सदियों से चली आ रही है नागौर में शीतला अष्टमी के पूजन की परंपरा नागौर,,सदियों से नागौर में शीतला अष्टमी के पूजन की परंपरा चली आ रही है सप्तमी के दिन यहां औख माना जाता है जिसके चलते सप्तमी पर शीतला माता की पूजा आदि नहीं की जाती है। शीतला माता मंदिर के पुजारी रविंद्र पारीक ने जानकारी देते हुए बताया कि नागौर एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर शीतला माता की पूजा अष्टमी के दिन की जाती है इस दौरान भक्त ठंडे भोजन का भोग प्रसाद आदि माता को चढ़ाते हैं इसके पीछे मान्यता है कि मौसम परिवर्तन के साथ होने वाली बीमारियों जैसे चेचक,चिकनपॉक्स, खाज, खुजली आदि की बीमारी माता प्रकोप के शांत होने के बाद परेशान नहीं करती हैं इस को लेकर एक दिन पूर्व ठंडा भोजन बनाकर मां शीतला को अष्टमी के दिन भोग लगाया जाता है आज सुबह 3.00 बजे से ही भक्तगण यहां मंदिर पूजा अर्चना के लिए आना शुरू हो जाते हैं जो की रात 10.00 बजे तक दर्शनों का सिलसिला चलता रहता है। एक मान्यता यह भी है कि दाद खाज खुजली से परेशान व्यक्ति यदि यहां मां शीतला के पांच फेरिया लगता है तो उसकी यह बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। जिसके चलते ऐसी बीमारियों से ग्रसित भक्तगण यहां शीतला माता के यहां फेरी लगाने आते हैं और स्वस्थ होकर लौटते हैं। स्वास्थ्य की तरफ से यदि देखा जाए तो मौसम में परिवर्तन के बाद ठंडा बासी भोजन करने से मौसम परिवर्तन से होने वाली बीमारियां व्यक्ति को परेशान नहीं करती हैं जिसके चलते एक दिन पहले ठंडे भोजन को बनाया जाता है और मां शीतला की पूजा करने के बाद उसको ग्रहण करते हैं इस अवसर पर घरों में पुरी, दही बड़े खींची पापड़ आदि तलकर बनाए जाते हैं वहीं राजस्थान में केर सांगरी की सब्जी बनाने की परंपरा भी विशेष तौर से प्रचलीत है जो की शरीर की विभिन्न समस्याओं तथा रोगों को ठीक करने का भी काम करती है। ल
सदियों से चली आ रही है नागौर में शीतला अष्टमी के पूजन की परंपरा नागौर,,सदियों से नागौर में शीतला अष्टमी के पूजन की परंपरा चली आ रही है सप्तमी के दिन यहां औख माना जाता है जिसके चलते सप्तमी पर शीतला माता की पूजा आदि नहीं की जाती है। शीतला माता मंदिर के पुजारी रविंद्र पारीक ने जानकारी देते हुए बताया कि नागौर एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर शीतला माता की पूजा अष्टमी के दिन की जाती है इस दौरान भक्त ठंडे भोजन का भोग प्रसाद आदि माता को चढ़ाते हैं इसके पीछे मान्यता है कि मौसम परिवर्तन के साथ होने वाली बीमारियों जैसे चेचक,चिकनपॉक्स, खाज, खुजली आदि की बीमारी माता प्रकोप के शांत होने के बाद परेशान नहीं करती हैं इस को लेकर एक दिन पूर्व ठंडा भोजन बनाकर मां शीतला को अष्टमी के दिन भोग लगाया जाता है आज सुबह 3.00 बजे से ही भक्तगण यहां मंदिर पूजा अर्चना के लिए आना शुरू हो जाते हैं जो की रात 10.00 बजे तक दर्शनों का सिलसिला चलता रहता है। एक मान्यता यह भी है कि दाद खाज खुजली से परेशान व्यक्ति यदि यहां मां शीतला के पांच फेरिया लगता है तो उसकी यह बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। जिसके चलते ऐसी बीमारियों से ग्रसित भक्तगण यहां शीतला माता के यहां फेरी लगाने आते हैं और स्वस्थ होकर लौटते हैं। स्वास्थ्य की तरफ से यदि देखा जाए तो मौसम में परिवर्तन के बाद ठंडा बासी भोजन करने से मौसम परिवर्तन से होने वाली बीमारियां व्यक्ति को परेशान नहीं करती हैं जिसके चलते एक दिन पहले ठंडे भोजन को बनाया जाता है और मां शीतला की पूजा करने के बाद उसको ग्रहण करते हैं इस अवसर पर घरों में पुरी, दही बड़े खींची पापड़ आदि तलकर बनाए जाते हैं वहीं राजस्थान में केर सांगरी की सब्जी बनाने की परंपरा भी विशेष तौर से प्रचलीत है जो की शरीर की विभिन्न समस्याओं तथा रोगों को ठीक करने का भी काम करती है। ल
