग्य।
सांसद का विधायकों का पत्रकारों का कि इस हिस्ट्रीशीटर व्यापारी पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई ना करवा पाए।
    user_Ramesh Gandhi
    Ramesh Gandhi
    Acupuncture school Ladpura, Kota•
    5 hrs ago
  • Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    1
    Post by राजू काँकोरिया खण्डार
    user_राजू काँकोरिया खण्डार
    राजू काँकोरिया खण्डार
    Journalist खंडर, सवाई माधोपुर, राजस्थान•
    19 hrs ago
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