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बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर कथित तौर पर पुलिस द्वारा हमला किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने आरोप लगाया है कि इमामगंज थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ कवरेज के दौरान अभद्र व्यवहार किया और मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का कहना है कि वह संतोष कुमार अग्रवाल के घर पर एक घटना की कवरेज के लिए पहुंचे थे, जहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए वह घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास किया। पत्रकार सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक पुलिस अधिकारी के अनुचित व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय होगा। संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और पत्रकारों का कार्य जनता तक सत्य और तथ्य पहुंचाना है। ऐसे में कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ डराने-धमकाने या दुर्व्यवहार की घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकतीं। इस मामले में पत्रकार सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि मामले को दबाने या अनदेखा करने का प्रयास हुआ, तो जिले के पत्रकार एकजुट होकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। पुलिस और पत्रकार—दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करती है, जबकि पत्रकार समाज के सामने सच रखने का। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए। यदि घटना का वीडियो वास्तव में उपलब्ध है, तो जिला पुलिस प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के उसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस अधिकारी को न्याय मिलना चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर वर्दी की आड़ में शक्ति का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। गया पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि अपनी निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करने की परीक्षा है। यदि ऐसे मामलों में समय पर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा और यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।

9 hrs ago
user_हेमन्त कुमार  सिंह
हेमन्त कुमार सिंह
जनहित मे समर्पित Wazirganj•
9 hrs ago

बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर कथित तौर पर पुलिस द्वारा हमला किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने आरोप लगाया है कि इमामगंज थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ कवरेज के दौरान अभद्र व्यवहार किया और मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का कहना है कि वह संतोष कुमार अग्रवाल के घर पर एक घटना की कवरेज के लिए पहुंचे थे, जहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए वह घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास किया। पत्रकार सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक पुलिस अधिकारी के अनुचित व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय होगा। संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और पत्रकारों का कार्य जनता तक सत्य और तथ्य पहुंचाना है। ऐसे में कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ डराने-धमकाने या दुर्व्यवहार की घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकतीं। इस मामले में पत्रकार सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि मामले को दबाने या अनदेखा करने का प्रयास हुआ, तो जिले के पत्रकार एकजुट होकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। पुलिस और पत्रकार—दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करती है, जबकि पत्रकार समाज के सामने सच रखने का। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए। यदि घटना का वीडियो वास्तव में उपलब्ध है, तो जिला पुलिस प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के उसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस अधिकारी को न्याय मिलना चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर वर्दी की आड़ में शक्ति का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। गया पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि अपनी निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करने की परीक्षा है। यदि ऐसे मामलों में समय पर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा और यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।

