Shuru
Apke Nagar Ki App…
बिहार शिक्षा विभाग की पोल खोलती तस्वीरें। बिहार सरकार की शिक्षा नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। जिन स्कूलों में बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वहीं आज मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है।
बिनोद झा (संपादक)
बिहार शिक्षा विभाग की पोल खोलती तस्वीरें। बिहार सरकार की शिक्षा नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। जिन स्कूलों में बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वहीं आज मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है।
More news from बिहार and nearby areas
- बिहार सरकार की शिक्षा नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत किसी से छिपी नहीं है। जिन स्कूलों में बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वहीं आज मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव दिखाई दे रहा है।1
- अचानक दिल्ली से अमेरिका पहुंचे राहुल गांधी-मचा दिया तांडव!1
- मजबूत और सुंदर घर बनवाने के लिए अनुभवी राजमिस्त्री मकान बनाने का काम अच्छा डिजाइन और मजबूती1
- सलीम परवेज, चेयरमैन, बिहार मदरसा एजुकेशन बोर्ड, ने कहा कि मदरसा शिक्षकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है तथा किसी भी तरह की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।1
- 🎉 हॉट गाछी जाले में Indian Public School का नया ब्रांच हुआ शुभारंभ! 📚 अब बच्चों को मिलेगी बेहतर शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं का लाभ। ✨ शिक्षा के क्षेत्र में एक और मजबूत कदम!1
- Post by LAXMI SAH RADHA KRISHNA JEWELLERS1
- सुपौल जिले में प्रशासनिक सख्ती के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर पंचायत रोजगार सेवक अमित विक्रम को सेवा से मुक्त कर दिया गया है। जिले में लगातार हो रही कार्रवाई से विभिन्न विभागों में हड़कंप है। यह कार्रवाई जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल द्वारा की गई, जिसका आदेश उप विकास आयुक्त सारा अशरफ के हस्ताक्षर से 14 फरवरी 2026 को जारी हुआ। जारी आदेश के अनुसार अमित विक्रम, जो पहले ग्राम पंचायत श्रीपुर तथा वर्तमान में गोविन्दपुर (प्रखंड प्रतापगंज) में पदस्थापित थे, इन पर मनरेगा योजना एवं अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप सिद्ध पाए गए। कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा, प्रतापगंज ने पत्रांक 99 दिनांक 05.07.2025 के माध्यम से उनकी कार्यशैली पर प्रतिवेदन भेजा था। जांच में सामने आया कि अमित विक्रम 30 जून 2025 से 5 जुलाई 2025 तक लगातार बिना अनुमति अपने कार्य क्षेत्र से अनुपस्थित रहे। उनकी अनुपस्थिति के कारण वृक्षारोपण अभियान सहित कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए। मनरेगा के अंतर्गत चल रही योजनाओं की प्रगति भी बाधित हुई तथा मजदूरों के लंबित भुगतान में देरी हुई। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान-2025 का काम भी प्रभावित पाया गया। इन आरोपों पर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल ने 10 जुलाई 2025 को उनसे स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उन्होंने निर्धारित समय में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। इसे उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना गया। इसके अलावा हालिया समीक्षा में यह भी पाया गया कि फार्मर रजिस्ट्री और मनरेगा मजदूरों के e-KYC कार्य में उनकी उपलब्धि प्रखंड प्रतापगंज में सबसे कम रही। प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी के संयुक्त प्रतिवेदन (पत्रांक 149, दिनांक 12.02.2026) में कहा गया कि उन्होंने इन कार्यों में अपेक्षित सहयोग और रुचि नहीं दिखाई। प्राधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि अमित विक्रम ने अपने दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती है, जो मनरेगा मार्गदर्शिका और बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी के अनुशासनिक प्रावधानों के प्रतिकूल है। इसी आधार पर बीआरडीएस के नियमों के तहत उनका अनुबंध रद्द करते हुए सेवा समाप्त करने की सजा दी गई। आदेश में यह भी उल्लेख है कि अमित विक्रम चाहें तो आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर जिलाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम समन्वयक के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में जवाबदेही तय करने की दिशा में कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कर्मियों पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।1
- Post by Amlesh kumar ram6