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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद भवन पहुंचे। एनडीए सांसदों ने उनका मकरद्वार पर जोरदार स्वागत किया। इस स्वागत से यह संकेत मिलता है कि प्रधान का कद और प्रभाव अभी भी बरकरार है। उनका इस्तीफा और फिर संसद में स्वागत, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद भवन पहुंचे। एनडीए सांसदों ने उनका मकरद्वार पर जोरदार स्वागत किया। इस स्वागत से यह संकेत मिलता है कि प्रधान का कद और प्रभाव अभी भी बरकरार है। उनका इस्तीफा और फिर संसद में स्वागत, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
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- दिल्ली के हजारीबाग के वास्तु विहार फेस-3 में एक जमीन विवाद सामने आया है। इस विवाद में रैयत और एक कंपनी आमने-सामने हैं। विवाद की जड़ में जमीन का मालिकाना हक है। रैयत का दावा है कि यह जमीन उनकी है, जबकि कंपनी का कहना है कि जमीन उनके नाम पर है। फिलहाल, इस विवाद का कोई हल नहीं निकला है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर अड़े हुए हैं।1
- तेलंगाना के हैदराबाद से बड़ी संख्या में पत्रकार दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचे और भारत सरकार से अपनी मुख्य मांगे रखीं। पत्रकारों का यह समूह अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता है। इस समूह में शामिल पत्रकारों ने केंद्र सरकार से कुछ महत्वपूर्ण मांगे रखीं, हालांकि स्रोत में यह नहीं बताया गया है कि ये मांगे क्या हैं। पत्रकारों का यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और उन्होंने अपनी बात रखने के लिए जंतर मंतर को मंच के तौर पर चुना।1
- देश के युवाओं ने एकजुट होकर आवाज़ उठाई और नतीजा यह हुआ कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा। अब E20 के मुद्दे पर भी हमें एक होकर आवाज़ उठानी होगी। इस शनिवार को 'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20' आयोजित किया जा रहा है, जिसमें शामिल होकर आप E20 पर अपनी बात रख सकते हैं। आप इसमें ऑनलाइन भी शामिल हो सकते हैं। आप सभी का आमंत्रण है। जैसा कि पहले देखा गया, युवाओं की एकजुटता और आवाज़ का असर होता है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा इसी का नतीजा है। अब E20 के मुद्दे पर भी हमें उसी तरह एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी।1
- नीट पेपर लीक के विरोध में सोनम वांगचुक ने 28 जून से जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन किया। इस दौरान हज़ारों छात्र सड़कों पर उतरे। मांग थी कि पेपर लीक की सीबीआई जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और छात्रों के भविष्य की गारंटी दी जाए। कई फिल्म स्टार भी इस अनशन में शामिल हुए। बीच में कुछ अपराधी और राजनीतिक तत्वों ने भी अपनी रोटियाँ सेंकीं। 26वें दिन, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से बातचीत हुई। इसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और अनशन टूट गया। सरकार ने लिखित आश्वासन दिए कि छात्रों पर एफआईआर नहीं होगी, पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं: क्या सीबीआई जांच होगी? क्या दोषी बड़े गिरोह तक पहुँचेंगे? क्या अगली परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी? या फिर ये सब सिर्फ headlines तक सीमित रहेगा? हर साल लाखों छात्र, करोड़ों की फीस, माँ-बाप की उम्मीदें—एक लीक से सब दांव पर लग जाती हैं। न्याय सिर्फ बयानों से नहीं, कार्रवाई से मिलता है। अब सवाल यह है कि क्या इस अनशन का असर हुआ या यह सिर्फ शोर था? आपकी राय कमेंट में शेयर करें और वीडियो शेयर करें, ताकि आवाज़ दबे नहीं। जय भारत माता! छात्रों के भविष्य के लिए सरकार झुकी है, अब सरकार से निवेदन है कि दोषियों को शीघ्र सजा दे।1
- सैनी समाज की ओर से सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई हैं। समाज ने समस्त देशवासियों के प्रति अपना बधाई संदेश प्रेषित किया है।1
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद भवन पहुंचे। एनडीए सांसदों ने उनका मकरद्वार पर जोरदार स्वागत किया। इस स्वागत से यह संकेत मिलता है कि प्रधान का कद और प्रभाव अभी भी बरकरार है। उनका इस्तीफा और फिर संसद में स्वागत, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।1
- रांची के गांधी नगर में जमीन को लेकर जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके पास सभी कानूनी दस्तावेज़ होने के बावजूद उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा है। इस विवाद ने समुदाय में गहरी नाराजगी और निराशा पैदा कर दी है। पीड़ितों का कहना है कि वे दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं और उनके पास सभी आवश्यक कागज़ात हैं जो उनकी मालिकाना हक़ को साबित करते हैं। फिर भी, उन्हें लगता है कि सिस्टम उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है। स्थानीय प्रशासन और न्यायपालिका से उन्हें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे उनका गुस्सा और बढ़ गया है। इस मसले पर स्थानीय नेता भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है। कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। इस विवाद का असर समुदाय के सामाजिक ताने-बाने पर भी पड़ा है। लोग आपस में बंटते जा रहे हैं और तनाव बढ़ता जा रहा है। कई परिवारों ने इस डर से अपने घर छोड़ दिए हैं कि उन्हें जबरन निकाला जा सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मसले को कैसे सुलझाता है और क्या पीड़ितों को वाकई न्याय मिल पाएगा।1
- दिल्ली के जंतर मंतर पर हैदराबाद तेलंगाना से आए लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ये लोग अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली आए हैं और जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि उनकी मांगों को पूरा करने के लिए वे यहां आए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे। उनकी मांगों में क्या शामिल है, इस बारे में प्रदर्शनकारी लोगों ने बताया कि वे अपनी मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों की मांग कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी मांगों की विस्तृत सूची नहीं दी है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो रहा है और अभी तक किसी तरह की कोई हिंसा या अशांति की सूचना नहीं है।1
- दिल्ली के नंद नगरी पुलिस स्टेशन की टीम ने एक सुनियोजित ऑपरेशन में बड़ी सफलता हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शराब की अवैध सप्लाई में शामिल एक तस्कर को गिरफ़्तार किया है। इस ऑपरेशन के दौरान भारी मात्रा में अवैध शराब भी बरामद की गई है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तस्कर के पास से 250 क्वार्टर अवैध शराब की बोतलें मिली हैं। यह कार्रवाई नंद नगरी पुलिस स्टेशन की टीम ने अंजाम दी। इस सफलता के साथ पुलिस ने अवैध शराब की सप्लाई चेन को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।1