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राजसमंद जिले के कांकरोली थाना क्षेत्र के गणेश नगर में देर रात अज्ञात चोरों ने एक सूने मकान को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवरात और एक वाहन पर हाथ साफ कर दिया। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। मिली जानकारी के अनुसार, गणेश नगर निवासी धापू बाई प्रजापत के मकान में चोरों ने प्रवेश किया। वारदात का पता सुबह उस वक्त चला जब परिवार के सदस्य सोकर उठे। घर का सामान बिखरा हुआ और कीमती सामान गायब देख परिजनों के होश उड़ गए। पीड़ित परिवार के मुताबिक, चोर घर से लगभग 10 तोला सोना, करीब 2 किलोग्राम चांदी और घर के बाहर खड़ी एक स्कूटी लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना तुरंत कांकरोली थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर साक्ष्य जुटाए। पीड़ित की ओर से थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात चोरों की तलाश और जांच शुरू कर दी है। देर रात हुई इस बड़ी चोरी की वारदात से पूरे गांव और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए प्रशासन से इन शातिर बदमाशों पर शिकंजा कसने की मांग की है, ताकि लोग अपने घरों में सुरक्षित महसूस कर सकें।

9 hrs ago
user_Tarun Joshi, Rajsamand
Tarun Joshi, Rajsamand
राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
9 hrs ago

राजसमंद जिले के कांकरोली थाना क्षेत्र के गणेश नगर में देर रात अज्ञात चोरों ने एक सूने मकान को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवरात और एक वाहन पर हाथ साफ कर दिया। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। मिली जानकारी के अनुसार, गणेश नगर निवासी धापू बाई प्रजापत के मकान में चोरों ने प्रवेश किया। वारदात का पता सुबह उस वक्त चला जब परिवार के सदस्य सोकर उठे। घर का सामान बिखरा हुआ और कीमती सामान गायब देख परिजनों के होश उड़ गए। पीड़ित परिवार के मुताबिक, चोर घर से लगभग 10 तोला सोना, करीब 2 किलोग्राम चांदी और घर के बाहर खड़ी एक स्कूटी लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना तुरंत कांकरोली थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर साक्ष्य जुटाए। पीड़ित की ओर से थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात चोरों की तलाश और जांच शुरू कर दी है। देर रात हुई इस बड़ी चोरी की वारदात से पूरे गांव और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए प्रशासन से इन शातिर बदमाशों पर शिकंजा कसने की मांग की है, ताकि लोग अपने घरों में सुरक्षित महसूस कर सकें।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • राजसमंद, राजस्थान के नांदोली से नंदलाल पुरबिया न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल ने जनहित में एक प्रसारण किया है। इस प्रसारण में भगवान रूपनारायण की जय का उद्घोष किया गया।
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    राजसमंद, राजस्थान के नांदोली से नंदलाल पुरबिया न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल ने जनहित में एक प्रसारण किया है। इस प्रसारण में भगवान रूपनारायण की जय का उद्घोष किया गया।
    user_फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांद
    फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांद
    Photographer राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत प्रोबेशनरी प्रकोष्ठ संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय अधिकारियों के साथ पूर्व निर्धारित वार्ता की। घासा चिकित्सालय के दीपक राजगुरु ने बताया कि यह वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जहाँ नर्सेज की विभिन्न समस्याओं और उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई। इस वार्ता के दौरान, संघ प्रमुख अनूप यादव एवं उदय सिंह मीना के नेतृत्व में पहुंचे 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उच्चाधिकारियों के सामने अपनी मांगों और समस्याओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।
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    राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत प्रोबेशनरी प्रकोष्ठ संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय अधिकारियों के साथ पूर्व निर्धारित वार्ता की। घासा चिकित्सालय के दीपक राजगुरु ने बताया कि यह वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जहाँ नर्सेज की विभिन्न समस्याओं और उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई।

