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सागर जिले के गौरझामर में हुई पहली बारिश ने खान मुहल्ले के रहवासियों के लिए आफत खड़ी कर दी है। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद बनी आरसीसी सड़क के कारण, जिसका नाली निर्माण नहीं हुआ, घरों के अंदर पानी भर गया है। आलम यह है कि मकान निवासी अपने घरों के भीतर ही तैरने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन की अनुपस्थिति को लेकर रहवासी चिंतित हैं और मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि यह तो बरसात की शुरुआत भर है, और यदि यही स्थिति बनी रही, तो खाना बनाने, सोने और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। रहवासियों ने इस समस्या का शीघ्र निदान करने की मांग की है।

1 hr ago
user_Akhlesh jain Reportar
Akhlesh jain Reportar
Salesperson देवरी, सागर, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

सागर जिले के गौरझामर में हुई पहली बारिश ने खान मुहल्ले के रहवासियों के लिए आफत खड़ी कर दी है। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद बनी आरसीसी सड़क के कारण, जिसका नाली निर्माण नहीं हुआ, घरों के अंदर पानी भर गया है। आलम यह है कि मकान निवासी अपने घरों के भीतर ही तैरने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन की अनुपस्थिति को लेकर रहवासी चिंतित हैं और मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि यह तो बरसात की शुरुआत भर है, और यदि यही स्थिति बनी रही, तो खाना बनाने, सोने और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। रहवासियों ने इस समस्या का शीघ्र निदान करने की मांग की है।

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  • सागर जिले के गौरझामर में हुई पहली बारिश ने खान मुहल्ले के रहवासियों के लिए आफत खड़ी कर दी है। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद बनी आरसीसी सड़क के कारण, जिसका नाली निर्माण नहीं हुआ, घरों के अंदर पानी भर गया है। आलम यह है कि मकान निवासी अपने घरों के भीतर ही तैरने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन की अनुपस्थिति को लेकर रहवासी चिंतित हैं और मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि यह तो बरसात की शुरुआत भर है, और यदि यही स्थिति बनी रही, तो खाना बनाने, सोने और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। रहवासियों ने इस समस्या का शीघ्र निदान करने की मांग की है।
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    सागर जिले के गौरझामर में हुई पहली बारिश ने खान मुहल्ले के रहवासियों के लिए आफत खड़ी कर दी है। वर्षों की प्रतीक्षा के बाद बनी आरसीसी सड़क के कारण, जिसका नाली निर्माण नहीं हुआ, घरों के अंदर पानी भर गया है। आलम यह है कि मकान निवासी अपने घरों के भीतर ही तैरने को मजबूर हैं।

स्थानीय प्रशासन की अनुपस्थिति को लेकर रहवासी चिंतित हैं और मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि यह तो बरसात की शुरुआत भर है, और यदि यही स्थिति बनी रही, तो खाना बनाने, सोने और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। रहवासियों ने इस समस्या का शीघ्र निदान करने की मांग की है।
    user_Akhlesh jain Reportar
    Akhlesh jain Reportar
    Salesperson देवरी, सागर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • नरसिंहपुर में 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, 'Yoga for Healthy Ageing' (स्वस्थ आयु के लिए योग) थीम के साथ एक अनूठा आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में योग साधिकाओं ने सामूहिक योग प्रदर्शन के लिए एक समान 'गुलाबी परिधान' (साड़ी) धारण किया, जिसे 'गुलाबी लहर' का नाम दिया गया। यह पहल शारीरिक अनुशासन के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का प्रतीक बनी। योग की कठिन मुद्राओं के प्रदर्शन के साथ-साथ, इन साधिकाओं ने 'मंडाला' की अद्भुत और जटिल आकृतियां भी बनाईं, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंडाला को मानसिक एकाग्रता, शांति और ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक माना जाता है, जो योग के 'हेल्दी एजिंग' के दर्शन के साथ पूरी तरह मेल खाता दिखा। योग प्रशिक्षकों ने इसे एक प्रकार की 'मेडिटेटिव आर्ट' बताया, जो मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति प्रदान करती है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस वर्ष की थीम 'Yoga for Healthy Ageing' पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र को गरिमापूर्ण और स्वस्थ बनाने की एक कला है। उन्होंने बताया कि नियमित योग अभ्यास से शारीरिक लचीलेपन के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता भी बनी रहती है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह संकल्प लिया कि वे योग को केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएंगे।
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    नरसिंहपुर में 21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, 'Yoga for Healthy Ageing' (स्वस्थ आयु के लिए योग) थीम के साथ एक अनूठा आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में योग साधिकाओं ने सामूहिक योग प्रदर्शन के लिए एक समान 'गुलाबी परिधान' (साड़ी) धारण किया, जिसे 'गुलाबी लहर' का नाम दिया गया। यह पहल शारीरिक अनुशासन के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का प्रतीक बनी।

