रामपुर सिंडाय, बरबीघा की बेटी आनंदा सिंन्हा ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर न केवल बरबीघा बल्कि पूरे शेखपुरा जिले का मान बढ़ाया है। इस परीक्षा में स्टेट टैक्स कमिश्नर के पद पर चयनित होने से उनके परिवार, माता-पिता, भाई-बहन और भाभी में अपार खुशी है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। Starnewsbihar. In के संवाददाता तरुण कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, आनंदा की इस उपलब्धि से उनके सभी सगे-संबंधियों में भी खुशी की लहर है। शेखपुरा जिले के नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले गांव बरबीघा रामपुर सिंडाय से निकलकर, आनंदा ने पटना में पढ़ाई की और फिर दिल्ली जाकर बीपीएससी की तैयारी की। यह उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि उन्होंने अपनी इस सफलता को हासिल किया। आनंदा सिंन्हा के पिता दिनेश कुमार सिंह हैं, जिन्होंने पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ दी थी। वे पांच बेटियों और एक बेटे के पिता हैं, जिनमें से चार बेटियों और बेटे की शादी हो चुकी है। उनका बेटा भी पुलिस विभाग में एक बड़े अधिकारी के रूप में कार्यरत है। आनंदा की माता विमला देवी, दिनेश सिंह की पत्नी, एक कुशल गृहिणी हैं, जिन्होंने अपनी सभी बेटियों को समान अवसर दिए और उनमें कभी कोई भेद नहीं किया। दिनेश सिंह को अच्छे स्वभाव का व्यक्ति बताया गया है जो परिवार और समाज में मिल-जुलकर रहते हैं। दिनेश कुमार सिंह की सबसे छोटी बेटी आनंदा बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थीं। उन्होंने पहले भी कई परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की थी और तीन बार बीपीएससी के इंटरव्यू तक पहुंची थीं, लेकिन उनका चयन नहीं हो पाया था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी, अपनी कमियों को दूर किया और 70वीं परीक्षा में अपने चौथे प्रयास में अपना परचम लहराया। आनंदा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, भाभी और बहनों को दिया, जिन्होंने उनके संघर्ष में साथ दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत, सेल्फ स्टडी और इंटरनेट के सहारे पढ़ाई करने तथा सिर्फ अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर बरबीघा नगर परिषद के अध्यक्ष सोनू कुमार, रोशन सिंह, श्री त्रिशूल धारी सिंह, वार्ड पार्षद सुनील कुमार सिंह सहित कई व्यक्तियों ने आनंदा सिंन्हा को उनकी सफलता पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उनकी भाभी धीरज कुमार की पत्नी ने बताया कि वह आनंदा को अपनी बेटी मानती हैं और उन्हें बेटी जैसा ही प्यार देती हैं। आनंदा ने भी स्वीकार किया कि मां के बाद उन्हें सबसे ज्यादा प्यार भाभी से ही मिला है, जो उनकी सारी इच्छाएं पूरी करती थीं।
रामपुर सिंडाय, बरबीघा की बेटी आनंदा सिंन्हा ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर न केवल बरबीघा बल्कि पूरे शेखपुरा जिले का मान बढ़ाया है। इस परीक्षा में स्टेट टैक्स कमिश्नर के पद पर चयनित होने से उनके परिवार, माता-पिता, भाई-बहन और भाभी में अपार खुशी है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। Starnewsbihar. In के संवाददाता तरुण कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, आनंदा की इस उपलब्धि से उनके सभी सगे-संबंधियों में भी खुशी की लहर है। शेखपुरा जिले के नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले गांव बरबीघा रामपुर सिंडाय से निकलकर, आनंदा ने पटना में पढ़ाई की और फिर दिल्ली
जाकर बीपीएससी की तैयारी की। यह उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि उन्होंने अपनी इस सफलता को हासिल किया। आनंदा सिंन्हा के पिता दिनेश कुमार सिंह हैं, जिन्होंने पुलिस विभाग की नौकरी छोड़ दी थी। वे पांच बेटियों और एक बेटे के पिता हैं, जिनमें से चार बेटियों और बेटे की शादी हो चुकी है। उनका बेटा भी पुलिस विभाग में एक बड़े अधिकारी के रूप में कार्यरत है। आनंदा की माता विमला देवी, दिनेश सिंह की पत्नी, एक कुशल गृहिणी हैं, जिन्होंने अपनी सभी बेटियों को समान अवसर दिए और उनमें कभी कोई भेद नहीं किया। दिनेश सिंह को
अच्छे स्वभाव का व्यक्ति बताया गया है जो परिवार और समाज में मिल-जुलकर रहते हैं। दिनेश कुमार सिंह की सबसे छोटी बेटी आनंदा बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी थीं। उन्होंने पहले भी कई परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की थी और तीन बार बीपीएससी के इंटरव्यू तक पहुंची थीं, लेकिन उनका चयन नहीं हो पाया था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी, अपनी कमियों को दूर किया और 70वीं परीक्षा में अपने चौथे प्रयास में अपना परचम लहराया। आनंदा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, भाभी और बहनों को दिया, जिन्होंने उनके संघर्ष में साथ दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत, सेल्फ स्टडी और
इंटरनेट के सहारे पढ़ाई करने तथा सिर्फ अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर बरबीघा नगर परिषद के अध्यक्ष सोनू कुमार, रोशन सिंह, श्री त्रिशूल धारी सिंह, वार्ड पार्षद सुनील कुमार सिंह सहित कई व्यक्तियों ने आनंदा सिंन्हा को उनकी सफलता पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। उनकी भाभी धीरज कुमार की पत्नी ने बताया कि वह आनंदा को अपनी बेटी मानती हैं और उन्हें बेटी जैसा ही प्यार देती हैं। आनंदा ने भी स्वीकार किया कि मां के बाद उन्हें सबसे ज्यादा प्यार भाभी से ही मिला है, जो उनकी सारी इच्छाएं पूरी करती थीं।
