सतना के रामपुर बघेलान स्थित प्रिज्म जॉनसन सीमेंट प्लांट के बाहर मातम और गुस्सा पसरा है, जहाँ 23 वर्षीय पुष्पेंद्र साहू की माइंस हादसे में मौत के बाद उनके परिजन शव लेकर मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए हैं। परिजनों ने शव रखकर चक्काजाम कर दिया है, जिसमें सैकड़ों महिलाएं और पुरुष प्लांट के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रिज्म माइंस 'मौत का कुआं' बन चुका है और बीते 30 दिनों के भीतर यह तीन जिंदगियां लील चुका है। पुष्पेंद्र का शव जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ने के बाद जब प्रिज्म के मुख्य गेट पर पहुँचा, तो वहाँ कोहराम मच गया। एक महीने में यह तीसरी मौत है, जिसके बाद ग्रामीणों का सब्र टूट गया है और उनका गुस्सा फूट पड़ा है। पुलिस अधिकारियों और जनपद अध्यक्ष छोटू सिंह द्वारा ग्रामीणों को समझाने के बाद मामला थोड़ा शांत हुआ। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि पीड़ित परिवार को पेंशन दी जाए और उसके एक सदस्य को नौकरी मिले। यह घटना प्रिज्म प्रबंधन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाती है कि क्या उनकी असावधानी मजदूरों की जान ले रही है और क्या सुरक्षा नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं।
सतना के रामपुर बघेलान स्थित प्रिज्म जॉनसन सीमेंट प्लांट के बाहर मातम और गुस्सा पसरा है, जहाँ 23 वर्षीय पुष्पेंद्र साहू की माइंस हादसे में मौत के बाद उनके परिजन शव लेकर मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए हैं। परिजनों ने शव रखकर चक्काजाम कर दिया है, जिसमें सैकड़ों महिलाएं और पुरुष प्लांट के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रिज्म माइंस 'मौत का कुआं' बन चुका है और बीते 30 दिनों के भीतर यह तीन जिंदगियां लील चुका है। पुष्पेंद्र का शव जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ने के बाद जब प्रिज्म के मुख्य गेट पर पहुँचा, तो वहाँ कोहराम मच गया। एक महीने में यह तीसरी मौत है, जिसके बाद ग्रामीणों का सब्र टूट गया है और उनका गुस्सा फूट पड़ा है। पुलिस अधिकारियों और जनपद अध्यक्ष छोटू सिंह द्वारा ग्रामीणों को समझाने के बाद मामला थोड़ा शांत हुआ। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि पीड़ित परिवार को पेंशन दी जाए और उसके एक सदस्य को नौकरी मिले। यह घटना प्रिज्म प्रबंधन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाती है कि क्या उनकी असावधानी मजदूरों की जान ले रही है और क्या सुरक्षा नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं।
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रामपुर बघेलान में रोगी कल्याण समिति द्वारा किए गए खर्चों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिससे समिति की मनमानी पर प्रश्नचिह्न लगा है। लगातार दस्तावेज़ सामने आ रहे हैं, जिसमें हनुमत इंटरप्राइजेज का लगभग ₹30,000 का सीसीटीवी कैमरा से संबंधित बिल (क्रमांक 85) प्रमुख है। इस बिल के साथ-साथ कार्यादेश, क्रेडिट मेमो और अन्य संबंधित दस्तावेज़ भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह मुख्य प्रश्न उठाया गया है कि यदि लगभग ₹30,000 के अलग-अलग कार्यादेश बार-बार जारी किए जा रहे थे, तो क्या इन कार्यों को नियमानुसार एक समेकित प्रक्रिया के माध्यम से कराकर रोगी कल्याण समिति के धन की बचत नहीं की जा सकती थी? यदि ऐसा नहीं किया गया, तो इसके पीछे के कारणों की गहन जांच की मांग की गई है, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण जांच का विषय है। दस्तावेज़ों के आधार पर तथ्यों को लगातार सार्वजनिक करने का उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस बात पर जोर दिया गया है कि सार्वजनिक धन का उपयोग केवल नियमों के अनुसार और जनहित में ही होना चाहिए। इस मुद्दे पर तथ्यों को सामने लाने के लिए लोगों से पोस्ट को अधिक से अधिक साझा करने और अपनी राय कमेंट में लिखने का आग्रह किया गया है।1