योग की कठिन मुद्राओं के प्रदर्शन के साथ-साथ, इन साधिकाओं ने 'मंडाला' की अद्भुत और जटिल आकृतियां भी बनाईं, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंडाला को मानसिक एकाग्रता, शांति और ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक माना जाता है, जो योग के 'हेल्दी एजिंग' के दर्शन के साथ पूरी तरह मेल खाता दिखा। योग प्रशिक्षकों ने इसे एक प्रकार की 'मेडिटेटिव आर्ट' बताया, जो मानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति प्रदान करती है।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस वर्ष की थीम 'Yoga for Healthy Ageing' पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि बढ़ती उम्र को गरिमापूर्ण और स्वस्थ बनाने की एक कला है। उन्होंने बताया कि नियमित योग अभ्यास से शारीरिक लचीलेपन के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता भी बनी रहती है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह संकल्प लिया कि वे योग को केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाएंगे।
    user_Satish Vishwakarma
    Satish Vishwakarma
    Photographer करेली, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    37 min ago
  • पारस कॉन्वेंट हाई स्कूल शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का एक विशेष संगम प्रस्तुत करता है। यह विद्यालय कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी निगरानी और वाहन सुविधा जैसी उन्नत व्यवस्थाएं प्रदान करता है, जो अभिभावकों का विश्वास जीत रही हैं। स्कूल गरीब छात्रों को निःशुल्क किताबें भी उपलब्ध कराता है और अनाथ व दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष सहायता प्रदान करता है। इन्हीं खासियतों के चलते हर साल सैकड़ों अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को इस स्कूल के भरोसे छोड़ रहे हैं, और यही वजह है कि इसे तहसील के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में से एक माना जाता है। स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
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    पारस कॉन्वेंट हाई स्कूल शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का एक विशेष संगम प्रस्तुत करता है। यह विद्यालय कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी निगरानी और वाहन सुविधा जैसी उन्नत व्यवस्थाएं प्रदान करता है, जो अभिभावकों का विश्वास जीत रही हैं। स्कूल गरीब छात्रों को निःशुल्क किताबें भी उपलब्ध कराता है और अनाथ व दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष सहायता प्रदान करता है। इन्हीं खासियतों के चलते हर साल सैकड़ों अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को इस स्कूल के भरोसे छोड़ रहे हैं, और यही वजह है कि इसे तहसील के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में से एक माना जाता है। स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया फिलहाल जारी है।
