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मंडी के कैंची मोड़ से माँ बगलामुखी के दर्शन के लिए रोपवे का सफर श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत मन को शांत कर देने वाला अनुभव है। इस यात्रा के दौरान नीचे बहती ब्यास नदी, चारों तरफ फैले हरे-भरे पहाड़ और उनके बीच झूलता रोपवे एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जिससे भक्तों को श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति का भी पूरा आशीर्वाद मिलता है। माँ बगलामुखी धाम, बाखली का यह रोपवे हिमाचल के सबसे खूबसूरत रोपवे में से एक है। यह केवल 5 मिनट का सफर भक्तों की सारी थकान मिटा देता है और दर्शन से पहले ही उनके मन को भक्ति में लीन कर देता है, जिससे यह यात्रा और भी विशेष बन जाती है।
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मंडी के कैंची मोड़ से माँ बगलामुखी के दर्शन के लिए रोपवे का सफर श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत मन को शांत कर देने वाला अनुभव है। इस यात्रा के दौरान नीचे बहती ब्यास नदी, चारों तरफ फैले हरे-भरे पहाड़ और उनके बीच झूलता रोपवे एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जिससे भक्तों को श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति का भी पूरा आशीर्वाद मिलता है। माँ बगलामुखी धाम, बाखली का यह रोपवे हिमाचल के सबसे खूबसूरत रोपवे में से एक है। यह केवल 5 मिनट का सफर भक्तों की सारी थकान मिटा देता है और दर्शन से पहले ही उनके मन को भक्ति में लीन कर देता है, जिससे यह यात्रा और भी विशेष बन जाती है।
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- सेऊबाग वाशिंग में स्थित अमरा सेन के निवास स्थान पर मां दशमी वारदा भजन मंडली द्वारा भक्तिमय गुनगान प्रस्तुत किया गया। इस कार्यक्रम को हिमाचल अपडेट 24 न्यूज़ पर सीधे प्रसारित किया गया, जिससे दर्शक इसे लाइव देख सके।1
- मंडी के कैंची मोड़ से माँ बगलामुखी के दर्शन के लिए रोपवे का सफर श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत मन को शांत कर देने वाला अनुभव है। इस यात्रा के दौरान नीचे बहती ब्यास नदी, चारों तरफ फैले हरे-भरे पहाड़ और उनके बीच झूलता रोपवे एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, जिससे भक्तों को श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति का भी पूरा आशीर्वाद मिलता है। माँ बगलामुखी धाम, बाखली का यह रोपवे हिमाचल के सबसे खूबसूरत रोपवे में से एक है। यह केवल 5 मिनट का सफर भक्तों की सारी थकान मिटा देता है और दर्शन से पहले ही उनके मन को भक्ति में लीन कर देता है, जिससे यह यात्रा और भी विशेष बन जाती है।1
- हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में, कशु नारायण के शैशर कोठी के तुंघ गांव में ऐतिहासिक जौलाई मेले का आयोजन किया गया। लंबिशाड़ी में आयोजित इस पारंपरिक उत्सव के दौरान, देवता के आदेश पर जौ (जौ) काटे गए और उन्हें देवता को अर्पित किया गया। इसके बाद, तुंघ गांव में पहुंचकर जौ के बुहरा को पूरे उत्साह के साथ नचाया गया और पारंपरिक कुलवी नाटी डाली गई।1
- सुजानपुर के कुठेड़ा में दो बसों के बीच टक्कर हो गई, जिसमें कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, इस घटना ने सवारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया है कि एक प्राइवेट बस वाले ने सरकारी बस को बीच रास्ते में रोक दिया, जिससे यह टक्कर हुई। सवाल उठाया जा रहा है कि प्राइवेट बस वाले की तरफ से यह किस तरह की गलती थी, और अगर इस दौरान किसी सवारी का सिर या बाजू कट जाता, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। लोगों ने सरकार से ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, क्योंकि ऐसी लापरवाही सवारियों के लिए मौत का कारण बन सकती है।1
- कांग्रेस नेता विवेक कटोच ने सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेन्द्र राणा द्वारा संविधान और लोकतंत्र को लेकर दिए जा रहे बयानों को उनकी राजनीतिक हताशा का परिणाम बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति ने अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए जनता के जनादेश और अपने विधानसभा क्षेत्र के सम्मान को दांव पर लगाने में कोई संकोच नहीं किया, उसके मुंह से आज संविधान की दुहाई देना अच्छी नहीं लगती। कटोच ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और संविधान केवल राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल करने वाले शब्द नहीं हैं, और जिन नेताओं ने अपने व्यक्तिगत हितों के लिए जनता के विश्वास को तोड़ा है, उन्हें दूसरों को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। विवेक कटोच ने यह भी कहा कि राजनीति में जनता यह अच्छी तरह जानती है कि किसने जनादेश का सम्मान किया और किसने अपने व्यक्तिगत राजनीतिक हितों को जनता के हितों से ऊपर रखा। कटोच ने विशेष रूप से सुजानपुर नगर परिषद चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरी तरह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक प्रावधानों के तहत संपन्न हुआ है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बहुमत के आधार पर अपना नेता चुनने और निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव संविधान और कानून के दायरे में रहकर संपन्न हुआ है, तो उस पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के फैसले पर सवाल खड़े करने के समान है। कांग्रेस नेता ने राजेन्द्र राणा पर दोहरी राजनीति और अवसरवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि जब राजनीतिक परिणाम उनके पक्ष में आते हैं, तो उसे लोकतंत्र की जीत बताया जाता है, और जब परिणाम विपरीत आते हैं, तो उसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि यह दोहरी राजनीति और अवसरवाद अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है। विवेक कटोच ने कहा कि सुजानपुर नगर परिषद के चुनाव में किसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं हुआ है; केवल राजनीतिक निराशा के कारण लोकतंत्र और संविधान पर प्रश्नचिह्न लगाना दुर्भाग्यपूर्ण और गैर-जिम्मेदाराना राजनीति है। उन्होंने राजेन्द्र राणा को सलाह दी कि संविधान की दुहाई देने से पहले उन्हें अपने राजनीतिक आचरण और अतीत पर आत्ममंथन करना चाहिए। कटोच ने दोहराया कि लोकतंत्र में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन जनादेश और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी होती है, और सुजानपुर की जनता राजनीतिक अवसरवाद और दोहरे चरित्र की राजनीति को अच्छी तरह पहचान चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में जनता ही इसका फिर से उचित जवाब देगी।1
- बम्म में स्थानीय लोगों ने एक जल सेवा छबील और पकौड़े के भंडारे का आयोजन किया। इस दौरान लोगों ने वहां उपस्थित सभी लोगों को पानी और पकौड़े वितरित किए।1
- हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर में हुए चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जमकर हंगामा किया। यह पूरा बवाल अध्यक्ष पद के चुनाव को रद्द करने की मांग को लेकर हुआ, जिसके चलते मौके पर स्थिति काफी हंगामेदार रही।1
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