इस वार्ता के दौरान, संघ प्रमुख अनूप यादव एवं उदय सिंह मीना के नेतृत्व में पहुंचे 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उच्चाधिकारियों के सामने अपनी मांगों और समस्याओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।
    user_Local Tv News Channel
    Local Tv News Channel
    वल्लभनगर, उदयपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • वीडियो और उसका सारांश इस वीडियो से हर व्यक्ति लेनी चाहिए बहुत ही शानदार वीडियो
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    वीडियो और उसका सारांश इस वीडियो से हर व्यक्ति लेनी चाहिए बहुत ही शानदार वीडियो
    user_मारवाड़ गोडवाड न्यूज़(रजिस्टेड)
    मारवाड़ गोडवाड न्यूज़(रजिस्टेड)
    Agricultural production बाली, पाली, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ ज़िले में औद्योगिक विकास को लेकर सार्वजनिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। कभी प्रगति और आर्थिक विकास का प्रतीक माने जाने वाले बड़े औद्योगिक और सीमेंट प्रोजेक्ट अब स्थानीय समुदायों की कड़ी जाँच का सामना कर रहे हैं। ज़िले भर में हाल ही में हुई जनसुनवाइयों से संकेत मिलता है कि निवासी अब केवल रोज़गार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं; बल्कि वे जल संसाधनों, वनों, कृषि भूमि और अपने जीवन की समग्र गुणवत्ता की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। बेगूँ क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट परियोजना के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान, ग्रामीणों ने पानी के स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाईं। इसके एक दिन बाद, निम्बाहेड़ा के पास फलवा गाँव में भी इसी तरह की चिंताएँ सामने आईं, जहाँ निवासियों ने वंडर सीमेंट द्वारा प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन विरोधों को अलग-थलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये चित्तौड़गढ़ में एक व्यापक और उभरती हुई जनभावना को दर्शाते हैं, जहाँ समुदाय अब औद्योगिक विस्तार के बदले पर्यावरणीय गिरावट को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। चित्तौड़गढ़ ज़िला लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से चंदेरिया क्षेत्र, अक्सर औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित चर्चाओं का विषय रहा है। वहीं, बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से जुड़े ज़ारोफिक्स कचरे के निपटान को लेकर विवाद बढ़ गया है और यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे औद्योगिक कचरे से मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संसाधनों और समग्र पारिस्थितिक संतुलन पर दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। इन अनुभवों ने कई समुदायों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया है कि क्या औद्योगिक परियोजनाओं के वास्तविक लाभ उनकी पर्यावरणीय लागतों की पर्याप्त भरपाई करते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर चूना पत्थर खनन और सीमेंट निर्माण से कई पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसे PM10 और PM2.5 जैसे कणों से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य ख़तरे, भूजल संसाधनों पर प्रभाव जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, कृषि उत्पादकता में कमी, और जैव विविधता व हरियाली के लिए ख़तरा। ग्रामीण तर्क देते हैं कि एक बार पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के बाद, इसे बहाल करने में दशकों लग सकते हैं, यदि यह संभव हुआ तो। इन जनसुनवाइयों से यह स्पष्ट संदेश उभरा है कि चित्तौड़गढ़ के लोग विकास तो चाहते हैं, लेकिन वे पर्यावरणीय जवाबदेही की भी मांग करते हैं। उनका कहना है कि संविधान हर नागरिक को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार देता है। स्थानीय समुदाय किसी भी मंज़ूरी से पहले प्रस्तावित परियोजनाओं के सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों के व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन की अपेक्षा करते हैं। अब ज़िला प्रशासन, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार पर ध्यान केंद्रित है। मुख्य प्रश्न यही है कि क्या जनसुनवाइयों में दर्ज आपत्तियाँ और सिफ़ारिशें अनुमोदन प्रक्रिया में सार्थक भूमिका निभाएँगी। यह देखना होगा कि पर्यावरणीय मंज़ूरी के निर्णय वास्तव में स्थानीय समुदाय की चिंताओं को दर्शाते हैं, या निवेश और औद्योगिक विकास की आवश्यकताओं के चलते सार्वजनिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाएगा। फिलहाल, एक बात निश्चित है: चित्तौड़गढ़ ज़िले में पानी, जंगल और ज़मीन की सुरक्षा का संघर्ष अब केवल एक पर्यावरणीय बहस नहीं रह गया है; यह नागरिकों के अधिकारों, लोकतांत्रिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों की भविष्य की स्थिरता का मामला बन गया है।
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    चित्तौड़गढ़ ज़िले में औद्योगिक विकास को लेकर सार्वजनिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। कभी प्रगति और आर्थिक विकास का प्रतीक माने जाने वाले बड़े औद्योगिक और सीमेंट प्रोजेक्ट अब स्थानीय समुदायों की कड़ी जाँच का सामना कर रहे हैं। ज़िले भर में हाल ही में हुई जनसुनवाइयों से संकेत मिलता है कि निवासी अब केवल रोज़गार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं; बल्कि वे जल संसाधनों, वनों, कृषि भूमि और अपने जीवन की समग्र गुणवत्ता की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