    user_KHABAR WITH KK
    KHABAR WITH KK
    Local News Reporter सिलवानी, रायसेन, मध्य प्रदेश•
    54 min ago
  • बीना विकासखंड में कृषि क्षेत्र एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जहाँ अब किसान पारंपरिक खेती के बजाय फसल विविधीकरण और कृषि नवाचार अपना रहे हैं। किसानों की रुचि अब चिया सीड्स, तिल, ज्वार, रोज़ेल (हिबिस्कस) और चिरायता जैसी औषधीय एवं नकदी फसलों की खेती में बढ़ी है। इस परिवर्तन में कृषि विभाग का मार्गदर्शन किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवदेश राय गांवों और खेतों का लगातार दौरा कर किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। वे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचार फसलों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी देने के साथ-साथ सफल किसानों के अनुभवों को दूसरों तक पहुँचाने का भी कार्य कर रहे हैं। इस क्षेत्र के कई किसानों ने चिया सीड्स की बुवाई छिड़काव विधि से शुरू की है, जबकि अनेक किसान अब मशीन और बेड पद्धति से वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने की तैयारी में हैं। इन किसानों ने ऐसी मल्टीक्रॉप मशीन की आवश्यकता व्यक्त की है, जो बेड निर्माण के साथ-साथ छोटे और बड़े दोनों प्रकार के बीजों की आसानी से बुवाई कर सके। किसानों की इस विशेष ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए, एक विशेष मल्टीक्रॉप मशीन का डिज़ाइन तैयार किया गया है। यह मशीन चिया सीड्स सहित अन्य बहुफसली बीजों की बुवाई के लिए उपयोगी होगी। मशीन निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से किसानों के एक दल ने खुरई स्थित विजय इंडस्ट्रीज़ के प्लांट का दौरा कर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि मशीन अगले एक सप्ताह में तैयार हो जाएगी। मशीन के तैयार होने के बाद, खेतों में इसका प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) किया जाएगा, जिससे किसान आधुनिक तकनीक का उपयोग करके नवाचार और औषधीय फसलों की वैज्ञानिक बुवाई कर सकेंगे। यह पहल फसल विविधीकरण, तकनीकी उन्नयन और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। नई फसलें, नई तकनीक और किसानों की बदलती सोच बीना की खेती को एक नई पहचान दे रही है, और कृषि विभाग तथा किसानों के संयुक्त प्रयास क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं लाभकारी खेती का एक नया मॉडल तैयार कर रहे हैं, जो भविष्य में अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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    बीना विकासखंड में कृषि क्षेत्र एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है, जहाँ अब किसान पारंपरिक खेती के बजाय फसल विविधीकरण और कृषि नवाचार अपना रहे हैं। किसानों की रुचि अब चिया सीड्स, तिल, ज्वार, रोज़ेल (हिबिस्कस) और चिरायता जैसी औषधीय एवं नकदी फसलों की खेती में बढ़ी है। इस परिवर्तन में कृषि विभाग का मार्गदर्शन किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।

वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवदेश राय गांवों और खेतों का लगातार दौरा कर किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं। वे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचार फसलों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी देने के साथ-साथ सफल किसानों के अनुभवों को दूसरों तक पहुँचाने का भी कार्य कर रहे हैं। इस क्षेत्र के कई किसानों ने चिया सीड्स की बुवाई छिड़काव विधि से शुरू की है, जबकि अनेक किसान अब मशीन और बेड पद्धति से वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने की तैयारी में हैं। इन किसानों ने ऐसी मल्टीक्रॉप मशीन की आवश्यकता व्यक्त की है, जो बेड निर्माण के साथ-साथ छोटे और बड़े दोनों प्रकार के बीजों की आसानी से बुवाई कर सके।

किसानों की इस विशेष ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए, एक विशेष मल्टीक्रॉप मशीन का डिज़ाइन तैयार किया गया है। यह मशीन चिया सीड्स सहित अन्य बहुफसली बीजों की बुवाई के लिए उपयोगी होगी। मशीन निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से किसानों के एक दल ने खुरई स्थित विजय इंडस्ट्रीज़ के प्लांट का दौरा कर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि मशीन अगले एक सप्ताह में तैयार हो जाएगी।

मशीन के तैयार होने के बाद, खेतों में इसका प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) किया जाएगा, जिससे किसान आधुनिक तकनीक का उपयोग करके नवाचार और औषधीय फसलों की वैज्ञानिक बुवाई कर सकेंगे। यह पहल फसल विविधीकरण, तकनीकी उन्नयन और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। नई फसलें, नई तकनीक और किसानों की बदलती सोच बीना की खेती को एक नई पहचान दे रही है, और कृषि विभाग तथा किसानों के संयुक्त प्रयास क्षेत्र में आत्मनिर्भर एवं लाभकारी खेती का एक नया मॉडल तैयार कर रहे हैं, जो भविष्य में अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
    user_RAJESH BABELE
    RAJESH BABELE
    Court reporter सागर नगर, सागर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • करेली की होनहार छात्रा पलक सोनी को जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। उन्हें एम.एससी. (भौतिक शास्त्र) में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए यह गौरवपूर्ण सम्मान भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के करकमलों से प्राप्त हुआ। पलक सोनी वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस परिषद के सदस्य प्रमोद सोनी की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि ने शिक्षा के क्षेत्र में करेली की प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नगर का मान बढ़ाया है।
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    करेली की होनहार छात्रा पलक सोनी को जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। उन्हें एम.एससी. (भौतिक शास्त्र) में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए यह गौरवपूर्ण सम्मान भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के करकमलों से प्राप्त हुआ।

पलक सोनी वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस परिषद के सदस्य प्रमोद सोनी की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि ने शिक्षा के क्षेत्र में करेली की प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर नगर का मान बढ़ाया है।
    user_पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    Media and information sciences faculty नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • प्रकृति के मनोरम दृश्य का वर्णन करते हुए, यह रचना उमड़ते बादलों और महकती हुई फ़िज़ाओं का चित्रण करती है। दिल में पुरानी यादों की धुनें गूंज रही हैं, जिससे यह अहसास होता है कि आसमान आज खुलकर बरसेगा। हवा भी जैसे बारिश के लिए प्रार्थना करती हुई प्रतीत होती है, जो चारों ओर एक भीगी-भीगी उम्मीद का माहौल बना रही है।
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    प्रकृति के मनोरम दृश्य का वर्णन करते हुए, यह रचना उमड़ते बादलों और महकती हुई फ़िज़ाओं का चित्रण करती है। दिल में पुरानी यादों की धुनें गूंज रही हैं, जिससे यह अहसास होता है कि आसमान आज खुलकर बरसेगा। हवा भी जैसे बारिश के लिए प्रार्थना करती हुई प्रतीत होती है, जो चारों ओर एक भीगी-भीगी उम्मीद का माहौल बना रही है।
    user_Sangita Sahu vlog
    Sangita Sahu vlog
    City Star सागर नगर, सागर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • नगर की प्रतिभाशाली छात्रा पलक सोनी को एम.एससी. भौतिक शास्त्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती के करकमलों से दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। प्रेस परिषद के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद सोनी की सुपुत्री पलक सोनी ने अपनी इस उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि से न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे करेली क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है।
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    नगर की प्रतिभाशाली छात्रा पलक सोनी को एम.एससी. भौतिक शास्त्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती के करकमलों से दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया है। प्रेस परिषद के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद सोनी की सुपुत्री पलक सोनी ने अपनी इस उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि से न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे करेली क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है।
    user_कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली
    कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली
    Electrician करेली, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • विहार के जोधपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर से संबंधित कुछ तथ्य अब सामने आए हैं। इन तथ्यों को लेकर क्षेत्र की जनता अपनी मन की बात खुलकर व्यक्त कर रही है।
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    विहार के जोधपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर से संबंधित कुछ तथ्य अब सामने आए हैं। इन तथ्यों को लेकर क्षेत्र की जनता अपनी मन की बात खुलकर व्यक्त कर रही है।
    user_Akhlesh jain Reportar
    Akhlesh jain Reportar
    Salesperson देवरी, सागर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
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