डूंगरपुर जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला विशेष टीम (डीएसटी) ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पालीसोडा-पाटिया मार्ग के जंगली रास्ते पर नाकाबंदी कर गुजरात की ओर तस्करी की जा रही करीब ₹3 लाख मूल्य की विभिन्न ब्रांड की 40 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त एक होंडा अमेज कार और एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है, हालांकि कार का चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। दरअसल, डीएसटी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहनपाल सिंह के नेतृत्व में टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि तस्कर मुख्य राजमार्गों पर पुलिस की चौकसी से बचने के लिए अंदरूनी और जंगली रास्तों से शराब गुजरात ले जा रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने पालीसोडा-पाटिया मार्ग पर अचानक नाकाबंदी कर दी। पुलिस को देखकर कार चालक ने गाड़ी घुमाकर भागने की कोशिश की, लेकिन उसकी कार बड़े पत्थरों में जाकर फंस गई। इसके बाद आरोपी चालक गाड़ी और अपना मोबाइल फोन छोड़कर रात के अंधेरे में फरार हो गया। पुलिस ने बरामद सामान को अग्रिम कार्रवाई के लिए बिछीवाड़ा थाने को सौंप दिया है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में कांस्टेबल मगनलाल, जितेन्द्र यादव, आशीष और जितेन्द्र भी शामिल रहे। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने जिले में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने 'तीसरी आंख' हेल्पलाइन मोबाइल व व्हाट्सएप नंबर 8690180022 जारी किया है, जिस पर कोई भी नागरिक अवैध गतिविधियों की सूचना साझा कर सकता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा।
डूंगरपुर जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जिला विशेष टीम (डीएसटी) ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत पालीसोडा-पाटिया मार्ग के जंगली रास्ते पर नाकाबंदी कर गुजरात की ओर तस्करी की जा रही करीब ₹3 लाख मूल्य की विभिन्न ब्रांड की 40 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तस्करी में प्रयुक्त एक होंडा अमेज कार और एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है, हालांकि कार का चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहा। दरअसल, डीएसटी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहनपाल सिंह के नेतृत्व में टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि तस्कर मुख्य राजमार्गों पर पुलिस की चौकसी से बचने के लिए अंदरूनी और जंगली रास्तों से शराब गुजरात ले जा रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने पालीसोडा-पाटिया मार्ग पर अचानक नाकाबंदी कर दी। पुलिस को देखकर कार चालक ने गाड़ी घुमाकर भागने की कोशिश की, लेकिन उसकी कार बड़े पत्थरों में जाकर फंस गई। इसके बाद आरोपी चालक गाड़ी और अपना मोबाइल फोन छोड़कर रात के अंधेरे में फरार हो गया। पुलिस ने बरामद सामान को अग्रिम कार्रवाई के लिए बिछीवाड़ा थाने को सौंप दिया है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में कांस्टेबल मगनलाल, जितेन्द्र यादव, आशीष और जितेन्द्र भी शामिल रहे। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने जिले में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने 'तीसरी आंख' हेल्पलाइन मोबाइल व व्हाट्सएप नंबर 8690180022 जारी किया है, जिस पर कोई भी नागरिक अवैध गतिविधियों की सूचना साझा कर सकता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) जिनेवा के मंच पर भारत के आदिवासी समाज के अधिकारों और पहचान की गूंज सुनाई दी है। मूकनायक न्यूज़ के रामलाल यादव के अनुसार, बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और पहचान की मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया। सांसद ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि दुनिया भर के आदिवासी प्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और संबंधित सरकारों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर उनका समाधान निकाला जाए। सांसद राजकुमार रोत ने विशेष रूप से भारत सरकार से आईएलओ कन्वेंशन संख्या 169 (ILO Convention No. 169) पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि इससे आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत संरक्षण मिलेगा। इसके अलावा, उन्होंने आदिवासी समाज की पुरखाई धार्मिक परंपरा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई, जिससे उनकी सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान सुरक्षित रह सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह लड़ाई केवल एक समुदाय की नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम मूल निवासियों के अस्तित्व और सम्मान की है। जिनेवा से उठी यह आवाज अब देश में एक बड़ी बहस का रूप ले चुकी है। अब सबसे बड़े सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या भारत सरकार आईएलओ कन्वेंशन 169 पर हस्ताक्षर करेगी और क्या आदिवासियों की पारंपरिक धार्मिक पहचान को संवैधानिक मान्यता मिल पाएगी।1
