उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर से बहस का विषय बन गया है। विधानसभा में हुई एक बहस के दौरान उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि किसी को "अल्लाह हू अकबर" का नारा अच्छा न लगे और वह उसे रोकने का प्रयास करे, तो क्या यह उचित होगा। मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से धार्मिक नारों और आस्था के सम्मान के महत्व पर बात की थी। उनके इस बयान पर पहले भी अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ सामने आई थीं। जहाँ एक ओर समर्थकों ने इसे सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करने और दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाने का प्रयास बताया था, वहीं आलोचकों ने इसे एक विवादास्पद बयान करार दिया था। आज भी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय मानते हुए इस पर अपनी राय रख रहे हैं, जबकि अन्य इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देख रहे हैं, जिससे यह बहस लगातार जारी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर से बहस का विषय बन गया है। विधानसभा में हुई एक बहस के दौरान उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि किसी को "अल्लाह हू अकबर" का नारा अच्छा न लगे और वह उसे रोकने का प्रयास करे, तो क्या यह उचित होगा। मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से धार्मिक नारों और आस्था के सम्मान के महत्व पर बात की थी। उनके इस बयान पर पहले भी अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ सामने आई थीं। जहाँ एक ओर समर्थकों ने इसे सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करने और दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाने का प्रयास बताया था, वहीं आलोचकों ने इसे एक विवादास्पद बयान करार दिया था। आज भी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय मानते हुए इस पर अपनी राय रख रहे हैं, जबकि अन्य इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देख रहे हैं, जिससे यह बहस लगातार जारी है।
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर से बहस का विषय बन गया है। विधानसभा में हुई एक बहस के दौरान उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि किसी को "अल्लाह हू अकबर" का नारा अच्छा न लगे और वह उसे रोकने का प्रयास करे, तो क्या यह उचित होगा। मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के माध्यम से धार्मिक नारों और आस्था के सम्मान के महत्व पर बात की थी। उनके इस बयान पर पहले भी अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ सामने आई थीं। जहाँ एक ओर समर्थकों ने इसे सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करने और दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाने का प्रयास बताया था, वहीं आलोचकों ने इसे एक विवादास्पद बयान करार दिया था। आज भी सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमाया हुआ है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय मानते हुए इस पर अपनी राय रख रहे हैं, जबकि अन्य इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देख रहे हैं, जिससे यह बहस लगातार जारी है।1
- पीलीभीत जिले के माधोटांडा क्षेत्र में ग्रामीण विद्युत विभाग की मनमानी से भड़क उठे हैं। भयंकर गर्मी से परेशान इन ग्रामीणों ने स्थानीय पावर हाउस का घेराव किया। ग्रामीणों का आरोप है कि योगी सरकार के आदेश केवल 'हवा-हवाई' साबित हो रहे हैं, क्योंकि माधोटांडा विद्युत विभाग अपनी मनमानी कर रहा है। यह घटना विभाग की तानाशाही और भीषण गर्मी के कारण उपजी ग्रामीणों की परेशानी और गुस्से को दर्शाती है।4
- बरेली जिले के फरीदपुर क्षेत्र में संपत्ति विवाद को लेकर एक बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी, जिससे पूरे परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि संपत्ति को लेकर परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी बेटे को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ करते हुए आगे की जांच कर रही है।1
- पीलीभीत में 9 साल की नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। मंत्री ने ऐलान किया है कि रविवार को पीड़िता के घर के पीछे बनी मजार पर 'बाबा का बुलडोजर' चलेगा। इस मामले में राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने पीड़िता नाबालिग बच्ची को गोद लेने का बड़ा फैसला लिया है, और उन्होंने खुद उसका कन्यादान करने का संकल्प भी व्यक्त किया है।1
- पीलीभीत के माधव टांडा रोड स्थित कल्याणपुर में एक कंपोजिट अंग्रेजी शराब की दुकान पर कथित ओवररेटिंग का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, 'ब्रो कोड' नामक बीयर की बोतल पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) ₹160 अंकित है, जिसका बैच नंबर 036 और निर्माण तिथि 15/01/2025 है। आरोप है कि इस बीयर को दुकान पर ₹200 में बेचा जा रहा है, जिसका अर्थ है कि ग्राहकों से ₹40 अधिक वसूले जा रहे हैं। जब एक ग्राहक ने इस संबंध में दुकान संचालक से पूछताछ की, तो कथित तौर पर बताया गया कि यह शराब पिछले एक सप्ताह से इसी बढ़ी हुई कीमत पर बेची जा रही है। इस मामले की सूचना नजदीकी पुलिस चौकी को भी दिए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता करण और सुखदेव ने संबंधित विभाग से इस ओवररेटिंग के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि ₹160 के अंकित मूल्य वाले उत्पाद के लिए ₹200 वसूले जा रहे हैं।1
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले शनिवार को पीलीभीत नगर पालिका परिषद ने पूरे शहर में एक विशेष स्वच्छता अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य योग दिवस के लिए शहर के वातावरण को स्वच्छ बनाना था, जिसमें जिलाधिकारी और एसडीएम ने स्वयं झाड़ू थामकर स्वच्छता का संदेश दिया।1
- मथुरा के गोवर्धन तहसील के आशा नगला ग्राम पंचायत सौंख में सैकड़ों जाटव समाज के ग्रामीणों ने अंबेडकर पार्क से जुड़े भूमि विवाद को लेकर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके पार्क में कोई हस्तक्षेप किया गया, तो उत्पन्न होने वाली अशांति और आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी। ग्रामीणों के अनुसार, यह ज़मीन वर्ष 1968 में ग्राम प्रधान सौंख देहात, विजेंद्र सिंह द्वारा जाटव समाज के लिए आवंटित की गई थी। उस समय आठ व्यक्तियों के नाम पट्टे काटकर अंबेडकर पार्क, मंदिर और धर्मशाला के लिए जगह सुनिश्चित की गई थी। इसके बाद, वर्ष 1980 में धर्मशाला का निर्माण हुआ और वर्ष 1985 में अंबेडकर प्रतिमा स्थापित की गई, जिसका उद्घाटन सांसद मानवेंद्र सिंह ने विधायक बलजीत सिंह की उपस्थिति में किया था। साथ ही, वर्ष 1987 में ग्राम समाज ने गुप्तेश्वर महादेव मंदिर की भी स्थापना की थी। अब, ग्रामीणों को पटवारी और कानूनगो गोवर्धन से यह सूचना मिल रही है कि इस पार्क की भूमि पर पट्टे आवंटित हैं, जिसे समाज पूरी तरह से निराधार और असत्य बता रहा है। जाटव समाज का कहना है कि जिन व्यक्तियों के पट्टों का जिक्र पार्क के संदर्भ में किया जा रहा है, उनके वास्तविक पट्टे वर्ष 1987 से आशा मोड़ पर हैं, जो उन्हें नगला नसबंदी के बदले में मिले थे। समाज ने प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की है कि अंबेडकर पार्क के मामले में किसी भी तरह का दखल न दिया जाए और अपनी चेतावनी दोहराई है।1
- प्रसारित जानकारी में यह दावा किया गया है कि भारतीय हिन्दूराष्ट्र संविधान अब लागू हो चुका है। इस संदेश के माध्यम से लोगों को 'देख सुन बोल' कहकर इस जानकारी पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है।1