- पादूकलां,नागौर जिले के पादूकलां में शीतला सप्तमी और अष्टमी का पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ धूमधाम से मनाया गया। कस्बे के सार्वजनिक तालाब किनारे स्थित शीतला माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने सौलह श्रृंगार कर सिर पर पूजा की थाली सजाई और मंगल गीत गाते हुए मंदिर पहुंचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने दही, छाछ, राबड़ी, पूड़ी, पूआ सहित ठंडे पकवानों का भोग लगाकर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। पर्व की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में “एक शाम शीतला माता के नाम” भजन संध्या का आयोजन हुआ। इसमें कलाकार नोरत टेहला, मुरली मांडल, हनुमान कुडकी और रामस्वरूप गोरा ने एक से बढ़कर एक भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते नजर आए और पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। सुबह महिलाओं ने समूह में मंगल गीत गाते हुए मंदिर और कुम्हार के घरों में पहुंचकर पारंपरिक बसौड़ा यानी बासी भोजन का भोग लगाया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता शीतला से परिवार को बीमारियों से बचाने, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। पादूकलां में शीतला माता का यह पर्व आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।3
- हल की पहली लकीर के साथ शुरू हुआ नया सफर, किसान की मेहनत से ही भरता है हर घर। 🚜 #हलोतिया #किसानजीवन #खेतीबाड़ी #देसीलाइफस्टाइल #गांवकीजिंदगी #धरतीमां #किसान #VillageLife #FarmingLife #DesiCulture #RuralLife #IndianFarmer #KhetKhaliyan #TractorLife #VillageVlog1
- Post by Bikaner local news1
- इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच इजराइल में फंसे एक भारतीय ने वहां के हालात को लेकर डरावना अनुभव साझा किया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारतीय युवक ने बताया कि यहां लगातार सायरन बज रहे हैं और ईरान की ओर से मिसाइल हमले हो रहे हैं। वीडियो में युवक कहता है कि जैसे ही सायरन बजता है, लोगों को तुरंत बंकर (बम शेल्टर) में भागना पड़ता है। कई बार कुछ ही समय के भीतर मिसाइलें आसमान में दिखाई देती हैं और जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई देती है। उसने बताया कि जब वह सुबह होटल में उठा तो हर तरफ सायरन बज रहे थे और मोबाइल फोन पर भी अलर्ट आने लगे। तभी उसे पता चला कि ईरान की तरफ से मिसाइल हमले शुरू हो गए हैं और पूरे देश में युद्ध जैसा माहौल है। भारतीय युवक के अनुसार, कई दिनों से स्थिति ऐसी है कि सायरन बजते ही लोगों को तुरंत सुरक्षित बंकर में जाना पड़ता है, क्योंकि मिसाइल हमले किसी भी समय हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में कई लोग घायल भी हुए हैं और कुछ इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।1
- Post by SSSO News1
- आज जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णी SP कावेंद्र सिंह सागर ने श्री डूंगरगढ़ में अधिकारियों के साथ एक बैठक ली जिसमें उपखंड मे हो रही दुर्घटना को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए।1
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- नागौर,, शहर के लोहिया चौक में मंगलवार रात्रि 9 बजे से शीतला अष्टमी के अवसर पर डांडिया नृत्य का आयोजन हुआ जिसमें गजानन महाराज की जय के एंव लोक गायन,ढोलक कसीयों में के साथ में शहर के युवाओं एवं छोटे बच्चों के द्वारा विभिन्न प्रकार के रूप एवं गोल घेरे में बनाकर डांडिया नृत्य कर रहें थे जहां पर चारों तरफ से इस डांडिया नृत्य को देखने का आनंद लें रहें थे2