- उदयपुर के ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ रही चोरी की वारदातों से ग्रामीणों में भारी रोष और असुरक्षा का माहौल है। कलड़वास, कानपुर, खरबड़िया, मटूण सहित आसपास के कई गांवों में बीते दिनों लगातार चोरी की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय बना हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने बैठक कर अपना कड़ा विरोध जताया है। बैठक में वक्ताओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले ही ग्रामीणों ने उदयपुर पुलिस अधीक्षक अमृता दुहान को ज्ञापन सौंपकर बढ़ती चोरियों पर अंकुश लगाने और दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की थी। इसके बावजूद अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे चोरों के हौसले और अधिक बुलंद हो गए हैं और क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि रात के समय गश्त बढ़ाई जाए, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और चोरी की वारदातों का जल्द खुलासा कर आरोपियों को पकड़ा जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द ही ठोस समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र के ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल, सहसंयोजक प्रेमचंद पटेल, धनराज पटेल, हीरालाल पटेल, भोपाजी कालू पटेल, सुरेश पटेल, नारायण पटेल, सोहनलाल, तेजराम डांगी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।4
- उदयपुर के वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत भटेवर में बैठक के दौरान खालातोड़ गांव में सरस डेयरी प्लांट के लिए आवंटित की गई करीब 50 बीघा जमीन को निरस्त करवाने का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा। पंचायत में कोरम बैठक के बाद बड़ी संख्या में खालातोड़ गांव के ग्रामीण पंचायत कार्यालय पहुंचे और इस आवंटन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कहा कि जिस भूमि पर सरस पशु आहार परियोजना स्थापित की जा रही है, वह 50 बीघा चरागाह भूमि है। सालों से गांव के मवेशी इसी जमीन पर चरते आ रहे हैं और पूरे गांव में इसके अलावा पशुओं के चरने के लिए कोई अन्य चारागाह भूमि बची ही नहीं है। ग्रामीणों को डर है कि यदि सरकार इस भूमि पर प्लांट खड़ा करती है, तो क्षेत्र के पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी का बेहद गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इस आवंटन के बदले में प्रशासन द्वारा जो वैकल्पिक जमीन दी गई है, उसे लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि वह जमीन गांव की सीमा से 20 किलोमीटर दूर माल की टुस में स्थित है, जहां रोजाना अपने पशुओं को चराने के लिए ले जाना किसी भी तरह संभव नहीं है।1
- सिरोही जिले के आबूरोड में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन द्वारा लायंस क्लब आबूरोड और रोटरी इंटरनेशनल ग्लोबल हॉस्पिटल ब्लड बैंक के तत्वावधान में 16 जुलाई 2026 को यूनियन कार्यालय में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में रेल कर्मचारियों और उनके परिजनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कुल 333 यूनिट रक्तदान कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। कोरोना महामारी के बाद से सिरोही जिले के ब्लड बैंक में रक्त संग्रहण की भारी कमी के कारण मरीजों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह आयोजन बेहद महत्वपूर्ण रहा। शिविर में कई रक्तदाताओं ने अनुकरणीय मिसाल पेश की, जिसमें भगवान अग्रवाल ने 87वीं बार, अजय भट्ट ने 54वीं बार, विकास मोरवाल ने 41वीं बार, देवेंद्र शर्मा ने 28वीं बार और राकेश आचार्य ने 11वीं बार रक्तदान किया। वहीं, कनिष्क और हर्षा ने जीवन में पहली बार रक्तदान कर युवाओं को प्रेरित किया। महिला दाताओं में हर्षा, निशिप्रभा और प्रभा पटेल ने, जबकि लायंस क्लब की ओर से बाल किशन चंदक, विशाल गोयल, प्रहलाद चौधरी, जगदीश ओरिया, भरत कच्छावा, रवि राणा और शांतिलाल पटेल ने रक्तदान किया। इसके साथ ही, मुस्लिम वर्ग के लोगों में भी रक्तदान को लेकर खासा उत्साह देखा गया। शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता गौरव राखेचा ने यूनियन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे यूनियन को केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित मानते थे, लेकिन यूनियन ने हर बार रक्तदान शिविर लगाकर मानवता की मिसाल कायम की है। इस दौरान मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी वत्शल श्राफ, डॉक्टर एमपी बंसल, एचएम केलाजी और डॉक्टर राजकुमार राज ने भी निरीक्षण किया। रोटरी क्लब के राजेन्द्र बाकलीवाल ने यूनियन के प्रबंधन की तारीफ की। इस मौके पर ग्लोबल हॉस्पिटल ब्लड बैंक के प्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि उनके ब्लड बैंक को सालाना 7500 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है और उन्होंने 'रक्त दो, वक्त दो, वक्त रहते रक्त दो' थीम के तहत हर घर से एक रक्तदाता जुड़ने की अपील की। शिविर की समस्त व्यवस्थाएं समंदर सिंह राठौर, देवेंद्र शर्मा, जितेन्द्र शर्मा और हितेश शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा संभाली गईं, जबकि लायंस क्लब द्वारा अल्पाहार व सर्टिफिकेट प्रदान किए गए। केंद्र और राज्य सरकार के सभी दिशा-निर्देशों की पालना के साथ आयोजित इस शिविर में लायंस क्लब अध्यक्ष सुरेन्द्र भूषण शर्मा, कोषाध्यक्ष जगदीश ओरिया, दिनेश गर्ग, पुनीत सोनी, मुरलीधर कुमावत, शिवशंकर शर्मा, सुशील वर्मा सहित यूनियन के वरिष्ठ सदस्य भानसिंह चौहान, प्रकाश मोरवाल और ओमप्रकाश शर्मा उपस्थित रहे।4
