गुमला मारवाड़ी संघ ने सामाजिक सरोकार और मानव सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हुए जिले में एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 45 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मुहैया कराना था। रक्तदाताओं ने स्वेच्छा से दान कर मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग और ब्लड बैंक की टीम ने सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया। कार्यक्रम के दौरान, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मारवाड़ी संघ के इस सराहनीय प्रयास की खुले दिल से प्रशंसा की और उन्हें सम्मानित भी किया। अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान के माध्यम से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और उन्होंने समाज के अन्य संगठनों से भी ऐसे जनहितकारी कार्यों में आगे आने का आग्रह किया। मारवाड़ी संघ के पदाधिकारियों ने पुष्टि की कि वे भविष्य में भी समाज के हित में ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे। इस रक्तदान शिविर की सफलता में संघ के सदस्यों, स्वयंसेवकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। शिविर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और जरूरतमंदों को दिया गया रक्त वास्तव में जीवनदान के समान है।
गुमला मारवाड़ी संघ ने सामाजिक सरोकार और मानव सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हुए जिले में एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 45 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मुहैया कराना था। रक्तदाताओं ने स्वेच्छा से दान कर
मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें स्वास्थ्य विभाग और ब्लड बैंक की टीम ने सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया। कार्यक्रम के दौरान, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मारवाड़ी संघ के इस सराहनीय प्रयास की खुले दिल से प्रशंसा की और उन्हें सम्मानित भी किया। अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि रक्तदान के माध्यम से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और उन्होंने समाज के अन्य संगठनों से भी ऐसे जनहितकारी
कार्यों में आगे आने का आग्रह किया। मारवाड़ी संघ के पदाधिकारियों ने पुष्टि की कि वे भविष्य में भी समाज के हित में ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित करते रहेंगे। इस रक्तदान शिविर की सफलता में संघ के सदस्यों, स्वयंसेवकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। शिविर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और जरूरतमंदों को दिया गया रक्त वास्तव में जीवनदान के समान है।
- गुमला जिले के सिसई स्थित रेफरल अस्पताल में हाल ही में संपन्न हुए साथिया पियर एजुकेटर प्रशिक्षण में बरगांव उतरी, बरगांव दक्षिणी, नगर और सिसई पंचायत के किशोर-किशोरियों ने भाग लिया था। इस प्रशिक्षण को प्रशिक्षिका सिलवंती मिंज, विनीता सोरेंग और सहिया मीना कुमारी ने प्रदान किया था। शनिवार को, इस प्रशिक्षण में शामिल रहे शेष बचे 24 किशोर-किशोरियों को अस्पताल परिसर में प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार वितरित किए गए।1
- चैनपुर/गुमला के बरवे क्षेत्र के 83 गांवों में संचालित 'सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता' जन-जागरण यात्रा का भव्य समापन सिरसी-ता नाले धर्मस्थल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज के गणमान्य लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे। जानकारी के अनुसार, यह जन-जागरण यात्रा 31 मई, 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल से शुरू हुई थी और 14 जून, 2026 को उसी पवित्र स्थल पर समाप्त हुई। समापन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में जुटे ग्रामीणों ने धर्मस्थल के विकास, संरक्षण और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। सभा में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल का विकास और निर्माण कार्य आदिवासी समाज के लोगों के एक-एक रुपये के सहयोग और आपसी चंदे से ही किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता शिव प्रकाश भगत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह धर्मस्थल आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और पहचान का प्रतीक है, जिसके संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी समाज स्वयं उठाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि धर्मस्थल के विकास के लिए किसी विधायक, सांसद अथवा किसी अन्य सरकारी फंड से सहायता स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बजाय, धर्मस्थल का निर्माण, संरक्षण, विकास एवं देखरेख स्थानीय लोगों की निगरानी और सहभागिता में ही होगी। इस निर्णय का बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों से आए ग्रामीणों ने समर्थन करते हुए संकल्प लिया कि वे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की जिम्मेदारी स्वयं निभाएंगे। वक्ताओं ने इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिरसी-ता नाले ककड़ो लाता धर्मस्थल का विकास एवं निर्माण कार्य पूरी तरह जनसहयोग से पूरा करना बताया, ताकि आदिवासी समाज की आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं अक्षुण्ण बनी रहें। कार्यक्रम का सफल संचालन अमित भगत ने किया, जबकि मनीषा उरांव, अनिता उरांव, जलेश्वर उरांव, सतीश चन्द्र भगत, शिवबालक भगत, लीला उरांव, भगत पति उरांव, ललिता उरांव, सुबरशनी मुंडा एवं सत्येन्द्र भगत सहित कई लोगों ने जन-जागरण यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में, आयोजन समिति ने इस जन-जागरण यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए बरवे क्षेत्र के सभी 83 गांवों के ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया।1
- चैनपुर में, लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने चैनपुर और जारी प्रखंडों के लिए अपने सांसद प्रतिनिधियों की नियुक्ति की है। सांसद भगत ने अल्बर्ट तिग्गा को चैनपुर प्रखंड के लिए सांसद प्रतिनिधि के रूप में नामित किया है, जबकि मोहम्मद जाकिर खान को जारी प्रखंड के लिए सांसद प्रतिनिधि की जिम्मेदारी सौंपी गई है।1
- सिमडेगा में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत बूथों की मैपिंग समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की छात्राओं से बातचीत की और उन्हें अपने आवास स्थित बगीचे में आम खाने के लिए आमंत्रित किया। उपायुक्त आवास पहुंची छात्राओं ने स्वयं पेड़ों से आम तोड़े और प्रकृति की गोद में बैठकर उनका आनंद लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी खिलखिलाहट, उत्साह और सहज स्नेह से एक पारिवारिक वातावरण में बदल गया। छात्राओं ने इस दौरान अपनी पढ़ाई, खेलकूद और अनुभव भी साझा किए। उपायुक्त ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की सोच है कि बच्चे केवल शैक्षणिक रूप से ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी नागरिक के रूप में भी विकसित हों। इसी उद्देश्य से जिला प्रशासन शिक्षा, सुरक्षा और समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बेटियों को घर जैसा अपनापन और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने को प्रशासन की प्राथमिकता बताया। साथ ही, उपायुक्त ने जोर दिया कि ऐसे आयोजन प्रशासन और समाज के बीच विश्वास एवं आत्मीय संबंधों को मजबूत करते हैं तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपायुक्त ने इस अनुभव को अपने प्रशासनिक दायित्वों से परे एक सुखद और ऊर्जा देने वाला बताया। आम के बहाने बेटियों संग हुए इस आत्मीय संवाद ने उपायुक्त आवास को सचमुच 'खुशियों का आंगन' बना दिया।1
- राजधानी राँची और आसपास के इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ली है। दोपहर की उमस और चिलचिलाती धूप के बाद शाम होते-होते आसमान में काले बादल छा गए, जिसके बाद कड़कती बिजली और बादलों की तेज गड़गड़ाहट के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस मूसलाधार बारिश से पिछले कुछ दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिली है और मौसम सुहावना हो गया है। मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार, बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं और तापमान में अचानक 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। विभाग ने बज्रपात (लाइटनिंग) की आशंका जताते हुए लोगों को चेतावनी जारी की है कि वे गरज और चमक के दौरान घरों में ही रहें और बिजली के खंभों या पेड़ों के नीचे शरण न लें। इस अचानक हुई तेज बारिश के कारण शहर के मुख्य चौराहों जैसे अल्बर्ट एक्का चौक, लालपुर और कचेहरी रोड पर यातायात की रफ्तार थोड़ी धीमी हो गई है। कई निचले इलाकों में सड़कों पर पानी भर जाने से दोपहिया वाहन चालकों को हल्की परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन गर्मी से मिली राहत के चलते लोग इस बारिश का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। एक मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि राँची और इसके आसपास के जिलों में अगले कुछ घंटों तक रुक-रुक कर बारिश का यह दौर जारी रह सकता है। यह प्री-मानसून गतिविधियों का हिस्सा है, जिससे वातावरण में ठंडक बनी रहेगी।1
