रांची (झारखंड): मनरेगा कर्मियों की सांकेतिक हड़ताल शुरू, 6 महीने से नहीं हुआ मानदेय का भुगतान सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं तो 12 मार्च से जाएंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर लंबित मांगों के समर्थन में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर के मनरेगा कर्मियों की तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सोमवार से शुरू हो गई। हड़ताल के पहले दिन 9 मार्च को राज्य के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों के समक्ष मनरेगा कर्मियों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन किया। धरना-प्रदर्शन में ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, सहायक अभियंता और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी समेत मनरेगा से जुड़े कर्मियों ने भाग लिया। कर्मियों ने कहा कि वे लंबे समय से कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। लेकिन अब तक समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई है। धरना के दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य के मनरेगा कर्मियों को छह माह से अधिक समय से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा नियमितीकरण नीति का अभाव, असमान वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कर्मियों को गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। इसके बावजूद वे वर्षों से ग्रामीण विकास की इस महत्वपूर्ण योजना को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ संचालित कर रहे हैं। सकारात्मक पहल करने की मांग संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समस्याओं का न्यायसंगत समाधान प्राप्त करना है। उन्होंने राज्य सरकार से मनरेगा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक पहल करने की मांग की। संघ के अनुसार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 10 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 11 मार्च को प्रदेश मुख्यालय में राज्यस्तरीय धरना आयोजित किया जाएगा। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि संगठन कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा और न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मांगों के समाधान तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
रांची (झारखंड): मनरेगा कर्मियों की सांकेतिक हड़ताल शुरू, 6 महीने से नहीं हुआ मानदेय का भुगतान सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं तो 12 मार्च से जाएंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर लंबित मांगों के समर्थन में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर के मनरेगा कर्मियों की तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सोमवार से शुरू हो गई। हड़ताल के पहले दिन 9 मार्च को राज्य के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों के समक्ष मनरेगा कर्मियों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन किया। धरना-प्रदर्शन में ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, सहायक अभियंता और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी समेत मनरेगा से जुड़े कर्मियों ने भाग लिया। कर्मियों ने कहा कि वे लंबे समय से कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। लेकिन अब तक समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई है। धरना के दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य के मनरेगा कर्मियों को छह माह से अधिक समय से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा नियमितीकरण नीति का अभाव, असमान वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कर्मियों को गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। इसके बावजूद वे वर्षों से ग्रामीण विकास की इस महत्वपूर्ण योजना को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ संचालित कर रहे हैं। सकारात्मक पहल करने की मांग संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समस्याओं का न्यायसंगत समाधान प्राप्त करना है। उन्होंने राज्य सरकार से मनरेगा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक पहल करने की मांग की। संघ के अनुसार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 10 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 11 मार्च को प्रदेश मुख्यालय में राज्यस्तरीय धरना आयोजित किया जाएगा। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि संगठन कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा और न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मांगों के समाधान तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
- रांची (झारखंड): मनरेगा कर्मियों की सांकेतिक हड़ताल शुरू, 6 महीने से नहीं हुआ मानदेय का भुगतान सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं तो 12 मार्च से जाएंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर लंबित मांगों के समर्थन में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर के मनरेगा कर्मियों की तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सोमवार से शुरू हो गई। हड़ताल के पहले दिन 9 मार्च को राज्य के विभिन्न प्रखंड मुख्यालयों के समक्ष मनरेगा कर्मियों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना-प्रदर्शन किया। धरना-प्रदर्शन में ग्राम रोजगार सेवक, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, सहायक अभियंता और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी समेत मनरेगा से जुड़े कर्मियों ने भाग लिया। कर्मियों ने कहा कि वे लंबे समय से कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। लेकिन अब तक समाधान के लिए ठोस पहल नहीं की गई है। धरना के दौरान वक्ताओं ने कहा कि राज्य के मनरेगा कर्मियों को छह माह से अधिक समय से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इसके अलावा नियमितीकरण नीति का अभाव, असमान वेतन संरचना और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कर्मियों को गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। इसके बावजूद वे वर्षों से ग्रामीण विकास की इस महत्वपूर्ण योजना को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ संचालित कर रहे हैं। सकारात्मक पहल करने की मांग संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समस्याओं का न्यायसंगत समाधान प्राप्त करना है। उन्होंने राज्य सरकार से मनरेगा कर्मियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द सकारात्मक पहल करने की मांग की। संघ के अनुसार पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत 10 मार्च को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जबकि 11 मार्च को प्रदेश मुख्यालय में राज्यस्तरीय धरना आयोजित किया जाएगा। इसके बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पाण्डेय ने कहा कि संगठन कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षा और न्यायसंगत अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मांगों के समाधान तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।1
- Post by IYCB1
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- Post by Tuleshwar mahto1
- खूंटी: कुएं में फंसे हाथी को जेसीबी से सुरक्षित निकाला गया बाहर, वन विभाग की टीम ने चलाया बचाओ अभियान #hathi #elephant #hathirescue #jharkhandhathi #jharkhand #RanchiNews #KhuntiNews1
- रामनवमी पर्व आने वाला है, लेकिन दारू प्रखंड सह अंचल कार्यालय के सामने एलएनटी कंपनी द्वारा पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़क की ढलाई तोड़कर मलबा और नुकीले रॉड के टुकड़े ऐसे ही छोड़ दिए गए हैं। इसी रास्ते से रामनवमी का जुलूस भी गुजरता है। ऐसे में इन नुकीले लोहे के टुकड़ों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही गड्ढों के कारण वहां जल जमाव भी हो गया है, जिससे आम लोगों और श्रद्धालुओं को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। प्रशासन और संबंधित कंपनी को चाहिए कि जल्द से जल्द मलबा हटाकर रास्ते को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि त्योहार के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।1
- हजारीबाग में मंगला और रामनवमी जुलूस में DJ पर प्रतिबंध रहेगा। हजारीबाग की प्रशाशन लोगो से अपील कर रही है।1
- Post by BaरKaट्ठा Ki आwaज1