राज्य सरकार द्वारा गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने और कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित किए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) लगभग सभी पंचायतों में बेमतलब साबित हो रहे हैं। एक ओर सरकारी धन खर्च कर इन केंद्रों का निर्माण कराया गया, वहीं दूसरी ओर इनके संचालन और रखरखाव की अनदेखी के कारण यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। कई आरआरसी सेंटरों के निर्माण का भुगतान हो चुका है, जबकि कई का भुगतान अभी भी अटका हुआ है। रसूलबाद विकास खंड क्षेत्र की कपराहट, लालगांव, अमरोहिया, मनावा सहित दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में पंचायत के कूड़े के निस्तारण हेतु आरआरसी सेंटर बनाए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इन केंद्रों के निर्माण के बाद से आज तक यहां न तो नियमित रूप से कूड़ा एकत्र किया गया और न ही उसके निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था की गई। देखरेख के अभाव में ये आरआरसी सेंटर बदहाल होते जा रहे हैं, और स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र परिसर में अराजक तत्वों का जमावड़ा होने लगा है, जिससे अनैतिक गतिविधियों की आशंका भी बनी रहती है। इस स्थिति से ग्रामीणों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करके जिस उद्देश्य से आरआरसी सेंटर बनाए गए थे, वे पूरे होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी योजना के प्रभावी संचालन को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं, जिसके चलते सरकार की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन संबंधी योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन आरआरसी सेंटरों को संचालित कर नियमित कूड़ा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके और गांव में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिल सके। इस संदर्भ में प्रभारी एडीओ पंचायत जितेंद्र सिंह ने बताया कि शासन से आरआरसी को लेकर अभी कोई नई गाइडलाइन नहीं आई है, और धन स्वीकृत होने के साथ ही नई गाइडलाइन के बाद इन केंद्रों को चालू कराया जाएगा। लाखों रुपये से निर्मित ये आरआरसी सेंटर आज मात्र 'शोपीस' बनकर रह गए हैं और कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने और कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित किए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) लगभग सभी पंचायतों में बेमतलब साबित हो रहे हैं। एक ओर सरकारी धन खर्च कर इन केंद्रों का निर्माण कराया गया, वहीं दूसरी ओर इनके संचालन और रखरखाव की अनदेखी के कारण यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। कई आरआरसी सेंटरों के निर्माण का भुगतान हो चुका है, जबकि कई का भुगतान अभी भी अटका हुआ है। रसूलबाद विकास खंड क्षेत्र की कपराहट, लालगांव, अमरोहिया, मनावा सहित दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में पंचायत के कूड़े के निस्तारण हेतु आरआरसी सेंटर बनाए गए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इन केंद्रों के निर्माण के बाद से आज तक यहां न तो नियमित रूप से कूड़ा एकत्र किया गया और न ही उसके निस्तारण की कोई समुचित व्यवस्था की गई। देखरेख के अभाव में ये आरआरसी सेंटर बदहाल होते जा रहे हैं, और स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र परिसर में अराजक तत्वों का जमावड़ा होने लगा है, जिससे अनैतिक गतिविधियों की आशंका भी बनी रहती है। इस स्थिति से ग्रामीणों में व्यापक असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करके जिस उद्देश्य से आरआरसी सेंटर बनाए गए थे, वे पूरे होते दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी योजना के प्रभावी संचालन को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं, जिसके चलते सरकार की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन संबंधी योजनाओं पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन आरआरसी सेंटरों को संचालित कर नियमित कूड़ा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो सके और गांव में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिल सके। इस संदर्भ में प्रभारी एडीओ पंचायत जितेंद्र सिंह ने बताया कि शासन से आरआरसी को लेकर अभी कोई नई गाइडलाइन नहीं आई है, और धन स्वीकृत होने के साथ ही नई गाइडलाइन के बाद इन केंद्रों को चालू कराया जाएगा। लाखों रुपये से निर्मित ये आरआरसी सेंटर आज मात्र 'शोपीस' बनकर रह गए हैं और कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