बेगूँ क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट परियोजना के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान, ग्रामीणों ने पानी के स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाईं। इसके एक दिन बाद, निम्बाहेड़ा के पास फलवा गाँव में भी इसी तरह की चिंताएँ सामने आईं, जहाँ निवासियों ने वंडर सीमेंट द्वारा प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन विरोधों को अलग-थलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये चित्तौड़गढ़ में एक व्यापक और उभरती हुई जनभावना को दर्शाते हैं, जहाँ समुदाय अब औद्योगिक विस्तार के बदले पर्यावरणीय गिरावट को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।

चित्तौड़गढ़ ज़िला लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से चंदेरिया क्षेत्र, अक्सर औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित चर्चाओं का विषय रहा है। वहीं, बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से जुड़े ज़ारोफिक्स कचरे के निपटान को लेकर विवाद बढ़ गया है और यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे औद्योगिक कचरे से मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संसाधनों और समग्र पारिस्थितिक संतुलन पर दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। इन अनुभवों ने कई समुदायों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया है कि क्या औद्योगिक परियोजनाओं के वास्तविक लाभ उनकी पर्यावरणीय लागतों की पर्याप्त भरपाई करते हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर चूना पत्थर खनन और सीमेंट निर्माण से कई पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसे PM10 और PM2.5 जैसे कणों से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य ख़तरे, भूजल संसाधनों पर प्रभाव जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, कृषि उत्पादकता में कमी, और जैव विविधता व हरियाली के लिए ख़तरा। ग्रामीण तर्क देते हैं कि एक बार पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के बाद, इसे बहाल करने में दशकों लग सकते हैं, यदि यह संभव हुआ तो। इन जनसुनवाइयों से यह स्पष्ट संदेश उभरा है कि चित्तौड़गढ़ के लोग विकास तो चाहते हैं, लेकिन वे पर्यावरणीय जवाबदेही की भी मांग करते हैं। उनका कहना है कि संविधान हर नागरिक को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार देता है। स्थानीय समुदाय किसी भी मंज़ूरी से पहले प्रस्तावित परियोजनाओं के सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों के व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन की अपेक्षा करते हैं। अब ज़िला प्रशासन, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार पर ध्यान केंद्रित है। मुख्य प्रश्न यही है कि क्या जनसुनवाइयों में दर्ज आपत्तियाँ और सिफ़ारिशें अनुमोदन प्रक्रिया में सार्थक भूमिका निभाएँगी। यह देखना होगा कि पर्यावरणीय मंज़ूरी के निर्णय वास्तव में स्थानीय समुदाय की चिंताओं को दर्शाते हैं, या निवेश और औद्योगिक विकास की आवश्यकताओं के चलते सार्वजनिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाएगा। फिलहाल, एक बात निश्चित है: चित्तौड़गढ़ ज़िले में पानी, जंगल और ज़मीन की सुरक्षा का संघर्ष अब केवल एक पर्यावरणीय बहस नहीं रह गया है; यह नागरिकों के अधिकारों, लोकतांत्रिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों की भविष्य की स्थिरता का मामला बन गया है।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    41 min ago
  • वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र में भटेवर से चारभुजा तक बन रहे नेशनल हाईवे 162ई के निर्माण कार्य में बाधा बन रहे अतिक्रमणों पर बुधवार को हाइवे ऑथोरिटी ने कार्रवाई की। इस दौरान, हाइवे ऑथोरिटी ने 'पीला पंजा' (बुलडोजर) चलाकर पूर्व में आवाप्त की गई जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में संपन्न हुई, जिसमें मौके पर भारी पुलिस बल और राजस्व विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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    वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र में भटेवर से चारभुजा तक बन रहे नेशनल हाईवे 162ई के निर्माण कार्य में बाधा बन रहे अतिक्रमणों पर बुधवार को हाइवे ऑथोरिटी ने कार्रवाई की। इस दौरान, हाइवे ऑथोरिटी ने 'पीला पंजा' (बुलडोजर) चलाकर पूर्व में आवाप्त की गई जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में संपन्न हुई, जिसमें मौके पर भारी पुलिस बल और राजस्व विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
    user_Local Tv News Channel
    Local Tv News Channel
    वल्लभनगर, उदयपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • फालना नगरपालिका के खुडाला फालना क्षेत्र में पीएम स्वनिधि योजना के तहत 1 जून से 30 जून 2026 तक एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान आयोजित शिविर में कुल 8 नए प्रथम ऋण आवेदन प्राप्त किए गए, जिन्हें सफलतापूर्वक ऑनलाइन किया गया। बैंकों के सहयोग से शिविर में 3 प्रथम ऋणों को स्वीकृति मिली और इनकी कुल ₹45,000 की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में वितरित की गई। अभियान के अंतर्गत, 5 लाभार्थियों के मोबाइल फोन में पीएम स्वनिधि ऐप भी इंस्टॉल किया गया। इसके साथ ही, दो पात्र लाभार्थियों और उनके परिवारजनों को 'स्वनिधि से समृद्धि' योजना से जोड़ा गया, जिसके तहत उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की गई। इस शिविर में पालिका अधिशाषी अधिकारी विनयपाल, एनयूएलएम प्रभारी शैलेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता और एनयूएलएम सी.ओ. कंचन सरगरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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    फालना नगरपालिका के खुडाला फालना क्षेत्र में पीएम स्वनिधि योजना के तहत 1 जून से 30 जून 2026 तक एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान आयोजित शिविर में कुल 8 नए प्रथम ऋण आवेदन प्राप्त किए गए, जिन्हें सफलतापूर्वक ऑनलाइन किया गया। बैंकों के सहयोग से शिविर में 3 प्रथम ऋणों को स्वीकृति मिली और इनकी कुल ₹45,000 की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में वितरित की गई।

