'मनुज क्रांति न्यूज़' से अनुज चौहान ने पत्रकार के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज को संबोधित करते हुए कहा है कि आज की नई पीढ़ी, चाहे पुरुष हो या महिला, 'पैसों के अंधे लालच' नामक एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गई है। उनके अनुसार, समाज में ऐसा माहौल बन गया है जहाँ लोग रिश्तों से ज़्यादा सिर्फ पैसा देखते हैं, यह मानते हुए कि जेब में पैसा होने पर दुनिया मुट्ठी में होती है। चौहान ने इस मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैसे से शानदार बिस्तर खरीदा जा सकता है लेकिन सुकून भरी नींद नहीं, सबसे महंगी गाड़ी खरीदी जा सकती है पर सच्चा परिवार नहीं, और दवाइयाँ खरीदी जा सकती हैं पर खोया हुआ स्वास्थ्य और जीवन नहीं। पैसे से आलीशान बंगला तो बन सकता है, पर उसे हँसता-खेलता घर अपनों का प्यार ही बना सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस कलयुगी सभ्यता में लोग चंद कागज़ के नोटों के लिए अपने बूढ़े माँ-बाप को रोता हुआ छोड़ देते हैं, और जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले पति या पत्नी को भी सिर्फ इसलिए त्याग देते हैं क्योंकि उन्हें कहीं और ज़्यादा पैसा या ऊँचा पद दिखाई देने लगता है। इसके साथ ही, भाई-बहन और सच्चे दोस्तों के विश्वास का खुलेआम व्यापार किया जा रहा है। ऐसे कार्य करने वाले हर महिला और पुरुष से हाथ जोड़कर अनुज चौहान ने संभल जाने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि माँ-बाप, भाई-बहन या जीवनसाथी के बिना कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी सुखी नहीं रह सकता। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि वक़्त का पहिया घूमता है और आज जो बोया जा रहा है, कल वही काटना पड़ेगा; बुरे वक़्त में नोटों की गड्डियाँ सहारा नहीं देंगी। चौहान ने स्पष्ट किया कि पैसा जीवन चलाने के लिए आवश्यक है, लेकिन रिश्तों और ईमानदारी की बलि देकर कमाया गया धन केवल विनाश लाता है। उन्होंने लोगों से अपनी मर्यादा पहचानने, शिष्टाचार को जीवित रखने, और यदि अतीत में कोई भूल हुई है तो लालच का रास्ता छोड़कर ईमानदारी की रोटी खाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। चौहान ने अपनों को गले लगाकर सम्मान और सुकून के साथ जीवन बेहतर बनाने की प्रेरणा दी, क्योंकि साफ ज़मीर की नींद किसी अरबपति को भी नसीब नहीं होती। अंत में, उन्होंने जनता जनार्दन से इस पोस्ट को दूर-दूर तक साझा करने की अपील की ताकि यह भटकते हुए इंसानों के दिल को छूकर, उनकी आँखें खोल सके और बिखरते हुए परिवारों को टूटने से बचा सके। अनुज चौहान ने इस विचार पर बल दिया कि पैसा ही सब कुछ नहीं है; जब ज़मीर मर जाता है, तो इंसान एक ज़िंदा लाश बन जाता है।
'मनुज क्रांति न्यूज़' से अनुज चौहान ने पत्रकार के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज को संबोधित करते हुए कहा है कि आज की नई पीढ़ी, चाहे पुरुष हो या महिला, 'पैसों के अंधे लालच' नामक एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गई है। उनके अनुसार, समाज में ऐसा माहौल बन गया है जहाँ लोग रिश्तों से ज़्यादा सिर्फ पैसा देखते हैं, यह मानते हुए कि जेब में पैसा होने पर दुनिया मुट्ठी में होती है। चौहान ने इस मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पैसे से शानदार बिस्तर खरीदा जा सकता है लेकिन सुकून भरी नींद नहीं, सबसे महंगी गाड़ी खरीदी जा सकती है पर सच्चा परिवार नहीं, और दवाइयाँ खरीदी जा सकती हैं पर खोया हुआ स्वास्थ्य और जीवन नहीं। पैसे से आलीशान बंगला तो बन सकता है, पर उसे हँसता-खेलता घर अपनों का प्यार ही बना सकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस कलयुगी सभ्यता में लोग चंद कागज़ के नोटों के लिए अपने बूढ़े माँ-बाप को रोता हुआ छोड़ देते हैं, और जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले पति या पत्नी को भी सिर्फ इसलिए त्याग देते हैं क्योंकि उन्हें कहीं और ज़्यादा पैसा या ऊँचा पद दिखाई देने लगता है। इसके साथ ही, भाई-बहन और सच्चे दोस्तों के विश्वास का खुलेआम व्यापार किया जा रहा है। ऐसे कार्य करने वाले हर महिला और पुरुष से हाथ जोड़कर अनुज चौहान ने संभल जाने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि माँ-बाप, भाई-बहन या जीवनसाथी के बिना कोई भी इंसान इस दुनिया में कभी सुखी नहीं रह सकता। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि वक़्त का पहिया घूमता है और आज जो बोया जा रहा है, कल वही काटना पड़ेगा; बुरे वक़्त में नोटों की गड्डियाँ सहारा नहीं देंगी। चौहान ने स्पष्ट किया कि पैसा जीवन चलाने के लिए आवश्यक है, लेकिन रिश्तों और ईमानदारी की बलि देकर कमाया गया धन केवल विनाश लाता है। उन्होंने लोगों से अपनी मर्यादा पहचानने, शिष्टाचार को जीवित रखने, और यदि अतीत में कोई भूल हुई है तो लालच का रास्ता छोड़कर ईमानदारी की रोटी खाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। चौहान ने अपनों को गले लगाकर सम्मान और सुकून के साथ जीवन बेहतर बनाने की प्रेरणा दी, क्योंकि साफ ज़मीर की नींद किसी अरबपति को भी नसीब नहीं होती। अंत में, उन्होंने जनता जनार्दन से इस पोस्ट को दूर-दूर तक साझा करने की अपील की ताकि यह भटकते हुए इंसानों के दिल को छूकर, उनकी आँखें खोल सके और बिखरते हुए परिवारों को टूटने से बचा सके। अनुज चौहान ने इस विचार पर बल दिया कि पैसा ही सब कुछ नहीं है; जब ज़मीर मर जाता है, तो इंसान एक ज़िंदा लाश बन जाता है।
- जनपद उन्नाव की ग्राम पंचायत बिहार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच गया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने पिछले पाँच वर्षों में ग्रामीणों को किसी भी सरकारी सुविधा या योजना का लाभ नहीं दिया है।1
- अनुज चौहान, मुख्य संवाददाता (मनुज क्रांति न्यूज़ - वतन की गरिमा) ने समाज के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है, जिसे उन्होंने 'समाज की जड़ पर लगा दीमक' बताया है। उनका कहना है कि अक्सर 'बेटी पढ़ाओ, बहू पढ़ाओ, उन्हें आज़ाद करो' जैसे नारे सुने जाते हैं, लेकिन आज़ादी की इस आड़ में समाज से मर्यादा, शिष्टाचार और शर्म खत्म होती दिख रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे ही कई डरावने कांड सामने आ रहे हैं। इन मामलों में एक गरीब पति दिन-रात एक करके, अपनी ज़मीन और खेत बेचकर पत्नी को पढ़ाता-लिखाता है, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन, जैसे ही पत्नी को सरकारी नौकरी या अफ़सरी की कुर्सी मिलती है, वह सिन्दूर की कीमत और पति के सालों के त्याग को ठुकरा देती है। चौहान ने सवाल उठाया कि 10-15 साल की शादी और बच्चों के बाद, अफ़सर बनते ही किसी बाहरी व्यक्ति से 'अफेयर' और प्यार कैसे हो जाता है? वे इसे प्यार नहीं, बल्कि 'विशुद्ध रूप से स्वार्थ का खेल' करार देते हैं, जहाँ शादियों को व्यापार समझा जा रहा है और बेहतर पद वाला कोई दूसरा मिलने पर पहले वाले को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पुराने समय का समाज का डर, अपनों के प्रति लिहाज़ और लोक-लाज अब ढोंग बनकर रह गए हैं। इस धोखे के भयानक सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने चेतावनी दी कि इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों मासूम बेटियों और बहुओं को उठाना पड़ेगा जो सच में पढ़ना चाहती हैं। उनके अनुसार, गरीब या मध्यमवर्गीय पति या पिता अपनी बहुओं को घर से बाहर भेजने से डरने लगेंगे कि 'कहीं अफ़सर बनने के बाद यह भी हमें छोड़ कर न चली जाए!' उन्होंने कहा कि अगर समाज में ऐसे ही कांड चलते रहे और मर्यादा का कत्ल होता रहा, तो पवित्र रिश्तों से लोगों का भरोसा उठ जाएगा, और चंद लोगों के इस लालच तथा व्यापार की सज़ा पूरे समाज को भुगतनी पड़ेगी। अंत में, उन्होंने सभी प्रबुद्ध साथियों से सवाल किया कि क्या आज़ादी के नाम पर मर्यादा खो देना सही है, और इस कलयुगी खेल तथा टूटते विश्वास पर उनकी राय और इस पोस्ट को समाज को जगाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया।2