- नागौद के मेन बाजार स्थित वार्ड क्रमांक 7 में नगर परिषद के विवेकानंद शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जहाँ एक ओर 'स्वच्छ भारत सर्वेक्षण अभियान' के बोर्ड लगाकर स्वच्छता का संदेश प्रचारित किया जा रहा है, वहीं हकीकत इसके बिलकुल उलट है। आधा सैकड़ा से अधिक दुकानों वाले इस कॉम्प्लेक्स से नगर परिषद को प्रतिमाह हजारों रुपए किराया प्राप्त होता है, बावजूद इसके परिसर में हफ्तों से कचरे का ढेर लगा है और गैलरी में हर तरफ गंदगी फैली हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस सफाई मित्र की ड्यूटी इस वार्ड में लगी है, वह सरकारी काम की बजाय प्राइवेट कॉम्प्लेक्स और दुकानों में अधिक समय देता है। परिसर में कभी झाड़ू नहीं लगती और सफाई मित्र भी अक्सर नदारद रहता है। इसी लापरवाही के चलते विवेकानंद कॉम्प्लेक्स की हालत खस्ताहाल हो चुकी है, जहाँ कबाड़ और कचरा भरा पड़ा है।1
- सतना जिले में बढईया से लेकर संतोषी माता मंदिर तक भारी यातायात जाम लग गया है। इस जाम की स्थिति इतनी गंभीर है कि इसमें एक पुलिस का वाहन भी फंसा हुआ है।2
- हाल ही में हुए एक जातिवाद के मुद्दे से संबंधित एक वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने की पुरज़ोर अपील की गई है। यह आग्रह किया गया है कि इस वीडियो को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए और इसे समाचार चैनलों पर भी दिखाया जाए, ताकि यह संदेश बड़े जनसमूह तक पहुँच सके।1
- सतना जिले की महिला पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर श्वेता मौर्या का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि इंस्पेक्टर मौर्या ने मैहर स्थित प्रसिद्ध शारदा देवी मंदिर परिसर में कॉमेडी "बड़ी मुश्किल से समझाया है दिल को। छोटी सी जिंदगी है.." पर एक रील बनाकर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट *@inspector_shweta* पर पोस्ट की है। उनकी इंस्टा प्रोफाइल के अनुसार, वे *SATNA MP Police* में पदस्थ हैं और उनके *75.7K फॉलोअर्स* हैं, जिसमें उनकी एक रील पर *9.7 लाख व्यूज* भी दिख रहे हैं। पुलिस आचरण नियमावली के अनुसार, वर्दी में रहते हुए धार्मिक स्थलों या सार्वजनिक स्थानों पर व्यक्तिगत या मनोरंजन के लिए वीडियो बनाना सेवा शर्तों के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हमारा ग्रुप वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।1
- मध्य प्रदेश के सतना में एक निजी अस्पताल पर लापरवाही और आर्थिक शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित पिता का आरोप है कि अस्पताल ने डेढ़ लाख रुपये वसूलने के बाद भी उनके बेटे का इलाज नहीं किया। अब अस्पताल प्रबंधन कथित तौर पर दवाइयां वापस मांग रहा है, और सवाल पूछने पर मरीज को रेफर कर दिया गया। पीड़ित पिता ने कैमरे पर बताया कि भर्ती के समय आईसीयू का खर्च प्रतिदिन 12-13 हजार रुपये बताया गया था, जबकि उसका वास्तविक शुल्क 3500 रुपये प्रतिदिन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि "डेढ़ लाख पचास हजार घाटे में" देने के बावजूद बेटे का इलाज नहीं हुआ; बेटा अस्पताल में चलकर आया था, लेकिन आईसीयू में रखे जाने के बाद उसे पीलिया हो गया और उसकी हालत बिगड़ गई। जब पीड़ित ने अस्पताल से सवाल किए, तो बेटे को "सीरियस है" कहकर रेफर कर दिया गया। एक नए वीडियो में सामने आई बातचीत में अस्पताल द्वारा दी गई दवाइयां वापस मांगे जाने का आरोप है, जिसके जवाब में पीड़ित ने सभी दवाइयों के पूरे बिल होने की बात कही। लाल गमछा पहने और हल्के नीले कुर्ते में पीड़ित पिता ने अस्पताल के बिस्तर पर बैठकर हाथ जोड़ते हुए दर्द बयां किया कि "अच्छा, तो गरीबों के साथ अत्याचार नहीं होगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके पास दवा और जांच के सभी बिल मौजूद हैं। पीड़ित ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले की जांच की मांग की है, सवाल करते हुए कि एक गरीब व्यक्ति इतना पैसा कहां से लाए और अब अपने बेटे को लेकर कहां जाए। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह जानकारी पीड़ित द्वारा कैमरे पर दिए गए बयानों पर आधारित है, और सतना के संबंधित निजी अस्पताल का पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है।3
- सतना के लक्ष्मीबाई स्कूल की बाउंड्री पर एक पेड़ गिरने से दो छात्राएं उसके मलबे में दब गईं। इस घटना के बाद, आसपास के दुकानदारों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर छात्राओं को मलबे से बाहर निकाला। दोनों घायल छात्राओं को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।1