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राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत प्रोबेशनरी प्रकोष्ठ संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय अधिकारियों के साथ पूर्व निर्धारित वार्ता की। घासा चिकित्सालय के दीपक राजगुरु ने बताया कि यह वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जहाँ नर्सेज की विभिन्न समस्याओं और उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई। इस वार्ता के दौरान, संघ प्रमुख अनूप यादव एवं उदय सिंह मीना के नेतृत्व में पहुंचे 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उच्चाधिकारियों के सामने अपनी मांगों और समस्याओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।
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राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत प्रोबेशनरी प्रकोष्ठ संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय अधिकारियों के साथ पूर्व निर्धारित वार्ता की। घासा चिकित्सालय के दीपक राजगुरु ने बताया कि यह वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जहाँ नर्सेज की विभिन्न समस्याओं और उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई। इस वार्ता के दौरान, संघ प्रमुख अनूप यादव एवं उदय सिंह मीना के नेतृत्व में पहुंचे 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उच्चाधिकारियों के सामने अपनी मांगों और समस्याओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।
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- वैष्णव वैरागी सेवा संस्थान की एक महत्वपूर्ण बैठक घाटा वाला माताजी देबारी में संस्थान के अध्यक्ष रमेश वैष्णव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में उदयपुर, आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों और 56 सेरा पांच बैठक से वैष्णव बैरागी समाज के लगभग 350 सदस्य उपस्थित रहे। समाजजनों ने समाज के उत्थान और प्रगति के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए। संस्थान के अध्यक्ष रमेश वैष्णव ने घोषणा की कि तीसरा आदर्श सामूहिक विवाह सम्मेलन 21 नवंबर, 2026 को घासा मेला ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने इस आयोजन के लिए अधिक से अधिक वर-वधू जोड़ों के पंजीकरण का आग्रह किया और समाज के सदस्यों से विवाह के सफल आयोजन के लिए तन, मन, धन से सहयोग करने की अपील की। इसके साथ ही, समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बेटे-बेटियों को पढ़ाई में समान अवसर देने का भी आग्रह किया गया। अध्यक्ष ने बाहर से आए सभी समाज बंधुओं और महंतों को धन्यवाद दिया। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि समाज के कुछ व्यक्तियों द्वारा एक प्रकरण में एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसके संबंध में समाज में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अफवाहें फैल रही हैं। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि इससे समाज की प्रतिष्ठा और छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।1
- रेलमगरा पुलिस ने मदारा गांव में भेड़ चरा रहे एक वृद्ध से सोने की रामनामी लूटने के मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से लूटी गई सोने की रामनामी बरामद कर ली है और वारदात में इस्तेमाल की गई मारुति वैगनआर कार को भी जब्त कर लिया है। यह घटना 3 जून को मदारा निवासी माधुलाल पुत्र देवा गाड़री के साथ तब हुई, जब वे गांव के पास भेड़ चरा रहे थे। एक कार उनके पास रुकी, जिसमें से एक व्यक्ति ने पानी मांगा। तभी कार से दो अन्य बदमाश भी उतर गए और माधुलाल की एक तोला वजनी सोने की रामनामी छीनकर कार में सवार होकर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक हेमन्त कालरा के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र पारिक और वृत्ताधिकारी नाथद्वारा शिप्रा राजावत के सुपरविजन में थानाधिकारी प्रवीणसिंह जुगतावत के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भीलवाड़ा, अजमेर, जयपुर और सीकर सहित विभिन्न स्थानों पर दबिश देकर आरोपियों की तलाश की। जांच के दौरान पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर लूटी गई सोने की रामनामी बरामद हुई और वारदात में प्रयुक्त मारुति वैगनआर कार भी जब्त की गई। पुलिस आरोपियों से अन्य संपत्ति संबंधी अपराधों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है। पुलिस ने इस मामले में बनेटी बनाल नागपुर की ढाणी, कोटपूतली निवासी कैलाश उर्फ तित्तरनाथ सपेरा; भोपियों की भागल नाथों की ढाणी, सीकर निवासी रणधीरनाथ पुत्र श्यामनाथ सपेरा; और सरूड़, कोटपुतली-बहरोड़ निवासी राजवीरनाथ पुत्र श्रवणनाथ सपेरा को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में थानाधिकारी प्रवीणसिंह जुगतावत, एएसआई बद्रीलाल, कांस्टेबल राजूलाल, हेड कांस्टेबल राकेश मीणा (विशेष योगदान) और कांस्टेबल चेतराम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।3
- राजसमंद जिले के कांकरोली थाना क्षेत्र के गणेश नगर में देर रात अज्ञात चोरों ने एक सूने मकान को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवरात और एक वाहन पर हाथ साफ कर दिया। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी भय और आक्रोश का माहौल व्याप्त है। मिली जानकारी के अनुसार, गणेश नगर निवासी धापू बाई प्रजापत के मकान में चोरों ने प्रवेश किया। वारदात का पता सुबह उस वक्त चला जब परिवार के सदस्य सोकर उठे। घर का सामान बिखरा हुआ और कीमती सामान गायब देख परिजनों के होश उड़ गए। पीड़ित परिवार के मुताबिक, चोर घर से लगभग 10 तोला सोना, करीब 2 किलोग्राम चांदी और घर के बाहर खड़ी एक स्कूटी लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना तुरंत कांकरोली थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर साक्ष्य जुटाए। पीड़ित की ओर से थाने में लिखित रिपोर्ट दी गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात चोरों की तलाश और जांच शुरू कर दी है। देर रात हुई इस बड़ी चोरी की वारदात से पूरे गांव और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए प्रशासन से इन शातिर बदमाशों पर शिकंजा कसने की मांग की है, ताकि लोग अपने घरों में सुरक्षित महसूस कर सकें।1
- राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नांदोली से न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल द्वारा नंदलाल पुरबिया ने चारभुजा नाथ के चरणों में जनहित में एक प्रसारण किया है। यह प्रसारण सार्वजनिक हित के लिए किया गया है।1
- चित्तौड़गढ़ ज़िले में औद्योगिक विकास को लेकर सार्वजनिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। कभी प्रगति और आर्थिक विकास का प्रतीक माने जाने वाले बड़े औद्योगिक और सीमेंट प्रोजेक्ट अब स्थानीय समुदायों की कड़ी जाँच का सामना कर रहे हैं। ज़िले भर में हाल ही में हुई जनसुनवाइयों से संकेत मिलता है कि निवासी अब केवल रोज़गार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं; बल्कि वे जल संसाधनों, वनों, कृषि भूमि और अपने जीवन की समग्र गुणवत्ता की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। बेगूँ क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट परियोजना के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान, ग्रामीणों ने पानी के स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाईं। इसके एक दिन बाद, निम्बाहेड़ा के पास फलवा गाँव में भी इसी तरह की चिंताएँ सामने आईं, जहाँ निवासियों ने वंडर सीमेंट द्वारा प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन विरोधों को अलग-थलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये चित्तौड़गढ़ में एक व्यापक और उभरती हुई जनभावना को दर्शाते हैं, जहाँ समुदाय अब औद्योगिक विस्तार के बदले पर्यावरणीय गिरावट को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। चित्तौड़गढ़ ज़िला लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से चंदेरिया क्षेत्र, अक्सर औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित चर्चाओं का विषय रहा है। वहीं, बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से जुड़े ज़ारोफिक्स कचरे के निपटान को लेकर विवाद बढ़ गया है और यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे औद्योगिक कचरे से मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संसाधनों और समग्र पारिस्थितिक संतुलन पर दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। इन अनुभवों ने कई समुदायों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया है कि क्या औद्योगिक परियोजनाओं के वास्तविक लाभ उनकी पर्यावरणीय लागतों की पर्याप्त भरपाई करते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर चूना पत्थर खनन और सीमेंट निर्माण से कई पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसे PM10 और PM2.5 जैसे कणों से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य ख़तरे, भूजल संसाधनों पर प्रभाव जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, कृषि उत्पादकता में कमी, और जैव विविधता व हरियाली के लिए ख़तरा। ग्रामीण तर्क देते हैं कि एक बार पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के बाद, इसे बहाल करने में दशकों लग सकते हैं, यदि यह संभव हुआ तो। इन जनसुनवाइयों से यह स्पष्ट संदेश उभरा है कि चित्तौड़गढ़ के लोग विकास तो चाहते हैं, लेकिन वे पर्यावरणीय जवाबदेही की भी मांग करते हैं। उनका कहना है कि संविधान हर नागरिक को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार देता है। स्थानीय समुदाय किसी भी मंज़ूरी से पहले प्रस्तावित परियोजनाओं के सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों के व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन की अपेक्षा करते हैं। अब ज़िला प्रशासन, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार पर ध्यान केंद्रित है। मुख्य प्रश्न यही है कि क्या जनसुनवाइयों में दर्ज आपत्तियाँ और सिफ़ारिशें अनुमोदन प्रक्रिया में सार्थक भूमिका निभाएँगी। यह देखना होगा कि पर्यावरणीय मंज़ूरी के निर्णय वास्तव में स्थानीय समुदाय की चिंताओं को दर्शाते हैं, या निवेश और औद्योगिक विकास की आवश्यकताओं के चलते सार्वजनिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाएगा। फिलहाल, एक बात निश्चित है: चित्तौड़गढ़ ज़िले में पानी, जंगल और ज़मीन की सुरक्षा का संघर्ष अब केवल एक पर्यावरणीय बहस नहीं रह गया है; यह नागरिकों के अधिकारों, लोकतांत्रिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों की भविष्य की स्थिरता का मामला बन गया है।1
- राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत प्रोबेशनरी प्रकोष्ठ संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय अधिकारियों के साथ पूर्व निर्धारित वार्ता की। घासा चिकित्सालय के दीपक राजगुरु ने बताया कि यह वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जहाँ नर्सेज की विभिन्न समस्याओं और उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई। इस वार्ता के दौरान, संघ प्रमुख अनूप यादव एवं उदय सिंह मीना के नेतृत्व में पहुंचे 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उच्चाधिकारियों के सामने अपनी मांगों और समस्याओं को मजबूती से प्रस्तुत किया।1
- रास्ते के दोनों तरफ पानी जमा होने के कारण एक पूरे गांव/मोहल्ले को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह मुख्य रास्ता होने से लोगों के आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है, जिससे बच्चों का स्कूल जाना और बुजुर्गों का बाहर निकलना पूरी तरह से बंद हो गया है। जलभराव की इस स्थिति के चलते वाहनों का घरों से बाहर निकलना और पैदल चलना भी असंभव हो गया है। इसके अलावा, लंबे समय तक पानी जमा रहने से मकानों की नींव और दीवारों में सीलन आ रही है, जिससे उनके नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। रुके हुए इस गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। स्थिति यह है कि घर के सामने भी पानी भरा हुआ है।2