अभियान के अंतर्गत, 5 लाभार्थियों के मोबाइल फोन में पीएम स्वनिधि ऐप भी इंस्टॉल किया गया। इसके साथ ही, दो पात्र लाभार्थियों और उनके परिवारजनों को 'स्वनिधि से समृद्धि' योजना से जोड़ा गया, जिसके तहत उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की गई।

इस शिविर में पालिका अधिशाषी अधिकारी विनयपाल, एनयूएलएम प्रभारी शैलेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता और एनयूएलएम सी.ओ. कंचन सरगरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_मारवाड़ गोडवाड न्यूज़(रजिस्टेड)
    मारवाड़ गोडवाड न्यूज़(रजिस्टेड)
    Agricultural production बाली, पाली, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • पाली जिले के बाली उपखंड क्षेत्र के केरापुरा गांव में रविवार शाम को एक पैंथर के हमले से एक 60 वर्षीय अधेड़ व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, केरापुरा निवासी 60 वर्षीय गुलाब सिंह पुत्र सवाई सिंह अपने बेरे से घर लौट रहे थे। इसी दौरान टिपरी मार्ग पर घात लगाए बैठे एक पैंथर ने उन पर अचानक हमला कर दिया, जिससे गुलाब सिंह के हाथों और नाक पर गंभीर चोटें आई हैं। घायल की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे। लोगों की भीड़ देखकर पैंथर जंगल की ओर भाग निकला। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल गुलाब सिंह को बाली के राजकीय अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सकों द्वारा उनका उपचार किया जा रहा है। घटना के बाद से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है, और उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में पैंथर की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
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    पाली जिले के बाली उपखंड क्षेत्र के केरापुरा गांव में रविवार शाम को एक पैंथर के हमले से एक 60 वर्षीय अधेड़ व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, केरापुरा निवासी 60 वर्षीय गुलाब सिंह पुत्र सवाई सिंह अपने बेरे से घर लौट रहे थे। इसी दौरान टिपरी मार्ग पर घात लगाए बैठे एक पैंथर ने उन पर अचानक हमला कर दिया, जिससे गुलाब सिंह के हाथों और नाक पर गंभीर चोटें आई हैं। घायल की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे। लोगों की भीड़ देखकर पैंथर जंगल की ओर भाग निकला।

ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल गुलाब सिंह को बाली के राजकीय अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सकों द्वारा उनका उपचार किया जा रहा है। घटना के बाद से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है, और उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में पैंथर की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
    user_जमाल खान बाली
    जमाल खान बाली
    बाली, पाली, राजस्थान•
    18 hrs ago
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