Shuru
Apke Nagar Ki App…
हिमाचल प्रदेश के रामपुर पॉक्सो कोर्ट ने एक कड़े फैसले में, अपनी नाबालिग बहन को लगातार डराकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले सगे भाई को 20 साल की सख्त कारावास की सजा सुनाई है। इस घटना ने उन पारिवारिक रिश्तों को तार-तार कर दिया है, जहाँ एक बहन ने अपने ही भाई को अपना रक्षक माना था। न्यायालय ने दोषी भाई पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है।
Him News Update
हिमाचल प्रदेश के रामपुर पॉक्सो कोर्ट ने एक कड़े फैसले में, अपनी नाबालिग बहन को लगातार डराकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले सगे भाई को 20 साल की सख्त कारावास की सजा सुनाई है। इस घटना ने उन पारिवारिक रिश्तों को तार-तार कर दिया है, जहाँ एक बहन ने अपने ही भाई को अपना रक्षक माना था। न्यायालय ने दोषी भाई पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है।
More news from हिमाचल प्रदेश and nearby areas
- हिमाचल प्रदेश के रामपुर पॉक्सो कोर्ट ने एक कड़े फैसले में, अपनी नाबालिग बहन को लगातार डराकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले सगे भाई को 20 साल की सख्त कारावास की सजा सुनाई है। इस घटना ने उन पारिवारिक रिश्तों को तार-तार कर दिया है, जहाँ एक बहन ने अपने ही भाई को अपना रक्षक माना था। न्यायालय ने दोषी भाई पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है।1
- हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में, कशु नारायण के शैशर कोठी के तुंघ गांव में ऐतिहासिक जौलाई मेले का आयोजन किया गया। लंबिशाड़ी में आयोजित इस पारंपरिक उत्सव के दौरान, देवता के आदेश पर जौ (जौ) काटे गए और उन्हें देवता को अर्पित किया गया। इसके बाद, तुंघ गांव में पहुंचकर जौ के बुहरा को पूरे उत्साह के साथ नचाया गया और पारंपरिक कुलवी नाटी डाली गई।1
- आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। शिमला में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दावा किया कि कांग्रेस को संविधान और लोकतंत्र की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि देश के इतिहास में लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए पूरे देश को एक तरह से जेल में बदल दिया था। भाजपा ने ऐलान किया है कि 25 जून को पूरे देश में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया जाएगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा। पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश का विभाजन, 1975 का आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगे, इन तीन घटनाओं ने देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने बताया कि 25 जून 1975 की रात देशभर में आपातकाल लागू कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने के बजाय आपातकाल का रास्ता चुना। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जॉर्ज फर्नांडिस, चंद्रशेखर सहित हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को मीसा कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, जहाँ लोगों के पास दलील, वकील या अपील का कोई अधिकार नहीं था। भारद्वाज ने आगे आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान 39वें और 42वें संविधान संशोधन के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया। इसमें न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करना, संसद और विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाना और शीर्ष पदों के चुनावों को न्यायिक समीक्षा से बाहर करने की कोशिश करना शामिल था। उन्होंने कहा कि जबरन नसबंदी अभियान और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग ने उस दौर को लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बना दिया। भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने आपातकाल के खिलाफ संघर्ष किया और हजारों कार्यकर्ताओं ने जेल यात्राएं कीं। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज वही कांग्रेस संविधान बचाने की बात कर रही है जिसने सबसे अधिक बार संविधान में संशोधन किए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया। भाजपा नेता ने जानकारी दी कि 25 जून को शिमला में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल मुख्य वक्ता होंगे। इसके अतिरिक्त, 27 जून को पालमपुर में होने वाले एक अन्य कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के दौरान आपातकाल से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी और लोकतंत्र सेनानियों तथा उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।1
- मंडी के कैंची मोड़ से माँ बगलामुखी के दर्शन के लिए रोपवे का सफर श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत मन को शांत कर देने वाला अनुभव है। इस यात्रा के दौरान नीचे बहती ब्यास नदी, चारों तरफ फैले हरे-भरे पहाड़ और उनके बीच झूलता रोपवे एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जिससे भक्तों को श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति का भी पूरा आशीर्वाद मिलता है। माँ बगलामुखी धाम, बाखली का यह रोपवे हिमाचल के सबसे खूबसूरत रोपवे में से एक है। यह केवल 5 मिनट का सफर भक्तों की सारी थकान मिटा देता है और दर्शन से पहले ही उनके मन को भक्ति में लीन कर देता है, जिससे यह यात्रा और भी विशेष बन जाती है।1
- मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का स्मृति दिवस अत्यंत श्रद्धा और आध्यात्मिकता के साथ मनाया गया।1
- बम्म में स्थानीय लोगों ने एक जल सेवा छबील और पकौड़े के भंडारे का आयोजन किया। इस दौरान लोगों ने वहां उपस्थित सभी लोगों को पानी और पकौड़े वितरित किए।1
- तु है कहाँ तुझे ढूंढे मेरी नज़र, सिर्फ एक मुलाकात की तमन्ना है दिल को समझा सकु इस जमाने मे मेरा भी कोई है l1
- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रैला में बुधवार को आयोजित स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की बैठक में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इस प्रक्रिया के तहत, झाबे राम ठाकुर को सर्वसम्मति से लगातार पांचवीं बार स्कूल प्रबंधन समिति का अध्यक्ष चुना गया है, जो समिति के प्रति उनकी कार्यकुशलता और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। कार्यकारिणी के अन्य पदों पर भी पदाधिकारियों का चयन हुआ, जिसमें देवराज को निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया। समिति को और मजबूती देने के लिए विभिन्न सदस्यों को मनोनीत किया गया, जिसमें बिमला देवी को सदस्य नियुक्त किया गया, वहीं पंचायत समिति सदस्य रीटा और वार्ड सदस्य देव राज को विशेष मनोनीत सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। नवनियुक्त अध्यक्ष झाबे राम ठाकुर ने अपनी प्राथमिकता विद्यालय में शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने की बताई। उन्होंने कहा कि समिति का लक्ष्य छात्रों के लिए एक उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण तैयार करना और विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है। नई टीम ने विद्यालय के विकास कार्यों और छात्रों की बेहतरी के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया है। इस दौरान, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने नई कार्यकारिणी को बधाई देते हुए विद्यालय के उत्थान के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया, जबकि अध्यक्ष ने सभी अभिभावकों से विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया।1