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रायबरेली के गुरबक्शगंज क्षेत्र में बिजली की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गहरा रोष व्याप्त है।

4 hrs ago
user_RN Vishwkarma
RN Vishwkarma
बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
4 hrs ago

रायबरेली के गुरबक्शगंज क्षेत्र में बिजली की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गहरा रोष व्याप्त है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • जनपद उन्नाव की ग्राम पंचायत बिहार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच गया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने पिछले पाँच वर्षों में ग्रामीणों को किसी भी सरकारी सुविधा या योजना का लाभ नहीं दिया है।
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    जनपद उन्नाव की ग्राम पंचायत बिहार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच गया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने पिछले पाँच वर्षों में ग्रामीणों को किसी भी सरकारी सुविधा या योजना का लाभ नहीं दिया है।
    user_RN Vishwkarma
    RN Vishwkarma
    बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • अनुज चौहान, मुख्य संवाददाता (मनुज क्रांति न्यूज़ - वतन की गरिमा) ने समाज के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है, जिसे उन्होंने 'समाज की जड़ पर लगा दीमक' बताया है। उनका कहना है कि अक्सर 'बेटी पढ़ाओ, बहू पढ़ाओ, उन्हें आज़ाद करो' जैसे नारे सुने जाते हैं, लेकिन आज़ादी की इस आड़ में समाज से मर्यादा, शिष्टाचार और शर्म खत्म होती दिख रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे ही कई डरावने कांड सामने आ रहे हैं। इन मामलों में एक गरीब पति दिन-रात एक करके, अपनी ज़मीन और खेत बेचकर पत्नी को पढ़ाता-लिखाता है, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन, जैसे ही पत्नी को सरकारी नौकरी या अफ़सरी की कुर्सी मिलती है, वह सिन्दूर की कीमत और पति के सालों के त्याग को ठुकरा देती है। चौहान ने सवाल उठाया कि 10-15 साल की शादी और बच्चों के बाद, अफ़सर बनते ही किसी बाहरी व्यक्ति से 'अफेयर' और प्यार कैसे हो जाता है? वे इसे प्यार नहीं, बल्कि 'विशुद्ध रूप से स्वार्थ का खेल' करार देते हैं, जहाँ शादियों को व्यापार समझा जा रहा है और बेहतर पद वाला कोई दूसरा मिलने पर पहले वाले को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पुराने समय का समाज का डर, अपनों के प्रति लिहाज़ और लोक-लाज अब ढोंग बनकर रह गए हैं। इस धोखे के भयानक सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने चेतावनी दी कि इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों मासूम बेटियों और बहुओं को उठाना पड़ेगा जो सच में पढ़ना चाहती हैं। उनके अनुसार, गरीब या मध्यमवर्गीय पति या पिता अपनी बहुओं को घर से बाहर भेजने से डरने लगेंगे कि 'कहीं अफ़सर बनने के बाद यह भी हमें छोड़ कर न चली जाए!' उन्होंने कहा कि अगर समाज में ऐसे ही कांड चलते रहे और मर्यादा का कत्ल होता रहा, तो पवित्र रिश्तों से लोगों का भरोसा उठ जाएगा, और चंद लोगों के इस लालच तथा व्यापार की सज़ा पूरे समाज को भुगतनी पड़ेगी। अंत में, उन्होंने सभी प्रबुद्ध साथियों से सवाल किया कि क्या आज़ादी के नाम पर मर्यादा खो देना सही है, और इस कलयुगी खेल तथा टूटते विश्वास पर उनकी राय और इस पोस्ट को समाज को जगाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया।
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    अनुज चौहान, मुख्य संवाददाता (मनुज क्रांति न्यूज़ - वतन की गरिमा) ने समाज के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है, जिसे उन्होंने 'समाज की जड़ पर लगा दीमक' बताया है। उनका कहना है कि अक्सर 'बेटी पढ़ाओ, बहू पढ़ाओ, उन्हें आज़ाद करो' जैसे नारे सुने जाते हैं, लेकिन आज़ादी की इस आड़ में समाज से मर्यादा, शिष्टाचार और शर्म खत्म होती दिख रही है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे ही कई डरावने कांड सामने आ रहे हैं। इन मामलों में एक गरीब पति दिन-रात एक करके, अपनी ज़मीन और खेत बेचकर पत्नी को पढ़ाता-लिखाता है, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन, जैसे ही पत्नी को सरकारी नौकरी या अफ़सरी की कुर्सी मिलती है, वह सिन्दूर की कीमत और पति के सालों के त्याग को ठुकरा देती है। चौहान ने सवाल उठाया कि 10-15 साल की शादी और बच्चों के बाद, अफ़सर बनते ही किसी बाहरी व्यक्ति से 'अफेयर' और प्यार कैसे हो जाता है? वे इसे प्यार नहीं, बल्कि 'विशुद्ध रूप से स्वार्थ का खेल' करार देते हैं, जहाँ शादियों को व्यापार समझा जा रहा है और बेहतर पद वाला कोई दूसरा मिलने पर पहले वाले को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पुराने समय का समाज का डर, अपनों के प्रति लिहाज़ और लोक-लाज अब ढोंग बनकर रह गए हैं।