- उन्नाव जिले के सगौली स्थित एक तालाब में दस साल के लंबे अंतराल के बाद कमल के फूल फिर से खिले हैं, जो एक दुर्लभ नजारा है। हालांकि, यहां के स्थानीय परिवार लगातार इन कमल के फूलों को नष्ट कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिंघाड़े की फसल उगाना है, जिसके लिए वे कमल के पौधों को या तो उखाड़कर फेंक देते हैं या उन्हें किसी और तरीके से हटा देते हैं, जिससे कमल की यह बहुप्रतीक्षित फसल हर बार बर्बाद हो जाती है।1
- उन्नाव में भीषण गर्मी के बीच पुलिस प्रशासन का एक मानवीय और प्रेरणादायक चेहरा सामने आया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए यातायात व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों को सहायता प्रदान की है। पुलिस कार्यालय परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 88 पीआरडी और होमगार्ड जवानों को पानी की बोतलें और छाते वितरित किए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि चिलचिलाती धूप में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए, जवानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है, और उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई है। एसएसपी ने जवानों को समय-समय पर पानी पीने, छाते का उपयोग करने और गर्मी से बचाव के सभी आवश्यक उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उन्नाव पुलिस की यह पहल जवानों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का एक बड़ा संदेश दे रही है।1
- एक दृश्य सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि एक ही सीट पर तीन यात्री सोकर यात्रा कर रहे हैं। इन यात्रियों ने सीट पर आराम फरमाते हुए दूसरों को बैठने की जगह नहीं दी है।1
- रायबरेली के गुरबक्शगंज क्षेत्र में बिजली की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गहरा रोष व्याप्त है।1
- फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में एकतरफा प्यार की सनक ने डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से जान ले ली, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक सनकी युवक ने अपने कथित प्रेम में बाधा मानते हुए इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। आरोप है कि आरोपी युवक युवती के शादीशुदा होने और मां बनने के बावजूद उस पर शादी का दबाव बना रहा था। शनिवार को वह शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी पहुंचा और डेढ़ साल के मासूम आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। कुछ देर बाद मासूम का शव मिला। आरोप है कि आरोपी ने बच्चे को कई बार जमीन पर पटककर उसकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। पुलिस ने तत्काल आरोपी की तलाश शुरू की और बाद में उसे एक मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है और उसका इलाज चल रहा है। हालांकि, इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या डेढ़ साल के मासूम की इतनी निर्मम हत्या के बाद सिर्फ 'हाफ एनकाउंटर' ही न्याय है? कई लोगों का मानना है कि इतनी क्रूरता वाले अपराध में केवल गिरफ्तारी या मुठभेड़ से न्याय की भावना पूरी नहीं होती। वहीं, कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायालय को है, और अंतिम फैसला अदालत ही करेगी। फिलहाल, लोगों में भारी आक्रोश है और वे आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि मासूम आरव को वास्तविक न्याय मिल सके।1