देव ध्वनियों से गूँज उठी सैंज घाटी, श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहा है माता आशापुरी का कारवां।" रिपोर्ट-27 फरवरी बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। हिमाचल प्रदेश सैंज घाटी (कुल्लू): श्रद्धा और अटूट देव परंपरा का संगम! रूपी रैला की अधिष्ठात्री देवी माता आशापुरी महामाई 12 साल के लंबे अंतराल के बाद अपने देवालय से बागी शियाड़ी के लिए रवाना हो गई हैं। ✨ देव मिलन का अद्भुत दृश्य आज शुक्रवार को यात्रा का पहला पड़ाव मनु मंदिर शेंशर में रहा। यहाँ जब माता आशापुरी का मनु ऋषि और माता शतरूपा से मिलन हुआ, तो पूरा वातावरण देवमयी हो गया। ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर झूमते श्रद्धालु इस भव्य मिलन के साक्षी बने। 📜 क्या है यह 'कला संग्रह' परंपरा? नया स्वरूप: माता के देवरथ को 2 साल पहले नया स्वरूप (नया रथ) दिया गया था। पुरानी मान्यता: कुल्लू की देव संस्कृति के अनुसार, जब भी रथ को नए स्वरूप में ढाला जाता है, तो माता 'कला संग्रह' के लिए निकलती हैं। अगला पड़ाव: कल यह देव रथ यात्रा बागी शियाड़ी पहुँचेगी, जहाँ सदियों पुरानी देव परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।
देव ध्वनियों से गूँज उठी सैंज घाटी, श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रहा है माता आशापुरी का कारवां।" रिपोर्ट-27 फरवरी बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। हिमाचल प्रदेश सैंज घाटी (कुल्लू): श्रद्धा और अटूट देव परंपरा का संगम! रूपी रैला की अधिष्ठात्री देवी माता आशापुरी महामाई 12 साल के लंबे अंतराल के बाद अपने देवालय से बागी शियाड़ी के लिए रवाना हो गई हैं। ✨ देव मिलन का अद्भुत दृश्य आज शुक्रवार को यात्रा का पहला पड़ाव मनु मंदिर शेंशर में रहा। यहाँ जब माता आशापुरी का मनु ऋषि और माता शतरूपा से मिलन हुआ, तो पूरा वातावरण देवमयी हो गया। ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर झूमते श्रद्धालु इस भव्य मिलन के साक्षी बने। 📜 क्या है यह 'कला संग्रह' परंपरा? नया स्वरूप: माता के देवरथ को 2 साल पहले नया स्वरूप (नया रथ) दिया गया था। पुरानी मान्यता: कुल्लू की देव संस्कृति के अनुसार, जब भी रथ को नए स्वरूप में ढाला जाता है, तो माता 'कला संग्रह' के लिए निकलती हैं। अगला पड़ाव: कल यह देव रथ यात्रा बागी शियाड़ी पहुँचेगी, जहाँ सदियों पुरानी देव परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।
- रिपोर्ट-27 फरवरी बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। हिमाचल प्रदेश सैंज घाटी (कुल्लू): श्रद्धा और अटूट देव परंपरा का संगम! रूपी रैला की अधिष्ठात्री देवी माता आशापुरी महामाई 12 साल के लंबे अंतराल के बाद अपने देवालय से बागी शियाड़ी के लिए रवाना हो गई हैं। ✨ देव मिलन का अद्भुत दृश्य आज शुक्रवार को यात्रा का पहला पड़ाव मनु मंदिर शेंशर में रहा। यहाँ जब माता आशापुरी का मनु ऋषि और माता शतरूपा से मिलन हुआ, तो पूरा वातावरण देवमयी हो गया। ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर झूमते श्रद्धालु इस भव्य मिलन के साक्षी बने। 📜 क्या है यह 'कला संग्रह' परंपरा? नया स्वरूप: माता के देवरथ को 2 साल पहले नया स्वरूप (नया रथ) दिया गया था। पुरानी मान्यता: कुल्लू की देव संस्कृति के अनुसार, जब भी रथ को नए स्वरूप में ढाला जाता है, तो माता 'कला संग्रह' के लिए निकलती हैं। अगला पड़ाव: कल यह देव रथ यात्रा बागी शियाड़ी पहुँचेगी, जहाँ सदियों पुरानी देव परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।1
- झूठ, अन्याय और साज़िश कितनी भी ऊँची दीवारें खड़ी कर ले, एक अकेला सच उन्हें गिराने के लिए काफ़ी होता है। Arvind Kejriwal1
- Post by Dev Raj Thakur1
- जोगिंदर नगर में 4 मार्च को मनाई जाएगी होली, बंद रहेगा बाजार।1
- Baba Veer Nath1
- Post by Dinesh Kumar1
- Post by न्यूज रिपोर्टर1
- रिपोर्ट- 27 फरवरी बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। सैंज (कुल्लू): लंबे इंतजार और कड़े जन-आंदोलन के बाद आखिरकार सैंज बाजार को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के जीर्णोद्धार का कार्य वीरवार से शुरू हो गया है। जून 2025 की भारी बारिश और भूस्खलन के कारण यह सड़क तीन स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे बाजार का संपर्क पूरी तरह कट गया था। मुख्य बातें: बजट और निर्माण: मुख्य सड़क के टूटे हिस्से पर 71 लाख रुपये की लागत से डंगे का निर्माण किया जा रहा है। समयसीमा: ठेकेदार सुरेंद्र नेगी ने बताया कि यदि मौसम ने साथ दिया, तो एक महीने के भीतर दीवार का काम पूरा कर लिया जाएगा। पहले हुआ कार्य: सियारनु देवता के पास पहले ही डंगे का निर्माण हो चुका है, जबकि बाजार की आंतरिक सड़क की अस्थायी मरम्मत की गई है। व्यापार मंडल का कड़ा रुख: सड़क बंद होने से कारोबार ठप होने के चलते व्यापार मंडल ने कई बार प्रदर्शन किया था। व्यापार मंडल के प्रधान झाबे राम ठाकुर ने कहा कि आठ महीने की परेशानी के बाद अब काम शुरू होने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। इस मांग को प्रमुखता से उठाने वाले व्यापारियों में कमल देव, हैप्पी, रिंकू, रोहित, विजय और लीलाधर चौहान शामिल रहे। प्रभाव: सड़क बहाली से सैंज घाटी की ठप पड़ी अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौटेगी और स्कूली बच्चों व मरीजों को आवाजाही में हो रही भारी दिक्कतें दूर होंगी।1