- कानपुर देहात के डेरापुर में अधिवक्ता समिति ने शासन द्वारा लागू ई-पंजीकरण/ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में 22 जून से 27 जून 2026 तक कलमबंद हड़ताल करने का निर्णय लिया है। समिति ने इस संबंध में न्यायालयों को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि हड़ताल की अवधि के दौरान सूचीबद्ध वादों में सामान्य तिथियां निर्धारित की जाएं। अधिवक्ता समिति ने न्यायालयों को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था के निजीकरण के खिलाफ आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से कलमबंद हड़ताल पर रहने का फैसला किया गया है। इसलिए, 22 से 27 जून तक न्यायालयों में नियत मामलों में अगली सामान्य तिथि निर्धारित की जाए, जिससे पक्षकारों के हित प्रभावित न हों। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि इस व्यवस्था से पक्षकारों को अनावश्यक असुविधा से बचाया जा सकेगा तथा न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति में भी वादों का समुचित प्रबंधन संभव होगा। इस हड़ताल के समर्थन में अकबरपुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष विपिन चंद्र दीक्षित, सुधीर सिंह भदौरिया, दिलीप यादव और विजय शंकर पांडेय डेरापुर तहसील परिसर पहुंचे और अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर डेरापुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्र द्विवेदी, महामंत्री हरिशंकर संखवार, गिरेंद्र सिंह गौर, महेंद्र यादव, अमर सिंह गौर, प्रशांत दीक्षित, सौरभ चौबे, बिल्लू मिश्रा, चंद्र प्रताप यादव, महेंद्र पाल, अमित तिवारी, अनिल शुक्ला और सुशील दीक्षित सहित बड़ी संख्या में अन्य अधिवक्ता भी मौजूद रहे।1
- कानपुर देहात के झींझक क्षेत्र में इस समय भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है, जिसके कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोग चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं, जिसके चलते सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है। इस बीच, बिजली की लगातार आँख मिचौली ने स्थानीय निवासियों की परेशानियों को और भी बढ़ा दिया है, जिससे भीषण गर्मी में उन्हें अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- रविवार सुबह रूरा-डेरापुर मार्ग पर गलुआपुर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों की पहचान पैलावर गांव के माजरा बदनपुर निवासी चिंटू नायक और बल्दीपुरवा मजरा सिउठा निवासी जयप्रकाश के रूप में हुई है, जिनकी दुर्घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं, सरदारपुर निवासी रोहित नायक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घायल रोहित नायक को अस्पताल पहुंचाया।1
- कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र में एक युवती को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में युवती के पिता की तहरीर पर पुलिस ने चार नामजद व्यक्तियों सहित कुछ अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित पिता के अनुसार, यह घटना 18 जून 2026 को हुई, जब उनकी लगभग 18 वर्ष 5 माह की बेटी को ग्राम कटेही निवासी अंकित पुत्र महेश राठौर, अवधेश पुत्र मुन्नीलाल, उपेंद्र पुत्र भूरा राठौर, और शरद पुत्र महेश राठौर अपने साथ ले गए। आरोप है कि युवती अपने साथ शैक्षणिक प्रमाण पत्र, कुछ जेवरात और लगभग 1.32 लाख रुपये नकद भी ले गई है। मामले में कुछ अन्य लोगों पर भी इन नामित व्यक्तियों का सहयोग करने का आरोप लगाया गया है। डेरापुर थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह ने सोमवार शाम पांच बजे बताया कि मिली तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, और युवती की बरामदगी के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए मामले की गहराई से जांच की जा रही है।1