More news from बिहार and nearby areas
  • नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड क्षेत्र के मंझवे, तुंगी, चक, धरमपुर, उमराव बीघा समेत कई गांवों में सोमवार को दोपहर में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश ने गर्मी से हलकान लोगों को राहत प्रदान की। बारिश का लुत्फ उठाते नन्हे बच्चे अली और आफिया की तस्वीर ने बारिश की खुशी को और बढ़ा दिया। हालांकि, यह बारिश सिर्फ 10 मिनट तक ही हुई, लेकिन इस छोटे से समय में ही मौसम सुहाना हो गया और गर्मी से परेशान लोगों को काफी राहत मिली।
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    नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड क्षेत्र के मंझवे, तुंगी, चक, धरमपुर, उमराव बीघा समेत कई गांवों में सोमवार को दोपहर में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश ने गर्मी से हलकान लोगों को राहत प्रदान की। बारिश का लुत्फ उठाते नन्हे बच्चे अली और आफिया की तस्वीर ने बारिश की खुशी को और बढ़ा दिया। हालांकि, यह बारिश सिर्फ 10 मिनट तक ही हुई, लेकिन इस छोटे से समय में ही मौसम सुहाना हो गया और गर्मी से परेशान लोगों को काफी राहत मिली।
    user_Imtiyaj A Fonwel
    Imtiyaj A Fonwel
    हिसुआ, नवादा, बिहार•
    14 hrs ago
  • बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक मामले की कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान पर अभद्र व्यवहार और मारपीट करने की कोशिश का आरोप लगाया है। सुशील कुमार ने बताया कि वह सूचना मिलने पर संतोष कुमार अग्रवाल के घर पहुंचे थे, जहां पुलिस मौजूद थी। वह पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान, सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया तथा उनकी ओर हाथ उठाकर मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान के विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वह जिले के पत्रकारों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।
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    बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक मामले की कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान पर अभद्र व्यवहार और मारपीट करने की कोशिश का आरोप लगाया है। सुशील कुमार ने बताया कि वह सूचना मिलने पर संतोष कुमार अग्रवाल के घर पहुंचे थे, जहां पुलिस मौजूद थी। वह पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान, सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया तथा उनकी ओर हाथ उठाकर मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान के विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वह जिले के पत्रकारों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।
    user_News Of Nawada
    News Of Nawada
    Local News Reporter सिरदला, नवादा, बिहार•
    10 hrs ago
  • बिहार के गया जिले में गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत एक बड़ी पदयात्रा आयोजित की गई। यह पदयात्रा गयाजी के गांधी मैदान से शुरू हुई और सैकड़ों लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। पदयात्रा समाहरणालय पहुंची जहां जिला पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में गायों के संरक्षण और उनके सम्मान को लेकर मांगें रखी गई हैं।
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    बिहार के गया जिले में गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत एक बड़ी पदयात्रा आयोजित की गई। यह पदयात्रा गयाजी के गांधी मैदान से शुरू हुई और सैकड़ों लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। पदयात्रा समाहरणालय पहुंची जहां जिला पदाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में गायों के संरक्षण और उनके सम्मान को लेकर मांगें रखी गई हैं।
    user_Uma Shanker singh
    Uma Shanker singh
    रिपोर्टर Gaya, Bihar•
    13 hrs ago
  • *30 तारीख को पूरे बिहार में होगा महाआंदोलन, नेहा बोरा का ऐलान, पटना आते ही खूब दहाड़ी* *30 तारीख को पूरे बिहार में होगा महाआंदोलन, नेहा बोरा का ऐलान, पटना आते ही खूब दहाड़ी*
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    *30 तारीख को पूरे बिहार में होगा महाआंदोलन, नेहा बोरा का ऐलान, पटना आते ही खूब दहाड़ी*
*30 तारीख को पूरे बिहार में होगा महाआंदोलन, नेहा बोरा का ऐलान, पटना आते ही खूब दहाड़ी*
    user_Ashutosh kumar
    Ashutosh kumar
    Lawyer Lakhibag, Manpur•
    9 hrs ago
  • बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर कथित तौर पर पुलिस द्वारा हमला किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने आरोप लगाया है कि इमामगंज थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ कवरेज के दौरान अभद्र व्यवहार किया और मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का कहना है कि वह संतोष कुमार अग्रवाल के घर पर एक घटना की कवरेज के लिए पहुंचे थे, जहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए वह घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास किया। पत्रकार सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक पुलिस अधिकारी के अनुचित व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय होगा। संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और पत्रकारों का कार्य जनता तक सत्य और तथ्य पहुंचाना है। ऐसे में कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ डराने-धमकाने या दुर्व्यवहार की घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकतीं। इस मामले में पत्रकार सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि मामले को दबाने या अनदेखा करने का प्रयास हुआ, तो जिले के पत्रकार एकजुट होकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। पुलिस और पत्रकार—दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करती है, जबकि पत्रकार समाज के सामने सच रखने का। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए। यदि घटना का वीडियो वास्तव में उपलब्ध है, तो जिला पुलिस प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के उसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस अधिकारी को न्याय मिलना चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर वर्दी की आड़ में शक्ति का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। गया पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि अपनी निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करने की परीक्षा है। यदि ऐसे मामलों में समय पर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा और यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।
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    बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर कथित तौर पर पुलिस द्वारा हमला किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने आरोप लगाया है कि इमामगंज थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ कवरेज के दौरान अभद्र व्यवहार किया और मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का कहना है कि वह संतोष कुमार अग्रवाल के घर पर एक घटना की कवरेज के लिए पहुंचे थे, जहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए वह घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास किया।

पत्रकार सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक पुलिस अधिकारी के अनुचित व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय होगा। संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और पत्रकारों का कार्य जनता तक सत्य और तथ्य पहुंचाना है। ऐसे में कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ डराने-धमकाने या दुर्व्यवहार की घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकतीं।

इस मामले में पत्रकार सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि मामले को दबाने या अनदेखा करने का प्रयास हुआ, तो जिले के पत्रकार एकजुट होकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। पुलिस और पत्रकार—दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करती है, जबकि पत्रकार समाज के सामने सच रखने का। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए।

यदि घटना का वीडियो वास्तव में उपलब्ध है, तो जिला पुलिस प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के उसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस अधिकारी को न्याय मिलना चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर वर्दी की आड़ में शक्ति का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। गया पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि अपनी निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करने की परीक्षा है। यदि ऐसे मामलों में समय पर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा और यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।
    user_हेमन्त कुमार  सिंह
    हेमन्त कुमार सिंह
    जनहित मे समर्पित Wazirganj•
    9 hrs ago
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