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भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले वनडे फाइनल मुकाबले से ठीक पहले भारतीय टीम को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। इस महत्वपूर्ण खिताबी भिड़ंत से पहले आए इस बड़े झटके ने भारतीय टीम की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।
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भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले वनडे फाइनल मुकाबले से ठीक पहले भारतीय टीम को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। इस महत्वपूर्ण खिताबी भिड़ंत से पहले आए इस बड़े झटके ने भारतीय टीम की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।
More news from Pashchim Champaran and nearby areas
- बिहार के बैरिया प्रखंड क्षेत्र के बैजुआ भगवानपुर और मसान ढाब गांवों में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्रामीण गुड्डू कुशवाहा सहित दर्जनों लोगों का कहना है कि बाढ़ जैसी स्थिति होने के बावजूद प्रशासन की तरफ से अब तक सरकारी नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके अलावा, अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था न होने से लोगों को आवागमन, रोजमर्रा के कार्यों और आवश्यक सामग्री लाने-ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सरकारी नाव, राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इस संबंध में अंचलाधिकारी बैरिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका, जिसके कारण उनकी आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।1
- पश्चिम चंपारण के रामनगर प्रखंड स्थित बड़ा बेलवा गांव के समीप मसान नदी के किनारे एक बाघ ने गाय के बछड़े को अपना शिकार बना लिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है और ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम कृष्णा यादव अपने मवेशियों को चराने के लिए मसान नदी के किनारे गए थे। इसी दौरान वहां पहले से घात लगाकर बैठे बाघ ने अचानक हमला कर गाय के बछड़े को दबोच लिया, जिससे आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने फौरन इसकी सूचना वन विभाग के राघिया रेंज कार्यालय को दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने बाघ की ट्रैकिंग शुरू कर दी है। वन अधिकारियों के मुताबिक, यह बाघ पिछले करीब एक सप्ताह से रिहायशी इलाके के आसपास लगातार देखा जा रहा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अकेले जंगल या नदी किनारे न जाने और मवेशियों को खुले में न छोड़ने की अपील की है। लगातार रिहायशी इलाकों में बाघ की इस मौजूदगी ने लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सबकी निगाहें वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।1
- मझौलिया प्रखंड की डुमरी पंचायत के रघुनाथपुर वार्ड संख्या-6 में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक विषैले कोबरा सांप के डसने से 18 वर्षीय कुमकुम कुमारी की मौत हो गई। मृतका गांव के नागेंद्र मुखिया की पुत्री थी। इस अचानक हुई घटना के बाद से ही पीड़ित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों के मुताबिक, कुमकुम सुबह अपने घर की साफ-सफाई में जुटी हुई थी। पोछा लगाने के लिए वह जैसे ही मिट्टी निकाल रही थी, तभी मिट्टी में छिपे एक विषैले कोबरा ने उसके पैर पर डस लिया। कुमकुम के चिल्लाने की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य तुरंत मौके पर पहुंचे और उसे तत्काल एक निजी क्लीनिक लेकर गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच बेतिया रेफर कर दिया, लेकिन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की और बाद में घर के पास दिखाई देने पर उस कोबरा सांप को पीट-पीटकर मार डाला। इस दुखद घटना से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। बरसात के मौसम में लगातार बाहर निकल रहे सांपों की घटनाओं को देखते हुए ग्रामीणों में भारी चिंता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए, लोगों को सर्पदंश से बचाव के उपाय बताए जाएं और पीड़ितों के त्वरित उपचार के लिए अस्पतालों में समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।4
- सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इस आंदोलन की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने की थी, जिसमें पिछले महीने 28 जून को सोनम वांगचुक भी शामिल हो गए थे. प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रही है. हालांकि, इस अनशन को लेकर केंद्र सरकार बहुत हरकत में नहीं दिख रही है, लेकिन सोनम वांगचुक के इस आंदोलन की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अच्छी-खासी हो रही है.1
- कुशीनगर के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के बांसगांव के रहने वाले प्रेमचंद कुमार शाह ने पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि उनके परिवार पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद अब उन पर समझौते का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित का कहना है कि यदि उन्होंने मुकदमा वापस नहीं लिया तो उनके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे वे सभी गहरे खौफ में हैं। इस विवाद की शुरुआत बीते 11 जुलाई को हुई थी, जब प्रेमचंद शाह की हार्डवेयर की दुकान पर गैस चूल्हा ठीक कराने आए संजय कुशवाहा से मजदूरी और पार्ट्स के 400 रुपये के लेनदेन को लेकर बहस हो गई। आरोप है कि इसके बाद संजय कुशवाहा अपने परिजनों के साथ लाठी, डंडे, बांस और लोहे की रॉड लेकर पहुंचा और प्रेमचंद के पिता अकलू शाह पर बर्बरता से हमला कर दिया। इस हमले के बीच-बचाव के लिए आए प्रदीप शाह भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस संबंध में