इस धोखे के भयानक सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने चेतावनी दी कि इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों मासूम बेटियों और बहुओं को उठाना पड़ेगा जो सच में पढ़ना चाहती हैं। उनके अनुसार, गरीब या मध्यमवर्गीय पति या पिता अपनी बहुओं को घर से बाहर भेजने से डरने लगेंगे कि 'कहीं अफ़सर बनने के बाद यह भी हमें छोड़ कर न चली जाए!' उन्होंने कहा कि अगर समाज में ऐसे ही कांड चलते रहे और मर्यादा का कत्ल होता रहा, तो पवित्र रिश्तों से लोगों का भरोसा उठ जाएगा, और चंद लोगों के इस लालच तथा व्यापार की सज़ा पूरे समाज को भुगतनी पड़ेगी। अंत में, उन्होंने सभी प्रबुद्ध साथियों से सवाल किया कि क्या आज़ादी के नाम पर मर्यादा खो देना सही है, और इस कलयुगी खेल तथा टूटते विश्वास पर उनकी राय और इस पोस्ट को समाज को जगाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया।
    user_Anuj Chauhan (Reporter)
    Anuj Chauhan (Reporter)
    Local News Reporter बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • उन्नाव जिले के सगौली स्थित एक तालाब में दस साल के लंबे अंतराल के बाद कमल के फूल फिर से खिले हैं, जो एक दुर्लभ नजारा है। हालांकि, यहां के स्थानीय परिवार लगातार इन कमल के फूलों को नष्ट कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिंघाड़े की फसल उगाना है, जिसके लिए वे कमल के पौधों को या तो उखाड़कर फेंक देते हैं या उन्हें किसी और तरीके से हटा देते हैं, जिससे कमल की यह बहुप्रतीक्षित फसल हर बार बर्बाद हो जाती है।
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    उन्नाव जिले के सगौली स्थित एक तालाब में दस साल के लंबे अंतराल के बाद कमल के फूल फिर से खिले हैं, जो एक दुर्लभ नजारा है। हालांकि, यहां के स्थानीय परिवार लगातार इन कमल के फूलों को नष्ट कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिंघाड़े की फसल उगाना है, जिसके लिए वे कमल के पौधों को या तो उखाड़कर फेंक देते हैं या उन्हें किसी और तरीके से हटा देते हैं, जिससे कमल की यह बहुप्रतीक्षित फसल हर बार बर्बाद हो जाती है।
    user_R v
    R v
    उन्नाव, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • एक दृश्य सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि एक ही सीट पर तीन यात्री सोकर यात्रा कर रहे हैं। इन यात्रियों ने सीट पर आराम फरमाते हुए दूसरों को बैठने की जगह नहीं दी है।
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    एक दृश्य सामने आया है जिसमें देखा जा सकता है कि एक ही सीट पर तीन यात्री सोकर यात्रा कर रहे हैं। इन यात्रियों ने सीट पर आराम फरमाते हुए दूसरों को बैठने की जगह नहीं दी है।
    user_Sachin nishad
    Sachin nishad
    कानपुर, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • रायबरेली के गुरबक्शगंज क्षेत्र में बिजली की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गहरा रोष व्याप्त है।
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    रायबरेली के गुरबक्शगंज क्षेत्र में बिजली की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण गहरा रोष व्याप्त है।
    user_RN Vishwkarma
    RN Vishwkarma
    बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में एकतरफा प्यार की सनक ने डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से जान ले ली, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक सनकी युवक ने अपने कथित प्रेम में बाधा मानते हुए इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। आरोप है कि आरोपी युवक युवती के शादीशुदा होने और मां बनने के बावजूद उस पर शादी का दबाव बना रहा था। शनिवार को वह शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी पहुंचा और डेढ़ साल के मासूम आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। कुछ देर बाद मासूम का शव मिला। आरोप है कि आरोपी ने बच्चे को कई बार जमीन पर पटककर उसकी हत्या कर दी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। पुलिस ने तत्काल आरोपी की तलाश शुरू की और बाद में उसे एक मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है और उसका इलाज चल रहा है। हालांकि, इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या डेढ़ साल के मासूम की इतनी निर्मम हत्या के बाद सिर्फ 'हाफ एनकाउंटर' ही न्याय है? कई लोगों का मानना है कि इतनी क्रूरता वाले अपराध में केवल गिरफ्तारी या मुठभेड़ से न्याय की भावना पूरी नहीं होती। वहीं, कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायालय को है, और अंतिम फैसला अदालत ही करेगी। फिलहाल, लोगों में भारी आक्रोश है और वे आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि मासूम आरव को वास्तविक न्याय मिल सके।
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    फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में एकतरफा प्यार की सनक ने डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से जान ले ली, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक सनकी युवक ने अपने कथित प्रेम में बाधा मानते हुए इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।

आरोप है कि आरोपी युवक युवती के शादीशुदा होने और मां बनने के बावजूद उस पर शादी का दबाव बना रहा था। शनिवार को वह शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी पहुंचा और डेढ़ साल के मासूम आरव को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। कुछ देर बाद मासूम का शव मिला। आरोप है कि आरोपी ने बच्चे को कई बार जमीन पर पटककर उसकी हत्या कर दी।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। पुलिस ने तत्काल आरोपी की तलाश शुरू की और बाद में उसे एक मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी है और उसका इलाज चल रहा है।

हालांकि, इस घटना के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या डेढ़ साल के मासूम की इतनी निर्मम हत्या के बाद सिर्फ 'हाफ एनकाउंटर' ही न्याय है? कई लोगों का मानना है कि इतनी क्रूरता वाले अपराध में केवल गिरफ्तारी या मुठभेड़ से न्याय की भावना पूरी नहीं होती। वहीं, कानून के अनुसार, किसी भी आरोपी को सजा देने का अधिकार केवल न्यायालय को है, और अंतिम फैसला अदालत ही करेगी। फिलहाल, लोगों में भारी आक्रोश है और वे आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि मासूम आरव को वास्तविक न्याय मिल सके।
    user_Rohit Kumar Baudh
    Rohit Kumar Baudh
    Court reporter उन्नाव, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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