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मंदसौर के भंडारिया में हुए एक मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन गिरफ्तारियों के बाद, पूरे गाँव में एक जुलूस निकाला गया। इस दौरान, भंडारिया गाँव 'पुलिस जिंदाबाद' के नारों से गूँज उठा, जिससे पुलिस कार्रवाई के प्रति जनता का समर्थन स्पष्ट रूप से सामने आया।
भविष्य न्यूज़ 24
मंदसौर के भंडारिया में हुए एक मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन गिरफ्तारियों के बाद, पूरे गाँव में एक जुलूस निकाला गया। इस दौरान, भंडारिया गाँव 'पुलिस जिंदाबाद' के नारों से गूँज उठा, जिससे पुलिस कार्रवाई के प्रति जनता का समर्थन स्पष्ट रूप से सामने आया।
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- मंदसौर के भंडारिया में हुए एक मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन गिरफ्तारियों के बाद, पूरे गाँव में एक जुलूस निकाला गया। इस दौरान, भंडारिया गाँव 'पुलिस जिंदाबाद' के नारों से गूँज उठा, जिससे पुलिस कार्रवाई के प्रति जनता का समर्थन स्पष्ट रूप से सामने आया।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रामपुरा नगर परिषद ने नगर के अंतिम छोर पर स्थित टीचिंग ग्राउंड में एक वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास को बढ़ावा देना और आमजन को प्रकृति के प्रति जागरूक करना था। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए आज वृक्षारोपण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित बनाए रखते हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए शुद्ध वायु, जल संरक्षण और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नगर परिषद अध्यक्ष सीमा जितेंद्र जागीरदार ने सभी नागरिकों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है। इस कार्यक्रम में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के.एल. सूर्यवंशी, इंजीनियर स्वप्निल भूरिया, कार्यालय अधीक्षक नंदलाल प्रजापति, सांसद प्रतिनिधि विजय दानगढ़, विधायक प्रतिनिधि दीपक मोर्चा, पार्षदगण और नगर परिषद के कई कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर पौधारोपण किया और नगर को हरा-भरा बनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण का संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन पर, उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और अधिक से अधिक पौधे लगाकर उन्हें संरक्षित रखने की शपथ ली।4
- कल बिजनौर में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने पाकिस्तान से भारत आए लगभग सोलह सौ हिन्दू सनातनी परिवारों को स्थायी रूप से रहने की जगह प्रदान की है। यह निर्णय उन सनातनी परिवारों के लिए लिया गया है, जिन्होंने पाकिस्तानी मजहबियों से अपनी जान बचाकर भारत में शरण ली हुई थी। इस कदम से इन परिवारों को अब भारत में एक स्थायी ठिकाना मिल गया है।1
- 5 जून 2026 को सुबह 5:00 बजे मौसम में आंधी-तूफान के साथ बारिश दर्ज की गई। इस घटना के कारण मानसून की स्थिति बहुत खराब हो गई।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रतापगढ़ में संजीवनी सेवा संस्थान द्वारा दीपेश्वरी तालाब स्थित दादा भैरवनाथ मसान वाली महाकाली मंदिर परिसर में 51 वृक्षों का रोपण किया गया। इस दौरान संस्थान के सभी कार्मिकों की एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि संस्थान इस वर्ष अधिक से अधिक वृक्षारोपण करेगा और लगाए गए पौधों को सुरक्षित व जीवित रखने के लिए एक विशेष अभियान चलाएगा। इसके साथ ही, किसान भाइयों को आयवर्धक एवं स्वास्थ्यवर्धक सहजन (मोरिंगा) की खेती के प्रति जागरूक करने हेतु एक विशेष जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा। संस्थान सचिव अमर सिंह ने बताया कि संजीवनी सेवा संस्थान पिछले आठ वर्षों से जिले में कन्यादान महादान योजना, बाल विवाह रोकथाम, जैविक खेती, बागवानी, किसानों की आय बढ़ाने हेतु आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार तथा महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने जैसे अनेक जनहितकारी कार्य निरंतर कर रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हुई इस बैठक में सभी सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और हरित प्रतापगढ़ के निर्माण के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया। बैठक में जिला सहायक अनुष्या मीणा, धातु पाटीदार, ललिता पाटीदार, फील्ड अधिकारी दिलीप सिंह देवड़ा सहित महिला कार्मिकों ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन "एक पेड़ माँ के नाम, हरियाली से खुशहाल बनेगा हमारा भविष्य" के संदेश के साथ हुआ।4
