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नवगछिया अनुमंडल अस्पताल नवगछिया के चोक का विडियो है यहां अभी -अभी आंधी तूफान के साथ भारी बारिश हो रही है एक बार इस वीडियो को जरूर देखें
Manoj kumar
नवगछिया अनुमंडल अस्पताल नवगछिया के चोक का विडियो है यहां अभी -अभी आंधी तूफान के साथ भारी बारिश हो रही है एक बार इस वीडियो को जरूर देखें
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- नवगछिया अनुमंडल अस्पताल नवगछिया के चोक का विडियो है यहां अभी -अभी आंधी तूफान के साथ भारी बारिश हो रही है एक बार इस वीडियो को जरूर देखें1
- नारायणपुर में निकली भव्य कलश शोभायात्रा, NH-31 चौक पर दिखा श्रद्धा और आस्था का नजारा नारायणपुर में कलश शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। शोभायात्रा के दौरान महिलाएं और श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर धार्मिक जयकारों के साथ आगे बढ़ते नजर आए। शोभायात्रा जब NH-31 चौक पर पहुंची तो वहां श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति का माहौल देखने को मिला। पूरे मार्ग में लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और धार्मिक वातावरण बना रहा। आयोजकों और श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं श्रद्धापूर्ण तरीके से संपन्न कराया। नारायणपुर में निकली इस कलश शोभायात्रा ने लोगों में धार्मिक उत्साह और आस्था का संदेश दिया।1
- भारत के युवाओं ने मोदी जी के हिंसक शासन के सामने जिस साहस और मजबूती से खड़े होकर जवाबदेही की मांग की, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने शांति, मोहब्बत और हंसी-मज़ाक के साथ अपनी आवाज़ बुलंद की। मुझे हर एक युवा पर गर्व है - खासकर उन लड़कियों पर, जिन्हें BJP के गुंडों की बदसलूकी, गाली-गलौज और हिंसा का सामना करना पड़ा, यहां तक कि उन्हें प्रधानमंत्री से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन अब उनकी आवाज़ दबाई नहीं जा सकेगी। 22 अगस्त को ‘छात्रों की गूँज’ पुणे पहुंच रही है - और इस बार का कार्यक्रम सिर्फ़ लड़कियों के लिए होगा। अब लड़कियां बोलेंगी, देश सुनेगा।1
- पूर्व मुखिया आशा देवी और पप्पू मंडल ने गरीबों के लिए लगाया नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, डेढ़ सौ मरीजों की हुई जांच भागलपुर जिले क़े नाथनगर प्रखंड क़े नूरपुर पंचायत की पूर्व मुखिया आशा देवी एवं जदयू अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष सुमन कुमार सुधांशु उर्फ पप्पू मंडल के आवास पर स्वास्थ्य सेवा अपग्रेडल के द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में करीब डेढ़ सौ गरीब एवं असहाय मरीजों की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। शिविर के दौरान चिकित्सक डॉ. कुमार अन्नू ने मरीजों की जांच की। इस दौरान ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, थायराइड सहित कई प्रकार की स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के बाद मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार आवश्यक दवाइयां नि:शुल्क दी गईं। साथ ही गंभीर बीमारियों से बचाव और बेहतर स्वास्थ्य के लिए चिकित्सकीय परामर्श भी दिया गया। आयोजक सुमन कुमार सुधांशु उर्फ पप्पू मंडल ने कहा कि पंचायत की जनता का तहे दिल से ख्याल रखना उनकी प्राथमिकता है। उनका प्रयास है कि समय-समय पर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की समुचित जांच कराई जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति को समय रहते बीमारी का पता चल सके और वह गंभीर बीमारी का शिकार होने से बच सके। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना सामाजिक जिम्मेदारी भी है। शिविर में लोगों ने स्वास्थ्य जांच और नि:शुल्क दवा मिलने पर खुशी जताई। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी जरूरत के अनुसार इस तरह के स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके। शिविर के सफल आयोजन में डॉ. कुमार अन्नू का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान जितेंद्र यादव, संतोष कुमार मिश्रा, वेदानंद, लक्की, सन्नी समेत कई सहयोगी मौजूद रहे। आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह देखा गया।1
- कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge ji जब मैं पहली बार MLA बना था, तब अमित शाह बच्चे थे और आज हमें देशभक्ति सिखा रहे हैं। BJP और इनके पुरखों ने कभी आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी, इसलिए ये लोग कांग्रेस के लोगों को देशभक्ति न सिखाएं। असल में- 'Anti-India' और 'Anti-religion' तो BJP है, क्योंकि जब मैंने उत्तराखंड में भाषण दिया तो BJP के लोगों ने भाषण मंच का शुद्धिकरण कर दिया। क्या BJP को उनके गुरुओं ने यही सिखाया है?1
- आज नाग पंचमी के दिन टिंगटेगा घाट गंगा जी में स्नान करने के लिए भक्तों की उमड़ी भीड़ एक बार इस वीडियो को जरूर देखें1
- लखीसराय हादसे में 7 मौतों पर मंत्री विजय सिन्हा का बड़ा बयान, बोले—जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई!1
- बरनडी नदी में दर्दनाक हादसा: स्नान करने गए पांच बच्चे डूबे, तीन की मौत फलका थाना क्षेत्र में सुबह-सुबह हुआ दर्दनाक हादसा, तीन मासूमों की मौत से मोरसंडा गांव में पसरा मातम; ग्रामीणों ने नदी में बैरिकेडिंग और पुल निर्माण की उठाई मांग कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र के मोरसंडा पंचायत अंतर्गत मोरसंडा गांव के समीप सोमवार की सुबह बरनडी नदी में एक दर्दनाक हादसा हो गया। करीब छह बजे नदी में स्नान करने गए पांच बच्चे अचानक गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते डूबने लगे। बच्चों को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय गोताखोरों की मदद से पांचों बच्चों को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी थी। हादसे की खबर फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते मोरसंडा गांव मातम में डूब गया। मृतकों की पहचान सत्यम कुमार (11 वर्ष), पिता चिरंजीव कुमार साह, दिव्यांशु कुमार (10 वर्ष), पिता विजय कुमार तथा अमन कुमार (11 वर्ष), पिता मनोज साह के रूप में हुई है। बताया गया कि सत्यम दो भाइयों में छोटा था। अपने मासूम बेटे की मौत की खबर सुनकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में हर तरफ करुण क्रंदन का माहौल बना हुआ है। वहीं नदी में डूबने के बाद सुजीत कुमार (14 वर्ष), पिता मनोज साह और आशीष कुमार (16 वर्ष), पिता अमरेश साह को स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दोनों बच्चों के सुरक्षित बचने से जहां लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं तीन बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, बच्चे बरनडी नदी में स्नान करने के बाद नदी के समीप स्थित शिव मंदिर में जल चढ़ाकर पूजा करने जाने वाले थे। इसी दौरान यह दर्दनाक हादसा हो गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि मंदिर में पूजा करने की तैयारी कर रहे बच्चों के परिवारों को कुछ ही देर में ऐसी हृदयविदारक खबर सुननी पड़ेगी। घटना की सूचना मिलते ही फलका थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे ने खड़े किए कई सवाल बरनडी नदी में आए दिन लोगों के स्नान और अन्य कार्यों के लिए पहुंचने के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के खतरनाक और गहरे हिस्सों को चिह्नित कर वहां बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि क्षेत्र में आवागमन और सुरक्षा की दृष्टि से बरनडी नदी पर पुल का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से नदी पर पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। तीन मासूमों की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाओं के बाद सिर्फ संवेदना जताई जाती रहेगी और नदी की सुरक्षा व्यवस्था कब मजबूत होगी? मोरसंडा गांव में हुई इस त्रासदी ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक आधारभूत संरचना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन हादसे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नदी में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने मासूम बच्चों को इस तरह न खोना पड़े।1