विशुनपुरा थाने में मुकदमा संख्या 196/2026 दर्ज है। पीड़ित प्रेमचंद का आरोप है कि मुख्य आरोपी संजय कुशवाहा होमगार्ड में तैनात है और वह अपनी सरकारी नौकरी तथा वर्दी का प्रभाव दिखाकर पीड़ित परिवार को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है। प्रार्थना पत्र के अनुसार, संजय कुशवाहा के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अलावा, आरोपी का भाई एक निजी स्कूल चलाता है और सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं से उसकी नजदीकी होने के कारण स्थानीय स्तर पर पीड़ित परिवार पर भारी राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। इसी प्रभाव के चलते आरोपियों का मनोबल बढ़ा हुआ है और वे लगातार मारपीट व दबाव बनाने जैसी हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें अपनी जान का सीधा खतरा सता रहा है और यदि समय रहते पुलिस ने कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की तो उनके साथ कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द सुरक्षा मुहैया कराने और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।1
- चनपटिया के पकड़ीहार (वार्ड-14) में सिकरहना नदी किनारे और रिहायशी इलाके के पास नगर पंचायत द्वारा कचरा डंप किए जाने के विरोध में शुक्रवार की दोपहर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे नदी प्रदूषित हो रही है, दुर्गंध फैल रही है और आसपास की खेती योग्य भूमि के बंजर होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने नगर पंचायत पर सफाई एजेंसी से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए आबादी से दूर वैज्ञानिक डंपिंग यार्ड बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि सफाई और कचरा प्रबंधन पर हर माह 20 लाख रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। पूर्व पार्षद कुंती देवी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि छठ घाट के पास कचरा डंप होने से लोगों की आस्था और जनस्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) हेमंत कुमार ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित स्थान पर फिलहाल कचरा डंपिंग बंद करा दी गई है और आगे स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।1
- पश्चिम चंपारण के बेतिया अंतर्गत गौनाहा प्रखंड की बेलसंडी पंचायत में स्थित राजकीय मध्य विद्यालय बेलसंडी इन दिनों तालाब का रूप ले चुका है। विद्यालय का पूरा प्रांगण और मुख्य प्रवेश मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है। हालात इस कदर खराब हैं कि बच्चों को घुटने भर गंदे पानी और कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। विद्यालय परिसर में जलनिकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पंचायत भवन से लेकर विद्यालय तक मुख्य सड़क पर पानी जमा है। इससे न केवल स्कूली बच्चों, बल्कि आम लोगों को भी आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस जलभराव के कारण पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है और कई बच्चों के लिए कक्षाओं तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इसी विद्यालय परिसर में 7 जुलाई 2026 को सहयोग शिविर का आयोजन हुआ था, जिसमें मंत्री, जिलाधिकारी (डीएम), उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सहित जिला और प्रखंड के कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे थे। उस समय भी पूरा परिसर कीचड़ और जलभराव से घिरा हुआ था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद आज तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन की इस उदासीनता पर गहरा आक्रोश जताते हुए तत्काल जलनिकासी कराने और विद्यालय परिसर को जलभराव से मुक्त कराने की मांग की है।1
- कुशीनगर जिले में 'मिशन सेफ' योजना के तहत स्कूल वाहनों के फिटनेस को लेकर प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जा रही है। बार-बार नोटिस जारी करने और जागरूक करने के बावजूद गाड़ियों का फिटनेस न कराने पर विभाग द्वारा कई विद्यालयों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। हालांकि, जो विद्यालय फिटनेस कराने पहुंचे, उनकी गाड़ियों का ब्लैकलिस्ट खोला भी गया है। इनमें रजली देवी इण्टरमीडिएट कालेज परगन मठिया, मदरसा अब्दुल कलाम आजाद हरपुर मजहर, कोटवा और द मैनेजर सीता देवी जनकल्याण स्वयं सेवी संस्था डिबनी बन्जरवा आदि शामिल हैं, जिन्होंने ब्लैकलिस्ट हटवाकर अपने वाहनों के फिटनेस की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। एआरटीओ के अनुसार, पहले जिले में 176 ऐसी गाड़ियां थीं जिनका फिटनेस समाप्त हो चुका था, लेकिन अब केवल 100 वाहन ही ऐसे बचे हैं। इस संबंध में सड़क पर प्रवर्तन की कार्रवाई भी की गई है। विभाग का आरोप है कि अभिभावकों की स्वतंत्रता की आड़ में स्कूल प्रबंधन नाजायज फायदा उठा रहा है और सुरक्षित बसों के बजाय बोलेरो, मैजिक और टेम्पो जैसे वाहनों का उपयोग कर रहा है। फिलहाल, जिले के लगभग 10 प्रतिशत स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी ने अपने वाहनों का फिटनेस करवा लिया है और इसकी रोजाना मॉनिटरिंग भी की जा रही है। एआरटीओ ने सुझाव दिया है कि यदि स्कूलों की मान्यता और रिनुवल प्रक्रिया से पहले परिवहन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मांग की जाए, तो शासन की मंशा के अनुरूप सभी स्कूली गाड़ियों का फिटनेस पूरी तरह से सुनिश्चित किया जा सकेगा।2
- बिहार से सामने आई एक तस्वीर हर किसी को झकझोर कर रख देने वाली है। यहाँ विकास के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए देखा जा सकता है कि कैसे एक मासूम बच्चे की पढ़ाई के लिए उसके पिता को उफनती नदी पार करनी पड़ रही है। इस लाचारी को देखने के बाद व्यवस्था से सीधा और तीखा सवाल पूछा गया है कि क्या वाकई यही विकास है?1