- गुलचू द्वारा एक भजन प्रस्तुत किया गया है।1
- भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। बिहार सरकार द्वारा इस मामले की जांच के लिए नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा गुरुवार को बिलौटी गांव पहुंचे। उनके साथ शाहबाद रेंज के डीआईजी सत्य प्रकाश, भोजपुर के डीएम तनय सुल्तानिया और भोजपुर के एसपी राज सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद थे। रिटायर्ड जज सिन्हा ने घटना स्थल का मुआयना किया और घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने सबसे पहले भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की। यह न्यायिक जांच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा न्यायिक जांच कराए जाने की बात कहे जाने के बाद शुरू हुई है। जांच के लिए बिहार स्टेट लॉ कमीशन की टीम भी शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव पहुंची है, जहां काफी संख्या में लोग मौजूद थे।1
- रानिपोखर में एटीएम कैश वैन को लूटने का प्रयास विफल हो गया। लुटेरों ने एटीएम कैश वैन से लूट की कोशिश की, लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए। इस नाकाम कोशिश के बाद लुटेरे को गिरफ्तार कर लिया गया है।1
- पडरौना स्थित किलकारी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल परख डायग्नोस्टिक सेंटर में एक डॉक्टर ने उस वक्त पिस्टल निकाल ली, जब मरीज अपनी बीमारी के बारे में पूछताछ कर रहे थे। मरीज अपना इलाज कराने के लिए हॉस्पिटल आए थे और अपनी बीमारी को लेकर जानकारी मांग रहे थे, जिसके जवाब में डॉक्टर ने कथित तौर पर पिस्टल निकालकर उन्हें दिखाया।1
- सुलींदाबाद से प्राप्त एक वीडियो के अनुसार, 25 तारीख की रात क्षेत्र में बहुत ज़्यादा बारिश हुई है।1
- भोजपुर में भरत तिवारी मुठभेड़ मामले की न्यायिक जांच शुरू हो गई है। इस जांच के लिए संबंधित टीम बिलोटी गांव पहुंच चुकी है।1
- यह जानकारी गुलचू भजन से संबंधित है।1
- बिहार के बिहटा में शाहपुर प्रखंड के बीलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को एक कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च राघोपुर स्थित स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम से शुरू होकर बिहटा चौक तक पहुँचा, जिसमें जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, युवाओं, महिलाओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। मार्च में शामिल लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि दी और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। लोगों का आरोप था कि भरत भूषण तिवारी ने जीवनभर गरीबों, वंचितों और शोषितों के हक की लड़ाई लड़ी तथा जनसरोकारों के विभिन्न मुद्दों को उठाया, लेकिन वे भ्रष्ट व्यवस्था और अफसरशाही के शिकार हो गए। मार्च के दौरान "भरत भूषण तिवारी अमर रहें", "न्याय दो" और "सत्य की जीत हो" जैसे नारे लगाए गए। समाजसेवी कुश कुमार ने स्पष्ट किया कि जब तक भरत भूषण तिवारी को न्याय नहीं मिल जाता और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने इस लड़ाई में समाज के सभी वर्गों की एकजुटता पर जोर दिया। बिहटा चौक पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. ललित मोहन शर्मा ने कहा कि भरत भूषण तिवारी गरीबों की आवाज थे और जमानिया गांव के पुनर्स्थापन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने मामले की जांच पूर्व डीजीपी अभयानंद की निगरानी में कराने की मांग की।1
- राजधानी पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर के आसपास प्रतिदिन लगने वाले फूलों के बड़े बाजार के कारण गंदगी और कचरे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। श्रद्धालु भगवान को अर्पित करने के लिए बड़ी मात्रा में फूल, माला और पूजा सामग्री खरीदते हैं, लेकिन बाजार समाप्त होने के बाद भारी मात्रा में फूल, पत्तियां, प्लास्टिक और अन्य कचरा सड़कों पर बिखरा रह जाता है। यह स्थिति महावीर मंदिर जैसे देश के प्रमुख धार्मिक स्थल, जहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन के लिए आते हैं, के लिए चिंताजनक है। मंदिर के प्रवेश मार्ग पर कचरे का अंबार न केवल शहर की छवि को धूमिल करता है, बल्कि श्रद्धालुओं को भी असुविधा होती है। कई लोगों का कहना है कि दुर्गंध और गंदगी के कारण मंदिर के आसपास खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है, और आशंका है कि इस गर्मी में इससे बीमारियाँ फैल सकती हैं। स्थानीय लोग नगर निगम की सफाई व्यवस्था को अनियमित और अप्रभावी बताते हुए आरोप लगाते हैं कि उनकी तरफ से लापरवाही बरती जा रही है। इस समस्या के समाधान के लिए लोगों ने फूल बाजार समाप्त होने के तुरंत बाद विशेष सफाई अभियान चलाने, पूजा सामग्री और जैविक कचरे के लिए अलग डस्टबिन रखने तथा नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। महावीर मंदिर, जो आस्था का केंद्र है, उसकी स्वच्छता सुनिश्चित करना केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि दुकानदारों, श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है। यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले, जिससे श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुंदर और सम्मानजनक वातावरण में दर्शन का अवसर मिल सके और मंदिर परिसर की गरिमा बनी रहे।1