कुशीनगर के कसया नगर में गोरखपुर मार्ग स्थित कर्बला के पास खुले में चल रही मुर्गा और बकरा मांस की दुकानों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। इस दौरान अवैध रूप से संचालित इन दुकानों और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे क्षेत्र के दुकानदारों में भारी हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई खुले में चल रही दुकानों और अतिक्रमण को लेकर प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई। शिकायतों के मद्देनजर, प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध कब्जे और दुकानों पर बुलडोजर से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे, खुले में मांस की बिक्री और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। इस कार्रवाई के बाद आसपास के दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
कुशीनगर के कसया नगर में गोरखपुर मार्ग स्थित कर्बला के पास खुले में चल रही मुर्गा और बकरा मांस की दुकानों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। इस दौरान अवैध रूप से संचालित इन दुकानों और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे क्षेत्र के दुकानदारों में भारी हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई खुले में चल रही दुकानों और अतिक्रमण को लेकर प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई। शिकायतों के मद्देनजर, प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध कब्जे और दुकानों पर बुलडोजर से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे, खुले में मांस की बिक्री और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। इस कार्रवाई के बाद आसपास के दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
- कुशीनगर के कसया में प्रशासन ने गोरखपुर मार्ग स्थित कर्बला के पास एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। यह कार्रवाई खुले में संचालित मुर्गा और बकरा की दुकानों के खिलाफ की गई, जो अतिक्रमण और खुले में दुकान संचालन के नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। एसडीएम डॉ. के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान तहसीलदार, एसओ और नगरपालिका की टीम भी मौजूद रही। प्रशासन के इस अचानक एक्शन से दुकानदारों में हड़कंप मच गया।1
- कुशीनगर के कसया नगर में गोरखपुर मार्ग स्थित कर्बला के पास खुले में चल रही मुर्गा और बकरा मांस की दुकानों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। इस दौरान अवैध रूप से संचालित इन दुकानों और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे क्षेत्र के दुकानदारों में भारी हड़कंप मच गया। यह कार्रवाई खुले में चल रही दुकानों और अतिक्रमण को लेकर प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई। शिकायतों के मद्देनजर, प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध कब्जे और दुकानों पर बुलडोजर से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे, खुले में मांस की बिक्री और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। इस कार्रवाई के बाद आसपास के दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।1
- कुशीनगर में एक सिंगल रोड पर हुए एक हादसे में एक कार ने गलत लेन में घुसकर बाइक सवार तीन लोगों को रौंद दिया।1
- कुशीनगर में बड़ी गंडक नदी के दाएं तट पर स्थित त्रिवेणी तटबंध के किलोमीटर 12.700 पर सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा बनाए जा रहे वीरभार स्पर (ठोकर) का नोजल पहली ही बारिश में धंस गया है। इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने निर्माण में अनियमितता और घटिया सामग्री के प्रयोग का आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि मॉनसून की शुरुआत में हुई पहली बारिश में ही स्पर के नोजल का अगला हिस्सा धंस गया, जबकि नदी का जलस्तर अभी सामान्य है और पानी का प्रवाह एक लाख क्यूसेक से भी कम है। इसके बावजूद निर्माणाधीन ढांचे का क्षतिग्रस्त होना गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्राम प्रधान समेत स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही मानकों की अनदेखी की जा रही थी और कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बाढ़ के समय नदी का जलस्तर बढ़ा, तो तटबंध और आसपास के गांवों के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। सिंचाई विभाग के सूचना बोर्ड के अनुसार, वीरभार स्पर के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम भाग में बोल्डर क्रेट तथा नोजल निर्माण सहित विभिन्न कार्य लगभग 789.44 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने जोर देकर कहा है कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना का हिस्सा पहली ही बारिश में धंस जाना एक गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन से निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करने, गुणवत्ता की समीक्षा करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने बाढ़ से पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कर सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।2
- कुशीनगर जिले के कोप जंगल में स्थित वृहद गौ संरक्षण केंद्र का जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) आलोक प्रियदर्शी ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान केंद्र में कई खामियां पाई गईं, जिसमें सबसे प्रमुख गौशाला में लगा बायोगैस प्लांट का बंद मिलना था। यह बात सामने आई कि एक माह पहले जिलाधिकारी (डीएम) के निरीक्षण में भी यह बायोगैस प्लांट बंद मिला था, और तब एक सप्ताह के भीतर सुधार के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। डीपीआरओ के इस निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने स्वयं पुष्टि की है कि वृहद गौ संरक्षण केंद्र के निरीक्षण में कई खामियां पाई गई हैं।2
- कुशीनगर के हाटा कोतवाली क्षेत्र स्थित अर्जुन डुमरी गांव में शनिवार सुबह 45 वर्षीय रामनिवास का शव उनके घर के बाहर एक नीम के पेड़ से लटका हुआ मिला। उनकी बेटी ने शव देखा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई, जिसके बाद गांव के लोग मौके पर जुट गए। सूचना मिलने पर हाटा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को नीचे उतरवाकर अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों के अनुसार, रामनिवास शुक्रवार रात मजदूरी करके घर लौटे थे और भोजन करने के बाद सो गए थे। सुबह उनका शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। हाटा कोतवाली पुलिस इस मामले में प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका जता रही है और सभी पहलुओं से घटना की जांच कर रही है।4
- कुशीनगर जनपद के रविंद्र नगर स्थित एल-2 अस्पताल परिसर में हल्की बारिश के बाद ही जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, थोड़ी सी बरसात होते ही नालियां ओवरफ्लो हो जाती हैं, जिससे अस्पताल परिसर और उसके आसपास नालियों का गंदा पानी तथा बारिश का पानी जमा हो जाता है। इस जलभराव के कारण अस्पताल आने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें गंदे पानी से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है, जो एक मजबूरी बन गई है, और इससे संक्रमण फैलने की आशंका भी लगातार बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभाग से इस समस्या के समाधान की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में नालियों की नियमित सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है, ताकि बारिश के दौरान अस्पताल परिसर में होने वाले जलभराव से लोगों को राहत मिल सके।3