- जशपुर के चुंडाभ पाठ जलाशय में सड़क पर पानी भर जाने के कारण आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई थी। जानकारी के अनुसार, 'चुंडा पाठ जलाशय मिशन योजना' के तहत नदी में पानी भर जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई थी। अब इस मार्ग पर आवाजाही के लिए 'रास्ता नंबर 2.0' उपलब्ध करा दिया गया है, जिससे लोग बिना किसी चिंता के नए मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।1
- लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव अल्बर्ट तिग्गा को चैनपुर प्रखंड का सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया है। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी (सीओ) को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, अल्बर्ट तिग्गा सांसद की अनुपस्थिति में सभी सरकारी कार्यक्रमों में उनका प्रतिनिधित्व करेंगे तथा जनता और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य संभालेंगे। अल्बर्ट तिग्गा का कांग्रेस संगठन और सामाजिक कार्यों से जुड़ाव काफी पुराना है; वे वर्ष 1995 से 2000 तक तत्कालीन विधायक स्वर्गीय प्रोफेसर बर्नार्ड मिंज के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। अपनी नियुक्ति पर अल्बर्ट तिग्गा ने सांसद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सांसद तक पहुंचाकर उनके समाधान का प्रयास करेंगे। उनकी इस नियुक्ति से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है, और लोगों ने उम्मीद जताई है कि उनके अनुभव का लाभ क्षेत्र के विकास एवं जनहित के कार्यों को मिलेगा।1
- यह शिकायत सामने आई है कि सीमेंट की कुर्सियां लगाकर जनता के पैसे की बर्बादी की जा रही है। बताया गया है कि ये कुर्सियां न तो मजबूत हैं और न ही इनमें नट ठीक से लगाए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई जगहों पर लगाने के तुरंत बाद ही ये टूट रही हैं। आरोप है कि 15वें वित्त आयोग के पैसे को केवल बर्बाद किया जा रहा है, और इस पूरे मामले को जाँच का विषय बताया गया है।1
- लातेहार के महुआडांड प्रखंड में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों से खुलेआम 'लूट' मची हुई है। क्षेत्र में खाद की भारी किल्लत और बड़े पैमाने पर कालाबाजारी का मामला सामने आया है। इस गंभीर स्थिति पर महुआडांड अनुमंडल के सांसद प्रतिनिधि संजय जायसवाल ने गहरी चिंता जताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है और प्रशासन से दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तय दामों को दरकिनार कर खाद-उर्वरक को दोगुने दामों पर बेचा जा रहा है, जहाँ ₹250 की सरकारी कीमत वाली खाद खुलेआम ₹500 में और ₹1300-₹1350 मूल्य वाली खाद के लिए गरीब किसानों से ₹2200-₹2300 तक वसूले जा रहे हैं। सांसद प्रतिनिधि जायसवाल ने मीडिया और समाचार पत्रों की खबरों का हवाला देते हुए यह भी आरोप लगाया कि महुआडांड के स्थानीय किसानों के हक की खाद को अवैध रूप से पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ भेजा जा रहा है। इस कालाबाजारी के कारण स्थानीय किसानों को खेती के मुख्य समय पर सही दाम में खाद नसीब नहीं हो पा रही है, जिसे उन्होंने किसानों की 'मानसिक हत्या' से कम नहीं बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कुछ खुदरा दुकानदारों और बिचौलियों ने चार-चार, पांच-पांच और दस-दस अवैध गोदाम बना रखे हैं जहाँ खाद की जमाखोरी कर किसानों को लूटा जा रहा है। उन्होंने अनुमंडल और जिला प्रशासन से इस पूरे सिंडिकेट पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। संजय जायसवाल ने चेतावनी दी है कि वे ₹1300 की खाद को ₹2300 में और ₹250 की खाद को ₹500 में कदापि नहीं बिकने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हक पर डाका डालने वाले किसी भी रसूखदार या पावरफुल व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। जायसवाल ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर प्रशासन ने इस कालाबाजारी पर तुरंत लगाम नहीं लगाई, तो वे किसानों के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।1