- चिकारड़ा स्थित श्री महावीर गोपाल गौशाला में श्री सांवलियाजी नव बृज विहार निशुल्क चतुर्थ विशाल पंचकोशी परिक्रमा पदयात्रा का भव्य स्वागत किया गया। गुरुवार को अपने चौथे पड़ाव पर पहुँची इस पंचदिवसीय यात्रा में लगभग 1500 महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल थे, जिनकी अगवानी से पूरा गौशाला परिसर भक्ति और उत्साह से भर उठा। यह पदयात्रा श्री 1008 स्वामी गंगा गिरी जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित की जा रही है, जो लगभग 75 किलोमीटर लंबी है। गौशाला पहुँचने पर अध्यक्ष सौभागमल छाजेड़, दिनेश अग्रवाल, रामेश्वरलाल खंडेलवाल, मदनलाल खंडेलवाल सहित आसपास के सैकड़ों गोभक्तों ने पदयात्रियों का पुष्पवर्षा और स्वागत-सत्कार के साथ अभिनंदन किया। शाम को गौशाला परिसर स्थित कृष्ण मंदिर में भव्य आरती और धर्मसभा का आयोजन हुआ, जिसमें स्वामी गंगा गिरी महाराज ने गौसेवा को भगवान तक पहुँचने का सबसे सहज और श्रेष्ठ मार्ग बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौमाता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है और उनकी सेवा से समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही समाज से गौसंवर्धन और गौरक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। स्वामीजी ने पंचकोशी परिक्रमा के महत्व को भी स्पष्ट किया, इसे गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की तरह विश्वभर में प्रसिद्ध बनाने की वकालत की। उन्होंने बताया कि यह यात्रा पिछले चार वर्षों से श्रद्धालुओं को भगवान सांवलियाजी के साथ क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन का लाभ दिलाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। लगभग 75 किलोमीटर लंबा यह मार्ग सांवलियाजी मण्डफिया से शुरू होकर अमरपुरा, केसरखेड़ी, भादसोड़ा, बड़ा सांवलियाजी, अनगढ़ बावजी, नर्बदिया, आक्या, भदेसर, धनेश्वर महादेव, आँवरी माता, आकोला खुर्द, फतेपुरा, अंकोलागढ़ और चिकारड़ा जैसे कई धार्मिक स्थलों से गुजरता है, जहाँ दो दर्जन से अधिक मंदिरों और तीर्थ स्थलों के दर्शन होते हैं। धर्मसभा के बाद महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसके उपरांत रात्रि में भजन संध्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में सराबोर होकर नृत्य किया और भगवान सांवलियाजी के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। गुरुवार अलसुबह करीब 4:45 बजे तेज हवा और वर्षा से यात्रा में कुछ समय के लिए बाधा आई, लेकिन मौसम साफ होते ही यह पुनः सुचारू रूप से आगे बढ़ी। शुक्रवार प्रातः यह पदयात्रा चिकारड़ा गाँव से होते हुए अपने अंतिम पड़ाव सांवलियाजी मण्डफिया के लिए रवाना हुई, इससे पहले श्रद्धालुओं ने गौशाला का भ्रमण कर व्यवस्थाओं की सराहना की और गौसेवा के लिए दान-पुण्य भी किया। इस पंचकोशी पदयात्रा में राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश के रतलाम, धार, भोपाल, राजगढ़, मंदसौर, नीमच और इंदौर सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस यात्रा के सूत्रधार पलसोड़ा निवासी कैलाश राठौड़ और उनके परिजन तथा चिकारड़ा गौशाला समिति रही, जिनकी व्यवस्थाओं की संतजनों और पदयात्रियों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष रतन गाडरी, पूर्व उपप्रधान लक्ष्मीलाल मेनारिया, ललित लखारा, सुशील तातेड़, अशोक गोड, गौशाला अध्यक्ष सौभागमल छाजेड़, दिनेश अग्रवाल, रामेश्वरलाल खंडेलवाल, मदनलाल खंडेलवाल सहित सैकड़ों गोभक्त और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, वहीं सुरक्षा के लिए चिकारड़ा चौकी प्रभारी कालूसिंह और पुलिस जाब्ता तैनात था। इस पंचकोशी पदयात्रा ने धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ गौसेवा, संस्कृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का प्रभावी संदेश भी दिया।4
- नीमच जिले में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग द्वारा 'हरित कवच' अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान की शुरुआत नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने पौधारोपण करके की। अभियान के तहत रतनगढ़ के पाटन में 1000 और अठाना क्षेत्र में 300 पौधे लगाए गए। इसी के साथ, 'एक पेड़ मां के नाम' नामक एक अन्य अभियान की भी शुरुआत हुई। वन विभाग ने जिले में 21 जून तक कुल 5.62 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अवसर पर मंत्री शुक्ला ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के अधिक उपयोग पर विशेष जोर दिया।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बी आर फाउंडेशन ने नीमच में एक महत्वपूर्ण पहल की है। फाउंडेशन ने पक्षियों की प्यास बुझाने के उद्देश्य से सकोरे और पौधे वितरित किए हैं, जिससे 'हर छत पर सकोरे और हर हाथ में पौधे' का संदेश साकार हो सके।1
- मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर की एक खास रिपोर्ट के अनुसार, बापचा की बेटी चांदनी कुंवर देवड़ा ने भारतीय वायुसेना में इतिहास रच दिया है। उन्होंने आसमान की ऊंचाइयों को छूते हुए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिससे उनके मूल स्थान बापचा का नाम रोशन हुआ है।1