सासनी क्षेत्र के भोजगढ़ी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का नौवें और अंतिम दिन भव्य समापन हुआ। कथा व्यास आचार्य पंडित मुकेश शास्त्री ने अपने श्रीमुख से विभिन्न दिव्य और मोक्षदायक प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। समापन दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आचार्य शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों को सांसारिक नहीं, बल्कि धर्म और भक्तों की रक्षा के लिए किए गए दिव्य कार्य बताया। इसके उपरांत उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की मार्मिक कथा सुनाई, जिसने सच्ची भक्ति, निष्काम प्रेम और मित्रता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें नम कर दीं और भगवान के प्रति उनके प्रेम और विश्वास को और सुदृढ़ किया। कथा के दौरान, महाराज परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का विस्तार से वर्णन करते हुए, आचार्य जी ने बताया कि कैसे सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर राजा परीक्षित ने जीवन के अंतिम क्षणों में तक्षक नाग के दंश से देह त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने इस प्रसंग से जीवन की नश्वरता और भगवान के नाम-स्मरण की महिमा को समझाया। आचार्य जी ने कलियुग के लक्षणों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान समय में धर्म की कमी और अधर्म की वृद्धि स्पष्ट है। मनुष्य के आचरण में गिरावट, सत्य से दूरी और बढ़ती भौतिकता के बीच केवल भगवान का नाम ही मोक्ष का सच्चा मार्ग है। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के माहात्म्य का वर्णन करते हुए यह भी कहा कि इसके श्रवण से पापों का नाश होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के समापन पर विधि-विधान के साथ हवन, पूर्णाहुति और पूजन संपन्न कराया गया। आचार्य जी ने सभी श्रद्धालुओं के कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति के लिए आशीर्वचन प्रदान किए। इस अवसर पर आचार्य लोकेश शर्मा, परीक्षित आनंद शर्मा, शालिनी शर्मा, अरुण शर्मा, माया शर्मा, बबलू शर्मा, कुशमा शर्मा, शशिवाला शर्मा, दिव्यांशी शर्मा, दुर्गा शर्मा, अभिषेक शर्मा, शिव कुमार शर्मा, कौशल शर्मा, मोनी शर्मा और भुवनेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भक्ति रस में सराबोर हुए।
सासनी क्षेत्र के भोजगढ़ी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का नौवें और अंतिम दिन भव्य समापन हुआ। कथा व्यास आचार्य पंडित मुकेश शास्त्री ने अपने श्रीमुख से विभिन्न दिव्य और मोक्षदायक प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। समापन दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आचार्य शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों को सांसारिक नहीं, बल्कि धर्म और भक्तों की रक्षा के लिए किए गए दिव्य कार्य बताया। इसके उपरांत
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की मार्मिक कथा सुनाई, जिसने सच्ची भक्ति, निष्काम प्रेम और मित्रता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें नम कर दीं और भगवान के प्रति उनके प्रेम और विश्वास को और सुदृढ़ किया। कथा के दौरान, महाराज परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का विस्तार से वर्णन करते हुए, आचार्य जी ने बताया कि कैसे सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर राजा परीक्षित ने जीवन के अंतिम क्षणों में तक्षक नाग के दंश
से देह त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने इस प्रसंग से जीवन की नश्वरता और भगवान के नाम-स्मरण की महिमा को समझाया। आचार्य जी ने कलियुग के लक्षणों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान समय में धर्म की कमी और अधर्म की वृद्धि स्पष्ट है। मनुष्य के आचरण में गिरावट, सत्य से दूरी और बढ़ती भौतिकता के बीच केवल भगवान का नाम ही मोक्ष का सच्चा मार्ग है। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के माहात्म्य का वर्णन करते हुए यह भी कहा कि इसके श्रवण से पापों का नाश होता
है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के समापन पर विधि-विधान के साथ हवन, पूर्णाहुति और पूजन संपन्न कराया गया। आचार्य जी ने सभी श्रद्धालुओं के कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति के लिए आशीर्वचन प्रदान किए। इस अवसर पर आचार्य लोकेश शर्मा, परीक्षित आनंद शर्मा, शालिनी शर्मा, अरुण शर्मा, माया शर्मा, बबलू शर्मा, कुशमा शर्मा, शशिवाला शर्मा, दिव्यांशी शर्मा, दुर्गा शर्मा, अभिषेक शर्मा, शिव कुमार शर्मा, कौशल शर्मा, मोनी शर्मा और भुवनेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भक्ति रस में सराबोर हुए।
- हाथरस जिले की सासनी तहसील के इगलास क्षेत्र के गाँव पढी़ल में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ खेत में सिंचाई कर रहे 42 वर्षीय किसान किशन सिंह की पानी की कुंडी में डूबने से दुखद मौत हो गई। इस खबर से परिवार में गहरा कोहराम मच गया। मिली जानकारी के अनुसार, किसान किशन सिंह अपने बेटे टिंकू के साथ खेत में फसल को पानी दे रहे थे। इसी दौरान, जब किशन सिंह को भूख लगी तो बेटा टिंकू खाना लेने के लिए घर चला गया। थोड़ी देर बाद जब बेटा खाना लेकर खेत पर वापस आया, तो उसने अपने पिता को खेत में बनी पानी की कुंडी में गंभीर हालत में पड़ा पाया। बेटे के शोर मचाने पर आसपास काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुँचे। परिजनों ने तुरंत किशन सिंह को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सासनी पहुँचाया, जहाँ चिकित्सक डॉ. अनंत कुमार ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुँची और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक के बेटे ने बताया कि किशन सिंह शुगर की बीमारी से ग्रसित थे। इस दुखद घटना के बाद उनकी पत्नी और बच्चों विकास, गौरव, टिंकू व भावना का रो-रोकर बुरा हाल है, और पूरे गाँव में शोक की लहर छा गई है।1