- सिकंदरा तहसील क्षेत्र में यमुना नदी में लगातार अवैध रूप से मछलियों का शिकार जारी है, जिससे संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालाँकि, इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसे यमुना नदी क्षेत्र का ही बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यमुना नदी के किनारे स्थित भुपैयापुर, गौहानी बांगर, बिलासपुर, बैजामऊ और महेशपुर गांवों के आसपास बड़े पैमाने पर मछली शिकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। जिला प्रशासन ने 31 मई 2026 से मछलियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है, क्योंकि जून माह में अधिकांश मछलियाँ अंडे देती हैं और सितंबर तक उनके बच्चों का विकास होता है। मत्स्य संपदा के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से हर वर्ष इस अवधि में प्रतिबंध लगाया जाता है, इसके बावजूद कुछ मछुआरे चोरी-छिपे नदी में जाल डालकर मछली पकड़ रहे हैं, जिससे मत्स्य संपदा को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी के अभाव में प्रतिबंध का प्रभावी पालन नहीं हो पा रहा है और यमुना नदी में खुलेआम मछलियों का शिकार किया जा रहा है। इस मामले पर जिलाधिकारी कपिल सिंह ने संज्ञान लेते हुए बताया कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है। उन्होंने अवैध मछली शिकार पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और यमुना नदी में हो रहे अवैध मछली शिकार पर प्रभावी रोक लग पाती है या नहीं।1
- कानपुर देहात के डेरापुर में अधिवक्ता समिति ने शासन द्वारा लागू की गई ई-पंजीकरण/ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में 22 जून से 27 जून 2026 तक कलमबंद हड़ताल करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में समिति ने न्यायालयों को एक प्रार्थना पत्र देकर हड़ताल अवधि के दौरान सूचीबद्ध वादों में सामान्य तिथियां निर्धारित करने की मांग की है। अधिवक्ता समिति द्वारा न्यायालयों को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में हुई बैठक में सर्वसम्मति से कलमबंद रहने का फैसला लिया गया है। इसलिए, 22 से 27 जून तक न्यायालयों में निर्धारित मामलों में अगली सामान्य तिथि तय की जाए, ताकि पक्षकारों के हित प्रभावित न हों। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि यह कदम पक्षकारों को अनावश्यक असुविधा से बचाएगा और न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति में भी वादों का उचित प्रबंधन संभव होगा। अधिवक्ताओं के इस आंदोलन को अकबरपुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष विपिन चंद्र दीक्षित, सुधीर सिंह भदौरिया, दिलीप यादव और विजय शंकर पांडेय का समर्थन मिला, जो डेरापुर तहसील परिसर पहुँचे और अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ाया। इस अवसर पर डेरापुर अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्र द्विवेदी, महामंत्री हरिशंकर संखवार, गिरेंद्र सिंह गौर, महेंद्र यादव, अमर सिंह गौर, प्रशांत दीक्षित, सौरभ चौबे, बिल्लू मिश्रा, चंद्र प्रताप यादव, महेंद्र पाल, अमित तिवारी, अनिल शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।1
- राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को एक तीन मंजिला कोचिंग एवं लाइब्रेरी भवन में भीषण आग लगने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आग की भयावह लपटों और तेजी से फैलते धुएं ने कुछ ही मिनटों में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे परिसर और आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद भवन में मौजूद छात्र-छात्राओं में भगदड़ मच गई। धुएं और आग से घिर जाने के कारण कई छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। इस घटना के दौरान चीख-पुकार और अफरा-तफरी का दृश्य देखकर स्थानीय लोग भी दहशत में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई थी, जिसमें एक युवक लोहे की ग्रिल पर गिरने से गंभीर रूप से घायल भी हो गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की लगभग एक दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और दमकल कर्मियों ने हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म तथा अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से आग पर काबू पाने और भवन में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। बचाव दल लगातार हर मंजिल की तलाशी लेकर लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटा रहा। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया, जबकि पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने भी घटना पर दुख जताते हुए अपने सारे कार्यक्रम निरस्त कर दिए। फिलहाल, आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है, लेकिन प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। समाचार लिखे जाने तक आग पर काबू पाने और संभावित रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी था, जिसमें प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर था।1