किताब-कलम छोड़ बच्चों के हाथ में झाड़ू! सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल सरकारी विद्यालयों में बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, लेकिन सामने आए एक वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाते और साफ-सफाई करते नजर आ रहे हैं। वहीं, शिक्षक भी पढ़ाई कराने के बजाय विद्यालय परिसर और शौचालयों की सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम चंपारण जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए जिन एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई थी, उन एजेंसियों को भुगतान किए बिना ही रातों-रात काम बंद कर दिया गया। इसके बाद कई विद्यालयों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी और अब विद्यालय परिसर, कक्षाओं तथा शौचालयों की सफाई की जिम्मेदारी कहीं न कहीं शिक्षकों और बच्चों पर आती दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो बच्चे अपना भविष्य बनाने के लिए स्कूल पहुंचते हैं, आखिर उनके हाथों में झाड़ू क्यों दिखाई दे रही है? जिन शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को संवारने की है, उन्हें सफाई व्यवस्था में क्यों लगना पड़ रहा है? विद्यालयों में साफ-सफाई बेहद जरूरी है, लेकिन अगर इसके लिए निर्धारित व्यवस्था को अचानक बंद कर दिया जाए और उसका असर बच्चों की पढ़ाई तथा शिक्षकों के शिक्षण कार्य पर पड़ने लगे, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर चिंता का विषय है। खासकर बच्चों से सफाई कार्य कराया जाना शिक्षा व्यवस्था और बाल हितों से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। स्थिति यह है कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में झाड़ू दिखाई दे रही है। बच्चे अपने भविष्य की तैयारी करने के लिए विद्यालय आते हैं, लेकिन अगर उनका समय विद्यालय की सफाई में बीत रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वहीं, शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय की सफाई व्यवस्था संभालने को मजबूर नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शिक्षक पढ़ाई कराएं या स्कूल की सफाई व्यवस्था संभालें? अब निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करेगा? क्या सफाई एजेंसियों के भुगतान और काम से जुड़े मामले का समाधान किया जाएगा? या फिर बच्चों और शिक्षकों के हाथों में झाड़ू का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा? अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है। फिलहाल, हमारा चैनल इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो की वास्तविक स्थिति और इसकी सत्यता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
किताब-कलम छोड़ बच्चों के हाथ में झाड़ू! सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल सरकारी विद्यालयों में बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, लेकिन सामने आए एक वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाते और साफ-सफाई करते नजर आ रहे हैं। वहीं, शिक्षक भी पढ़ाई कराने के बजाय विद्यालय परिसर और शौचालयों की सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम चंपारण जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए जिन एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई थी, उन एजेंसियों को भुगतान किए बिना ही रातों-रात काम बंद कर दिया गया। इसके बाद कई विद्यालयों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी और अब विद्यालय परिसर, कक्षाओं तथा शौचालयों की सफाई की जिम्मेदारी कहीं न कहीं शिक्षकों और बच्चों पर आती दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो बच्चे अपना भविष्य बनाने के लिए स्कूल पहुंचते हैं, आखिर उनके हाथों में झाड़ू क्यों दिखाई दे रही है? जिन शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को संवारने की है, उन्हें सफाई व्यवस्था में क्यों लगना पड़ रहा है? विद्यालयों में साफ-सफाई बेहद जरूरी है, लेकिन अगर इसके लिए निर्धारित व्यवस्था को अचानक बंद कर दिया जाए और उसका असर बच्चों की पढ़ाई तथा शिक्षकों के शिक्षण कार्य पर पड़ने लगे, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर चिंता का विषय है। खासकर बच्चों से सफाई कार्य कराया जाना शिक्षा व्यवस्था और बाल हितों से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। स्थिति यह है कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में झाड़ू दिखाई दे रही है। बच्चे अपने भविष्य की तैयारी करने के लिए विद्यालय आते हैं, लेकिन अगर उनका समय विद्यालय की सफाई में बीत रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वहीं, शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय की सफाई व्यवस्था संभालने को मजबूर नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शिक्षक पढ़ाई कराएं या स्कूल की सफाई व्यवस्था संभालें? अब निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करेगा? क्या सफाई एजेंसियों के भुगतान और काम से जुड़े मामले का समाधान किया जाएगा? या फिर बच्चों और शिक्षकों के हाथों में झाड़ू का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा? अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है। फिलहाल, हमारा चैनल इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो की वास्तविक स्थिति और इसकी सत्यता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
- किताब-कलम छोड़ बच्चों के हाथ में झाड़ू! सरकारी स्कूलों में सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल सरकारी विद्यालयों में बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, लेकिन सामने आए एक वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में स्कूली बच्चे विद्यालय परिसर में झाड़ू लगाते और साफ-सफाई करते नजर आ रहे हैं। वहीं, शिक्षक भी पढ़ाई कराने के बजाय विद्यालय परिसर और शौचालयों की सफाई करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम चंपारण जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था के लिए जिन एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई थी, उन एजेंसियों को भुगतान किए बिना ही रातों-रात काम बंद कर दिया गया। इसके बाद कई विद्यालयों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी और अब विद्यालय परिसर, कक्षाओं तथा शौचालयों की सफाई की जिम्मेदारी कहीं न कहीं शिक्षकों और बच्चों पर आती दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो बच्चे अपना भविष्य बनाने के लिए स्कूल पहुंचते हैं, आखिर उनके हाथों में झाड़ू क्यों दिखाई दे रही है? जिन शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को संवारने की है, उन्हें सफाई व्यवस्था में क्यों लगना पड़ रहा है? विद्यालयों में साफ-सफाई बेहद जरूरी है, लेकिन अगर इसके लिए निर्धारित व्यवस्था को अचानक बंद कर दिया जाए और उसका असर बच्चों की पढ़ाई तथा शिक्षकों के शिक्षण कार्य पर पड़ने लगे, तो यह निश्चित तौर पर गंभीर चिंता का विषय है। खासकर बच्चों से सफाई कार्य कराया जाना शिक्षा व्यवस्था और बाल हितों से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। स्थिति यह है कि जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में झाड़ू दिखाई दे रही है। बच्चे अपने भविष्य की तैयारी करने के लिए विद्यालय आते हैं, लेकिन अगर उनका समय विद्यालय की सफाई में बीत रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वहीं, शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ विद्यालय की सफाई व्यवस्था संभालने को मजबूर नजर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शिक्षक पढ़ाई कराएं या स्कूल की सफाई व्यवस्था संभालें? अब निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करेगा? क्या सफाई एजेंसियों के भुगतान और काम से जुड़े मामले का समाधान किया जाएगा? या फिर बच्चों और शिक्षकों के हाथों में झाड़ू का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा? अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में ठोस कदम उठाता है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है। फिलहाल, हमारा चैनल इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो की वास्तविक स्थिति और इसकी सत्यता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।1
- खेल मैदान और रनिंग ट्रैक की मांग को लेकर युवाओं ने उठाई आवाज, सीओ को सौंपा आवेदन ।। मझौलिया प्रखंड क्षेत्र के मझरिया शेख पंचायत अंतर्गत पुरुषोत्तमपुर गांव में खेल मैदान एवं रनिंग ट्रैक की मांग को लेकर युवाओं और विद्यार्थियों ने आवाज बुलंद की है। पुलिस, सेना सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को नियमित दौड़ एवं शारीरिक अभ्यास के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर युवाओं ने संयुक्त रूप से अंचलाधिकारी डौली कुमारी को लिखित आवेदन सौंपकर सरकारी भूमि का निरीक्षण कर उपयुक्त स्थल पर रनिंग ट्रैक विकसित कराने की मांग की। युवाओं ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शारीरिक दक्षता का महत्वपूर्ण स्थान है। लेकिन सुरक्षित एवं व्यवस्थित रनिंग ट्रैक के अभाव में उन्हें सड़क अथवा अन्य असुविधाजनक स्थानों पर दौड़ लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। युवाओं ने मांग की कि क्षेत्र में उपलब्ध सरकारी भूमि अथवा किसी उपयुक्त पोखरा के चारों ओर रनिंग ट्रैक का निर्माण कराया जाए। इसके साथ ही खेल मैदान और आवश्यक खेल सुविधाओं का भी विकास किया जाए। उनका कहना है कि रनिंग ट्रैक बनने से युवाओं को नियमित अभ्यास का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे वे खेल गतिविधियों में भाग लेने के साथ-साथ पुलिस, सेना एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की शारीरिक दक्षता परीक्षा की तैयारी भी सुचारु रूप से कर सकेंगे। अंचलाधिकारी डौली कुमारी ने आवेदन के आधार पर स्थल का निरीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया। आवेदन का नेतृत्व वसंत कुमार उर्फ विक्की ने किया। मौके पर निर्भय कुमार, चुन्नू तिवारी, उमेश पासवान, सुनील राम, शंभू कुमार, सुशील राय, संजय पटेल, सुनील कुमार, छोटून तिवारी, छोटन कुमार, मनजीत सिंह, भुवाली यादव, बृजेश कुमार कुशवाहा, उमेश कुमार, आसु कुमारी, सुंदरम कुमारी, जूली कुमारी, सनोज बैठा, मुकेश सहनी, अक्लेश तिवारी, कामरान आलम, सोवैब आलम, राज कुमार, हरेंद्र प्रसाद, कन्हैया प्रसाद सहित कई युवाओं के हस्ताक्षर थे।2
- सुगौली के भटहा में किया गया गया एक दिवसीय किसान संगोष्टि का आयोजन, पहुंचे सैकड़ों किसान।1
- मोतिहारी में 25 सितंबर को भव्य एयर शो! सूर्य किरण टीम के 9 विमान दिखाएंगे आसमान में हैरतअंगेज करतब #Motihari #AirShow #SuryaKiran #MotihariNews #KSRBiharNews #BiharNews #GandhiMaidan ✈️ मोतिहारी में 25 सितंबर को भव्य एयर शो! पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर मोतिहारी के गांधी मैदान में 25 सितंबर को एयर शो का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में सूर्य किरण टीम के 9 विमान आसमान में हैरतअंगेज हवाई करतब दिखाएंगे। जिला प्रशासन की ओर से सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई है। 📍 स्थान: गांधी मैदान, मोतिहारी 📅 तारीख: 25 सितंबर ✈️ मुख्य आकर्षण: सूर्य किरण टीम के 9 विमान ऐसी ही स्थानीय और ताजा खबरों के लिए KSR BIHAR NEWS को Subscribe करें। #Motihari #AirShow #SuryaKiran #MotihariNews #BiharNews #KSRBiharNews #GandhiMaidan1
- 21 मार्च और 23 सितंबर को पूरी दुनिया में दिन और रात बराबर होते हैं. 23 सितंबर को पृथ्वी पर एक दुर्लभ और खास खगोलीय घटना (Equinox / विषुव) होने जा रही है। दुर्लभ खगोलीय घटना: दिन और रात 12-12 घंटे के होंगे 23 सितंबर को सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी की भूमध्य रेखा (Equator) पर पड़ेंगी। इस अनोखी घटना को खगोल विज्ञान में 'शरद विषुव' (Autumnal Equinox) कहा जाता है। इस घटना की मुख्य खास बातें: दिन और रात की बराबर अवधि: इस दिन पूरी दुनिया में दिन और रात की अवधि बिल्कुल बराबर (लगभग 12-12 घंटे) होगी। ऋतु परिवर्तन: इसके बाद उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में आधिकारिक रूप से शरद ऋतु (Autumn) की शुरुआत हो जाएगी और दिन छोटे व रातें लंबी होने लगेंगी, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत होगी। साल में केवल दो बार: पृथ्वी पर ऐसा संतुलन साल में केवल दो ही बार बनता है—एक 21 मार्च को (वसंत विषुव) और दूसरा 23 सितंबर को (शरद विषुव)। (यह प्रकृति का एक दुर्लभ संतुलन है जब सूर्य ना तो उत्तरी ध्रुव की ओर झुका होता है और ना ही दक्षिणी ध्रुव की ओर।)1
- GMCH बेतिया में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन मनाने के बाद भी इलाज अच्छा नहीं बेतिया सदर अस्पताल में सिर्फ सरकारी डाक्टरों और कर्मचारियों का मनमानी के कारण सभी लोग परेशान।1
- पश्चिम चंपारण के स्कूलों में सफाई व्यवस्था प्रभावित, बच्चे और शिक्षक लगा रहे झाड़ू पश्चिम चंपारण जिले के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में इन दिनों सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति सामने आ रही है।1
- किशोर की हत्या के बाद सड़क पर बवाल, शव रखकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन बेतिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लालगढ़ पंचायत स्थित धर्मपुर चौक पर सोमवार को मारपीट की घटना में एक किशोर की मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। किशोर की हत्या के बाद सड़क पर बवाल, शव रखकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन बेतिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लालगढ़ पंचायत स्थित धर्मपुर चौक पर सोमवार को मारपीट की घटना में एक किशोर की मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।1