- हाथरस गेट क्षेत्र के गांव टुकसान में शनिवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने गांव के बाहर संचालित देसी शराब के ठेके के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन किया। महिलाओं ने सीधे ठेके पर पहुंचकर संचालक से इसे तुरंत बंद करने की मांग की। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव के बाहर यह देसी शराब का ठेका होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर मजदूर वर्ग के लोगों में शराब का सेवन काफी बढ़ गया है। उनके मुताबिक, सुबह से शाम तक मेहनत-मजदूरी करने के बाद कई लोग अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा शराब पर ही खर्च कर देते हैं। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है और घर के राशन-पानी तक की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। महिलाओं ने यह भी बताया कि शराब पीकर घर लौटने के बाद कई लोग घरेलू विवाद और मारपीट करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप परिवारों में आए दिन झगड़े होते रहते हैं। उनका स्पष्ट कहना था कि इस स्थिति का सबसे अधिक बुरा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने प्रशासन से पुरज़ोर मांग की है कि गांव के बाहर स्थित इस देसी शराब के ठेके को अविलंब बंद कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे भी अपना आंदोलन जारी रखने के लिए बाध्य होंगी।1
- हाथरस गेट क्षेत्र में 18 जून को कैलाश ढाबे के सामने हुई फायरिंग की घटना के बाद पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने विशेष टीमें गठित की थीं और छह आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसी क्रम में, शनिवार देर रात एसओजी, थाना हाथरस जंक्शन और थाना हाथरस गेट पुलिस को सूचना मिली कि 25 हजार रुपये का इनामी आरोपी शानू अलीगढ़-आगरा हाईवे से अपने गांव गंगचौली की ओर जा रहा है। सूचना के आधार पर दयानतपुर नहर के पास घेराबंदी की गई, जहां पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग में आरोपी शानू के दोनों पैरों में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने उसके पास से एक 315 बोर का तमंचा, एक जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस और बिना नंबर की एक मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी शानू पर मारपीट, धमकी और एससी-एसटी एक्ट समेत कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। यह कैलाश ढाबा फायरिंग कांड में पुलिस की दूसरी बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले इसी मामले में इनामी आरोपी मोना ठाकुर को भी पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब शेष फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।2
- सासनी क्षेत्र के भोजगढ़ी गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का नौवें और अंतिम दिन भव्य समापन हुआ। कथा व्यास आचार्य पंडित मुकेश शास्त्री ने अपने श्रीमुख से विभिन्न दिव्य और मोक्षदायक प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। समापन दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। आचार्य शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों को सांसारिक नहीं, बल्कि धर्म और भक्तों की रक्षा के लिए किए गए दिव्य कार्य बताया। इसके उपरांत उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की मार्मिक कथा सुनाई, जिसने सच्ची भक्ति, निष्काम प्रेम और मित्रता की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की। इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें नम कर दीं और भगवान के प्रति उनके प्रेम और विश्वास को और सुदृढ़ किया। कथा के दौरान, महाराज परीक्षित और शुकदेव जी के संवाद का विस्तार से वर्णन करते हुए, आचार्य जी ने बताया कि कैसे सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर राजा परीक्षित ने जीवन के अंतिम क्षणों में तक्षक नाग के दंश से देह त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने इस प्रसंग से जीवन की नश्वरता और भगवान के नाम-स्मरण की महिमा को समझाया। आचार्य जी ने कलियुग के लक्षणों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान समय में धर्म की कमी और अधर्म की वृद्धि स्पष्ट है। मनुष्य के आचरण में गिरावट, सत्य से दूरी और बढ़ती भौतिकता के बीच केवल भगवान का नाम ही मोक्ष का सच्चा मार्ग है। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के माहात्म्य का वर्णन करते हुए यह भी कहा कि इसके श्रवण से पापों का नाश होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा के समापन पर विधि-विधान के साथ हवन, पूर्णाहुति और पूजन संपन्न कराया गया। आचार्य जी ने सभी श्रद्धालुओं के कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति के लिए आशीर्वचन प्रदान किए। इस अवसर पर आचार्य लोकेश शर्मा, परीक्षित आनंद शर्मा, शालिनी शर्मा, अरुण शर्मा, माया शर्मा, बबलू शर्मा, कुशमा शर्मा, शशिवाला शर्मा, दिव्यांशी शर्मा, दुर्गा शर्मा, अभिषेक शर्मा, शिव कुमार शर्मा, कौशल शर्मा, मोनी शर्मा और भुवनेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भक्ति रस में सराबोर हुए।4
- उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के कोतवाली सासनी क्षेत्र में एक महिला को उसके घर में घुसकर बेरहमी से घसीट-घसीट कर पीटा गया। हमलावरों ने इस दौरान उसे निर्वस्त्र भी कर दिया। इस अमानवीय कृत्य की शिकार पीड़ित महिला अब लगातार न्याय की गुहार लगा रही है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि सासनी थाना पुलिस ने इस मामले में पीड़िता की तहरीर लेने से ही इनकार कर दिया है, जिससे न्याय से वंचित की गई यह महिला लगातार मदद की अपील कर रही है।1