- प्रतापगढ़ जिले के छोटी सादड़ी में बुवाई के बाद बारिश नहीं होने के कारण किसान पूरी तरह से फ्री हैं। अपने इस समय का सदुपयोग करने के लिए किसान मंडी में अपना माल लेकर आ रहे हैं। छोटी सादड़ी की कृषि उपज मंडी में आसपास के विभिन्न दूर-दराज के गांवों से किसान लहसुन बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। बारिश नहीं होने की वजह से मिले खाली समय का उपयोग किसान मंडी में अपनी लहसुन की फसल बेचने के लिए कर रहे हैं।4
- राजसमंद में पहली बार हो रहे पांच दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ का आज दूसरा दिन है। इस आयोजन के दौरान राजसमंद झील किनारे भक्तों और सनातन प्रेमियों का मेला लगा हुआ है। इस यज्ञ में रोजाना अलग-अलग सनातन प्रेमी सहपत्निक हिस्सा ले रहे हैं।1
- डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली पादरा ग्राम पंचायत में विकास के दावों की पोल खुल गई है। संवाददाता संतोष व्यास के अनुसार, पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और सड़कों की हालत खस्ताहाल है। गांव के मुख्य रास्तों से लेकर सार्वजनिक जल स्रोतों तक गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। सबसे बदतर स्थिति पंचायत भवन से महज कुछ ही दूरी पर स्थित गांव के मुख्य तालाब की है, जहां तालाब और उसके आसपास के क्षेत्र के साथ-साथ सड़क किनारे भारी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट फैला हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब गांव का प्रमुख जलस्रोत होने के बावजूद ग्राम पंचायत और संबंधित विभाग इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। बरसात के मौसम में कचरा पानी में बहकर जाने से जल प्रदूषण और डेंगू-मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। इसके अलावा, सड़क मार्ग की बदहाली भी ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। गांव के एक मुख्य मार्ग पर वर्षों से मिट्टी का ढेर जमा है, जो बारिश के दिनों में दलदल और कीचड़ में तब्दील हो जाता है। इस वजह से दोपहिया व चारपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ राहगीरों का वहां से गुजरना दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाया है कि बार-बार ध्यान आकर्षित करने के बावजूद पंचायत प्रशासन इस समस्या पर पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है। एक तरफ जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ व विकसित बनाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं पादरा पंचायत की यह बदहाली इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तालाब और सड़क की समस्या का अविलंब समाधान किया जाए, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित हो और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।1
- राजस्थान की राजधानी जयपुर के चाकसू में हजारों महिलाओं की मेहनत की कमाई वापस दिलाने की मांग को लेकर पूर्व विधायक वेदप्रकाश सोलंकी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। जयपुर के अंबेडकर सर्किल, चाकसू में चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार और महिलाएं जुटी हुई हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से न्याय नहीं मिलने के कारण उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, राजस्थानानी महिला सेवा सहकारी समिति में जमा उनकी जीवनभर की कमाई आज तक वापस नहीं मिली है। पूर्व विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने कहा कि जब तक सरकार पीड़ितों का पैसा लौटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। इस मामले में कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा किया जा रहा है, जिसकी अभी तक कोई स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में सरकारी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। महिलाओं की जमा पूंजी और न्याय की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या सरकार पीड़ित परिवारों को राहत दिला पाएगी और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।1
- नीमच जिले में पुलिस विभाग के भीतर एक बड़ा प्रमोशन देखने को मिला है, जिसे नीमच की पहचान बताया गया है। यहाँ पुलिस महकमे में एक साथ 70 से अधिक पुलिस कर्मियों को पदोन्नत कर नया पद सौंपा गया है। इस बड़े प्रमोशन को क्षेत्र में काफी गर्व और उत्साह के साथ रेखांकित किया जा रहा है।1